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26.5.18

हिन्दी गजल और दुष्यंत कुमार

डॉ.सौरभ मालवीय

हिन्दी गजल हिन्दी साहित्य की एक नई विधा है. नई विधा इसलिए है, क्योंकि गजल मूलत फारसी की काव्य विधा है. फारसी से यह उर्दू में आई. गजल उर्दू भाषा की आत्मा है. गजल का अर्थ है प्रेमी-प्रेमिका का वार्तालाप. आरंभ में गजल प्रेम की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम थी, किन्तु समय बीतने के साथ-साथ इसमें बदलाव आया और प्रेम के अतिरिक्त अन्य विषय भी इसमें सम्मिलित हो गए. आज हिन्दी गजल ने अपनी पहचान बना ली है. हिन्दी गजल को शिखर तक पहुंचाने में समकालीन कवि दुष्यंत कुमार की भूमिका सराहनीय रही है. वे दुष्यंत कुमार ही हैं, जिन्होंने हिन्दी गजल की रचना कर इसे विशेष पहचान दिलाई.

24.5.18

आजमगढ़ में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन : प्रेम की वंशी गलाकर वज्र अब गढ़ना पड़ेगा...

आज़मगढ़। कृष्ण मुरारी सिंह स्मृति न्यास द्वारा 20 मई को शहर  के एस.के.पी.इंटर कॉलेज के प्रांगण में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। रविवार की शाम 7:00 बजे से शुरू हुआ कवि सम्मेलन सुबह 4:00 बजे तक चला। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रोताओं की तालियों ने कवियों का खूब उत्साहवर्धन किया।

14.5.18

वीरान सूखते पहाड़ों में बूंद- बूंद को तरसते गांव

जब हम बचपन में गांव जाते थे तो गांव बड़ा खुशहाल नजर आता था | चारों तरफ हरियाली, चिड़ियों की चह-चाहट, धार ( खुली जगह ) के खेतों हवा के शोर से सनसनाना रही होती थी | हरे सोने से भरे जंगलों में ग्वाले (चराहे) गाय, बकरियों को जंगल में चराने ले जाते थे | नौले-गदेरों में गांव की ताई, चाची, भाभी, बहन कपड़े धोने, ठंडा पानी भरने आया करती थी | गांव की गलियों में नन्हें-नौनिहाल का शोर गूंजता था | यदि आपसी मतभेद हटा दिए जायें तो सच पहाड़ की खुशहाली की परिकल्पना की जा सकती है |

बनारस के कम्युनिस्ट कार्यकर्ता देवब्रत सेन को मारक कैंसर

देवब्रत सेन कम्युनिस्ट कार्यकर्ता हैं और बनारस में रहते हैं। उन्हें मारक कैंसर है। हिमाचल के धर्मशाला स्थित तिब्बती वैद्य के यहाँ से उनका उपचार चल रहा है। अभी कल ही तीन महीने की दवा लेकर लौटा हूँ। साथियो, बनारस के उनके सभी कॉमरेडों, शुभचिंतकों की चाहत और राय दोनों है कि मैक्लॉडगंज स्थित तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा के मुख्य वैद्य से सेकंड ओपिनियन भी ले ली जाए।

किसी अनजान लड़के की माँ भी बिल्कुल वैसी है....जैसी तुम्हारी माँ है, हैप्पी मदर्स-डे

आज मदर्स डे है, मातृ दिवस । सुबह से शोशल मीडिया पर माँ की फोटों के साथ बेटों की तस्वीरें वाॅल पर छा रही हैं । माँ को नमन, उसके प्रति श्रद्धा दिखाती ये पोस्ट माँ का ‘मान’ बढ़ाती नजर आती हैं । और क्यों न हो ? माँ होती ही ऐसी है, जिसके प्रति सर अपने आप झुक जाता है । ये पश्चिमी देशों का त्योहार है ऐसा लोग बोलते हैं, हिन्दुस्तान में तो रोज माँ की पूजा की जाती है । सच में की जाती है क्या..? अब नहीं... पहले की जाती रही होगी । छोटे बच्चांे को नैतिक शिक्षा की किताब का पहला पाठ माता-पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लेने का हुआ करता था । सनातन धर्म की हर किताब माँ को पहला गुरू बताकर उसका सम्मान बढ़ाती है, वह शक्ति पुंज होकर देवी माँ के रूप में पूज्यनीय है । फिर भी क्या हम रोजाना पैर छूना तो दूर माँ के पास कुछ पल बैठकर उसकी खैर खबर रखते हैं...? अगर रखते हैं तो वृद्धाश्रमों में किनकी माँ मजे में हैं?

