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25.4.19

यूपी चौथा चरण : भाजपा के सामने साख की चुनौती, देखें किस सीट पर किस जाति के कितने वोटर

अजय कुमार, लखनऊ

यूपी में चौथे चरण में 29 अपै्रल को 13 सीटों पर चुनावी जंग होनी है। 2014 में भाजपा को 13 में से 12 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। एक सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी। यहां से डिम्पल यादव चुनाव जीती थीं।  भाजपा के सामने अपनी 12 सीटें बरकरार रखने की चुनौती है तो सपा-बसपा गठबंधन के सामने जातीय समीकरणों के बूते पुरानी जमीन भाजपा से छीनने का लक्ष्य है। कांग्रेस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर उन सीटों पर खास निगाह लगाए है जो उसने 2009 में जीती थीं। चौथे चरण में जिन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। उसमें बीजेपी सभी 13 सीटो पर तो सपा-बसपा क्रमशः 07 और 06 सीटों पर तथा कांगे्रस 13 सीटों पर मैदान में है। कांगे्रस ने डिम्पल के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा है। इस चरण में डिम्पल यादव,राम शंकर कठेरिया,सत्यदेव पचैरी,श्री प्रकाश जायसवाल,देवेन्द्र सिंह भोले,आदि दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है।

बाबा भोलेनाथ की नगरी दो दिनों तक रहेगी मोदीमय

अजय कुमार, वाराणसी से
देश की सबसे अधिक चर्चित लोकसभा सीटों में से एक वाराणासी संसदीय सीट पर लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। यहां सांतवें और अंतिम चरण में मतदान होना है। यहां से 26 अ्रपै्रल को नामांकन के लिए भाजपा उम्मीदवार और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक दिन पूर्व 25 अ्रपै्रल को वाराणसी पधार रहे हैं। पीएम मोदी 25 अप्रैल को रोड शो और 26 अप्रैल को नामांकन करेंगे। दो दिनों तक यहां सियासत उफान पर होगी। यह कहना गलत नहीं होगा की बाबा भोलेनाथ की नगरी वाराणसी इन दो दिनों में मोदीमय नजर आएगी।

पत्रकारों की किल्लत हो गई है क्या जो 'चौकीदार' का इंटरव्यू 'खिलाड़ी' ले रहा!

नींद टूटी तो हमेशा की तरह अपनी आदत के मुताबिक न्यूज़ चैनलों का दीदार शुरू कर दिया। अरे ई का!! जहां देखो पीएम से अछईया (अक्षय) वाला इंटरव्यू चल रहा था। ज़ी न्यूज़, आज तक, एबीपी न्यूज़, डीडी न्यूज़, रिपब्लिक भारत और फलाना ढिकाना सारे चैनलों पर इनका ही इंटरव्यू चल रहा था, वह भी नॉनस्टॉप! बोले तो बिना ब्रेक के!

हेमंत करकरे उत्पीड़न और प्रताड़ना का अपराधी था!

विष्णु गुप्त
हेमंत करकरे को लेकर कोई एक नहीं बल्कि अनेकानेक प्रश्न खडे थे, पर अधिकतर लोग इस प्रश्न पर बात ही नहीं करना चाहते थे? हेमंत करकरे को लेकर उठे प्रश्नों पर आखिर लोग बात क्यों नहीं करना चाहते थे? पहला कारण यह था कि कांग्रेस हर हाल में हिन्दू -भगवा आतंकवाद को प्रत्यारोपित करना चाहती थी, इसके लिए कांग्रेस हर वह हथकंडा अपनाने के लिए तैयार बैठी थी जो हथकंडा अपना सकती थी, हथकंडे के तौर पर कांग्रेस के पास तीस्ता सीतलवाड, हर्ष मंदर, जान दयाल और शबनम हाशमी जैसे तमाम चेहरे थे जो भारत को एक खलनायक के तौर पर प्रस्तुत करते थे और हिन्दुओं को आतंकवादी, खतरनाक तथा अमानवीय मानुष साबित करने के लिए तुले रहते थे, इसी सोच से प्रस्तावित दंगा रोधी विधेयक सामने आया था, जिसमें प्रावधान यह था कि कहीं भी दंगा होगा तो बेगुनाह साबित करने की जिम्मेदारी हिन्दुओं को ही होगी, मुस्लिम पर आरोप होने पर भी उसे बेगुनाही के सबूत नहीं जुटाने होंगे, वह प्रस्तावित विधेयक सोनिया गांधाी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने लायी थी जिसके सदस्य तीस्ता सीतलवाल सहित अन्य तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोग शामिल थे।

