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8.6.08

भास्कर इलेवन के खिलाड़ियों ने दिखाया जौहर

भास्कर इलेवन ने मीडिया इलेवन पर शानदार जीत दर्ज की

रविवार को आर्य कालेज के मैदान में हुए एक बेहतरीन मुकाबले में भास्कर इलेवन ने मीडिया इलेवन पर 18 रनों से शानदार जीत दर्ज की। महीने भर से चल रहे तीखे वाकयुद्ध के बाद आज मैदान पर जौहर दिखाने की बारी थी और भास्कर के खिलाड़ी इस पैमाने पर पूरी तरह खरे उतरे। भड़ासियों को बता दें कि यह मैच भास्कर इलेवन को चैलेंज करके रखा गया था। विपक्षियों ने जीत का दावा भी पहले ही ठोक दिया था। भास्कर के रणबांकुरों ने कैप्टन आलोक सिंह रघुवंशी की अगुवाई में मीडिया इलेवन के दावें की हवा निकाल दी। यह भी गौर करने वाली बात है कि विपक्षी टीम के कुठ खिलाड़ी भास्कर परिवार के ही सदस्य हैं। उन खिलाड़ियों ने भी भास्कर इलेवन को हराने के लिए पुरजोर कोशिश की, लेकिन भास्कर परिवार के सहयोग से भास्कर इलेवन की टीम सभी अपेक्षाओं पर खरी उतरी। बता दें कि विपक्षी टीम ने विभिन्न टीमों से हुए मुकाबले में लगातार सात मैचों में जीत दर्ज की है। इसी घमंड में उन्होंने भास्कर इलेवन को चैलेंज कर दिया। भास्कर इलेवन ने इस चैलेंज को कबूलते हुए उनके ताबूत में कील ठोक दी। विपश्री टीम के खिलाड़ी भास्कर के रणबांकुरे के जौहर देखकर चारों खाने चित हो गए। आज सुबह टास जीतकर मीडिया इलेवन के कप्तान मोहित ने पहले फील्डिंग करने का निर्णय लिया। ओपनर बल्लेबाज कप्तान आलोक सिहं रघुवंशी और दिनेश भट्ट ने मीडिया को शानदार शुरुआत दी। मैच के दूसरी ही गेंद पर कप्तान ने स्टेट पर शानदार चौका जमाया। मीडिल आर्डर के बल्लेबाज सन्नी (95), राहुल, नितिन यादव ने शानदार बल्लेबाजी कर मीडिया इलेवन के लिए 20 ओवरों में 201 रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में खेलते हुए मीडिया इलेवन के ओपनर बल्लेबाजों मोहित और सुनील ने शानदार शुरुआत दी। इन दोनों खिलाड़ियों के आउट होने के बाद टीम हतोत्शाहित हो गई। हालांकि मीडिल आर्डर के बल्लेबाज तरसेम दियोगण ने अच्छी बल्लेबाजी कर अपनी टीम को विजय लक्ष्य के नजदीक पहुंचा दिया, लेकिन राहुल श्रीवास्तव, आकाश रावल, सन्नी, दिनेश ने अपनी चतुराई भरी गेंदबाजी से निचले कम के बल्लेबाजों को झका दिया और मीडिया इलेवन को 18 रनों से मात दी। अंत में भास्कर इलेवन के खिलाड़ी मैदान पर जीत के नारे लगाते हुए अपने दफ्तर पहुंचे और दफ्तर के सामने भास्कर परिवार के लोगों ने कप्तान सहित सभी खिलाड़ियों का स्वागत किया।

टीम- आलोक सिंह रघुवंशी (कप्तान), नितिन यादव (उपकप्तान), दिनेश भट्ट, राहुल श्रीवास्तव, आकाश रावल, सन्नी, महेश, प्यार सिंह, अमित, मुकेश, सुनील।
मैच जीतने पर भास्कर के स्थानीय संपादक राजीव सिंह, सिटी चीफ कुमार अभिमन्यु, विशेष संवाददाता अशोक सिंघी, योगेंऱद भदौरिया, सिटी डेस्क इंचार्ज नवीन गुप्ता, सीनियर सब एडिटर अनिल भारदाज, मनीष सिंह, चीफ फोटोगाफर कुलदीप काला ने विजयी टीम के सदस्यों को शुभकामनाएं दी।

29.5.08

तुम मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी साबित करो वरना मैं तुम्हें कालिया-कमीना-फादरचोद कहूंगा

दिल्ली का कालिया दैत्य अपने बुने जाल में धंसता चला जा रहा है। यकीं न हो तो नीचे के दोनों प्वाइंट्स पर नजर डालिए....