अभी तुम इश्क़ में हो का लोकार्पण...

स्पंदन द्वारा विचार संगोष्ठी एवं लोकार्पण समारोह


ललित कलाओं के प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं शोध की अग्रणी संस्था स्पंदन द्वारा सुपरिचित कथाकार, उपन्यासकार, कवि पंकज सुबीर के बहुचर्चित ग़ज़ल संग्रह ‘‘अभी तुम इश्क़ में हो’’ पर विचार संगोष्ठी का आयोजन इ़कबाल लायब्रेरी सभागार में किया गया।

7.5.18

चुनाव 2019 की तैयारी और मेरी सोच

इस वक्त ज़ोरो शोरों से 2019 के चुनाव की तैयारी की जा रही है। ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या बाजी भाजपा मारती है या कांग्रेस। या फिर सपा और बसपा की गठबंधन वाली सरकार???? जहां एक ओर चुनाव 2019 के लिए रैलियों की तैयारी शुरू हो गयी है तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष मोदी के 4 साल का हिसाब किताब बताकर भाजपा पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं।

20.4.18

पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं के शीघ्र ख़ुलासे की माँग

फ़तेहपुर। जनपद में पत्रकारों के साथ एवम् अख़बार के कार्यालयों में हो रही लगातार चोरी आदि की घटनाओं को लेकर नाराज पत्रकारों ने आज फ़तेहपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री नागेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में ज़िला अधिकारी श्री कुमार प्रशान्त और फिर पुलिस अधीक्षक श्री राहुल राज से उनके कार्यालयों में मिलकर ज्ञापन सौंपा। इसमें फ़तेहपुर प्रेस क्लब (राष्ट्रीय सहारा) कार्यालय में दो दिन पूर्व हुई चोरी की घटना के साथ-साथ कई अन्य घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इनके शीघ्र ख़ुलासे और विभिन्न समाचार पत्रों के कार्यालयों मे सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराये जाने की पुरज़ोर माँग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- छह माह में मजीठिया के मामले निपटाएं, देखें फैसले की कापी






एक खबर और दो अखबारों का कवरेज : जमीन-आसमान का अंतर



अभिजीत सरकार का लैटेस्ट 'सरकारनामा' देखने के लिए नीचे की तस्वीर पर क्लिक करें


आईपीएस अफसरों के कैडर ट्रांसफर की लिस्ट देखें



जज लोया की मौत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रवीश कुमार की प्रतिक्रिया पढ़ें


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जज लोया मौत प्रकरण में जांच करा लेना बेहतर होता : रवीश कुमार

11.4.18

कात्यायनी चैनल ला रहा है दो नए कार्यक्रम ‘जयंति शुक्राचार्य‘ और ‘जगदम्बा-कहानी शक्ति पीठों की‘


नई दिल्ली। सतत् 9 वर्षों से कात्यायनी चैनल को प्रसिद्ध धार्मिक चैनल के तौर पर देखा गया है। मां कात्यायनी और संतबाबा नागपाल के आशीर्वाद से चैनल एक नई उपलब्धि और मीडिया जगत में बड़े बदलाव के साथ दो नए कार्यक्रम ला रहा है। अब तक आप धार्मिक धारावाहिक सिर्फ एंटरटेनमेंट चैनल्स पर ही देखते आए हैं, लेकिन कात्यायनी चैनल दो धार्मिक धारावाहिक ‘जयंति शुक्राचार्य‘ और ‘जगदम्बा- कहानी शक्ति पीठों की‘ लाकर मीडिया जगत में एक नए पड़ाव की नींव रखने जा रहा है।

गैरसैण राजधानी का मुद्दा राजनीतिक भी है और जनभावना भी


जनपक्षधर समाचार साइट जनज्वार डॉट कॉम द्वारा रविवार, 8 अप्रैल 2018 को हल्द्वानी के मेडिकल हॉल स्थित लैक्चरर थिएटर हॉल में 'गैरसैण राजधानी की मांग जनभावना या राजनीतिक मुद्दा' विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। वरिष्ठ पत्रकार और गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष चारु तिवारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति के संरक्षक राजीव लोचन शाह, उक्रांद के पूर्व अध्यक्ष और विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता पीसी तिवारी, हेम आर्य और पूर्व छात्र नेता और युवा कांग्रेस नेता ललित जोशी ने संबोधित किया।