किसी ईसाई ने नमाज़ पढ़ रहे लोगों को मारा तो ये दुनिया में कहीं भी क्रिश्चियन मार के बदला लेंगे!


Tabish Siddiqui : ISIS ने कहा है कि न्यूज़ीलैंड में मारे गए लोगों का बदला उन्होंने श्रीलंका में लिया है.. मतलब न्यूज़ीलैण्ड में किसी ईसाई ने मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे लोगों को मारा था तो ये दुनिया मे कहीं भी क्रिस्चियन मार के वो उसका बदला ले लेंगे. अब सवाल ये नहीं है कि ये सही है या ग़लत.. सवाल ये है कि आपको ये पसंद आया कि नहीँ?

24.4.19

राज ठाकरे ने तो बीजेपी आईटी सेल की बैंड बजा दी!

मोदी-शाह की नाक में दम कर दिया है राज ठाकरे ने। इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू हैं राज ठाकरे. उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ रहा है लेकिन राज ठाकरे पूरे महाराष्ट्र में ताबड़ तोड़ रैलियां कर रहे हैं. अपने हर भाषण में वो सिर्फ मोदी और अमित शाह पर तीखे हमले करते हैं.

दैनिक भास्कर प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ जमकर खबरें छाप रहा है


ये कैसी पत्रकारिता...! बात नाम लेकर ही शुरू कर रहे हैं। पत्रकारिता का विद्यार्थी हूं तो फिर हो रही पत्रकारिता पर भी ध्यान देना तो बनता ही है। इसलिए सीधा नाम लिख रहा हूं, देश के सबसे बड़े अखबार होने का दावा करने वाले दैनिक भास्कर का। इसके भोपाल संस्करण का। साफ कर दें कि यह नाम को बदनाम करने की कोशिश नहीं है। यह प्रयास है समझने का कि आखिर हो क्या रहा है। अखबार का 24 अप्रैल का अंक देखा। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को नीचा दिखाने वाली पांच-पांच खबरों को सआशय इसमें प्रमुखता से स्थान दिया गया है।

क्या वाकई फंस गए हैं देश के मुख्य न्यायाधीश?

जस्टिस रंजन गोगोई पर गम्भीर आरोप, यौन उत्पीड़न मामले में जस्टिस बोबडे और दो अन्य जज करेंगे जाँच

जे.पी.सिंह

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीडन के आरोपों को जिस तरह शनिवार को एक विशेष पीठ बनाकर स्वयं को क्लीन चिट देने का प्रयास किया उसकी विधिक और न्यायिक क्षेत्रों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई और उच्चतम न्यायालय द्वारा स्वयं बनाई गयी प्रक्रिया के तहत जाँच की मांग बहुत बड़े पैमाने पर उठी।अंततः मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की आंतरिक जांच के लिए मंगलवार को उच्चतम न्यायालय  के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोबडे को नियुक्त किया गया । न्यायमूर्ति बोबडे ने वह मुख्य न्यायाधीश के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं।न्यायमूर्ति बोबडे ने उच्चतम न्यायालय  के दो न्यायाधीशों न्यायमूर्ति एनवी रमन और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी को शामिल कर एक समिति गठित की है। न्यायमूर्ति रमन वरिष्ठता में न्यायमूर्ति बोबडे के बाद हैं और न्यायमूर्ति बनर्जी को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि वह महिला न्यायाधीश हैं।

गुजरात दंगों की गैंगरेप पीड़िता बिलकिस बानो की कहानी इस लोकतंत्र का सिर शर्म से झुकाती रहेगी!

