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27.8.15

क्या संयुक्त संस्थान को आरक्षण को समाप्त करवाने ठेका मिला है?

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

दो दशक पहले सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे से अनेकानेक असंवैधानिक और मनमाने फैंसले जारी हुए। जिनके कारण अजा एवं अजजा के आरक्षण को मृतप्राय कर दिया गया था। हमने अजा/अजजा संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ के बैनर पर देशभर में जनान्दोलन करके, संसद और सु्प्रीम कोर्ट का घेराव करके अधिकांश फैसलों को संसद द्वारा संविधान संशोधन करवाकर निष्प्रभावी करवा दिया था। अब जब कि परिसंघ के अध्यक्ष को संघ/भाजपा ने अपने पाले में बिठा लिया है और परिसंघ भी संघ की भाषा बोलने लगा है तो देशभर का अजा एवं अजजा संगठन बिखर सा गया है। ऐसे में बेशक हमने 'हक रक्षक दल सामाजिक संगठन' का गठन किया है, लेकिन हम अभी प्रारम्भिक दौर में हैं। इसके अलावा हमारे विरोध में मनुवादियों द्वारा संचालित धनकुबेर समता आन्दोलन समिति खुद है और उसके इशारों पर चलने वाले सजातीय मनुवादी, समता आन्दोलन के हित साधन के लिये काम कर रहे हैं। इसके बावजूद चुप तो नहीं ही रहा जा सकता!



नरेन्‍द्र मोदी के प्रस्‍तावित इज़रायल दौरे को रद्द करने और जायनवादी राज्‍य का पूरी तरह से बॉयकाट करने की माँग को लेकर अभियान शुरू

नई दिल्‍ली। फ़ि‍लिस्‍तीन पर इज़रायली कब्‍जे़ और लगातार जारी नरसंहारक मुहिम के ख़ि‍लाफ़ जारी फ़ि‍लिस्‍तीनी जनता के प्रतिरोध के प्रति भारतीय जन की एकजुटता दर्शाने के लिए नई दिल्‍ली  के ग़ालिब संस्‍थान में चल रहा दो-दिवसीय कन्‍वेंशन रविवार देर रात को सम्‍पन्‍न हुआ। कन्‍वेंशन के दौरान प्रधानमंत्री की प्रस्‍तावित इज़रायल यात्रा को रद्द करने एवं भारत के कूट‍नीतिक, सैन्‍य एवं व्‍यापार संबन्‍धों को तोड़ने की माँग को लेकर एक हस्‍ताक्षर अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया। यह कन्‍वेंशन गाज़ा पर इज़रायली हमले की पहली बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था जिसमें 502 बच्‍चों सहित 2200 से भी ज्‍़यादा लोग मारे गए थे।

कौन कहता है बिहार बीमारू राज्य नहीं है?

हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,एक समय था जब भारत के अर्थशास्त्री बिहार,मध्य प्रदेश,राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बोझ मानते थे और इनको इकट्ठे बीमारू राज्य कहा करते थे। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्य अब दावा करने लगे हैं कि वे बीमारू नहीं रहे लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि ठीक ऐसा ही दावा इन दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बिहार के बारे में कर रहे हैं। शायद इसी तरह के घटनाक्रम में कभी यह कहावत बनी थी कि जब सारी लड़कियाँ नृत्य करने लगीं तो लंगड़ी-लूली ने कहा कि इनसे अच्छा नृत्य तो वो कर लेती है।
खैर,अब नीतीश कुमार उर्फ बिहार कुमार (कृपया इस नामकरण को मनोज कुमार उर्फ भारत कुमार के प्रसंग से जोड़कर न देखें ) को जो दावा करना था उन्होंने कर लिया,दस साल तक जो हवाबाजी करनी थी कर ली। हवाबाजी में तो पूरी वसुधा पर उनका कोई जोड़ ही नहीं है। लेकिन क्या नीतीश कुमार जी बताएंगे कि बिहार बीमारू राज्य कैसे नहीं रहा? जहाँ भारत की प्रति व्यक्ति औसत आय 80388 रुपया है वहीं बिहार की प्रति व्यक्ति औसत आय 31229 रुपया है। जहाँ बिहार में बिजली की प्रति व्यक्ति खपत 144 किलोवाट प्रति घंटा है. वहीं देश में औसतन प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 927 किलोवाट प्रति घंटा है। जहाँ राज्य की साक्षरता का औसत है 63.8 फीसदी है वहीं राष्ट्रीय औसत 74 फीसदी।  जहाँ बिहार में 43.85 फीसदी लोग अनपढ़ हैं वहीं देश का औसत 35.73 फीसदी है। जहाँ बिहार के 70 फीसदी ग्रामीण परिवार दिहाड़ी मजदूर हैं, वहीं देश का औसत 51 फीसदी है। जहाँ भारत में सिंचित क्षेत्र का औसर 28 प्रतिशत है वहीं कृषि योग्य कुल 93.6 लाख हेक्टेयर भूमि में से मात्र 15 लाख हेक्टेयर भूमि ही वास्तविक रूप से सिंचित है। आज नीतीश कुमार उर्फ बिहार कुमार बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं तो लगे हाथ वे यह भी बता दें कि आज उनके दस साल के शासन के बाद भी राज्य में कितने प्रतिशत सरकारी नलकूप चालू अवस्था में हैं? जहाँ भारत में गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करनेवाले लोगों की संख्या जहाँ 36 प्रतिशत वहीं बिहार में आजादी के 70 साल बाद भी 55 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं और जहालत और जलालत की जिंदगी जी रहे हैं।
मित्रों,अब बात करते हैं उद्योगों की। बिहार में देश की आबादी 9 प्रतिशत है जबकि राज्य के कारखानों से रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रलय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 1.79 लाख कारखाने हैं जिनमें से बिहार में मात्र तीन हजार कारखाने ही हैं। बिहार में एक कारखाने से औसतन 40 लोगों को रोजगार मिल रहा है जबकि देश में यह औसत 72 है। राज्य में एक भी ऐसा कारखाना नहीं है जो 2,000 से अधिक लोगों को रोजगार देता हो। प्रदेश में जो भी कारखाने हैं उनमें से आधे ऐसे हैं जिनमें 15 से कम लोगों को रोजगार मिलता है। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में बिहार में बरौनी रिफाइनरी ही प्रमुख औद्योगिक इकाई है। इसके अलावा छिटपुट खाद्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयां हैं और नीतीश कुमार हैं कि बिहार को बीमारू मानने को तैयार ही नहीं हैं। जो राज्य पूरे देश में सबसे पिछड़ा है अगर उसे बीमारू नहीं कहा जाएगा तो क्या महाराष्ट्र,गुजरात और पंजाब को बीमारू कहा जाएगा? कुछ क्षेत्र जैसे शिक्षा ऐसे भी हैं जिनमें बिहार की स्थिति लालू-राबड़ी के आतंक-राज के मुकाबले और खराब ही हुई है। भले ही बिहार में साक्षर लोगों की संख्या बढ़ी है लेकिन सरकारी स्कूल-कॉलेजों में शिक्षा का स्तर गिरा ही है।
मित्रों,हम नीतीश कुमार उर्फ बिहार कुमार जी से सविनय निवेदन करते हैं कि वे बिहार की हकीकत को देखते हुए मान लें कि बिहार आज से 25-30 साल पहले भी बीमारू था और आज भी बीमारू है। उनके जिद पकड़ने से सत्य और तथ्य बदल नहीं जाएगा। बिहार अधिकांश क्षेत्रों में 5-6 दशक पहले भी नीचे से अव्वल था और आज भी है लेकिन नीतीश कुमार जी को गांठ बांध लेनी चाहिए कि आगे ऐसा नहीं होगा। बिहार अब जाग चुका है और जनता परिवार कैसे बिहार को खंता (गड्ढे ) में फेंक देना चाहती समझ चुका है। अब बिहार नीचे से अव्वल नहीं ऊपर से अव्वल बनना चाहता है। बिहार को अब लालटेन की रोशनी और तीर-धनुष का युग नहीं चाहिए और न ही भारत-विरोधी खूनी पंजा चाहिए बल्कि अब हर बिहारी को विकास चाहिए,24 घंटे बिजली चाहिए,हर खेत को पानी चाहिए,हर हाथ को बिहार में ही काम चाहिए,हर बच्चे को साईकिल और पैसे के बदले बेहतरीन शिक्षा चाहिए,दिवाला नहीं दिवाली चाहिए,कमल पर सवार लक्ष्मी चाहिए।

हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित

परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए उच्च न्यायालय के फैसले का अनुपालन कराये जाने के लिए हस्ताक्षर अभियान प्रारंभ

प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने के लिए सरकार द्वारा सकारात्मक कदम उठाने के लिए जनता की ओर से अनुरोध के साथ साझा संस्कृति मंच, शिक्षा का अधिकार अभियान, सूचना का अधिकार अभियान उ. प्र एवं आशा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेशव्यापी हस्ताक्षर अभियान आज से प्रारंभ हुआ. वाराणसी में गोलघर कचहरी चौराहे के निकट एक फ्लेक्स और माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन पर सैकड़ों लोगो के हस्ताक्षर लिए गए.

पुस्तक समीक्षा : चलो गांव की ओर : एक अभियान

कुमार कृष्णन

आजादी के बाद जिस अनुपात में महानगरों से लेकर छोटे—छोटे कस्वों का विकास हुआ उस अनुपात में गांव पिछड़ता चला गया और शुरु हो गया गांव से शहरों की ओर पलायन का सिलसिला। फलस्वरूप गांव में खेती,पशुपालन और घरेलु उद्योग चौपट हो गए। कल और आज के गांव में बुनियादी फर्क आ गया है जिससे हमारे लोकजीवन में विकृतियां बढ़ी है। धीरे—धीरे लोक संस्कृति,लौकिक रीति— रिवाज और परंपराओं में भारी बदलाव के कारण गॉव में रहनेवालों की जीवन—शैली बदल गयी है।शिक्षा,स्वास्थ्य और पेयजल,रोजगार के मसले का समाधान आजादी के सड़सठ वर्षों बाद भी नहीं हो पाया है। लोकतंत्र खत्म हो गया और विकास की किरणें पहुंची नहीं।

खास आदमियों को यूं आम मत बन बनाओ ...प्लीज...!! :)


तारकेश कुमार ओझा

बचपन में अपने हमउम्र बिगड़ैल रईसजादों को देख कर मुझे उनसे भारी ईष्या होती थी। क्योंकि मेरा ताल्लुक किसी प्रभावशाली नहीं बल्कि प्रभावहीन परिवार से था। मैं गहरी सांस लेते हुए सोचता रहता ... काश मैं भी किसी बड़े बाप का बेटा होता , या एट लिस्ट किसी नामचीन मामा का भांजा अथवा किसी बड़े  चाचा का भतीजा ही होता तो मैं भी ऐसी शरारतें कर पाता। फिर आशावादी दृष्टिकोण मेरे मन को समझाता ... अभी तो पूरी पिक्चर बाकी है मेरे दोस्त... इतना निराश होने की भी जरूरत नहीं है। किसी बड़ी हस्ती का बेटा, भतीजा या भांजा न बन सका तो क्या हुआ ... क्या पता कल को मेरा रिश्ता किसी बड़े ससुराल से जुड़ जाए। मैं किसी बड़ी हस्ती का दामाद, जीजा या साढ़ू ही बन जाऊं। लिहाजा जिंदगी की लाख जिल्लतें झेलता हुआ मैं अभी ख्याली पुलाव में उलझा हुआ ही था कि धुर्तों की एक टोली मेरे घर शादी का रिश्ता लेकर आ धमकी।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा 40 कर्मचारियों को निकालने के विरोध में सिंघद्वार पर शुरू हुयी भूख हड़ताल