हर असम्भव में संभव तलाशना ही एक शिष्य का कर्तव्य है : शेखर सेन


नयी दिल्ली : “जो असम्भव लगता हो, उसे संभव करने के तरीके तलाशना ही एक अच्छे शिष्य की विशेषता है, जिस तरह तीर को दूर तक फैंकने के लिए धनुष की प्रत्यंचा को उतना  ही  पीछे खिंचा होता है, उसी तरह नृत्य कला में अपने गुरु, उनके गुरु और उनके गुरु के  कार्यों को जानना कलाकार को आगे ले जाता है, जितना अतीत का अन्वेषण कर्नेगे उतना ही आगे जाएंगे .”’ यह उदगार थे कत्थक केंद्र के अध्यक्ष, प्रख्यात रंगकर्मी श्री शेखर सेन के, वे दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित कत्थक केंद्र में सम्पन्न , डॉ चित्रा शर्मा की पुस्तक ‘गुरु मुख से’ के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे .

न्यूज ट्वेंटी फोर चैनल पर साइबर क्राइम पर आधारित कथाएं 'जाल' का प्रसारण शीघ्र

 


बी ए जी फिल्म्स नेटवर्क, जल्द ही एक खास कार्यक्रम 'जाल ' लांच करने जा रहा है, जो हिंदुस्तान में किसी भी न्यूज़ चैनल पर आने वाला पहला ऐसा शो है, जो साइबर क्राइम और साइबर सुरक्षा पर आधारित है.ये शो इंटरनेट पर होने वाले उन खौफनाक अपराधों की सच्ची घटनाओं पर आधारित है , जो देश के अलग अलग हिस्सों में लोगों के साथ हुए. ये शो अप्रैल 13, रात 9:55 मिनट पर, News24 चैनल पर लांच होगा, जहाँ इंटरनेट के खतरनाक पहलु से लोगों को रूबरू करवाया जायेगा, और साथ ही इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के तरीके भी कहानियों के ज़रिये बताये जायेंगे.

7.4.18

साहित्य में कालजयी हैं पंडित माखनलाल चतुर्वेदी : अच्युतानंद मिश्र

नोएडा, 7 अप्रैल। माखनलाल चतुर्वेदी सदैव अपनी साहित्यिक एवं पत्रकारीय कृतित्व के कारण जनमानस के अवचेतन में मौजूद रहेंगे। पत्रकारिता, राजनीति, साहित्य और शिक्षण के साथ ही उनका राष्ट्रीय दायित्व बोध भी अवलंबित होता है। पंडित माखनलाल की पत्रकारिता एक आंदोलनकारी पत्रकारिता के रूप में थी। सर्कुलेशन बढ़ाने, विज्ञापन छापने तथा धनोपार्जन के लिए पत्रकारिता धर्म से समझौता न करना उनकी प्रवृत्ति थी। उक्त विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर में आयोजित राष्ट्रीय संविमर्श में व्यक्त किए।  पं. माखनलाल चतुर्वेदी की 129 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श का विषय ‘पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का साहित्यिक और पत्रकारीय अवदान’ था । 

6.4.18

बच्चों के आत्महत्या की ओर बढ़ते कदम

-ओम प्रकाश उनियाल

आज के दौर में बच्चे इतने संवेदनशील हो चुके हैं कि छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव व अवसाद का शिकार हो जाते हैं। यहां तक कि आत्महत्या करने जैसा कदम उठा रहे हैं। क्या कारण हैं जो बच्चे इस प्रकार के कदम उठाते हैं। अक्सर ज्यादातर मां-बाप आधुनिकता का लबादा ओढ़े हुए हैं। बच्चा पैदा हुआ नहीं कि उसका भविष्य बनाने पर तुल जाते हैं। अढाई-तीन की आयु से शुरू हो जाता है बोझ लादना। इस उम्र में थोप दी जाती है पढ़ाई। घर आकर रिवीजन का सिलसिला। घर में कोई आया है तो उसके सामने भी शुरु हो जाते हैं- 'बेटे ए बी सी डी सुनाओ...फलां पोयम सुनाओ....डांस दिखाओ.....गाना गाओ...' जैसी बातों का दबाव डालते रहते हैं।