Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Loading...

31.7.16

राष्ट्र सेवा और भारत माँ का कर्ज चुकाने के लिए पत्रकारिता के पेशे में आयें- जयभान सिंह पवैया


भोपाल । राष्ट्र सेवा और भारत माँ का कर्ज चुकाने के लिए पत्रकारिता के पेशे में आयें। पत्रकारिता करते समय आप जितनी बड़ी दृष्टि रखेंगे, आपका क्षितिज भी उतना बड़ा होगा। स्वाध्याय के साथ, अहंकार रहित जीवन एवं भयादोहन जैसी बुराईयों से दूर रहकर ही पत्रकारिता के पेशे का वास्तविक सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। पत्रकार के जीवन में दिशा नहीं होगी तो वह राष्ट्र की सेवा नहीं कर सकता है। यह विचार आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ 2016 के तृतीय दिवस पर समापन सत्र में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री, श्री जयभान सिंह पवैया ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पत्रकार वह होता है जो दूसरों को ख्याति देता है। यदि एक हिन्दू नेता के रूप में देश ने मुझे पहचाना है तो इसमें सबसे बड़ी भूमिका पत्रकार एवं मीडिया की है।

30.7.16

पहले से संजरपुर से उठाए गए युवकों के साथ फर्जी मुठभेड़ दिखा रही है पुलिस!

खुदादादपुर सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ने की हो रही है सांप्रदायिक कोशिश, प्रतापगढ़ में मंदिर से विस्फोटक बरामदगी मामले में संघ की भूमिका की हो जांच


लखनऊ, 30 जुलाई 2016। रिहाई मंच ने आजमगढ़ पुलिस द्वारा संजरपुर के तीन युवकों की आज दिखाई गई मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि आजमगढ़ के निजामाबाद थाने के रानीपुर गांव के पास जिन तीन युवकों सलमान, आफताब और अकरम को पुलिस मुठभेड़ में घायल और गिरफ्तार दिखाकर आजमगढ़ एसएसपी अजय कुमार साहनी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं उन तीनों युवकों को गुरुवार 28 जुलाई को संजरपुर चैक, छाऊं मोड़ के पास जब वे बाजार में थे तब गिरफ्तार किया गया था।

29.7.16

दलितों की दुर्दशा का सच....

हाल ही में दबंगो द्वारा गुजरात के ऊना में दलितों के साथ किया गया अमानवीय व्यवहार ने सारे देश के बहुजनो को हिलाकर रख दिया वैसे तो देशभर में आये दिन इस प्रकार की घटनाये देखने में व् सुनने में आती रहती है । पर इस घटना से एक बात साफ दिखाई देती है की दबंगो के हौंसले कितने बुलंद है की वो दलितों के साथ मार् पिटाई करके अपनी दबंगई का साबुत सोशल मीडिया पर वायरल करते है उन्हें कानून का तनिक भी भय नहीं है इससे प्रतीत होता है कि वो दूषित मानशिकता के  लोग यह दिखना चाहते है की आप लोग आज भी गुलाम है और हम मालिक है, हम इस देश में जैसा चाहेंगे वैसा करेंगे कोई भी हमारा बाल बांका भी नहीं कर सकता ।

भोपाल में भुट्टा पार्टी और छत्तीसगढ़ के चैनल में बनी लिस्ट

इंदौर के भाई दिल्ली से भोपाल पहुँचे तो पार्टी तो होना तय था...और पार्टी हुई भी भुट्टा पार्टी,लेकिन इस भुट्टा पार्टी की खास बात रही छत्तीसगढ़ की राजधानी से प्रसारित होने वाले चैनल में बनी मेहमानों की लिस्ट...दरअसल भाई की भुट्टा पार्टी में कौन आएगा यह तय किया रायपुर से प्रसारित एक चैनल के दफ्तर के अय्यर ने....जिन्हें बाइज्जत कुछ दिनों पहले एक प्रतिष्ठित चैनल से विदा किया गया था...साहब जनसम्पर्क के वेब घोटाले के चपेट में आ गए थे...सो सीएम की कृपा से इन्हें बेज्जत कर तो नहीं पर चुपचाप विदा कर दिया गया...तो सीएम साहब ने फिर दरियादिली दिखाई और इन्हें छत्तीसगढ़ के रीजनल चैनल में चिपकवा दिया...

