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15.1.12

भ्रष्ट देश के भ्रष्ट निवासी, हम सब एक हैं.


भ्रष्ट देश के भ्रष्ट निवासी, हम सब एक हैं.
एक देश है, हजारों भाषा,
हजारों जाति और अनेक धर्म.
उबलता है देश सारा, के भारत नहीं है हमारा.
उबलते हैं सभी धर्म, के भारत नहीं है हमारा.

एक धर्म है हमारा, जो रखे देश को एक,
इस देश के भ्रष्ट लोग न पूछे कोई जाति,
बस हाथ फैलाकर करते स्वागत, हो कोई भी धर्म,
हमको पैसा देदो भाई, भले हो आपका कोई भी मर्म.

भारत एक है जब सामने आवे भ्रष्टाचार,
भ्रष्ट देश के भ्रष्ट निवासी एक साथ करें गुणगान,
हमारे सपने को भी कभी मिलेगा आकार,
बने भारत का एक नया ही राष्ट्रगान,
"भ्रष्ट देश के भ्रष्ट निवासी हम सब एक हैं,
कई धर्म हैं कई भाषा, होती हैं कई जाति भी,
एकता और अखंडता को एकजुट रखने में हम सब एक हैं,
जब तक जेब में आते नोट, भारत एक है.
भ्रष्ट देश के भ्रष्ट निवासी हम सब एक हैं."----रविन्द्र

20.10.11

काला धन

सोचो, देश का सारा काला धन वापस आ गया तो...

बिजली गॉन, मीटर ऑन

बीएसईएस की कारगुजारी 
बिजली का कनेक्शन काटते समय मीटर की रीडिंग ४४७ यूनिट थी। २ दिन बाद अचानक सूबे सिंह की नज़र मीटर पर पड़ी तो उनके होश उड़ गये। बिना बिजली कनेक्शन के मीटर दौड़ रहा था और उसमें रीडिंग १२५७ थी। उन्होंने अपने इष्ट-मित्र-पड़ोसियों को बुलाकर यह करामात दिखाई। सभी यह देख आश्चर्यचकित और आक्रोषित थे। 
निजी बिजली कम्पनी बीएसईएस (मालिक अम्बानी) के ऊपर दिल्ली की मुख्य मन्त्री श्रीमती शीला दीक्षित की असीम कृपा है। खुलेआम इस कम्पनी का वे पक्ष लेती हैं। तेज दौड़ते बिजली के मीटरों से लोग लम्बे समय से परेशान हैं। मनमाने बिलों से परेशान हैं। पर राहत की बजाय लोगों के हाथ सिर्फ़ परेशानियां ही आती हैं।


पिछले दिनों बिजली का बिल समय पर जमा न कर पाने के कारण दिल्ली के नजफ़गढ़ क्षेत्र के गांव खड़खड़ी रोंद निवासी सूबे सिंह के घर का कनेक्शन काट दिया गया। बिजली का कनेक्शन काटते समय मीटर की रीडिंग ४४७ यूनिट थी। २ दिन बाद अचानक सूबे सिंह की नज़र मीटर पर पड़ी तो उनके होश उड़ गये। बिना बिजली कनेक्शन के मीटर दौड़ रहा था और उसमें रीडिंग १२५७ थी। उन्होंने अपने इष्ट-मित्र-पड़ोसियों को बुलाकर यह करामात दिखाई। सभी यह देख आश्चर्यचकित और आक्रोषित थे।
वे तत्काल इस मामले की शिकायत करने ३ बार उजवा और नजफ़गढ़ दफ़्तर गये। किसी बिजली अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी। मीटर की जांच के लिए पहले ५० रुपये शुल्क जमा कराकर शिकायत करने को  को कहा गया। सूबे सिंह ने अनेक परेशानियां झेलते हुए बिजली दफ़्तर के अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया। फ़िर उन्हें बिजली के बिल की बकाया राशि २३०० रुपये भी जमा कराने को कहा गया। वह भी उन्होंने जमा करा दी। इसके बाद बिजली अधिकारी उनके घर गये और दिया गया विवरण सही पाकर तत्काल मीटर बदलने का पर्चा काट दिया। सूबे सिंह के घर का दो दिन जमकर चला बिजली का फ़िलहाल बन्द है। पर बिजली का दोषयुक्त यह मीटर ये पंक्तियां लिखे जाने तक यानी आज २० अक्टूबर २०११ तक भी नहीं बदला गया है।
यही है जनसेवा करने वाली सरकार के तमाम कामों का एक नमूना।
• सुरेश त्रेहान
नाहरगढ़ साप्ताहिक, नयी दिल्ली
Clik to Visit: शिकायत बोल Shikayat Bol