गुजरात दंगों में गैंगरेप पीड़िता को 50 लाख का मुआवजा और आवास देने के सुप्रीम निर्देश

जे.पी.सिंह

"आप खुद को भाग्यशाली समझिए कि हम अपने आदेश में सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कह रहे हैं।" यह कहते हुये उच्चतम न्यायालय ने 2002 गुजरात दंगा मामले में गैंगरेप सर्वाइवल बिलकिस बानो को 50 लाख रुपए का हर्जाना देने का निर्देश गुजरात सरकार को दिया है। उच्चतम न्यायालय ने गुजरात सरकार को ये भी निर्देश दिया है कि उन्हें नियमों के मुताबिक नौकरी और रहने की सुविधा दी जाए। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने 29 मार्च को बिलकिस बानो मामले में गलत जांच करने वाले 6 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने को कहा था। अपने फैसले में कोर्ट ने ये कहा था कि उन्हें सेवा में नहीं रखा जा सकता।

जयपुर की सेंट्रल जेल में ये क्या चल रहा है!

जयपुर केंद्रीय कारागारः कैद तनहाई और बर्बर पिटाई की दास्तान, रिहाई मंच व अवमेला के संयुक्त प्रनिधिमंडल की दौरा रिपोर्ट.... रिहाई मंच और अवमेला के तीन सदस्यीय संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर केंद्रीय कारागार, जयपुर में जयपुर ब्लास्ट समेत आतंकवाद के नाम पर कैद विचाराधीन कैदियों की 30 अप्रैल 2019 को जेल के अंदर बर्बर पिटाई की घटना के तथ्यों को जानने लिए तीन दिवसीय (6, 7, 8 अप्रैल) दौरा किया। प्रतिधिमंडल जयपुर स्थित मानवाधिकार/सामाजिक संगठनों, जेल अधीक्षक सेंट्रल कारागार जयपुर और पीड़ित विचाराधीन कैदियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में मसीहुद्दीन संजरी, मो0 आसिम और शादाब अहमद शामिल थे।

22.4.19

संचार में धैर्य और समन्वय से कार्य करना जरूरी: नरेश कुमार


भोपाल : क्राइसिस मैनेजमेंट के समय प्रबंधन, प्लानिंग, रिसर्च ,कारपोरेट संचार, प्रबंधन टीम पर भरोसा और समन्वय के साथ कार्य करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। किसी भी संस्थान की संचार प्रबंधन की टीम की योग्यता और क्षमता, संस्थान को संकट से उबार लेती है। जनसंपर्क विभाग की काबलियत उस समय बहुत मदद करती है, जबकि संकट से निपटने के लिए समय बहुत ही कम होता है। जनसंपर्क अधिकारी को सदैव सतर्क रहना चाहिए।

सहारा का संकट : जब कार्यकर्ता और जमाकर्ता ही नहीं बचेगा तो क्या कर लोगे

सहारा श्री सुब्रत रॉय की कुम्भकर्णी नींद। संस्था के मैनेंजमेंट ने संस्था और कार्यकर्ता को इस गम्भीर स्थिति में पहुंचा दिया है कि जो कार्यकर्ता हमेशा से संस्था और सहाराश्री भक्त थे, वो भी नेगेटिव बाते करने को मजबूर हो गए हैं. ये अपने व संस्था के भविष्य को लेकर सोचने लगे हैं. अब तो यूं कहें कि गूंगे भी बोलने लगे हैं, तो गलत नहीं होगा. पर अब भी कुछ अंध-भक्त ऊपरी दिखावे से बाज नहीं आते हैं और जो आवाज़ उठाता है उन लोगों को दबाने की कोशिश करते हैं. क्योंकि वो जानते हैं कि इससे उन लोगों का उल्लू सीधा हो रहा है.