23.7.16

Letter to Union Minister for An Effective Model Locayukta Bill for States

20-06-2016
To,
Hon’ble Union Minister
Ministry of Law and Justice
Government of India, New Delhi-110001
Subject: An Effective Model Locayukta Bill for States
Dear Sir,
After ratifying the United Nation Convention Against Corruption on 12-05-2011, the Parliament adopted ‘Sense of House Resolution’ on 27-08-2011, which reads as thus: “This House agrees in principle on following issues: (i) Citizen Charter (ii) Lower bureaucracy under Lokpal through an appropriate mechanism, (iii) Establishment of Lokayukta in the States; And further resolves to forward the proceedings of the House to the Standing Committee on Law and Justice while finalizing its report”.

21.7.16

President of India Urges Indian Universities to take global rankings seriously

New Delhi, 21 July 2016 :The International Institute for Higher Education Research & Capacity Building (IIHEd) of O.P. Jindal Global University and Indian Centre for Academic Rankings and Excellence (ICARE) gave a presentation on the “State of Indian Universities in the Global Academic Rankings” to the President of India, Mr. Pranab Mukherjee at Rashtrapati Bhavan on 20th July.

कवि कुमार विश्वास हो गए म्यूज़िकल - वीडियो रिलीज़ किया

विख्यात कवि डा कुमार विश्वास ने सोमवार, 18 जुलाई को एक मिनट का एक वीडियो रिलीज़ किया, जो उनके म्यूज़िकल कॉन्सर्ट का प्रीव्यू है। 'के वी म्यूज़िकल' नाम से लांच किए गए इस वीडियो में विश्वास अपनी संगीतमय प्रस्तुति देते नज़र आ रहे हैं। इस वीडियो को विश्वास ने फेसबुक, ट्विटर एवं यूट्यूब पर एक साथ लांच किया। इस लांच के समय से पहले ही ट्विटर पर #KVMusical ट्रेंड हो रहा था।

हम पढ़ना चाहते हैं, अवसर तो दो

लखन सालवी

किशन (6 साल) व आरूषि (3 साल) पढ़ना चाहते है। किशन से ज्यादा आरूषि का मन लगता है पढ़ाई में। पर एक तो गरीबी उपर से बिजली विभाग के कर्मचारी बैरी बने हुए है। कमोबेश देशभर में ऐसे न जाने कितने ही किशन व आरूषियां गरीबी के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाती है और आगे जाकर वे मजदूर के रूप में दिखाई पड़ते है।

कालाबाजारियों से पत्रकारों द्वारा की गई वसूली की तस्वीरें

जालौन से सूचना है कि उरई के कुछ पत्रकारों ने वसूली के लिए राठ रोड पर मारुति ओमिनी वैन यूपी 92 एल 6548 पर दबिश डाल दी. इसमें चोर बाजार में सप्लाई के लिए भेजा जा रहा राशन का चावल लदा था. पत्रकारों की छापामारी से ब्लैक मार्केटियर हड़बड़ा गये. सड़क लगभग एक घंटे तक सौदेबाजी हुई. आखिरकार 40 हजार में सौदा तय हुआ. देखें कुछ तस्वीरें....

18.7.16

रिलायंस वालों का फ्राड : टावर से कमाई कराने का प्रलोभन देकर इंश्योरेंस पालिसी बेच रहे हैं

Subject : reliance tower fraud and forcly selling insurance policy

रेस्पेक्टेड सर

मेरा नाम पंकज सेवालाल चौहान है. मुझे मार्च  २०१६ में रिलायंस टावर डिपार्टमेंट से एक कॉल आई जिसका नंबर (८४४७०५३०४६ निशा) और (८८८२२९२७५६ गौरव) उन्होंने मुझे मेरे प्लाट पर रिलायंस टावर लगाने के लिए ऑफर दी,  यहाँ तक तो ठीक था, उन्होंने मुझे लाइट वेट टावर और हैवी ड्यूटी टावर की इंस्टालेशन प्रोसेस की सारी जानकारी बताई लेकिन उन्होंने (निशा) मुझे सबसे पहले रिलायंस लाइफ इन्सुरेंस की पालिसी लेने के लिए कहा.



छुटकही : आखिर कहां है ये चिड़ी!