31.8.11

आईये जाने कौन है सोनिया गाँधी:Who is Sonia Gandhi

आईये  जाने कौन है सोनिया गाँधी:Who is Sonia Gandhi एक असा लेख जो हर भारतीय को एक बार पढना चाहिए
आधिकारिक रूप से सोनिया गाँधी का कोई अस्तित्व नहीं है .पासपोर्ट में उनका नाम ना सोनिया है ना ही गाँधी .पासपोर्ट में उनका नाम है Edvige Antonia Albina Maino. सोनिया एक रशियन नाम है जबकि अन्तोनिया  इतालियन मूल का नाम है और उनका पासपोर्ट भी इतालियन है.उनकी शादी राजीव गाँधी के साथ हुई पर उन्होंने आधिकारिक रूप से अपना सरनेम कभी नहीं बदला .
पूरा अर्तिक्ले पढने के लिए लिंक पर क्लिक करें.
http://meriparwaz.blogspot.com/2011/08/who-is-sonia-gandhi.html

26.4.11

India

What is INDIA...???
A Nation where pizza reaches home faster than Ambulance & Police...
Where u get car lone @7% but Education lone @12%...
Where rice is Rs.40/kg but sim card is free...
Where people worship goddess Durga but went to kill their girl child...
Where olympic shooter wins gold, govt. gives 3carore, Another shooter dies fighting with terrorist, govt pays only 1 lakh...
Really, "INCREDIBLE INDIA"...
Plz suppurt kare n govt tak pahucha de...!!!

11.9.08

हम शर्मिंदा हैं...