गायब कर दिया 'धूलकोट चौराहा' नाम



इतिहास के पन्नों में दर्ज 'आहड़ सभ्यता' के अवशेष उदयपुर के आयड़ क्षेत्र में महासतियां के पास है, जो 'मिट्टी' में दबे होकर संरक्षित है। इन मिट्टी के टीलों को 'धूलकोट' के नाम से जाना जाता है। 80 के दशक में जब धूलकोट के पीछे आबादी बसी और आवासीय कॉलोनियां बनी तो यहां चार रास्ते निकले, जिनमें से एक ठोकर, दूसरा आयड़, तीसरा पहाड़ा और चौथा बोहरा गणेश मंदिर। इससे इस चौराहा का नाम 'धूलकोट चौराहा'  रखा गया और तभी से यह 'धूलकोट चौराहा' के रूप में ही जाना जाता रहा है।

कई संघियों की सेलेक्टिव शर्म जागी है!

विजेंदर मसिजीवी
कई संघियों की सेलेक्टिव शर्म जागी है, उन्हें संविधानवाद याद आया है और वे आईपीएस करकरे पर प्रज्ञा की बकवास को इस मायने में जस्टिफाई करना चाहते हैं कि उसके साथ हिरासत में अच्छा व्यवहार नहीं हुआ।  वे आतंकी प्रज्ञा सिंह की पुलिस हिरासत में हुई यातना का विरोध करना चाहते हैं। हम इस वाली बात का स्वागत करते हैं।

हेमंत करकरे पर प्रज्ञा का बयान और प्रधानमंत्री द्वारा किया गया उनका बचाव

जब 26/11 हुआ था, तब बहुत कुछ समझ नहीं आ रहा था। सिवाय इसके कि ताज होटल में कोई इजरायली बैठक चल रही थी, नरीमन हाउस भी इजरायली मामला है जहां आतंकी छुपे थे, गड़करी उस वक़्त इजरायल में थे और कर्नल श्रीकांत पुरोहित, प्रज्ञा ठाकुर, दयानंद पांडेय आदि इजरायल में हिन्दुओं की प्रवासी सरकार बनाने में लगे हुए थे जिसकी मुंबई एटीएस ने अपने चार्जशीट में बात की थी और जिसे हेमंत करकरे ने बनाया था।

श्रीलंका के आतंकी विस्फोटों से जुड़े सवाल

-ललित गर्ग-
श्रीलंका अपनी शांति और मनोरतमा के लिये नई इबारत लिख ही रहा था कि वहां हुए सिलसिलेवार शक्तिशाली बम विस्फोटों एवं धमाकों केे खौफनाक एवं त्रासद दृश्यों नेे सम्पूर्ण मानवता को लहुलूहान कर दिया, आहत कर दिया और दहला दिया। कैसी उन्मादी आंधी पसरी कि 200 से अधिक लोगों का जीवन ही समाप्त कर दिया। हजारों गंभीर रूप से घायल हो गए तथा करोड़ों रुपये की सम्पत्ति नष्ट हो गई। इस प्रकार यह विस्फोटों की शृंखला, अमानवीय कृत्य अनेक सवाल पैदा कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि कुछ उन्मादी लोगों के उन्माद में न जिन्दगी सुरक्षित है और न ही जीवन-मूल्यों की विरासत। आखिर कब रूकेगा हिंसा, आतंक एवं त्रासदी का यह खूनी खेल। इस तरह के हिंसा, भय, आतंक, अन्याय एवं अमानवीयता के घृणित कर्मों ने यह भी साबित कर दिया कि आदमी के मन में पाप का भय रहा ही नहीं।

21.4.19

बरेली व आंवला में 5-10% ज़्यादा मुस्लिम वोट बीजेपी को न पड़ा तो सियासत छोड़ दूंगा : डॉ.हुदा

अज़ीज़ाने गिरामी-ए-मिल्लत एहले सुन्नत वल जमात अस्सलामोलेकुम...2010,2012 याद है या भूल गए.? जिस दौरान शर पसन्द ताकतों ने शहर की फ़िज़ा में ज़हर घोलने का काम किया,कौमी यकजहती को पामाल किया और बरेली जैसा अमन का पैरोकार शहर कर्फ्यू की ज़द में आगया था...याद होगा आपको रमज़ान का मुबारक महीना था! सूबे में समाजवादी सरकार की हुक़ूमत थी,मरकज़ी हुक़ूमत कांग्रेस की थी।

याद है न?

