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11.2.16

बीएचयू के भूगोल विभाग में पीएचडी एडमिशन में धांधली



इस वर्ष bhu में भूगोल विभाग में PhD एडमिशन में हुई धांधली को लेकर हमारे सीनियर्स ने भूगोल विभाग के सामने धरना दिया। इस धरने को खत्म करवाने के लिए विभाग और bhu प्रशासन ने ने हर तरीके के रणनीति अपनायी। सबसे पहले तो दोपहर 3 बजे कमरे में बुलाकर आंदोलनकारियों को व्यक्तिगत धमकी दिया गया। पुनः रात बारह बजे लंका पुलिस को बुलाकर धमकी दिलवाकर आंदोलनकारियों को हटाने में सफल रहे। यह धरना  bhu के इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस/फैकल्टी ऑफ़ साइंस  और साथ ही साथ भूगोल विभाग में अबतक के इतिहास का PhD में एडमिशन में धांधली को लेकर पहला धरना था। लेकिन धांधली हर साल होती है, जो इसके चयन की प्रक्रिया को देखकर की आसानी से जाना जा सकता है।

जैंता इक दिन त आलौ उ दिन य दूनी में, दलालों के दिन पूरे होने को है









पुरुषोत्तम असनोड़ां

अल्मोडा जिला का डीडा नैनीसार  6 महिने पहले तक एक नामालूम सा गांव-तोक रातों-रात देश- दुनिया में मसहूर हो गया। अनजान से गांव की जमीन पर माफिया की नजर पडी और सरकार ने युद्ध स्तर पर उसे जिन्दल ग्रुप के हिमांशु इण्टर नेशनल स्कूल के नाम आवंटित कर दिया।

सैया भये कोतवाल तो डर काहे का, की तर्ज पर बिना लीज पट्टे के 22 अक्टूबर 15 को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जन विरोध के बावजूद हिंमांशु इण्टरनेशनल स्कूल का उद्घाटन कर दिया। नैनीसार के ग्रामीणों व उत्तराखण्ड परिवर्तंन पार्टी ने भूमि आवंटन का विरोध करते हुए आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया। स्कूल में मुख्य मंत्री के इन्वॉलमेंट ने प्रशासन को इतना पक्षपाती बना दिया कि उसने भूमि के कब्जे में स्कूल को पूरी छूट दे दी । यहां तक कि कानून व्यवस्था की परवाह किये बिना कि वहां जिन्दल ने किस प्रवृति के लोगों को रखा है पूरी छूट दे दी।

सवाल से कैसा डर कलक्टर साहिबा

-अनिल द्विवेदी-
प्रशासन का अहंकारी दुरूपयोग करके यदि कुछ लोग मीडिया पर नकेल कसना चाहते हैं तो उन्हें आपातकाल के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का हश्र याद रखना चाहिए। जवाबदेह प्रशासन की उम्मीद के बीच एक महिला आइएएस यदि सेल्फी लेने के आरोप में नौजवान को जेल भेज देती है तो इस पर जवाब मांगना गैरवाजिब कब से हो गया..?

9.2.16

निदा फाजली को श्रद्धांजलि : तुम्हारी मौत की सच्ची खबर, जिसने उड़ाई थी, वो झूठा था


निदा फ़ाज़ली साहब के न रहने पर उनकी वो नज़्म याद आती है जिसे उन्होंने अपने पिता के गुजर जाने पर लिखा था...

''तुम्हारी कब्र पर मैं, फ़ातेहा पढ़ने नहीं आया, मुझे मालूम था, तुम मर नहीं सकते.''

इस नज़्म को आज पढ़ते हुए खुद को मोबाइल से रिकार्ड किया. इसी नज़्म की ये दो लाइनें:

तुम्हारी मौत की सच्ची खबर, जिसने उड़ाई थी, वो झूठा था,
वो तुम कब थे? कोई सूखा हुआ पत्ता, हवा मे गिर के टूटा था।

स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के एसी कोच में लूट करने वाले से यात्रियों ने जमकर की पूछताछ, देखें वीडियो


स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के एसी कोच में लूट करने वाले से यात्रियों ने अपने तरीके से हाथ साफ करते हुए जमकर की पूछताछ, बदमाश तोते की तरह सब कुछ बकने उगलने लगा, देखें वीडियो https://www.youtube.com/watch?v=89ClxzlNr7Y

7.2.16

सम्मान पाकर मैं बहुत अभिभूत हूं : किशन कालजयी

पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह संपन्न, संवेद के संपादक कालजयी को दिया गया सम्मान


भोपाल/ पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान 2016 से इस साल ‘संवेद’ पत्रिका के श्री किशन कालजयी को सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें शाल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न और 11000 की नगद धनराशि प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संकठा प्रसाद सिंह ने की जबकि मुख्य अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की। इस मौके पर डॉ. संजीव गुप्ता की पुस्तक श्रुति बुक्स, गाजियाबाद से प्रकाशित पुस्तक ‘मास कम्युनिकेशन का विमोचन किया। पं. बृजलाल द्विवेदी की स्मृति में यह आठवां सम्मान है। स्वागत भाषण मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक श्री संजय द्विवेदी ने किया।

