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19.8.12

कर्त्तव्य ,अकर्त्तव्य ,व्यापार और राजनीति


कर्त्तव्य ,अकर्त्तव्य ,व्यापार और राजनीति 

साहब ,आजादनगर झोपड़ पट्टी के पास बलात्कार की घटना घटी है।

साहब- पकड़ के धांसू दफा लगा कर अन्दर कर दूँगा साले को ,भविष्य में किसी की हिम्मत ही
           नहीं पड़ेगी किसी लड़की को छेड़ने की .

साहब उसके कपडे और रहन-सहन से ठीक घर का नजर आता है. 

साहब-  बढ़िया !उसने ऐश की,मजे लूटे ,अब देखना भारी दफा को हल्की करवाने के भरपूर
            नोट मिलेंगे .वैसे भी ऐसे मामले में ज्यातर दोनों पक्ष दोषी होते हैं .अपनी तो ऐश हो
            जायेगी .

साहब वह लड़की अपने बाप की जगह आपका नाम दे रही है!!!

साहब- छोड़ना मत उस कमीने को .आज उसकी मौत ने दावत दे दी है .पूरी रात मार मार कर
           हुलिया बदल दूँगा और ऐसा फिट करूंगा की सालो बाहर नहीं आ पायेगा
.
साहब ,वह बहुत बड़े नेता का बेटा है !!

साहब- क्या बात करते हो ?अब उस नेता ने मेरी लड़की के साथ अपने लड़के की शादी नहीं
           की तो उसका तो पूरा दाँव  ही फेल हो जाएगा .उस लड़के को मारना मत ,पहले बात
           करके देख लेता हूँ ,बात बन गयी तो बल्ले-बल्ले .बड़े घर का जमाई बैठे -बैठे मिल सकता
           है.वैसे ही बेटी तो पराया धन होती है ,हाथ तो पीले करने ही थे .भूल सुधार भी हो जायेगी
           और बेटी भी ऊँचे घर में राज करेगी .    

1.10.11

थोडा सा पुण्य


 थोडा सा पुण्य  

सा'ब जी ! सा'ब जी !!हमने जोर से आवाज निकाली .उन्होंने पहले दायें बांये झाँका फिर हमारी सीध में
 देखा वो कुछ समझे तब तक हम उन्हें दंडवत प्रणाम कर चुके थे .हमारे साथी दगडू जी भी हमारी 
देखादेखी श्री चरणों में लोटपोट हो चुके थे .वो बेचारे अचानक आई मुसीबत से छुटकारा पाने की कोशिश
 में बौखलाते हुए पीछे की तरफ खिसके और बोले -जी,मेने आपको पहचाना नहीं ,आप .........

वो आगे कुछ बोल पाते उससे पहले हम बोल पड़े -सा'ब जी ,मैं आपकी बहन के नंदोई के साला का साला
 का साला .

वो बेचारे खींसे निपोरते हुये बोले -अरे आप ,भले पधारे ,मिलकर बहुत ख़ुशी हुयी श्रीमान .......

उनकी बात को पूरी करते हुये हम तुरंत बोल उठे -आपने सही पहचाना ,आपकी स्मरण शक्ति की दाद
 देनी होगी कि अभी तक आपको हमारा नाम तक याद है ,मैं जब से मेरे साथी दगडू को साथ लेकर घर
 से निकला था तब से दगडू को बोलता आ रहा हूँ कि मेरे सा'ब कि इस नाचीज झगडू पर रहम नजर है .

वो हें हें करके बोले -श्रीमान झगडू, मैं आपको कब भुला पाया हूँ जब हम आपसे पहली बार मिले थे तब ........

उनको कुछ याद करते देख हम तुरंत बोल पड़े -......जब आप नेताजी की गाडी रगड़ रगड़ कर चमकाया
 करते थे .कितनी लगन थी आप में ,कितनी तन्मयता थी काम में आपके ,आप कभी भी गाडी में बैठकर
 यात्रा करने की इच्छा तक नहीं रखते थे .

हमारी बात सुनकर वे खुश हो गए और बोले -झगडू ,आज भी मैं भले ही प्रधान बन गया हूँ मगर सा'ब की
गाडी मैं ही सुबह सवेरे चमकाता हूँ .सा'ब की पत्नी जी के चरणों में लोटपोट होकर दिन की शरुआत करता
 हूँ .भक्ति से क्या नहीं मिलता ,नाम स्मरण से सब काम बन जाते हैं .तू बता मैं तेरे लिए क्या कर सकता हूँ ?

