पंक्तिया अर्ज़ कर रहा हु मस्ती के साथ पड़ीयेगा...........
जिन्दगी के सफ़र में कई अनुभव हुए
कुछ अच्छे कुछ बहुत बुरे हुए
दिल से सोचा तो एक ख्याल आया
गम के पेहुलुआ से कम, ख़ुशी के असुआ से
मेने एक रिश्ता बनाया.............
गम कभी साथ छोड़ता नहीं
गम देने वाला कभी मुड़कर देखता नहीं
अह कभी निकलती नहीं
एक टिश सी हमेशा चुभती हें ................
जब कोई रुकसत होता हे ...............
एक दर्द सा होता हे जब कोई दिल को छूता हे .....
और हर एक आहट पर मन विचलित हो उठता हे
ऐसा क्या हे , क्यों हे सवाल सवाल और बस सवाल
जवाब की तलाश जरी हे ..........
आपका -- जीत
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23.9.09
गम कभी साथ छोड़ता नहीं
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6.9.09
भारत में गरीबी गरीबी नहीं एक पतिव्रता नारी हैं

एक दिन रास्ते मैं मिल गई गरीबी
मेने पूछा क्या हाल हे बड़ी बी.......
बहुत दिन हो गय तुम्हे इंडिया मैं
कुछ दिनों के लिए मायके चली जाओ
विदेश जाकर आपनी माता जी से मिल आओ
गरीबी बोली मेरा तो इश देश से जनम जनम का नाता हैं
और मेरा नाम तो चुनाव लड़ने के काम आता हे
भला ऐसे भी कोई घर छोड़कर जाता हैं
और अगर मैं न रहूंगी तो ये किसे हटायेंगे
चुनाव लड़ना भूल जायंगे,
फिर वो मुस्कराई और बोली बेटा में एक पति व्रता नारी हु
इतनी आसानी से नहीं जाउंगी डोली में सबर जोकर आई थी
आपका जीत
कंधो पर सवार होकर जाउंगी
आपका -- जीत
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