5.2.16

मुख्यमंत्री को जेल से खुला पत्र : हे हरीश रावत, शायद जिंदल के हितों के सामने आपको मेरा यह सुझाव पसंद न आए

प्रेषक- पीसी तिवारी
अध्यक्ष उत्तराख्ण्ड परिवर्तन पार्टी      
दिनांक- 29 जनवरी 2016
जिला कारागार अल्मोड़ा

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री हरीश रावत जी
उत्तराखण्ड सरकार देहरादून

माननीय,
मुख्यमंत्री जी, एक स्थानीय चैनल ई टीवी पर कल रात व आज सुबह पुनः नानीसार पर आपका विस्तृत पक्ष सुनने का मौका मिला। आपकी इस मामले में चुप्पी टूटने यह साबित हुआ कि उत्तराखण्ड में संघर्शरत जनता की आवाज आपकी पार्टी की सियासी सेहत को नुकसान पहुंचाने लगी है। लेकिन आपका वक्तव्य ध्यान से सुनने और मनन करने के बाद में इस नतीजे पर पहुंचा कि आपके वक्तव्य में सच्चाई का नितांत अभाव था। और एक बार फिर अपनी गरदन बचाने के लिए आप नानीसार के ग्रामीणों की दुहाई देकर पूरे उत्तराखण्ड व देष को गुमराह करने की कोषिष कर रहे हैं।

3.2.16

पत्रकार हर दिन इम्तिहान देता है... हर दिन

-अमित राजपूत-
यूं तो आज के कौशलवादी मानसिकता के दौर में लगभग प्रत्येक क्षेत्र के कॅरियर अथवा कामकाज में ज़ूमिंग अर्थात् दृष्टि-विशेष देखने को मिल रही है। चाहे वो बाल काटने की कला हो, गीत गाने की कला हो, अभिनय हो, कपड़ों को डिज़ाईन करना हो, घर का नक्शा कैसा होगा ये तय करना हो या फ़िर पार्टियों में म्यूज़िक प्लेयर कौन और किस पैमाने पर प्ले करेगा इसका निर्धारण करना हो। अब हर क्षेत्र में विशेषज्ञ की मांग है और इन साब कामों के लिए लोग इन विशेषज्ञों को  भारी से भारी रक़म भी चुकाते हैं। वहीं दूसरी तरफ़ कहीं न कहीं इन सभी कार्यों के बरक्स संप्रेषण, पत्र-व्यवहार या संवाद जैसे गम्भीर और सावधानी पूर्वक किये जाने वाले काम की बात करें, जिसके लिए सरकार ने विशेष विश्वविद्यालय खोले हैं, भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक स्वायत्तशाषी भारतीय संस्थान भी स्थापित किया है जिसे पत्रकारिता के मक्का आदि की संज्ञा भी दे दी गई है और यह अपने आप में पत्रकारिता के लिए एशिया का एक अति महत्वपूर्ण संस्थान भी है।

31.1.16

साढ़े सात फीट का यह विशालकाय खाकी वर्दी वाला आदमी रोज 40 अंडे, 40 रोटियां, 4 किलो चिकन, 5 लीटर दूध और 4 किलो फल खाता है!


अंबाला शहर में गाड़ी चलाते वक़्त अगर आपको 7.4 फीट का विशालकाय आदमी खाकी कपड़ों में दिख जाए तो घबराइएगा मत. इस शख़्स का नाम है राजेश कुमार जो कि हरियाणा ट्रैफिक पुलिस में कांस्टेबल हैं. सुरक्षित ड्राइविंग और हेल्मेट पहनने का संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए आज-कल राजेश कुमार लोगों को जागरूक कर रहे हैं.

30.1.16

क्या माउंटबेटन जानते थे कि किसने मारा गाँधी को?


Rakesh Mishra
“माउंटबैटन ने बिड़ला हाउस पहुँचने पर बाहर जब किसी के मुंह से सुना कि गांधीजी को किसी मुसलमान ने मार डाला, उन्होंने बगैर पूरी जानकारी के भी उस आदमी को डपट दिया - बेवकूफ, वह मुसलिम नहीं हिन्दू था। बाद में वह हिन्दू ही निकला”। बीबीसी  के  संवाददाता  की पेश  की  गयी  इस कहानी  पर में अंग्रेजी स्टेट्समैन माउंटबेटन की इस प्रतिक्रिया के  तमाम  मायने  निकलते  हैं| इस पर जनसत्ता ओम थानवी का निष्कर्ष है कि, “माउंटबैटन ने तुरतबुद्धि से यह भयानक कल्पना की होगी कि हिन्दू-मुसलिम अविश्वास और खून-खराबे के ताजा अतीत को देखते गांधीजी की हत्या मुसलमान के नाम से प्रचारित हुई तो देश का क्या हश्र होगा ... अफवाहें फैलाने वाले तब भी कितने मौजूद थे”!