अमरेंद्र प्रताप सिंह, लखनऊ

जैसे इस पूरी दुनिया में कोई भी अवधारणा या धारणा हर किसी पर लागू नहीं होती, कुछ लोग अपवाद स्वरूप उससे इतर हमेशा ही होते हैं वैसे ही हमारा यह मामूली लेख भी हर किसी पर लागू नहीं होता, अपितु अनेक लोग न सिर्फ इससे ऊपर इतर हैं बल्कि उनके साथ सानिध्य प्राप्त कितने ही उन्ही की तरह अपवाद है।

खैर बात कुछ यूं जहन में आई कि इधर कई समकालीन महानतम पत्रकार श्रेष्ठों, पत्रकारिता के मूल्यों में गिरावट से अत्यधिक आहत देवतुल्य पत्रकारिता एवं सर्वोच्च लेखन कला में हो रहे क्रमिक क्षरण के दर्द से कराह रहे, समाधान के बजाय समस्या के विस्तृत विवरण पर पूरा ध्यान एकाग्र रखने वाले सम्भवतः समुद्र मंथन से निकले स्वनामधन्य, शीर्ष स्वप्रशंसक अग्रजों के लेख-विचार कई वेबसाइटों, समाचार पत्र-पत्रिकाओं विशेषकर समाचारों की चयन सम्बन्धी श्रेष्ठता एवं विषय सामग्री के लिए विशेष लोकप्रिय एक प्रतिष्ठित साप्ताहिक समाचार पत्र में पढ़ने को मिले। पढ़कर लगा कि जिस प्रकार के पत्रकारों की आलोचना के कसीदों पर उनका पूरा जोर था उसमें से कई गुण तो हम जैसे तुच्छ ननहऊआ प्राणी में भी विद्यमान है। हालांकि आलोचना लच्छित समूह में हमने स्वयं को बहुत पीछे खड़ा पाया परन्तु यह तो लगा कि चलो कहीं न कहीं गिनती में तो आये। हमारे जैसे तो एकल दौड़ में भी हमेशा द्वितीय आते हैं। लेख निश्चित तौर पर सर्वग्राही, विचारपूर्ण एवं बेहद ऊंचे दर्जे का रहा होगा। तभी तो पूरे तौर कुछ बातें हम जैसे न समझ सकें परन्तु इतनी जिज्ञासा जरूर प्रकट हुई कि इन   साक्षात्कार सामग्री रूपी लेखों में वृहद् समस्या चिंतन दरअसल होता किस लिए है।

यदि यह पत्रकारिता के हित में होता है तो फिर इसे समाचार पत्र में छापने की, और यदि छापना ही हो, तो आमजन के अति समक्ष प्रथम पृष्ठ पर स्थान क्यों? इस प्रकार तो आम जनमानस इसे पढ़कर पत्रकारों आदि के बारे में अपने बचे खुचे अच्छे विचारों को भी तिलांजलि दे देगा। और यदि आमजन के बजाय पत्रकारिता विधा के लोगों के विचारार्थ प्रस्तुत होता है तो कुछ सुझाव-चिंतन समाधानोन्मुख भी होना चाहिए। केवल समस्या का रोना ही क्यों? मुझे नहीं याद है कि पिछले कुछ वर्षों में, किसी ख्याति श्रेष्ठ अग्रज ने कोई कार्यशाला, सेमीनार, दक्षता कक्षा या जागरूकता कार्यक्रम नव आगंतुक एवं अल्पज्ञ अनुजों के लिए आयोजित किया हो, जिससे उनमें भी थोड़ी सी आपकी शैली, कला और विद्वता का अंश समाहित हो सके।

हम जैसे ननहऊों ने तो बोधमय जीवन की शुरुआत में ही पाठ्य पुस्तकों, मासिक, साप्ताहिक पत्रिकाओं एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध समाचार पत्रों में दिए गए लेखों आदि को पढ़कर श्री अरुण शौरी, श्री राजनाथ सिंह सूर्य एवं श्री ह्रदय नारायण दीक्षित आदि को जो कि राजनीति में भी  उच्च पदस्थ रहे, उन्हें श्रेष्ठतम पत्रकार ही जाना-माना है।  बड़े होकर जिले से लखनऊ आगमन पर साथियों-सहयोगियों की मदद-मुसीबत में राज्य-समाज से लड़ भिड़कर उनकी सहायता करने वालों के रूप में अनेक पत्रकार अग्रजो एवं पत्रकारिता क्षेत्र से आगे बढ़कर सरकार में उच्च पदस्थ सम्मानित पद सूचना सलाहकार एवं सूचना आयुक्तों के रूप में आज के वरिष्ठों को भी पत्रकारिता की प्रोफाइल बढ़ाने वाला श्रेष्ठतम पत्रकार ही जाना-माना है। मुझे नहीं लगा कि उपरोक्त सभी जो पत्रकारिता से अलग अन्य क्षेत्रों में भी प्रशंसित-पुरस्कृत हुए ने पत्रकारिता को कोई हानि पहुंचाई हो, तो फिर इतनी आलोचना किसकी और किस लिए?