बरेली के भी एक सियासी रहनुमा सूबे में मुस्लिम वोटों पर जीत कर हुक़ूमत में आला वज़ीर बने बैठे थे...सद अफसोस!!!

सुनो मुसलमानों!जोगी नवादा,पनबढिया,रबड़ी टोला, सुभाषनगर...याद है न या ये भी याद दिलायूँ?

जिस वक्त अखिलेश हुक़ूमत ने रबड़ी टोला के इमरान को पुलिस की गोली से शहीद किया,सुभाष नगर बब्बन पुर्वा का इमरान शहीद हुया,जोगी नवादा का जाफरी भाई शहीद हुया तब सर पर कफ़न बांध कर रमज़ाम में जान हतेली पर लेकर जनाज़ों को कंधा कौन दे रहा था?

शहीदों की तदफ़ीन के लिये कफ़न और पटलो का इंतेज़ाम कर्फ्यू में हाथ जोड़-जोड़ कर लोगो से दुकान खुलवाकर कौन कर रहा था? जब मुसलमानों के घरों में चूल्हे नही जल रहे थे तब जान हतेली पर रख कर कर्फ्यू में राहत सामग्री लेकर पूरी बरेली के मोहल्लों मोहल्लों में कौन बाटता घूम रहा था? शराफ़त मियाँ हुज़ूर की खानकाह पर कर्फ्यू के दौरान फसी हामला बहनों को जान की बाज़ी लगाकर उनके घर तक कौन पहुँचा रहा था? जली हुई दुकानों के मुआवज़े और शहीद हुए लड़को के हक़ के लिये हुक़ूमत से अकेला कौन लड़ कर उनके हक़ का मुतालबा कर रहा था? कौन मस्जिदों में नमाज़ क़याम करा रहा था क्योंकि कर्फ्यू की वजह से लोग घरों से नही निकल पा रहे थे?

बरेली की कम से 50 से ज़्यदा मस्जिदों में सेहरी और अफ्तार का इंतेज़ाम कौन करा रहा था? मस्जिदों के इमाम साहब किन हालातो में रोज़े रख रहे थे उनको हौसला देने के लिये पुलिस-प्रशासन के सहयोग से रुट मार्च कौन निकलवा रहा था? बन्द रोज़गार और दुकानें कौन खुलवा रहा था? आश्रित परिवारों के लिये बरेली से लेकर लखनऊ तक मुआवज़े और सरकारी नोकरी के लिए हुक़ूमत से अकेले कौन लड़ रहा था?

सूबे में समाजवादी सरकार थी और जोगी नवादा में पुलिस के ज़ुल्म के ख़िलाफ़ अकेले जान पर खेल कर PAC किसने हटवाई थी? अहमद उल्लाह भाई, इफ्तेकार कुरैशी भाई अगर वाक़ई पंजतन के ग़ुलाम हो तो गवाही देना...ज़रा अल्लाह को हाज़िर नाज़िर जान कर बताओ बरेली के मुसलमानों! इस ख़ादिम ने क्या कोई कसर छोड़ी? जान की बाज़ी लगा दी आपके लिये तब कहाँ थे आपके कांग्रेसी और सामाजवादी नेता?

अरे मुझे गालियां देने से पहले निगाहों का लिहाज़ तो कर लेते...या सब लिहाज़,मोहब्बत,हया भूल गए? मेरे भाई तौसीफ भैया के लिये सऊदी हुक़ूमत से किसने पैरवी की थी? मदरसों को आतंक का अड्डा कहने वाले वसीम रिज़वी पर पूरे सूबे में उसके ख़िलाफ़ सबसे पहले किसने मोर्चा खोल कर FIR कराई थी?

