Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Showing posts with label india against corruption. Show all posts
Showing posts with label india against corruption. Show all posts

1.9.12

भ्रष्टतंत्र में फंसे मेरे भाई का ख़त



देवरिया में मेरा भाई जनसेवा केंद्र चलाता है, सरकार की चलाई इस योजना के तहत आम जनता को कम पैसे में उनके घर के पास सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए हैं लेकिन इस सेवा में हो क्या रहा है, वो हक़ीकत पेश करता है मेरे भाई का ये ख़त--- 

 


शायद आप लोगो को ये जान कर बहुत आश्चर्य होगा पर बहुत सोच समझकर मैंने ये फैसला लिया है की मैं अपने "जन सेवा केंद्र " की फ्रेंचाइजी को वापस कर रहा हु .
निश्चित ही आप लोग सोच रहे होंगे की मैंने अचानक ये फैसला क्यों ले लिया.
मैंने ये फैसला इसलिए लिया क्योकि मैंने ये फ्रेंचाइजी जनता की सेवा करने के लिए लिया था न की किसी भी तरह से पैसे कमाने के लिए. आपने पिछले कुछ दिनों में फेसबुक पर मेरे केंद्र से सरकारी सेवाए शुरू होने के साथ साथ एक प्रमाड पत्र भी देखा होगा.परन्तु मुझे आप लोगो को ये बताते हुए ये दुःख हो रहा है की ये व्यवस्था आधी ऑनलाइन और आधी ऑफलाइन होने की वजह से यहाँ भी भ्रष्टतंत्र स्थापित हो गया है.मैंने अभी तक अपने केंद्र से कई फ़ार्म सबमिट किया मगर समय से कोई कभी प्रमाड पत्र नहीं आया .मैं पिछले दस दिनों से लगातार तहसील के चक्कर काट रहा था और मुझे कहा जा रहा था की आपके सभी फार्मो की रिपोर्ट लग चुकी है और जल्द ही आपको प्रमाड पत्र मिल जायेंगे परन्तु जब 20 दिन बाद भी प्रमाड पत्र नहीं मिले और लोग मुझसे उसके बारे में सवाल करने लगे तो कल मैं देवरिया के जिलाधिकारी से मिला और इसकी शिकायत की,उन्होंने मुझे आश्वासन दिया की वो जल्द ही इस पर कुछ करेंगे. फिर मैंने तहसीलदार से मुलाकात की उन्होंने अपने एक आदमी से मुझे बात करने को कहा .मैं जब उनसे मिलने पहुचा तो देखा की सैकड़ो लोग उनके पीछे लगे थे और वो भाई साहब एक हाथ से लोगो से पैसे ले रहे थे और दुसरे हाथ से कागजों पर दस्तखत कर रहे थे. 4-5 घंटे उनके पास बैठने के बाद उन्हें फुर्सत मिली तो याद आया की जिलाधिकारी महोदय ने उनको प्रमाड पत्र जारी करने को कहा है. अब मुझे लगा की भाई साहब कम्प्यूटर पर बैठकर मेरे प्रमाड पत्र जारी कर देंगे,मगर भाई साहब तो अपने किसी और आदमी को खोजने लगे जो कम्प्यूटर जानता हो .खैर किसी तरह वो अपना थैला उठाये और प्रमाड पत्र जारी करने के लिए कम्प्यूटर पर बैठे. (ऐसा इसलिए क्योकि तहसीलदार महोदय को कम्प्यूटर नहीं आता और उन्होंने अपना डिजिटल सिग्नेचर इन भाई साहब को सुपुर्द कर दिया था ) 
प्रमाड पत्र जारी करने के लिए जब भाई साहब ने अपना थैला खोला तो उसमे किसी पथरदेवा के जन सेवा केंद्र के फ़ार्म थे किन्तु मेरे एक भी नहीं .मैं उनसे पूछता रहा की भाई साहब मेरे फ़ार्म कहा है मगर वो गुटका चबाने में इतना व्यस्त थे की उनके मुख से कुछ निकल ही नहीं रहा था.खैर फिर मैंने पथरदेवा के उस जन सेवा केंद्र संचालक से बाहर आकर बात की की भाई आपके फ़ार्म यहाँ हैं.मेरे क्यों नहीं. तो उन्होंने मुझे बताया की उन्होंने इनको 2000 रूपए दिए हैं इसलिए उनका काम जल्दी किया जा रहा है.मैंने उस केंद्र संचालक को डाटा की आज तुहारी एक गलती से सभी केंद्र संचालको को दिक्कत हो रही है क्योकि तुमने जो घूस देने की शुरुआत कर दी है उसका खामियाजा हम सबको भुगतना पड़ेगा .खैर मैं सिर्फ बोल ही तो सकता था, इन सबमे शाम के 7 बज चुके थे और मेरे फ़ार्म का पता नहीं था .अंत में मैंने कुछ शख्त रवैया अपनाते हुए रात को 8 बजे तहसील का ताला खुलवाकर अपनी फ़ाइल निकलवाई तो देखा की उस पर इतने दिनों में कोई रिपोर्ट नहीं लगी है. अगले दिन मैं खुद उस फ़ाइल को लेकर लेखपाल और कानूनगो के पास गया तो वो लोग भी मुझे पैसे देने का इशारा करने लगे. मैंने वह देखा की जो भी उनकी जेब में 50 रूपए दाल देता उसका काम तुरंत हो जाता और जो नहीं देता उसको कुछ भी कहकर टाल दिया जाता .
जाहिर सी बात है की अगर मुझे इनको पैसे देने पड़े तो वो पैसे मुझे जनता से ही लेने पड़ेंगे जो की मैं कर नहीं सकता क्योकि मैंने ये केंद्र जनता को सरलता और आसानी से कम पैसे में सेवा देने के लिए खोला था न की ज्यादा पैसे लेकर खुद इस भ्रष्टतंत्र का हिस्सा बन्ने के लिए .
मुझे इन चीजों को देखकर मेरे अंतर्मन में बहुत दुःख हुआ की आज के समय में हर आदमी बिक चुका है और डैडी फिल्म का वो गाना याद आया की ".ये वो जगह है जहा वफ़ा बिकते हैं,बात बिकते हैं और लफ्ते जिगर बिकते हैं,कोख बिकती है,दिल बिकते है,सर बिकते है , इस बदलती हुयी दुनिया का खुदा कोई नहीं,सस्ते दामो में हर रोज खुदा बिकते है.... 
हर खरीददार को बाज़ार में बिकता पाया ,हम क्या पायेंगे किसी ने यहाँ क्या पाया. मेरे एहसास ,मेरे फूल कही और चले....."