साधू -साधू ,धन्य है आप ,मैं रास्ते मैं दगडू सेठ को आपकी परोपकारी स्वभाव के बारे में बताता आ रहा था .आप स्वनाम धन्य हैं सा' ब !आप कृपा करके दगडू सेठ की भेंट स्वीकार कर इन्हें भी कृतार्थ कीजिये .

प्रधान बोले -इसकी जरुरत नहीं है झगडू ,दोस्ती में आपसे कुछ नहीं लूंगा .बस आप काम बताईये ?

मैं बोला ,सा'ब जी ,आप भेंट स्वीकार कीजिये ,जबतक आप इस थेले पर नरम कोमल हाथों से स्पर्श नहीं
 कर लेते तब तक हमारे से कुछ कहते नहीं बन पा रहा हैं .हम खुद को कृत्घन समझ रहे हैं .

उन्होंने सुकोमल हाथों से भेंट स्वीकार की तब हम बोले -साब ,इस दगडू के माथे पर हाथ रख दीजिये ,
आपका सौभाग्यशाली हाथ दगडू के सर पर रहेगा तो गाँव की गौचर जमीन का पट्टा बन जाएगा ........
दगडू के बच्चे भी आपका स्मरण करेगे .और मेरा तो कोई खास काम नहीं है ,बच्चा डिग्री में फेल हो गया
 है सो उसे नया पास का सर्टिफिकेट दिलवा दीजिये और कोई जिले का मुखिया .......

अरे झगडू ,दगडू ! मुझे शर्मिंदा ना कर भाई ,समझ तेरा काम करके मेरी आत्मा को असीम सुख मिलेगा 
बस एक काम कर करना ,एक चिट पर पूरा पता लिख दे और जब बड़े साब बुलाये तब .........

उनकी बात का सार समझ कर हम बोले -सा'ब जी !आपकी नाक थोड़े ही कटायेंगे ,साब की पार्टी के लिए 
बड़ी रसीद लिखवा कर थोडा पुन्य तो हम कमाएंगे .

प्रधान को पुन: प्रणाम कर हम भी खुद को धन्यभाग समझते घर की ओर लौट चले थे .         
      

5.8.11

बहन का सवाल ! -एक लघु कथा




रजत ने गुस्से  में तमतमाते हुए घर में घुसते ही आवाज  लगाईं  -मम्मी 'सारा' कहाँ है ? मम्मी थोडा घबराई   हुई किचन से बाहर आते हुए बोली -''...............क्या हुआ  रजत ?.....चिल्ला क्यों रहा है ........सारा तो अपने कमरे में है .तुम दोनों भाई-बहन में क्या चलता रहता है भगवान ही जानें ! उसके पैर में मोच है सचिन अपनी बाइक पर छोड़कर गया है कॉलेज से यहाँ घर ....''रजत मम्मी की बात अनसुनी करते हुए सारा के कमरे की ओर बढ लिया .सारा पलंग पर बैठी हुई अपने पैर को सहला रही थी .रजत ने कमरे में घुसते ही कड़क वाणी में कहा -''.....सारा कितनी बार मना किया है कि किसी  भी लड़के की बाइक पर मत बैठा करो !तुम मुझे कॉल कर देती मैं आ जाता तुम्हे लेने .....मेरा कॉलिज दूर ही कितना है तुम्हारे कॉलिज से !आज के बाद यदि तुम्हे किसी लड़के की बाइक पर पीछे बैठा देखा तो अच्छा न होगा !...''यह कहकर आँख दिखाता हुआ रजत सारा के कमरे से चला गया .सारा के गले में एक बात अटकी ही रह गयी -''....भैया केवल आपने ही नहीं देखा था मुझे .....मैंने भी देखा था आपको सागरिका को आपकी  बाइक पर पीछे बैठाकर जाते हुए .मैंने जानबूझकर    नज़र चुरा ली थी ....मै आपको डिस्टर्ब नहीं करना चाहती   थी ......पर जब  आप अपनी बहन का  किसी और लड़के की बाइक पर बैठना पसंद  नहीं करते फिर किसी और की बहन को क्यों बैठा लेते हैं अपनी बाइक पर ?........केवल इसलिए की आप लड़के हो .....आप जो चाहो करो ....सब सही है !''
                                          शिखा कौशिक
                http://bhartiynari.blogspot.com/