हम शर्मिंदा हैं कि हम एक ऐसे व्यवसाय से जुड़े हैं, जिसका काम लोगों में वैज्ञानिक चेतना और शिक्षा के प्रचार -प्रसार की जगह भय और अंधविश्वास का बढ़ावा देना हो गया है। मीडिया की इसी नासमझी ने मध्यप्रदेश के सारंगपुर जिले के आशारेता गांव की निवासी 16 वर्र्षीया छाया की जान ले ली। पृथ्वी की उत्पत्ति समझने के लिए किए जा रहे एक वैज्ञानिक प्रयोग को मीडिया ने इस तरह प्रचारित किया कि इस बच्ची ने मानसिक संतुलन खो दिया और दुनिया खत्म होने के डर से जहर खाकर आत्महत्या कर ली। हो सकता है कि पुलिस इस मामले में निजी टीवी चैनलों पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज करे और हो सकता है कि न भी करे। गोल मानी जानेवाली ये दुनिया भले ही खत्म हो न हो, पर मीडिया ने छाया की दुनिया खत्म कर दी। मीडिया को लेकर लंबे समय से हम बहसों में उलझे हैं कि यह मिशन है या प्रोफेशन। लेकिन लगता है कि यह निर्लज्ज पूंजीवाद का ऐसा अंग बन गया है, जो लोगों को अनपढ़ बनाए रखने और उनकी एकता को तोड़ने के हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। पहले तोहमत समाचार पत्रों पर ही लगाई जाती थी, पर निजी टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले समाचारों (अगर उन्हें समाचार कहा जा सकता है, तो) ने तो स्वरूप को और भी बिगाड़ दिया है। आम आदमी की जिंदगी की जो बात पहले कभी-कभार हो जाती थी, वह अब बिल्कुल ही बंद हो गई है। जिंदा लोगों की बात करने में इन्हें परहेज है, पर भूत-प्रेतों पर घंटों एक ही कार्यक्रम चलता रहता है। हो सकता है कि भूख से मरा कोई व्यक्ति भूत बनने के बाद ही अपनी व्यथा इन समाचार चैनलों पर सुना सके, जिंदा रहते उसकी बात सुनने को तो कोई तैयार नहीं है। धरती के रहस्य को जानने के लिए किए जा रहे प्रयोग को महाप्रलय का नाम देकर लोगों को डराना इनके लिए अपनी टीआरपी बढ़ाने भर का एक साधन है। भाग्यवादी और धर्मभीरु इस देश की जनता पर इसका क्या असर पड़ने वाला है, इसकी चिंता उन्हें नहीं है। वे बता रहे हैं कि अगर महाप्रलय से बचना है, तो काशी-मथुरा चलो। जो हिंदू नहीं हैं या जिनमें काशी-मथुरा जाने की कूवत नहीं है, उन्हें बचने का अधिकार नहीं है क्या?
1951 में अमरीका ने भारत के बारे में एक विस्तृत सर्वेक्षण कराया था, आज भी अमरीका उसी सर्वेक्षण के आधार पर अपनी नीतियां बनाता है। इस सर्वेक्षण का केन्द्र बिन्दु एक सांस्कृतिक संगठन था। सर्वेक्षण के अनुसार अगर हिन्दुस्तानी जनता की एकता को तोड़ना है, तो इस संगठन को बढ़ावा देना होगा। उसी के बाद से अमरीका ने इस संगठन को वित्तीय सहायता देना शुरू किया और फिर उसका विस्तार होता चला गया। अमरीका आज भी उसी दिशा में काम कर रहा है और पूंजीवाद के इशारे पर काम करनेवाले निजी चैनल इसी संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। राम के पदचिन्हों से लेकर कृष्ण के सिंहासन को ढूंढ़ने के नाम पर खोजी पत्रकारिता की जा रही है। रावण कहां पैदा हुआ था, कैसा था, यह अनुसंधान का विषय हो गया है। अगर किसी सिक्केपर राम का चिन्ह मिल जाए, तो एक घंटे का कार्यक्रम तैयार हो जाता है। सीता की साड़ी और शंकर के त्रिशूल को खोजने के काम में लगे रिपोर्टरों पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। देश की बेरोजगारी, भुखमरी, पलायन, बच्चों की तस्करी, दहेज के लिए मारी जा रहीं महिलाएं, दवाओं के अभाव में दम तोड़ता बचपन, वैश्यावृत्ति की तरफ धकेली जाती बच्चियां इनकी टीआरपी नहीं बढ़ातीं।
निजी चैनलों का हाल यह है कि देश-विदेश के मुख्य समाचार देखना-सुनना भी मुश्किल हो गया है। 24 घंटे चलनेवाले इन चैनलों में पूरी रात कार्यक्रमों को दोहराया ही जाता है। दिन के समय में दो घंटे खली निकाल देता है, दो घंटे अश्लील चुटकुले सुनाने वाले खराब करते हैं, दो घंटे बाबा बैरागी लोगों को ग्रह- दशाओं के नाम पर डराते रहते हैं, कुछ समय टीवी पर चल रहे रियलिटी शो के अंश दिखाने में निकल जाता है। गंडे-ताबीज से लेकर एकमुखी रुद्राक्ष का प्रचार-प्रसार इन चैनलों पर किया जाता है। ग्रहण अगर किसी त्योहार के दिन हुआ, तो ये आदमी को इतना डरा देंगे कि उसका घर से निकलना ही बंद हो जाए। अब महाप्रलय नहीं हो सकी, तो उसकी तिथि आगे बढ़ा दी गई है। कहा जा रहा है, कि प्रलय अब २२सितम्बर होगा। इन घोर अवैज्ञानिक चैनलों के लिए केन्द्र सरकार के पास कोई उपाय नहीं है। यह सारा भयादोहन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किया जा रहा है। अगर छाया ने आत्महत्या की है, तो उसके लिए जितनी जि?मेदारी इन निजी चैनलों की है, उतनी ही जिम्मेदार केन्द्र सरकार भी है, जो इन पर अंकुश लगाने में स्वयं को अपाहिज महसूस करती है। हमें पता है कि इस आत्महत्या के बाद भी केन्द्र सरकार और निजी चैनलों को कोई शर्मिंदगी नहीं होगी। लेकिन हम जैसे मुट्‌ठी भर लोग, जिनके लिए पत्रकारिता व्यापार नहीं है, शर्मिंदगी महसूस कर सकते हैं और कर रहे हैं।
साभार : देशबंधु
www.deshbandhu.co.in

