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14.1.14

प्रयोग-तंत्र

प्रयोग-तंत्र 

सड़क पर ट्रक ड्राईवर गाडी चला रहा था ,नशे में धुत होने के कारण गाडी के स्टेयरिंग से
काबू खो दिया और ट्रक ने कुछ को कुचल दिया जिसमे एक -दो मर गए और सात -आठ
घायल हो गये। हादसा होते ही भीड़ इकट्टी हो गई। लोग काफी गुस्से में थे उनमें से एक
बोला -गाडी सड़क पर चलने से दुर्घटना होती है ,इसलिए ट्रको को सड़क पर नहीं उतारना
चाहिये।
दूसरा बोला -इन ड्राइवरों को गाडी चलाना ही नहीं आता।
तीसरा बोला -हमें ट्रको में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा ,हम ऐसी ट्रक का निर्माण
कर सकते हैं जिसे नौसिखिया भी बढ़िया तरीके से चलाये और दुर्घटना होने के पहले
ट्रक में लगे सेंसर हमें बता देंगे कि सावधान हो जाए।
भीड़ ने कहा -क्या ऐसा हो सकता है ?
उस व्यक्ति ने आत्मविश्वास से जबाब दिया -हाँ ,यह कोई बड़ी बात नहीं है। मैं और
मेरे दोस्त ऐसा कर सकते हैं।
भीड़ उत्साह और कोतुहल से भर गई और उन्होंने उससे पूछा -बोल ,तुझे क्या चाहिए ?
वह व्यक्ति बोला -इस ड्राईवर को हटा दीजिये।
भीड़ ने पूछा -क्या दूसरा ड्राइवर लाये जो नशा नहीं करता हो ?
वह व्यक्ति बोला -नहीं ,दूसरे अनुभवी और योग्य ड्राइवर की जरूरत नहीं है ,बस आप
न तो दूसरा लाने कि बात करे न इसको रखने की।
भीड़ में से एक ने पूछा -फिर इस सड़क के बीच खड़ी ट्रक को कौन चलायेगा ?
वह व्यक्ति बोला -आपको किसने कहा ट्रक चलाने के लिए निपुणता कि आवश्यकता
होती है। आप सब हमारे पर विश्वास कीजिये ,हम कसम खाते हैं कि इस ट्रक में
आमूलचूल परिवर्तन कर देंगे ये स्वत: चलेगी।
भीड़ का कौतुहल बढ़ता गया ,कुछ उतावले लोगों ने उसके मत को योग्य बता दिया।
देखने वालों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। सबने एक दूसरे को बताया कि यह व्यक्ति
कुछ नया करने को कह रहा है। जिसने भी नयी बात को सुना उसका कायल हो गया।
भीड़ ने तय किया कि हम इस व्यक्ति को अवसर देंगे ,भीड़ में से एक आवाज उठी -
अरे,इससे पूछ तो लो कि इसने कभी वाहन चालन किया है ?

उस व्यक्ति ने कहा -वाहन चालन सीखना निकम्मी बात है जी ,हम बिना सीखें भी
बढ़िया ट्रक बनायेंगे और चला के दिखायेंगे।
लोगों ने नशे में डूबे चालक को पीट कर निचे उतारा, योग्य ड्राइवर को किनारे किया
और उस व्यक्ति को बैठाया।

वह व्यक्ति चालक सीट पर जा बैठा और गाडी का इन्जन चेक किया और बोला -
आज यह गाडी सड़क पर पड़ी रहेगी इसके इन्जन को कल खोल के देखना है।

दूसरे दिन भी गाडी सड़क पर पड़ी थी वह ड्राइवर बोला इसके ईंधन को बदलना होगा।

तीसरे दिन भी गाडी सड़क पर पड़ी रही वह व्यक्ति बोला -गाडी चलाने से पहले सड़क
की फाईल की जाँच आवश्यक है।

चौथे दिन वह व्यक्ति बड़ी भीड़ इकट्टी करके ड्राईवर की सीट पर बैठा ,इंजन स्टार्ट किया
ट्रक को गति दी ,कुछ ही फीट चल कर ट्रक डिवाइडर से टकरा गयी। वह व्यक्ति सीट
से उतर कर ट्रक की छत पर चढ़ गया और बोला -माफ करना ,मैं अभी ट्रक में पुरे
परिवर्तन नहीं कर पाया ,मुझे समय दीजिये ,मैं और नए तरीके आजमाता हूँ।

यह कह कर वह व्यक्ति चला गया और सड़क जो पहले से संकड़ी थी उस ट्रक में नए
बदलाव के कारण और जाम हो गयी।     

23.7.13

सच बोलना है पर घेरे के अन्दर

सच बोलना है पर घेरे के अन्दर 

जब एक बच्चे को अध्यापक बनाया तो बच्चा अध्यापक का स्वांग रच कर क्लास में
आया और बोला-अब मैं मास्टर बन चूका हूँ इसलिए मैं जो कहूँ उसे ध्यान से सुनो -
आज तक मेरे से पीछे वालों ने एक काम नहीं किया ,क्या आपको मालुम है ?