29.1.16

देवरिया में पुलिस ने दिवंगत पत्रकारों को भेजा निमंत्रण पत्र

यूपी के देवरिया में पुलिस विभाग ने पुलिस लाईन में गणतंत्र दिवस का परेड देखने के लिए करीब एक दशक पूर्व दिवंगत हो चुके पत्रकारों को आमंत्रण पत्र भेजा है. उदाहरण के लिए दैनिक जागरण के सतेंद्र यादव, राष्ट्रीय स्वरूप के प्रभाकर मिश्र और छायाकार अमर तिवारी को निमंत्रण भेजा गया है जो अब इस दुनिया में नहीं हैं.

चलो बाबा बना जाए

विवेक दत्त मथुरिया
चलो बाबा बना जाए । बाबा मतलब साधु । भेष धारण करते ही व्यक्तित्व में दिव्यता आ जाती है। फिर मुंह, मुंह नहीं रहता श्रीमुख हो जाता है। बातें प्रवचन, भोजन प्रसाद, पैर चरण और क्रिया-कलाप लीला हो जाते हैं। सब कुछ बदल जाता है। लाभ की अपार संभावनाओं का द्वार है। जिन लोगों को वाकई अच्छे दिनों से मुलाकात करनी है, वह बाबा बनने पर सहज और सुलभ है। राजनीति सहित बाकी धंधों में तो जोखिम उठाकर इन्वेस्टमेंट करना पड़ता है। यह इन्वेस्टमेंट फ्री जोन है।

27.1.16

बस्ती जनपद के बिटिश कालीन उपनिवेश छावनी बाजार की दास्तान

-डा. राधे श्याम द्विवेदी-
बस्ती अयोध्या राजमार्ग पर बस्ती से लगभग 40किमी. की दूरी पर 260 47’उत्तरी अक्षांश तथा 820 23’ पूर्वी देशान्तर पर मनोरमा नदी की रामरेखा नामक उपधारा के तट पर बसा यह एक ब्रिटिस कालीन कस्बा है। राजस्व अभिलेेख में तप्पा बेलवा परगना अमोढ़ा का यह एक पुरवा/मजरा है। उत्तर मुगल काल में यह अमोढ़ा राज्य के अन्तर्गत आता था, जो बहुत समय तक अवध के नबाबों द्वारा नियंत्रित होता था। गोरखपुर जब नार्थ वेस्टर्न प्राविंस के अधीन अंग्रेजों को मिला तब भी यह क्षेत्र ब्रिटिस सरकार का भाग नहीं रहा।


24.1.16

परिकल्पना द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन 16 से 21 जनवरी को बैंकाक में संपन्न, कई हिंदी ब्लागर सम्मानित





परिकल्पना द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन 16 से 21 जनवरी के बीच थाईलैण्ड की राजधानी बैंकाक में आयोजित किया गया। नई दिल्ली, लखनऊ, काठमांडो (नेपाल) थिम्मू (भूटान) कोलम्बो (श्रीलंका) के सफल आयोजनों की श्रृंखला में थाईलैण्ड का सम्मेलन भी पूरे वैभव के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर थाईलैण्ड के प्रमुख शहर पटाया और राजधानी बैंकाक में सम्पन्न हुए सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों में कवि सम्मेलन पुस्तक लोकार्पण, परिचर्चा एवं सांस्कृतिक संध्या जैसे कार्यक्रम सम्पन्न हुए।

20.1.16

रोहित वेमुला के हत्यारे कौन?

मुझे रोहित वेमुला से सहानुभूति नहीं है | यकीन मानिये रत्ती भर भी नहीं | क्यूंकि मेरा ह्रदय संघर्ष से विरत किसी डरपोक, भगोड़े के लिए द्रवित नहीं हो सकता | क्यूंकि मेरी कलम इतनी अशक्त नहीं जो एक कायर का यश गान लिखे | क्यूंकि जिस तरह की गतिविधियों में वो संलिप्त था वो न सिर्फ देश के सामाजिक तानेबाने को छिन्न –भिन्न कर रही थीं वरन देश में अलगाववाद की बयार भी फूंक रही थी | ऐसे इंसान पर मैं आंसू कैसे बहा दूँ जो सतत नकारात्मक कार्यों में लिप्त था ?

15.1.16

'रामायण' सीरियल में काम करनेवाले हर कलाकार का फिल्मी कैरियर खत्म हो गया

-संजय तिवारी-

आज ही किसी से अभिनेता अरुण गोविल की चर्चा हो रही थी कि कैसे बी ग्रेड फिल्मों में काम करनेवाले अरुण गोविल हमारे युग में 'राम' के प्रतीक बन गये। रामायण को आधार बनाकर बहुत सारे धारावाहिक बने और बन रहे हैं लेकिन चेहरों की जो छवि रामायण ने प्रस्तुत की वह कोई और न कर सका। हर एक पात्र उसी चरित्र की पहचान बन गया जिसका उसने अभिनय किया था। अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया, दारा सिंह और अरविन्द त्रिवेदी। लोगों के मन में इनकी छवि राम, सीता, हनुमान और रावण की ऐसी बसी कि फिर निकलने का नाम नहीं लिया।