25.4.11

लोगो के पेट में मरोर क्यूँ पैदा हो रही है,

प्रिय भइए,
                   मेरे समझ में आज तक ये नहीं आया कि भ्रस्ताचार कि जिस मुहीम कि सुरुआत अपने अन्ना जी ने किया है उससे लोगो के पेट में मरोर क्यूँ पैदा हो रही है, और इनमे कितने लोग तो ऐसे है जिन्हें अपने आप को इमानदार और भ्रस्ताचार मुक्त सुशासन देने का भ्रम है, कुछेक कतो समझ में आ रहा है कि हम नौ सौ चूहे खा चुके है, और अब  बिल्ली  के हज चलने कि तैयारी है, अब मै नाम तो नहीं लेना चाहता लेकिन मध्य प्रदेश के स्वनाम धन्य पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से लेकर मा० ठा० अमर सिंह , रीता जी जैसे लोगो को क्या कहें ? बहन मायावती जी को ये शिकायत है कि कमेटी में कोई दलित नहीं है, अरे बहिन जी , दलित भी इस देश कि आम रियाया है, बल्कि कहे तो वे ही सबसे ज्यादा भ्रस्ताचार से पीड़ित है, अगर देश में कोई भ्रस्ताचार मुक्ति कि आंधी इस क्रांति से आएगी तो उसमे सब का कल्याण होगा.
आश्चर्य तो तब होता है जब हमारे साउथ के बड़े बड़े राजनेता जो घोटाले कि चासनी में सरोबर है, वे तो इस जन अभियान में कुछ नहीं कहते या कहने का साहस नहीं कर पा रहे है, लेकिन  अपने उत्तर के नेता खूब चिल्ला रहे है, कही ऐसा तो नहीं कि इन्हें डर हो कि चोर कि दाढ़ी में तिनका?
 बहरहाल मुझे लगता है कि जन लोकपाल विधेयक में कुछ चीजे और डालनी चाहिए जिससे भ्रस्ताचार को उपर से नीचे ख़त्म किया जा सके उसके लिए मेरे समझ से एक तरीका ये होना चाहिए कि हिंदुस्तान का हर नागरिक अपने अपने सम्पतियों , आय के साधन का ब्यौरा लिखित रूप से दाखिल करे, ठीक उसी तरह जैसे इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया जाता है, और यह अनिवार्य एवं क़ानूनी  हो , जिसके न पालन करने पे भरी जुरमाना हो. साथ ही साथ इस देश कि सारी चल अचल  सम्पतियों का  भी स्वामित्व का ब्यौरा जमा कराया जाये . बाद में इन दोनों अभिलेखों को आपस में एक दुसरे से सत्यापित करवा दिया जाये , मित्रो , सारी बेनामी संपतिया आपके सामने आ जाएँगी, साथ ही वे ढेर सारे भ्रस्ताचारी और घुसखोर भी , जो इस देश कि जड़ो को खोखला कर रहे है.