30.1.08

तेरी माँकी और सायमन्ड्स का मन्कियापा

भड़ासी गुरू सुबह से ही भयानक परेशान थे। गरिया रहे थे और नस्लभेद पर तमाम तरह की टिप्पणियां चेंप रहे थे। हम मन ही मन मु्स्कुराये और चुटकियाने के अन्दाज़ में उन्हे किलकिया दिए कि भड़ासी गुरू अब भड़ास निकालने से क्या फायदा जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने भज्जी को बरी कर दिया। वो बिफर गये और भज्जी की तथाकथित अभद्र भाषा की उल्टी करने लगे।

बोले- "तेरी माँकी" ही तो कहा था प्यारे भज्जी ने, मंकी तो कहा नहीं उस जटाजूट वाले उद्दंड को, अब उसे पंजाबी और हिन्दी ना आये तो भज्जी का क्या दोष?वो चालू रहे नानस्टॉप बोलते रहे- हम कब तक यूँ ही सहते रहेंगे? महात्मा गाँधी ने जिस नस्लभेद के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी उसी नस्लभेद के खिलाफ हम घुटने टेक रहे हैं। गाली देना तो ह्युमन बीईंग का नेचर है, चुनांचे भज्जी ने सिर्फ गाली का मुखड़ा बोला था, पूरी गाली नहीं ऐसे में खाली स्थान भरो की तरह ऑप्सन देना था एन्ड्रयू सायमन्डस को कि बेटा पहले भज्जी के भड़ास की मीनिंग तो बताओ?

उछलने लगे ऐसे कि जैसे सही में कपि की औलाद हों।

मैंने कहा-भड़ासी गुरू अब तो मामला दूध का दूध, पानी का पानी हो गया तो खिसियाकर वो अपना सोंटा निकाल लिए। चुटकियों से पैसों कि मुद्रा बनाते हुए बोले- अभी बताता हूँ मेरे सहनशील शिष्य॰॰ अबे तुझे नहीं पता कि सब लक्ष्मी का खेल है॰॰

मैंने फौरन चुटकी ली- कौन मित्तल जी? बोले अबे मित्तल-वित्तल नाहीं, उ जिससे मित्तल आज मित्तल हैं, मनी मनी॰॰ई सब बड़े लोगों का अपनी ओर अटेंशन लेने का तरीका है। भज्जी अन्ततोगत्वा बरी हो गये, मीडिया को भी खूब मसाला मिला लिखने को और दिखाने को। हम लोग नाहक परेशान हुए॰॰ रोज गाली देते हैं लेकिन कोई नोटिस ही नहीं लेता॰॰ तेरी माँकी॰॰॰