प्रकाशनार्थ
सेवा में
संपादक महोदय

विषय : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा 40 कर्मचारियों को निकालने के विरोध में सिंघद्वार पर शुरू हुयी भूख हड़ताल।

महोदय , आज दिनाँक 27 अगस्त 2015 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के जल एवं विद्युत विभाग में कार्यरत 40 संविदा कर्मचारियों ने पिछले 3 दिन से चल रही भूख हड़ताल को जारी रखा , ज्ञातव्य है की इन आंदोलनकारियों में 2 से लेकर 20 वर्ष तक अपनी सेवाएं देने वाले कर्मचारी भी शामिल है। परीक्षा लेकर और असफल करके इन्हे कार्यमुक्त करना इनके श्रम अधिकारों एवं मानवाधिकारों के साथ घोर अन्याय है। इनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए इन्हे किसी भी समुचित योग्य स्थान पर समायोजित किया जा सकता था।

26.8.15

संलेखना (संथारा) आत्महत्या नहीं, आत्मसाधना है


 -गणि राजेन्द्र विजय:-

जैन धर्म की सबसे प्राचीन आत्म उन्नयन की परम्परा है संथारा (संलेखना)। इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है और इसे अपराध घोषित किया है। जबकि संथारा आत्महत्या नहीं, आत्मसाधना है। संथारा एक अहिंसक और आध्यात्मिक साधना पद्धति है इसलिए इसके समर्थन में होने वाले उपक्रम भी अहिंसक एवं आध्यात्मिक ही होने चाहिए। मनुष्य जीवन निवृत्ति प्रधान जीवन है। निवृत्तिमूलक प्रवृत्तियां सांसारिक एवं शारीरिक विषय भोगों से अनासक्त/विरक्त और रत्नत्रय के संवर्द्धन का हेतु होने से भव भ्रमण करने में समर्थ कारण हैं।

विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन सीज

रमेश सर्राफ धमोरा
झुंझुनू,25 अगस्त। राजस्थान हाइकोर्ट के आदेश की पालना में पुलिस एवं
प्रशासन ने मंगलवार को जिले के पचेरीकलां गांव स्थित सिंघानिया
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन को सीज कर दिया है। पुलिस व प्रशासन की
संयुक्त रूप से हुई कार्रवाई के दौरान विवि परिसर में भारी संख्या में
पुलिस जाब्ता तैनात रहा। प्रशासनिक भवन सीज होने से विवि में अध्ययनरत
करीब छह हजार विद्यार्थी प्रभावित होंगे।

फर्जी मुकदमों के खिलाफ एक सितम्बर से लोकतन्त्र बचाओं अभियान

पिथौरागढ़, 26 अगस्त। ढ़ाई वर्शो से गोरीनदी पर पुल का इन्तजार कर रही गोरीपार क्षेत्र की जनता की अगवाई कर रहे भाजपा नेताओं के खिलाफ किये गये फर्जी मुकदमें की आग को भाजपा ठण्डा नहीं होने देना चाहती। भाजपा ने इसके लिए कांग्रेस पर करारा प्रहार करने के लिए अपनी रणनीति बना ली है। भाजपा मुख्यमन्त्री की विधान सभा में लोकतन्त्र बचाओं अभियान चला कर मुख्यमन्त्री पर निषाना साधेगी। भाजपा एक सितम्बर को मुनस्यारी में धरना-प्रदर्षन और सभा कर इसकी षुरूआत करेगा। अभियान चलाकर विधान सभा के 159 ग्राम पंचायतों में इसी तरह के कार्यक्रम होंगे।