मै बार बार औरो से और खुद से ये सवाल पूछता हूँ, कि
- इस देश में एक बेरोजगार लड़की सदी होने के बाद गृहणी बनती है और  ५-७ साल के अंदर  ही उसके नाम  उसके पास करोडो  की  सम्पति , कार, मकान सब कैसे हो जाता है? जबकि उसके पतिदेव समाज में अपने आप को इमानदार  साबित करते रहते है?
- आज के समाज में एक सुब इंस्पेक्टर , जूनियर इंजीनियर, आर टी ओ , रजिस्ट्री आफिस , फ़ूड इंस्पेक्टर , सप्लाई इंस्पेक्टर जैसे पोस्टो क़ी तनख्वाह कितनी है, और इनके बीबी, बच्चो और  रिश्तेदारों क़ी संपतियां करोडो में कैसे हो जाती है?
- आज अपने आप को एन जी ओ कहने वाले ज्यादातर संगठन या तो ट्रस्ट, या सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है, ये सभी संगठन ईमानदारी से बताये क़ी उन्होंने अपने पंजीकरण  कराते समय कितना पैसा घूस में दिया था? और अगर दिया तो उन्होंने उस समय विरोध क्यूँ नहीं किया? 
 चलिए मै बताये देता हूँ कि आज उत्तर प्रदेश में सोसायटी के रजिस्ट्रेसन में लगभग ४०००/  और ट्रस्ट के पंजीयन में ३०००/ रुपया गिनना पड़ता है, तो जब ये एन जी ओ अपने बुनियादी दौर में भ्रस्ताचार का विरोध नहीं कर पाते तो इनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, जिसे इन्हें सिद्ध करना होगा.
    बहरहाल एक  अच्छी सुरुआत है , और आज कि जरुरत भी, हम सब को मिल के इस मुहीम में शामिल होना चाहिए, नहीं तो हम नदी किनारे  खरे रह जायेंगे और नदी का पानी कहीं सूख जायेगा?

                                बात को भी दिग्विजय जी के तर्ज पे ख़तम करूँगा, कि जब हाथी चलता है तो वो रस्ते में ये नहीं देखता कि राह में कितने तिनके आये?
   
अब भैये , ये तो समझाने वाली बात है कि इस मुहीम में हठी कौन होगा और तिनका कौन बनेगा?
  जय हिंद!

आप का  ही,
व्योमेश चित्रवंश 
chitravansh@gmail.com
http://chitravansh.blogspot.com 

9.4.11


रामदेव जी आपकी महत्वाकांक्षा प्रबल हैं /

बाबा रामदेव ने पिछले दो दिनों में दो बार राजनीती का प्रदर्शन कर दिया / एक बार तो श्री अन्ना जी के मंच से सोनिया गाँधी का विदेशी मूल का मुद्दा उठाकर, तब भी गुस्सा आया था और आज तो हद ही कर दी / श्री शांति भूषण और प्रशांत भूषण पिता- पुत्र का एक साथ जन लोकपाल ड्राफ्ट कमिटी में होना सोचने से अच्छा नहीं लग रहा / इससे बचना था / लेकिन जल्दबाजी में या किसी भी और वजह से अगर ये त्रुटी रह गयी तो भी बाबा रामदेव को मीडिया में बयान नहीं देना था / पहले आपस में, इंडिया अगेंस्ट करप्सन में चर्चा करते फिर मीडिया में बयानबाजी करते / बाबा रामदेव बहुत ही ज्यादा महत्वाकांक्षी हैं लेकिन अपनी महत्वाकांक्षा के चलते वो जनभावना का अपमान नहीं कर सकते / बाबा रामदेव जो शहर शहर गाँव गाँव वर्षो से घूम घूम कर भी अपने लिए जो जनसमर्थन इकठ्ठा नहीं कर पाए वो श्री अन्ना को मिलते देखकर वो बौखला गए हैं / बाबा रामदेव सोचते हैं की उन्हें जन समर्थन हासिल हैं लेकिन उन्हें ये नहीं पता  भारत की जनता की सोच बहुत ही परिपक्व हो चुकी हैं / मैं उनसे सादर सिर्फ एक ही सवाल पूछना चाहता हूँ की आप भारत स्वाभिमान के जो मंडलाध्यक्ष , जिलाध्यक्ष बना रहे हैं उनका चुनाव कैसे कर रहे हैं , क्या उनके लिए कोई चंदा / डोनेसन निर्धारित हैं ? 

