जरनैल का जूता एक साथ बहुत कुछ कह .गया...!हमारे चारों और जो घटित हो रहा है...उसकी कहानी कह गया!अब दुनिया बहुत छोटी हो गई है..!एक मामूली सी घटना थोडी देर में पूरे विशव में फ़ैल जाती है..!बुश पर जूता पड़ते सारी दुनिया ने देखा..लेकिन नेताओं ने इससे सबक लेना उचित नहीं समझा..!ये तो बोलना जानते है..सुनना कहाँ पसंद है इनको..?तो लो खाओ जूते...!नेता लोग एक अलग जाती होती है...पार्टी चाहे कोई हो इनका खून एक है ..तभी तो हर पार्टी में ये झट से एडजस्ट हो जाते है...इनके ब्लड ग्रुप वाली कोई समस्या नहीं ...है..!ये खून करे या दंगे करें या कुछ भी करे ..अवल्ल तो जेल जाते नहीं और चले भी जाएँ तो जल्दी वापिस भी आ जाते है...!जबकि एक आम आदमी को traffik नियम तोड़ने जैसे अपराध में भी इतना .शर्मिन्दा होना पड़ता है की क्या बताएं...?बड़े अपराध में तो जाने क्या होगा? जबकि नेताओं को देखिये...कुछ भी अनाप सनाप बोले जा रहें है..!सब .चुपचाप सुनते जा रहे है....!.देखिये वरुण गांधी को,देखिये लालू जी को ,देखिये रामविलास और मुलायम को...हुआ किसी को कुछ....अब आम आदमी क्या करे ...सुनता रहे इनकी बकवास....क्यूँ? इस sannatte को तोड़ने के लिए फ़िर जूता फेंकना पड़ेगा क्या?
8.4.09
7.4.09
जूता नहीं है...ये...
चूड़ी नहीं है...दिल है... देखो ...ये गीत तो आपने सुना ही होगा..!ठीक वही आजकल जूतों के बारे में हो रहा है..!आजकल अभिव्यक्ति का नया मध्यम बन गया है...ये जूता..!जिसे देखो वो फेंक रहा है!लेकिन जूता फेंकने के पीछे भावना कुछ और ही होती है..!जैसे की बुश साहब पर जूता इराकी निति के कारण पड़ा जबकि मंत्री जी सफाई जरनैल सिंह जी को पसंद नही आई...!लेकिन एक बात जरूर अलग है वो ये की जरनैल जी शायद केवल एक संदेश देना चाहते थे .नहीं तो...कुछ भी हो सकता था...!जबकि बुश साहब पर तो जूते पूरे .वेग से .और दो बार फेंके गए थे...!पर एक बार फेंको चाहे दो बार...धीरे फेंको चाहे जोर से...मतलब की बात ये है की ऐसा हुआ क्यों???नाराजगी की बात तो ठीक है पर इसे जायज़ नहीं ठहराया जा सकता...!अन्तराष्ट्रीय समुदाय में देश की किरकरी होगी..सो अलग...!इसलिए तो कहा गया की भावनाओं पर .कंट्रोल.....रखना सीखो...नहीं तो कहीं ऐसा नहीं हो की अगली बार प्रेस कांफ्रेस में सभी को नंगे .पाँव..ही बुलाया जाए....[www.yeduniyahai.blogspot.com]
Posted by
RAJNISH PARIHAR
0
comments
Labels: जूता...