शिक्षा को गिरवी रखने की भगवा तैयारी

- सुधांशु बाजपेयी- 

शिक्षा ही वो सीढ़ी है जिसके द्वारा वर्तमान समाज मे कोई आगे बढ़ सकता,सम्मानजनक जीवनयापन और रोजगार के बारे मे सोच सकता है, मगर जब शिक्षा कमोडिटी बन जाए तो स्वभविक ही है की वो सीढ़ी सिर्फ समर्थ लोगो के लिए ही होगी ! यू तो भारत मे शिक्षा के बाजारीकरण का प्रस्थान बिन्दु 1990 का वो दौर है ,जब शिक्षा को अघोषित रूप से सरकारी दायित्व से बाहर कर बाजार की वस्तु बना दिया गया,देश के दरवाजे उदारीकरण के नाम पर लुटेरी पूंजी के लिए खोल दिये गए ! परंतु आज जब उदारीकरण अपनी चरम अवस्था मे है,और उसे अब समाजवाद का भय भी उतना नही सता रहा,तब वो अपने ही “वेलफेयर स्टेट” के वादे से भी पीछे हट चुका है।

छात्रवृत्ति घोटाले के लिए गड़बड़झाला : एक ही नाम के एक ही कक्षा में 100 से अधिक छात्र!

सेवा में,
आदरणीय मुख्य सचिव, उ०प्र० सरकार
एवं आदरणीय प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग उ०प्र० ,
माननीय मानवाधिकार आयोग, UBI गाजीपुर उ०प्र० |

आप से सविनय अनुरोध है कि "श्री आनंद प्रकाश PMV फतेहउल्लाहपुर गाजीपुर उ०प्र०" में एक ही नाम के एक ही कक्षा में 100 से अधिक छात्रों का भुगतान छात्रवृत्ति के वेबसाइट एवं UBI गाजीपुर की जाँच टीम (दिनांक 21/07/2015 एवं 12/08/2015) के अनुसार हुआ है; जबकि एक ही विद्यालय के एक ही कक्षा में एक ही वर्ष में 100 से अधिक एक ही नाम के छात्रों का होना असंभव है; अतः इस  छात्रवृत्ति प्राप्ति हेतु प्रयुक्त लगभग सभी दस्तावेजों के फर्जी होने की संभावना जबरदस्त रूप में है| इसी प्रकार इसी प्रबंधन द्वारा चलाये जा रहे "बुद्धं शरणं आईटीआई फतेहउल्लाहपुर गाजीपुर उ०प्र०"  में भुगतान की गई छात्रवृत्ति एवं शुल्क की भरपाई की रक़म जो दी गई है वह अमर उजाला (लखनऊ) के दिनांक 19 मई 2015 के अनुसार, सभी  छात्र फर्जी थे और इन सभी छात्रों का सम्पूर्ण विवरण उ०प्र० के छ्त्रवृत्ति की वेवसाइट पर भी मौजूद है|


23.8.15

सीबीआई को एक पत्र

सोसायटी फॉर एजुकेषन डेमोक्रेसी मध्यप्रदेश

श्रीमान् प्रभारी अधिकारी
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो
(सी.बी.आई.)
केम्पस भोपाल, म.प्र.

विषय - एस टी एफ द्वारा व्यक्तियों को दण्ड से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा।

सेवा में,

महोदय, विनम्र निवेदन है कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो द्वारा जबसे अनुसंधान अपने हाथ में लिया है 93 नई एफ.आई.आर. दर्ज की गई। उक्त संदर्भ में इस प्रकार निवेदन है कि -

ऐसी राजनीति देश के लिए घातक... सावधान...