रामदेव जी आप देश के लिए सोचते हैं इसमें कोई शक नहीं लेकिन आपकी महत्वाकांक्षा प्रबल हैं / त्याग की प्रतिमूर्ति बनिए श्री अन्ना जी की तरह , नाम के योगी न बने कर्म में योग लाये / त्याग में बहुत बड़ी शक्ति होती हैं, सोनिया जी का प्रधानमंत्री पद का त्याग ही  यु पि ए सरकार को अब तक चला रहा हैं / श्री अन्ना जी से अनुरोध करना चाहूगा की वो अपने आन्दोलन को किसी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की बलि न बनने दे  , आज भारत की जनता को आपमें जो एक नयी रौशनी दिखी हैं उसे कायम रहने दे / श्री अरविन्द केजरीवाल से लेकर स्वामी अग्निवेश तक जो लोग भी आज आपके साथ हैं उन्हें एक बार फिर से परख ले , क्या वो सच्चे देशभक्त हैं ? क्या वो निस्वार्थ हैं ? क्या उनके मन के अन्दर कोई दबी हुयीं महत्वाकांक्षा तो नहीं ? नेहरु जी और जिन्ना जी की महत्वाकांक्षा का फल हम सभी भुगत रहे हैं / आजादी के इस दुसरे आन्दोलन की परिणति ऐसी होना देश का दुर्भाग्य होगा /

6.4.11

ये आग नहीं बुझेगी ....नहीं बुझेगी...नहीं बुझेगी


जंतर मंतर से अभी घर पहुंचा हूँ / कमाल कर दिया हैं श्री अन्ना हजारे जी ने / देश के जनमानस की आवाज बन गए हैं / जंतर मंतर में जन सैलाब उमड़ पड़ा हैं /
युवक युवतिया, वृद्ध जवान , व्यवसायी नौकरी पेशा, रिक्शा चालक , रेड़ी पटरी वाले, किसान , रिटायर्ड सैनिक , डॉक्टर सभी एक ही मंच के नीचे निसंकोच दरी पर बैठे हुए अन्ना को सुन रहे हैं, भजन और देश भक्ति गीत गा रहे हैं / देखकर अनुभव हो रहा हैं की गांधीजी की संध्या सभा और अनशन कैसे होते होगे /

अन्ना जी आपके ऊपर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ गयी हैं / देश के नौजवानों में जो जोश और जूनून आपके इस आन्दोलन में देखा जा रहा हैं वो दिल्ली के इतिहास में अभूतपूर्व हैं / युवा वर्ग आपको एक नयी आशा की किरण के रूप में देख रहा हैं / जो युवा उकता गया था भारत की राजनीती से , उसे घिन आती थी राजनेताओ से , जो नफरत करते थे मंत्रियो से एम् एल ए, एम् पिए से वो युवा कंधे से कन्धा मिलाकर चिल्ला रहे हैं " अन्ना आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं " / ये जो थोडा सा भरोशा आपने जनमानस विशेषकर युवा वर्ग में जागृत किया हैं ये एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी हैं आप पर / अगर युवा वर्ग आपसे भी निराश हुए तो उनका विश्वाश इस राजनैतिक सिस्टम से ही उठ जाएगा /

बहुत से राजनेता अन्ना से मिलने आ रहे हैं लेकिन अन्ना को उन्हें अपने से दूर ही रखना होगा वर्ना जो जनसमर्थन उन्हें हासिल हो रहा हैं वो नहीं होगा/ जनता के मन में व्याप्त भ्रष्ट तंत्र के प्रति आक्रोश को देश व्यापी जन आन्दोलन में परिवर्तित हो रहा हैं / उत्तरी भारत से तो जाने कितने लोग मायानगरी हीरो बन ने जाते हैं पर अन्ना पहले व्यक्ति हैं जो मुंबई से दिल्ली आकर सारे देश के हीरो बन गए हैं / हमने आज जंतर मंतर से इंडिया गेट और इंडिया गेट से कस्तूरबा गाँधी मार्ग होते हुए जंतर मंतर तक "मौन दीप यात्रा " (candle march) किया / कालेज के दिनों की यादे ताजा हो गयी जब हम नारे लगते थे " ये आग नहीं बुझेगी ....नहीं बुझेगी...नहीं बुझेगी "
अगर देश को भ्रष्टाचार मुक्त करना हैं तो ये चिंगारी बुझनी नहीं चाहिए / इसे दावानल बना दीजिये और समूचे भ्रष्ट तंत्र को स्वाहा कीजिये / जय हिंद