हाँ इससे कुछ अलग कुछ ज्ञात श्रेष्ठों को सामान्यतः विधान सभा, विधान परिषद सत्रों के दौरान टंडन हाल एवं वी आई पी कैफेटेरिया में हँसते बतलाते, विधायक गणों एवं मंत्री परिषद के सदस्यों से मिलते जुलते, विधान सभा के प्रेस रूम एवं एनेक्सी के मीडिया सेंटर में राज्य एवं केंद्र सरकार की नीतियों, नियमों एवं प्रस्तुतियों पर लेखन-मंथन करते, मुख्यमंत्री के आवास पर होने वाले आयोजनों-उदघाटनों से लेकर उनके प्रदेश दौरों के दौरान होने वाली प्रेस मीडिया कांफ्रेंसों पर अपने अलग-अलग विचार प्रस्तुत करते, शासन के बड़े साहब से लेकर मंत्री-नेता एवं विभागीय अफसरों के कार्यक्रमों-प्रेस आयोजनों में थोड़ा बहुत खाते पीते भी देखा है और थोड़ा बहुत जो भी आदर्श, ज्ञान या सीख, स्वयं या उनके माध्यम से प्राप्त की इसका अवसर यहीं पर ही मिला है। कुछ एक बार शाम आदि को भी यूपी प्रेस क्लब आदि में कुछ वरिष्ठों को फुरसत में देखने का सौभाग्य मिला वहां पर भी उनका व्यवहार प्रेम और स्नेह भरा ही था।

कमियां हैं, परन्तु आवश्यक नहीं है कि कमियों के प्रत्यक्ष वर्णन पर ही पूरी ऊर्जा लगाई जाये। कमियां वकील, इंजीनियर, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि अन्य प्रोफेशनल्स की जमात में भी कुछ लोगों में होती हैं, परन्तु हमने कभी पब्लिकली उन्हें इसका मुजाहिरा करते नहीं देखा।

तो फिर हमारे प्रोफेशन में ही यह प्रज्ञा-प्रलाप किसलिए। साहित्य की किन ऊंचाइयों का आरोहण करने जा रहे हैं हम इन साक्षात्कार सामग्रियों से, और पाठकों पर प्रभाव की बात करें तो हमें लगता है कि सम्भवतः इसी आत्म संतोषी साहित्य को पढ़-पढ़कर अब चौराहे का एक अदना सा होमगार्ड भी हमें पत्रकारिता कि शुचिता पर लेक्चर देने लगा है। यही है वो परिभाषा जो हमने स्वयं गढ़ी है।

यह ऊपर की पूरी बात हमने इसलिए लिखी कि इस सबको देखने-जानने में हम आज तक  यह नहीं समझ सके कि आदर्श से भी ऊपर समुद्र मंथन जैसी किसी क्रिया से निकली देव श्रेष्ठ पत्रकारिता की वह चिड़िया, जिसके दुर्बल होने का रोना इन साक्षात्कार सामग्रियों में आज कल रोया जा रहा है, ऐसी अद्भुत चिड़ी हमें तो कहीं नहीं मिली। अगर मिलती तो उसकी पूंछ के एकाध पंख की क्षणिक हवा खाकर हम भी सबसे पीछे की गिनती के चिड़ीमार सही कुछ न कुछ तो बन जाते-कहलाते ही, तो फिर है कहाँ यह चिड़ी? समाधान पर कोई बात न करके केवल समस्या पर चहचहाने वाली यह श्रेष्ठ पत्रकारिता की चिड़ी मिले तो हमें भी बताना। हो सकता है स्थिति पहले से कुछ बदली हुई हो या कुछ खराब भी हुई हो, परन्तु ऐसा तो कभी नहीं लगा कि पब्लिकली कमियों को रोया जाना चाहिए।  मेरी तुच्छ समझ से तो अभी-

’तुम पूछो और मैं न बताऊँ, ऐसे तो हालात नहीं,
एक जरा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं’

