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20.6.09

एक पत्र रजत शर्मा जी के नाम

रजत शर्मा जी,
इंडिया टीवी

सर,
आप कैसे हैं ? आपका काम कैसा चल रहा है ? चैनल की टी.आर.पी कैसी है ?

अरे , मै ये सब क्या पूछ रहा हूँ. जाहिर सी बात है कि इन सवालों से आपका तो कोई सरोकार ही नहीं होगा क्योंकि भूत, शनी की दशा, इछाधारी नाग-नागिन और न जाने क्या-क्या सब तो आपके फैन हैं .

जिस खबिरया चैनल पर 24 घण्टे मे से बारह घण्टे भूत- प्रेत और नाग - नागिन को दिखलाया जाता हो उस चैनल और उसके मालिक पर तो इनकी असीम अनुकम्पा होगी ही.

वैसे ये तोरुर खबर (ब्रेकिंग न्यूज) तो मिल गई थी कि आपके भुतहा चैनल पर भूतो ने अपना हाथ रख दिया है लेकिन आपके बारे मे चिंता हो रही थी सो ये पत्र लिख रहा हूँ. जबावी पत्र में अपने बारे मे जरुर लिखियेगा.….

रजत जी, एक बात मै बड़े दिनों से गौर कर रहा हूँ कि “आपकी अदालत” जिसमें आप वकील और जज दोनो होते हैं और कटघरे मे खड़े आरोपी पर ऐसे आरोप लगाते हैं कि पूछिए मत…….

लेकिन अब इस प्रोग्राम मे बदलाव की जरुरत है ……

आपको नहीं लगता कि बदलाव की जरुरत है ?

ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको दर्शकों के पसंद की खबर न हो…….

आप तो सबसे बड़े खिलाड़ी हैं ……..

तभी तो आप सबसे ज्यादा मल्लिका पर आरोप लगाते हैं …..

खैर, मै इन फालतू के झमेलो मे नही पड़ना चाहता…...

हाँ तो, मै बतला रहा था कि इस प्रोग्राम मे कुछ बदलना चाहिए …

मेरे ख्याल से अगर आप इन्सानो के बजाय भूतो पे आरोप तय करे और वो जवाब दें तो कैसा रहेगा……

मजा आ जाएगा….

आप तो रातो-रात फेमस हो जायेंगे और आपका चैनल बाकी के चैनलो से बहुत ऊपर चला जाएगा ……

दर्शकों को प्रोग्राम मे नयापन दिखेगा ……

भूतो का समुदाय आपको अपना सरदार मान लेगा……

और इसमे ज्याद टेंशन भी नहीं है अगर आपको अपने अदालत मे मल्लिका को लाना होता है, तो दस तरह की झीक-झीक होती है इस सोमवार तो टाईम नहीं है ……

इस तरह के सवाल नहीं चलेंगे …..

ऐसा नही, वैसा नहीं और न जाने क्या-क्या....

लेकिन भूतो को बुलाने मे कोई परेशानी नहीं….

शमशान भूमी मे वैसे ही खाली घूमते रह्ते है. वैसे भी आपके पास तो भूतो से परिचत भूतकारों की एक लम्बी फौज है जो हर तरह के भूत को “आपकी अदालत” मे ला सकते हैं.……

तो रजत जी, कब सजेगी अगली “आपकी अदालत”. बेसब्री से इन्तज़ार है ……

- आपका शुभिचन्तक
(रजत शर्मा के नाम एक दर्शक की चिट्ठी)

17.6.09

एक पत्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम

डा. मनमोहन सिंह जी,
प्रधानमंत्री, भारत सरकार,

साहब जी,
आपके गठबंधन की जीत हुई है और आप दूसरी बार प्रधानमंत्री बन गए हैं, यह खुशी की बात है. लेकिन मन मे एक सवाल बार - बार उठ रहा है कि इससे पहले भी तो आप ही प्रधानमंत्री थे और उन पाँच साल मे हमारे यहाँ तो कुछ नही बदला. सब कुछ वैसा का वैसा ही रहा जैसा आपके प्रधानमंत्री बनने से पहले था।

आपके गठबंधन की जीत हुई है और आप दूसरी बार प्रधानमंत्री बन गए हैं, यह खुशी की बात है. लेकिन मन मे एक सवाल बार - बार उठ रहा है कि इससे पहले भी तो आप ही प्रधानमंत्री थे और उन पाँच साल मे हमारे यहाँ तो कुछ नही बदला. सब कुछ वैसा का वैसा ही रहा जैसा आपके प्रधानमंत्री बनने से पहले था. पहले भी एक पक्का घर नही था, आज भी नही है. तब भी कुछ दिन कमाता था और कुछ दिन बैठ के खाता था, आज भी वही हाल हैं
पहले भी एक पक्का घर नही था, आज भी नही है. तब भी कुछ दिन कमाता था और कुछ दिन बैठ के खाता था, आज भी वही हाल हैं . मुझे याद है, पिछले दिनों गाँव में हल्ला हुआ कि इस सरकार ने तो कमाल कर दिया अब तो हर किसी को काम मिलेगा और काम का पूरा दाम मिलेगा लेकिन यहाँ भी वही हुआ जो हर जगह होता है।

कुछ दिनों के बाद काम बंद हो गया. हमसे कहा गया कि काम ही नही है, वो तो बाद मे पता चला कि हमारे नाम पर पैसे उठ रहे हैं और हमे ही नही मिल रहा. अब, आप ही बताइए....... क्या फायदा हुआ हमे आपके इस योजना से?

आप यह भ्रम मत रखियेगा कि यह किसी एक की परेशानी है.... ना, ना, हमारी संख्या तो बहुत है लेकिन सब थक हार गए हैं , किसी को कुछ करके कोई फायदा नहीं दिख रहा. मुझे भी कोई बहुत उम्मीद नही है लेकिन कभी-कभी लगता है कि अगर आप तक मेरी आवज पहुँच गई और आपने सुना तो हमारे दिन बहुरेगें।

ऐसा ही कुछ हाल इंदिरा आवास योजना का है. इस योजना से अभी तक घर तो मिला नही लेकिन एक जोडी चप्पल जरुर घिस गया है. मैने सुना था कि आप बहुत ईमानदार हैं और पैसे की भी आपको बहुत अच्छी समझ है. लेकिन आपकी ईमानदारी और पैसे की समझ से हमारा तो कुछ भी फायदा नही हुआ.
अब आप दूसरी बार प्रधानमंत्री बन गए हैं तो कोशिश करियेगा कि हमारी हालत मे भी कुछ सुधार आए।

इससे ज्यादा क्या कहूँ पहले रहने के लिए घर और खाने के लिए खाना मिल जाए तभी तो सड़क और बिजली की जरुरत होगी. अभी तो बिजली की जगह लालटेन से काम चल जाता है और पैद्ल चलने के लिए तो गाँव की पगडंडी ही बहुत है. अंत मे एक बात और, अभी भी आपका साफ -सुथरा हाथ आम आदमी तक नही पहुँचा है ।

एक आम आदमी,
विकास कुमार
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