Baljeet Kumar

क्या भारत को अब 1974 की राजनीति के सहारे जीना पड़ेगा, कहीं ये पष्चिम देषों की साजिष तो नहीं ? हां आप सही सुन रहे हैं, भारत को और 20 साल पीछे ढ़केलने की साजिष चल रही है और भारत इसकी चपेट में आ चुका है और भारत की मीडिया इसके इस्तेमाल के लायक भी बन रही है, षायद मीडिया इसको न माने और जिम्मेदारी का हवाला देकर लोगों को यकीन दिलाने में कामयाब भी हो जाये, लेकिन ये भी सत्य है। इस राजनीति को विस्तार से बताने से पहले मीडिया से एक छोटा सा सवाल है.... क्या एक आंदोलनकारी जिसका जमीन से कोई लेना देना या हित न हो और 1974 की लड़ाई, जो भारत के संदर्भ में भारतीयों के हित में था, 2011 में उठाना कितना प्रासांगिक था, जबकि भ्रष्टाचार विकास में बाधक बन सकती है, तो हम विकास में भ्रष्टाचार की बात क्यों नही करते हैं किसी खास की बात क्यों करते हैं ? भ्रष्टाचार की बात तो दूर अब हम मौलिक अधिकार की बात को भी भ्रष्टाचार बताने लग गये, जो कभी बहस का मुद्वा था ही नही, बहस का मुद्वा संजीदगी से बनाया गया। स्वास्थ्य, षिक्षा, पानी, और बिजली जरूरत की चीजें हैं, जो सबको चाहिये, दिल्ली में यह समस्या वर्षों से है, सुलझाया जा सकता है, लेकिन इसे ही मुद्वा बनाया गया।

पाकिस्तान की पैंतरेबाज़ी

priyank dwivedi 

आखिरकार पाकिस्तान जो चाहता था वही हुआ। भारत-पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच होने वाली मीटिंग रद्द हो ही गई। पाकिस्तान ने इस मीटिंग को रद्द करने के कई असफल प्रयास किए जिसे वो कर सकता था और अपनी इज्जत भी बचा सकता था। लेकिन उसकी हर एक चाल पर भारत ने भी नई चाल चल दी और पाकिस्तान को उसके ही जाल में फंसा दिया। आखिर थक हारकर पाकिस्तान ने अपने एनएसए सरताज अजीज को भारत जाने से मना कर दिया।

Biography of Dr. Johanna Budwig


I gladly announce that Biography of Dr. Johanna Budwig is published in Health of India as Cover Story. Definitively Budwig Protocol is a miracle cure for cancer with documented 90% success if you follow this treatment perfectly and religiously. This treatment targets on prime cause of cancer.
Prime cause of Cancer is oxygen deficiency in the cells. Two factors are essential to attract oxygen in the cells: 1- Sulfur containing protein (found in cottage cheese) and 2- some unknown fat which nobody could identify until 1949 when Dr. Budwig developed paper chromatography technique to identify fats. These fats were Alpha-linolenic acid and linoleic acid found abundantly in FLAX OIL. Thus she developed Cancer therapy based on Flax oil and cottage cheese. I shall soon give you link to download this file.

Click here to download

Dear Friends,
If anybody wants to have hard copy of this issue, you may get from Mr. Mohit chaturvedi on his mobile (09314937709 or 09309291100) or email (dietvictuals@gmail.com). Cost is Rs. 60/- + courier, if applicable. In Jaipur no courier charges.Thanks. Dr. O.P.Verma

  • Comments on FB
  • Brent Wilcox im telling you this lady was WAY WAY WAY AHEAD OF HER TIME...the body was set up to heal itself...Dr. Budwig understood this to be true...i have researched her and the Budwig Center, this proves that cancer is curable WITHOUT chemotheraphy!!!
    12 hrs · Unlike · 9
  • Inge Kalkhoven I agree Brent
    11 hrs · Edited · Unlike · 1
  • Kelly Madsen Holmes I Love Her!!! I am so Grateful for her, she's Awesome!!!
    11 hrs · Unlike · 4
  • Kelly Madsen Holmes Great job on cover story !!
    6 hrs · Unlike · 1
  • Om Verma Friends, the cover story includes her biography, some quotes, protocol in brief, some testimonials, biography of Mr Lothar Hirneise and 5 important herbs used in Cancer e.g. Dandelion, Mulberry, Milk Thistle, Stinging Nettle and Essiac tea
    2 hrs · Like
  • Om Verma Even cover page looks awesome. It is for the first time thart Budwig appears on cover page of an Indian magazine. How thrilled and excited I am.!!!
    2 hrs · Like
  • Om Verma I definitely agree with Brent Wilcox. In my opinion Budwig was the best scientist of the era. It is very sad that no body worked on Quantum Biology after her demise.