Amrendra Pratap Singh
9415027811
sharpmedia24@gmail.com

राणा अयूब को एकता कपूर के टीवी सीरियल की लेखिका स्क्रिप्ट राइटर होना चाहिए



एकता कपूर के टीवी सीरियल की तरह यह एक विचित्र बच्चा है ,जिसके इत्त्ने डबल रोल है की ये बच्चा पैलेट गन से तीन बार अँधा हो चुका है ,सबसे पहले 2014 फिलिस्तीन में इजराइल आर्मी हमले में, इसका एक और रोल था कश्मीर में जब ये 2015 में एक बार फिर अँधा हुआ पुलिस से।  और आज ये बच्चा फिर से कश्मीर में आर्मी की पैलेट गन से अँधा हो गया। इस सीरियल की लेखिका है बेस्ट बुक सेलर महिला पत्रकार --राणा अयूब !!!

भोजपुरी महासभा ने यूपी, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के 102 मेधावी छात्रों को किया सम्मानित


गाजियाबाद : रविवार को पुराने बस अड्डे स्थित मीनामल धर्मशाला पूर्वांचल भोजपुरी महासभा द्वार मेधावी छात्रों के हौसला अफजाही के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह बोर्ड परीक्षाओं में प्रतिभा के दम पर मुकाम हासिल करने वाले 102 छात्रों को पूर्वांचल भोजपुरी महासभा ने सम्मानित किया। इस मौके पर यूपी बोर्ड, सीबीएसई एवं आईसीएसई के इन छात्रों मोमेटों और प्रशस्ति पत्र दिए गए।

संसदीय सचिव ने भाजपा मंडल अध्यक्ष, एल्डमैन और निजी पीए व पीए के रिशतेदारों को ही बांट दी निधि

शासन की जनसंपर्क निधि का मनमाने ढंग से किया जा रहा वितरण

रविकांत 

मनेंद्रगढ़। एक ओर दिल्ली में संसदीय सचिवों को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की महिला संसदीय सचिव अपनी मनमानी को लेकर एक बार फिर विवादों में है। अपने सगे शिक्षाकर्मी भाई को अपना शासकीय निज सहायक बनाने के बाद छत्तीसगढ़ शासन की संसदीय सचिव व भरतपुर सोनहत विधायक चंपादेवी पावले एक बार फिर विधायक जनसंपर्क निधि की बंदरबाट करने के कारण सुर्खियों में है। एक बार संसदीय सचिव द्वारा जनसंपर्क निधि की राशि का जमकर दुरुपयोग किया गया है। वित्तीय अधिकारों का फायदा उठाकर जनप्रतिनिधि अपने चहेतों को रेवडिय़ां बांट दी।

कांग्रेसी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने ह्वाट्स ग्रुप पर 11 सेकेंड की ब्लू फिल्म पोस्ट कर दिया!

सिवनी (मध्य प्रदेश)। कुछ वर्षो पूर्व विधानसभाओं में यह चर्चा बड़े जोर से गर्मायी थी कि विधायक विधानसभाओं में काम के वक्त कम्प्यूटरों में नीली फिल्म देखते हैं और यह मामला गर्माया मगर शनै: शनै: शांत हो गया, यह मामला उस समय उठा था जब स्वयं स्व. हरवंश सिंह दिग्विजय सिंह जी के कार्यकाल में केबीनेट मंत्री थे। ऐसी ही स्थिति गत दिनों केवलारी के विधायक ठा. रजनीश सिंह के साथ भी निर्मित हुई जब उन्होंने सफाई दे देकर अपने आपको स्वयं उलझन में डाल दिया। मामला कुछ यूं हुआ कि ठा. रजनीश सिंह के वाट्सएप नंबर से एक नीली फिल्म लगभग 11 सेकेंड की एक ह्वाट्सएप ग्रुप को देर रात्रि में सेंड कर दी गयी। 

14.7.16

रवीश और रोहित के नाम चार दिन के पत्रकार का खत

आदरणीय,

रवीश कुमार जी और रोहित सरदाना जी,

आज पहली बार आप दोनों का खत पढ़ा अच्छा लगा. आप दोनों की बातों से बहुत
जानकारीयां भी मिली. लेकिन इस जानकारी से इतर एक ऐसा भी दृष्टिकोण मिला
जिसमें एक पत्रकार दूसरे पत्रकार से सवाल कर रहा था. और उसी दृष्टिकोण से
इस चार दिन के पत्रकार का दो वरिष्ठ पत्रकारों से कुछ सवाल है. हालांकि
मुझे यह नहीं पता कि मेरा यह खत आप दोनों तक पहुंचेगा भी या नहीं, लेकिन
फिर भी मुझे आप दोनों के जवाब का इंतजार रहेगा.