बच्चे बोले -नहीं मालुम।

मास्टर बोला-आज तक देश के सामने किसी ने सच नहीं बोला  ………………

बच्चों ने जम कर तालियाँ बजाई तो मास्टरजी बोले -..............लेकिन अब सच बोलना
है।

बच्चे मायूस हो गए। उनमे से एक बोला- सर ,किसी ने हेराफेरी पर बात की तो सही
नाम उगल दूँ ?

दूसरा बच्चा बोला-कोई पिछली चोरी पर बात करे तो क्या सही सही बयान कर दूँ ?

तीसरा बोला- कोई घोटाले की रकम किसके पास है पूछे तो बता दूँ ?

चौथा बोला- आज तक के फर्जीवाड़े का ढोल पीट दूँ ?

पाँचवा बोला - क्या रिश्ते नाते के झूठ भी उघाड़ कर रख दूँ ?

मास्टरजी बोले -……चुप ! सच बोलना है पर घेरे के अन्दर रहकर।

बच्चे बोले -मतलब ?

मास्टरजी ने समझाया - तुम्हारे से कोई अपराध हो गया तो घेरे में आकर सच
बता देना ताकि उसका तोड़ ढूंढ़ लिया जाए अगर घेरे में झूठ बोला तो झूठा
कहलाओगे। समझ गए

बच्चे बोले -हाँ जी।

मास्टर जी ने आज की क्लास शांतिपूर्वक खत्म कर दी।     

15.7.13

काल्पनिक कुत्ता


काल्पनिक कुत्ता

एक चोपाल पर दो गाँव वाले बैठे थे।करने धरने को कुछ काम नहीं था ,आपस में
बतीया करके भी थक गए तो उनमे से एक बोला - देख फकीरा ,अपन दोनों बातें
करते -करते उब गए हैं इसलिए कुछ करते हैं।

उसकी बात सुन फकीरा बोला-ऐसा करे दयाला  ,अपन आपस में झगड़ पड़े।आपस 
में लड़ेंगे तो और लोग भी इकट्टे हो जायेंगे।

उसकी बात सुन दयाला बोला -बात तो तेरी जँचती है ,मगर बिना बात कैसे लड़ेंगे।

फकीरा बोला -लड़ने का तरीका ....................

दयाला बोला -देख,मैं लड़ने का तरीका बताता हूँ ....इतना कहकर दयाला ने जमीन
पर अंगुली से एक चोरस आकृति बनाई और बोला-फकीरा ,ये मेरा खेत है और
एक और आकृति बनाकर बोला -यह पास वाला तेरा खेत है।

फकीरा बोला -मान लेता हूँ।

उसके बाद दयाला ने कहा -तेरे खेत में फसल मेरे से ठीक पनप रही है परन्तु मेरे
खेत में फसल कम पनप रही है।

फकीरा बोला -तेरे किस्मत ही खराब है तो मैं क्या करू।

इस पर ताव देते हुए दयाला बोला -खेत मेने बनाया ,फसल तेरी ज्यादा पनप
रही है यह बात मेने कही और तू मेरी ही किस्मत को ख़राब बता रहा है।

फकीरा बोला -हाँ,पास -पास में खेत और तेरे फसल कम तो इसको तेरी फूटी
किस्मत ही तो कहूंगा।

दयाला ने गुस्से में कहा -तूने मेरी किस्मत को फूटा कहा ना ,अब ले मैं अपने
खेत में बंधी दोनों भेंसे,चारों गायें तेरे खेत में छोड़ देता हूँ।मेरे जानवर तेरा खेत
उजाड़ देंगे और तेरी किस्मत भी फूट जायेगी।

अब तो फकीरा  भी गुस्से में आकर चिल्लाया  -मेरी फसल को बर्बाद करने वाले,क्या
मेने हाथों में चूड़ियाँ पहन रखी है तेरा एक भी जानवर मेरे खेत से सलामत बाहर
नहीं जायेगा।

दयाला उसे चिल्लाता देख ताव में आ गया और बोला -अगर मेरे एक भी जानवर के
हाथ लगाया तो तेरी हड्डियाँ तोड़ दूँगा।

उसे ताव में देख अब तो फकीरा भी लाल हो गया और पास में पड़े डंडे से एक मार दी।
बस अब तो दोनों गुथमगुथा हो गए।उनको झगड़ते देख लोग इकट्टा हो गए और उनको
अलग किया।एकत्रित भीड़ से एक बुजुर्ग बोला -दोनों तो दोस्त हो ,फिर लड़ क्यों पड़े?

बुजुर्ग की बात का उत्तर देते हुए फकीरा बोला -दादा ,ये मेरे खेत में अपने जानवर
छोड़ने की धमकी दे रहा था।

बुजुर्ग बोला -मगर तेरे पास खेत था कब और दयाला  के पास तो बकरी ही नहीं है फिर
जानवर कहाँ से आ गए।

दयाला बोला -दादा ,हम तो बैठे बैठे थक गये तो काल्पनिक खेल खेलने बैठ गए थे।

                 यही हाल तो इस देश की राजनीति का हो गया है।एक ने उदाहरण दिया
और विपक्षी उस काल्पनिक कुत्ते का पोस्टमार्टम करने लगे,देश का मीडिया,अखबार
उस काल्पनिक कुत्ते पर घंटो बहस करने लगे और पन्ने भरने लगे।वाह ....क्या खेल है
देश चलाने वालों का!!!