चंद फेसबुक पर मुख़ालफ़त करने वालो सुन लो! जिंतनी आपकी तादाद है उससे लाख गुना ज़्यदा मेरे चाहने वाले और उनकी अज़ीम दुआएं मेरे साथ हैं...लगा लेना जितना ज़ोर लगाना हो!अगर बरेली और आंवला में 2014 के मुकाबले 5-10% ज़्यदा मुस्लिम वोट इस बार बीजेपी को नहीं पड़ा तो सियासत छोड़ दूंगा...

मुझे उम्मीद है मेरे हज़ारों,लाखो चाहने वाले मुझे मेरे मुखलीफो के सामने रुसवा नही होने देंगे...इन्शा अल्लाह!

आप सिर्फ मुझे देखिये बस और ये सोचिए कि बरेली और आंवला दोनों जगह से बीजेपी से आपका ख़ादिम डॉ हुदा लड़ रहा है"...

अरे मेरी कुर्बानियों का कुछ तो लेहाज़ करो मेरे अज़ीज़ों...
"व तो इज़्ज़ो मन्तशाओ व तो ज़िल्लो मन्तशा"...

जय-हिंद


























20.4.19

प्रियंका गांधी के एक बयान ने बीजेपी वालों के दोनों हाथों में लड्डू थमा दिया है


अजय कुमार, लखनऊ

वाराणसी कांग्रेस के लिए बनी दोधारी तलवार...  सियासत की डगर बड़ी पथरीली और उबड़-खाबड़ होती है। यहां कदम-कदम पर ठोकर का डर रहता है। हर कदम बहुत संभल कर रखना पड़ता है। जरा सी भी लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है।संभवता इस बात का अहसास कांग्रेस का तरूप का इंका समझी जाने वाली प्रियंका वाड्रा को भी हो गया होगा। अभी प्रियंका को यूपी की राजनीति में कदम रखे दो-ढाई महीना ही हुआ होगा,लेकिन उनकी चमक फीकी पड़ने लगी है। वह भी भाई राहुल गांधी की तरह ही अपना पक्ष जनता के सामने मजबूती से नहीं रख पा रही हैं। शायद इसी लिए प्रियंका जनसभा करने की बजाए रोड शो को अधिक तरजीह दे रही हैं,लेकिन इस हकीकत को अनदेखा नहीं किया जा सकता है कि कोई भी नेता बिना बोले जनता से संवाद स्थापित नहीं कर सकता है, लेकिन मजबूरी यह है कि प्रियंका जैसे ही बोलती हैं भाजपा नेता उनकी बात पकड़ लेते हैं।

साध्वी प्रज्ञा मुस्लिम होती तो आतंकी होती!

जियाउर्रहमान
आप सोचिये कि यदि किसी मुस्लिम को जिसपर आतंकी घटना में शामिल होने का केस चल रहा हो उसे  कांग्रेस या अन्य  कोई दल लोकसभा का प्रत्याशी बना दे तो देश में कथित राष्ट्रवादियों और मीडिया की क्या प्रतिक्रिया होती ?  देशभर में भाजपाइयों ने हंगामा खड़ा कर दिया होता और तूफ़ान ला दिया होता | लेकिन राष्ट्रवाद का राग अलापने वाली भाजपा ने अचानक चुनाव में आतंकवाद की आरोपी मालेगांव ब्लास्ट की आतंकी साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से चुनाव में उतारा है, राष्ट्रवादी मौन हैं ? | पीएम मोदी ने भी एक इंटरव्यू में साध्वी से हमदर्दी जताकर अपनी मौन स्वीकृति दे दी है | आतंकी साध्वी प्रज्ञा को भाजपा ने ऐसे समय में टिकट दिया है जब देश में दो चरण का मतदान हो चुका है | तो क्या यह माना जाये कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए आतंक के आरोपी के जरिये ध्रुवीकरण करना चाहती है ?

18.4.19

डिप्टी कलेक्टर दिवाकर की ये कविता हो रही लोकप्रिय

बिहार प्रशासनिक सेवा के सीनियर डिप्टी कलेक्टर रविन्द्र कुमार दिवाकर द्वारा रचित यह कविता बिहार में लोकप्रिय हो रही है-

तो हम तुमसे प्रश्न करेंगे---