11.7.16

‘कुपोषण से जंग’ सरकार का नारा धोखा

आंगनवाड़ियों के श्रम का हो सम्मान, राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के तहत पूरे प्रदेश में किया आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन ने प्रदर्शन, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भेजा पत्रक

लखनऊ, 11 जुलाई 2016, आंगनबाड़ियों का मानदेय 18000 रूपए करने, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, बढ़े हुए मकान किराए को लागू करने, कुपोषण दूर करने के मूलभूत काम के अतिरिक्त कामों में न लगाने, बीमा प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने, निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने, केंद्र तक पोषाहार पहुंचाने, शिकायत निवारण कमेटी के गठन समेत बारह सूत्रीय मांगों पर आज अखिल भारतीय आंगनबाड़ी व सहायिका संघ द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के तहत सीआईटीयू से सम्बद्ध आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन, उ0 प्र0 की तरफ से पूरे प्रदेश में धरना, प्रदर्शन किया गया। सहारनपुर, मुरादाबाद, मेरठ, गाजीपुर, सोनभद्र, गोंडा, बस्ती, लखनऊ समेत तमाम जिलों में आयोजित इन विरोध कार्यक्रमों द्वारा प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक भेजा गया। लखनऊ में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर पत्रक सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।    

ok india news चैनल की आईडी बेचने का मामला सामने आया

उत्तराखंड (रामनगर) : ok india न्यूज़ चैनल की आईडी  रिपोर्टरों को बेचने का मामला सामने आया है. दरसल मामला ये है कि बाजपुर के रहने बाले भूपेन्दर सिंह पन्नू पिछले कुछ दिनों से खुद को रिपोर्टर बता रहे हैं. इनकी छवि ठीक नहीं है. मीडिया में काम करने के साथ ही उसके सम्बन्ध आस पास के पत्रकार भाइयों से हो गए. पत्रकारों पर अपना विश्वास जमाते हुए whatsapp के ग्रुपों में लिख दिया कि ओके इंडिया न्यूज़ चैनल में काम करने के इच्छुक अपना बायोडाटा मुझे मेल करें.

यजीदीयो की नस्ल है ज़ाकिर नायक : जैनुल आबेदीन हाश्मी

सुल्तानपुर : इस्लाम के आंगन में धोके से इस्लामिक लेबास पहनकर आये कट्टरपंथी ज़ालिम ज़ाकिर नायक ने आलमी पैमाने पर जहां मुसलमानों को अपने लोक लुभावन बोल से  गुमराह किया वहीं ये बहरुपिया आज मज़हब के लिये नासूर बन गया है, जिससे दुनिया भर में इस्लाम बदनामी की ज़नजीरों में जकड़ गया है, लेकिन पढ़े लिखे मुसलमान इस ज़ालिम के मंसूबों को समझ चुके हैं जिन्होंने आखिर इसके खिलाफ ज़बान खोल ही दी, इसी मुद्दे पर रविवार को अंजुमन इस्लाहुल कुरैश के अधयक्ष एवं इंडियन इस्लामिक आर्गनाइजेशन यू.पी. के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष जैनुल आबेदीन हाश्मी ने ख़ास बातचीत में बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी। पेश है श्री हाश्मी से हुई ख़ास बातों के कुछ अंश.....

इन्सान बनना मुश्किल है पर पत्रकार बनना आसान

"जागरण / भास्कर जैसे अखबारो में रहा हूँ मैं''

''वहाँ किसके साथ काम किया?''

''जिसके-जिसके साथ काम किया, सब मर चुके हैं "

......
इन्सान बनना मुश्किल है पर पत्रकार बनना आसान
.....

वो खुद को पत्रकार कहें..झूठ बोले..सच बोले..हमसे क्या मतलब। जब चाय वाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो एक ड्राइवर, ठेकेदार , बरफ वाला, पंचर वाला..टैम्पो वाला, बिल्डर.. कलाकार..चित्रकार अगर पत्रकार बन जाता है या अपने पेशे की व्यस्तता से समय निकाल कर पत्रकारिता करता है तो किसी को क्या ऐतराज?