4.12.12
जी न्यूज के बहाने पत्रकारिता का अंदरखाने
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ASHISH KUMAR
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1.11.12
भाषा के साथ आत्मगौरव का सवाल
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ASHISH KUMAR
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25.11.11
10.5.10
अप्पन समाचार को एक और उपलब्धि
अप्पन समाचार को यूके की संस्था "वन वर्ल्ड मीडिया" ने स्पेशल अवार्ड के लिए विकासशील देशों से आये सैकड़ों प्रोपोजलों में से चयनित केवल चार प्रोपोजलों को शॉर्टलिस्ट किया है, जिसमें भारत से एकमात्र "अप्पन समाचार" को "शॉर्टलिस्ट विनर" घोषित किया है. जिन चार संगठनों/कामों को शोर्टलिस्ट विनर घोषित किया गया है, उनके नाम हैं-Appan Samachar (India), Rien que la Vérité (Congo), The Team (Kenya) और Voices, Equal Access (Nepal). यह अप्पन समाचार टीम के लिए ख़ुशी की बात है. मालूम हो क़ि २००३ के बाद भारत से किसी भी काम को "वन वर्ल्ड मीडिया" ने स्पेशल अवार्ड के लिए न ही शॉर्टलिस्ट विनर घोषित किया और न फाईनल विनर घोषित किया. २३ जून को यूके के किंग पैलेस में दुनियाभर की हस्तियों की उपस्थिति में एक सेमिनार भी आयोजित हो रहा है, जिसमें अप्पन समाचार की परिकल्पना एवं इसकी गतिविधियों पर भी चर्चा होनी है.
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Santosh Sarang
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29.7.09
यह जहाज़ कर देगा हिन्दुस्तानी मीडिया को बर्बाद -exclusive-http://salaamzindagii.blogspot.com/
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आशीष जैन
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26.7.09
हिंदी ब्लॉग में आई फिर एक लड़की -जिसने समेटे हुए अनेको ख्वाब और जेहन में है अनेकों दर्द .....पहला लेख जरुर पढ़े ...क्योंकि आपकी सराहना हिंदी ब्लॉग को एक
हिंदी ब्लॉग में आई एक लड़की -जिसने समेटे हुए अनेको ख्वाब और जेहन में है अनेकों दर्द .....पहला लेख जरुर पढ़े ...क्योंकि आपकी सराहना हिंदी ब्लॉग को एक नई दिशा दे सकती है और लेखिका को एक उत्साह प्रदान कर सकती है ,आर्शीवाद दे
click -salaazindagii.blogspot.com
जो दिखता है वही बिकता है
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आशीष जैन
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मां तुम सच बोलती हो...
मां से मैंने कहा सच कड़वा होता है लोग बर्दाश्त नहीं कर पाते... मां ने जवाब दिया.. ग़लत जुमला है ये सच कड़वा नहीं होता.. सच तो ईश्वर है... सच हमेशा प्रिय होता है... सुननेवाले को कड़वा लगता है ये अलग बात है... कहा भी गया है सत्यम् शिवम् सुंदरम्.. सत्य ही शिव है... और शिव ही सुंदर है... यानि सत्य सबसे सुंदर है... मैंने बहस को बढ़ाने के लिए कहा अगर ऐसा है तो ये चैनलवाले बेवकूफ हैं जो इस पर बहस कर रहे हैं... मेरी मां आक्रामक हो गईं... बोल पड़ी मैं होती तो इनका मुंह नोच लेती... देश की संस्कृति की बात करते हैं... और संस्कृति में आग लगानेवाले यही हैं... और वो सच दिखानेवाला कार्यक्रम किस तरह से भारत की संस्कृति को नुकसान पहुंचा रहा है.. ये कोई नहीं बता रहा.. सब बस यही कह रहे हैं कि किसी के बेडरूम के सवाल पूछकर सामाजिक माहौल ख़राब किया जा रहा है... समझ में नहीं आता इससे सामाजिक माहौल कैसे ख़राब हो रहा है... कोई बताए भी तो कैसे सामाजिक माहौल ख़राब हो रहा है...
ख़ैर अब मैं इससे ज़्यादा अपनी मां से बहस नहीं कर सकता था.. क्योंकि मैं भी उस कार्यक्रम का समर्थक हूं... मां से बहस करने का मतलब बस इतना था कि एक अनुभवी महिला जो समाज का हिस्सा है उनकी सोच क्या है...
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Madhaw
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2.9.08
zindginama
asa lagta ha me hawaoo me hu. aaj itni khushi mili ha.
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Rajak Haidar
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