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12.6.11

बहुत बड़बोले हैं स्वामी रामदेव, जनता को क्या मिला?

अफसोसजनक बात है कि लाखों दिलों में आदर के साथ बसने वाले स्वामी रामदेव ने अपने अनशन की बुनियाद झूठ के मंच पर रखी और नाम दे दिया ‘सत्याग्रह’। शीर्षासन पर बैठे लोगों से यूं तो ऐसी आशा नहीं की जाती, लेकिन फरेब बर्फ की तरह पिंघलता और उसके अंदर छिपाया गया सच अपने रूप में बाहर आ जाता है।महंगाई, भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता की भावनाओं को छले जाने का सिलसिला पुराना है। नेता यह काम अर्से से करते आ रहे हैं। बाबा ने कुछ नया भी नहीं किया। बेचारी जनता की नियति यही है। अति महत्वाकांक्षी होना बाबा पर भारी पड़ा। संभवतः बाबा खुद को भविष्य में प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे थे। उन्होंने मांग शुरू कर दी कि जनता को प्रधानमंत्री चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। सवाल यह कि इससे लाभ किसको? जाहिर है बाबा के भक्त उन्हें ही कहते और बाबा कहते कि अब जनता कह रही है, तो मैं क्या करूं। बाबा की महत्वाकांक्षाओं से संत समाज भी उनसे नाराज रहा है। 
'जाको प्रभु दारूण दुख देंही,
ताकी मति पहिले हर लैंही।' यह सच है कि बड़बोलेपन ओर अति महत्वाकांक्षाओं का अंजाम कभी अच्छा नहीं होता। बड़बोलेपन का झूठ इंसान का मजाक ही बनवाता है और लोगों को दूर करता है। बाबा के साथ ऐसा ही हो रहा है।

9.4.11


रामदेव जी आपकी महत्वाकांक्षा प्रबल हैं /

बाबा रामदेव ने पिछले दो दिनों में दो बार राजनीती का प्रदर्शन कर दिया / एक बार तो श्री अन्ना जी के मंच से सोनिया गाँधी का विदेशी मूल का मुद्दा उठाकर, तब भी गुस्सा आया था और आज तो हद ही कर दी / श्री शांति भूषण और प्रशांत भूषण पिता- पुत्र का एक साथ जन लोकपाल ड्राफ्ट कमिटी में होना सोचने से अच्छा नहीं लग रहा / इससे बचना था / लेकिन जल्दबाजी में या किसी भी और वजह से अगर ये त्रुटी रह गयी तो भी बाबा रामदेव को मीडिया में बयान नहीं देना था / पहले आपस में, इंडिया अगेंस्ट करप्सन में चर्चा करते फिर मीडिया में बयानबाजी करते / बाबा रामदेव बहुत ही ज्यादा महत्वाकांक्षी हैं लेकिन अपनी महत्वाकांक्षा के चलते वो जनभावना का अपमान नहीं कर सकते / बाबा रामदेव जो शहर शहर गाँव गाँव वर्षो से घूम घूम कर भी अपने लिए जो जनसमर्थन इकठ्ठा नहीं कर पाए वो श्री अन्ना को मिलते देखकर वो बौखला गए हैं / बाबा रामदेव सोचते हैं की उन्हें जन समर्थन हासिल हैं लेकिन उन्हें ये नहीं पता  भारत की जनता की सोच बहुत ही परिपक्व हो चुकी हैं / मैं उनसे सादर सिर्फ एक ही सवाल पूछना चाहता हूँ की आप भारत स्वाभिमान के जो मंडलाध्यक्ष , जिलाध्यक्ष बना रहे हैं उनका चुनाव कैसे कर रहे हैं , क्या उनके लिए कोई चंदा / डोनेसन निर्धारित हैं ? 

रामदेव जी आप देश के लिए सोचते हैं इसमें कोई शक नहीं लेकिन आपकी महत्वाकांक्षा प्रबल हैं / त्याग की प्रतिमूर्ति बनिए श्री अन्ना जी की तरह , नाम के योगी न बने कर्म में योग लाये / त्याग में बहुत बड़ी शक्ति होती हैं, सोनिया जी का प्रधानमंत्री पद का त्याग ही  यु पि ए सरकार को अब तक चला रहा हैं / श्री अन्ना जी से अनुरोध करना चाहूगा की वो अपने आन्दोलन को किसी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की बलि न बनने दे  , आज भारत की जनता को आपमें जो एक नयी रौशनी दिखी हैं उसे कायम रहने दे / श्री अरविन्द केजरीवाल से लेकर स्वामी अग्निवेश तक जो लोग भी आज आपके साथ हैं उन्हें एक बार फिर से परख ले , क्या वो सच्चे देशभक्त हैं ? क्या वो निस्वार्थ हैं ? क्या उनके मन के अन्दर कोई दबी हुयीं महत्वाकांक्षा तो नहीं ? नेहरु जी और जिन्ना जी की महत्वाकांक्षा का फल हम सभी भुगत रहे हैं / आजादी के इस दुसरे आन्दोलन की परिणति ऐसी होना देश का दुर्भाग्य होगा /