एक बार एक ताऊ अपनै छोरे के पास अपना ईलाज करानै
शहर चला गया ! वहां ताऊ का छोरा बडा सरकारी अफ़सर
था ! सरकारी गाडी बन्गला नौकर चाकर सब मिल राखे थे !
शहर मे उसके छोरे नै और उसकी बहू नै ताऊ की घणी सेवा करी !
और डाक्टर भी ताऊ के छोरे का पहचान का था सो उसनै ताऊ की
जान्च वान्च करके बताया की उसके प्रोस्टेट का आपरेसन करणा
पडैगा ! ताऊ को असपताल मै भर्ती करा दिया ! और सब जांच वांच
करकै डाक्टर बोल्या-- ताऊ थारा सुबह एक छोटा सा आपरेशन
कर देन्गे ! कोई चिन्ता मत करियो ! आप बिल्कुल ठीक हो जाओगे !
और इब आप बीडी चिलम मत पीना !
ताऊ बोल्या -- ठिक सै भाई ! जैसी थम कहो !
अगले दिन ताऊ का आपरेशन हो गया ! इसके बाद एक दिन
तो ताऊ नै बिना चिलम बीडी कै निकाल दिया ! पर इब उसतैं रहा
नही जावै था ! चिलम की तलब घणी होण लागरी थी ! और ताऊ नै
वार्ड बाय़ वगैरह सब आजमा के देख लिये , पर बात बणी नही !
इब ताऊ स्टाफ़ को चकमा देके असपताल के सामनै की पान की
दुकान पर पहुंच के बीडी पीके आगया ! और बस घुमण का
बहाना मार के ताऊ बीडी पीके वापस अपने बिस्तर पर आजाया
करै था !
शाम को डाक्टर आया राउन्ड लेता हुआ ! और उसनै ताऊ को
लिटा कै उसकी पेशाब की जगह पट्टि वट्टी
बदलनै लग गया ! और ताऊ सै बात भी करता जावै था !
इब डाक्टर नै पूछी-- ताऊ बीडी सिगरेट तो नही पी थी ना !
ताऊ बोल्या-- क्युं भाइ डागदर साब ? उडे के धुंआ निकलण लागरया सै ?
तन्नै क्युं कर बेरा पाटया के मन्नै बीडी पी थी ?
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14.7.08
तन्नै क्युं कर बेरा पाटया के मन्नै बीडी पी थी ?
Posted by
ताऊ रामपुरिया
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