21.8.15

यूँ ही नहीं बना मैं रवीश कुमार का प्रशंसक

पत्रकारिता में गिने चुने नाम हैं जिन्हें मै पसंद करता हूँ उन्ही में से एक नाम है रवीश कुमार, कल शाम को काफी थका हुआ था टेलीविजन खोला तो रवीश सर को देखा कुछ आम से दिखने वाले चेहरों के साथ वो भी हवाईअड्डे पर, कार्यक्रम देखा तो पता चला कि एनडीटीवी व स्पाईस जेट की साझा मुहिम से 16 परिवारों को पहली बार हवाई यात्रा करायी जिसमे हर उम्र के लोग शामिल थे।


अस्सोकॉम, इंडिया और यू.के की ग्रेन एंड फीड मायलिंग टेक्नोलॉजी नाम संस्था ने मिलकर किया ग्लोबल माइलिंग कॉन्फरेंस का आयोजन

हैदराबाद के होटल ताज डेक्कन में ग्लोबल माइलिंग कांफ्रेंस का आयोजन किया गया I वर्ष 2050 तक 9 बिलियन लोगो को खाद्य सुरक्षा के लिए संतुष्ट करना ही इस कार्यक्रम का एजेंडा था I  गुणवत्ता के उत्पादनों को माइलिंग तकनीक के ज़रिये बढ़ावा देना इस कार्यकम की थीम रखी गई थी I कार्यक्रम का संचालन ग्रेन एंड फीड मायलिंग टेक्नोलॉजी, यू.के और अस्सोकॉम, इंडिया ने किया I

एक शाम लखनऊ की संस्कृति और कला के नाम : मिया मल्हार, कत्थक ,अवधी लोकगीत और सावन के बेहतरीन गीतों की हुई प्रस्तुति

लखनऊ : अवध अपने विकास पथ पर न जाने कितने ही कला जगत ,साहित्य ,रंगमंच के क्षेत्र में कई संस्थानों को जन्म दिया है ,उसी श्रृंखला में एक और नाम जुड़ा " कला स्रोत " ,जो अपनी सालगिरह 9  से 23  अगस्त तक  मना रहा है इसी लड़ी में 16 अगस्त को सांस्कृतिक संध्या " शाम - ए - इनोवेशन "के नाम से प्रस्तुत किया गया ,जिसमे सभी कलाकार इनोवेशन फॉर चेंज के थे ,इस सांस्कृतिक संध्या का उद्धघाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर संगीता शर्मा ( सामाजिक कार्यकर्ता एवं कॉउंसलर ,चाइल्ड लाइन लखनऊ ) ने किया ,

20.8.15

सिटी बस में कन्डक्टर ने यात्रियों से की अभद्रता, नहीं दिया टिकट

सेवा में
संपादक महोदय,

विषय: सिटी बस में कन्डक्टर ने यात्रियों से की अभद्रता, नही दिया टिकट

-बस तेरे बाप की है जो टिकट बनाऊँ...
-रूट नं0 23 की बस के कन्डक्टर ने यात्रियों से की अभद्रता...

महोदय मैं आज दिनांक 17/08/2015 को अपने आफिस के लिए 3.35 बजे सिटी बस (रूट नं0 23) यूपी 32 डी एन 0687 से निशातगंज से सवार हुए, सवार होने के तुरंत बाद मैनें उक्त बस के कन्डक्टर से जीपीओं तक का टिकट बनाने के लिए 5.00 रुपये दे दिया।