किचिर-किचिर पर लंबी चकर-चकर होगी,
किसकी फटेगी...........................खोपडी,
किसका निकलेगा.......................दम,
पता नहीं।
हम समझते रहे इसे भडास,
तो फ़िर हमारी ही फटेगी.................खोपडी,
हमारा ही निकलेगा............................दम।
(घबरा गए, कुछ और न फटेगा, कुछ और न निकलेगा)
बाप-दादाओं ने भी समझा था
इसे भडास, किचिर-किचिर,
तभी खाते रहे उनका................जूता,
ख़ुद भी और
खिलवाते रहे उनका.....................जूता,
(फ़िर घबराए...............)
हमें भी,
अब लगता है, इन आदतों से
हम भी डालेंगे..............मुसीबत में
अपनी आने वाली पीढ़ी को।
युगों-युगों से चलती आ रही
जूते खाने, पिटने और फ़िर
करने की...............किचिर-किचिर
की परम्परा को
निभाते रहेंगे।
वे डालेंगे....................मुसीबत में
हमें और हम
डलवाते रहेंगे.......................मुसीबत में
ख़ुद को
क्योंकि सत्य सामने है पर हम
दबाये बैठे हैं अपना....................हौसला
और कहते हैं
किचिर-किचिर युगों से चालू है.