नंबर एक
एनडीटीवी के बैनर का दुरुपयोग करने का सिलसिला अविनाश अब भी जारी रखे हुए है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और एनडीटीवी प्रबंधन से इसे स्वतः संज्ञान में लेने का अनुरोध करते हैं। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि ....

कालिया ने जो मेल दिल्ली पुलिस के लिए तैयार की है और हम लोगों को डराने के लए भेजी है, उसमें मुद्दा तो ब्लागिंग से जुडे़ झगड़े का है लेकिन उसने अप्लीकेशन में अपना काम और पद एनडीटीवी का दिखाया है, मोहल्ला और माडरेटर का नहीं दिखाया है। ये दोगलापन है। वैसे तो आप दिन भर मोहल्ला मोहल्ला और माडरेटर माडरेटर और ब्लाग ब्लाग चिल्लाएंगे, जब खुद पर पड़ेगी तो पुलिस के पास एनडीटीवी का बैनर लेकर जाएंगे। यह बताता है कि कालिया अंदर के कितना दोहरा, खोखला और धूर्त टाइप प्राणी है।

जहां जिस तरह काम बने, बना लो के फंडे पर जीने और सोचने वाला यह बंदा एक और बड़े फंदे में फंस गया है।

अतीत में भी अविनाश ने एनडीटीवी के बैनर के सहारे पत्रकारों को नौकरी देने का झांसा देते हुए उन्हें अपने ब्लाग पर लिखने के लिए बाध्य करता रहा है। यह सरासर किसी संस्थान की प्रतिष्टा का दुरुपयोग है। हम इस कृत्य की घोर निंद करते हैं और एनडीटीवी प्रबंधन से ऐसे भेड़िए टाइप आदमी के बारे में छानबीन करने की गुजारिश करते हैं।

((अपने भड़ासी साथियों और शुभचिंतकों से अनुरोध है कि वो एनडीटीवी के कर्ताधर्ता प्रणय राय या अन्य किसी शीर्षस्थ अधिकारी की मेल आईडी मुझ तक मेल से पहुंचाएं। मेरी मेल आईडी है yashwantdelhi@gmail.com))


नंबर दो
वो बार बार मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी बता रहा है। मैं इस मामले में लगातार चुप हूं क्योंकि मैं इसमें कुछ भी बोल के अपने लोगों को तमाशा नहीं बनाना चाहता, अपने लोगों पर कीचड़ नहीं उछालना चाहता। जितनी भी बदनामी होनी है, वो सिर्फ मेरी हो ले। ये मेरा बड़प्पन या त्याग नहीं, ये मेरी सहज वृत्ति है जिसे हमेशा से जीता आया हूं और आगे भी बरकरार रखूंगा।

तो मैं कह रहा था कि हाहाकार मचाकर बंदर कूद गया लंकर के अंदर वाली स्टाइल में कालिया जिस तरह लगातार इस मुद्दे को गलत-सलत तरीके से उछालकर और शब्दों के मैथुन से भांति भांति के एंगिल पैदाकर मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, उसमें वो अब खुद ही फंसने वाला है।

मेरा चैलेंज है कि वो मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी ठहराए वरना मैं उसका नाम सदा के लिए कालिया कमीना फादरचोद रख दूंगा। वो बताए कि उसने किस आधार पर मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी कहा है। मेरी चुप्पी का मतलब मेरी कमजोरी नहीं, मेरी मजबूरी नहीं, मेरा मनुष्यता में यकीन है जिसके नतीजे में हमेशा मेरे हिस्से दुख, बुराई और दर्द ही आते रहे हैं और इन्हीं से सींचा गया हूं मैं और इसी सिंचाई से अंदर की मजबूती आती है।


डा. रूपेश, यशवंत, रजनीश के झा, हृदयेंद्र प्रताप सिंह, मनीष राज से तुम्हारा कोई निजी झगड़ा नहीं है, ये वैचारिक झगड़ा है और ये केवल पांच से नहीं बल्कि भड़ास के 315 सदस्यों और लाखों पाठकों से है।


तुम्हारी कमीनगी अतीत में कइयों के द्वारा खोली जा चुकी है, लोगों का तुम पे भरोसा नहीं है क्योंकि तुम्हारा हर कदम अपने स्वार्थ को केंद्र में रखकर होता है। अगर तुमने जीवन में इमानदार लड़ाइयां लड़ी होतीं तो हम सारे भड़ासी खुद ब खुद तुम्हें अपना नेता मान लेते लेकिन तुम्हें क्या पता कि इमानदारी किसे कहते हैं, सहजता किसे कहते हैं, सरलता किसे कहते हैं। तुम अभी जीना सीख ले बेटा।

अभी तो तुम एनडीटीवी के बैनर के चलते उछल रहा है, सोच वो दिन जब तुम्हारे उपर कोई बैनर वैनर न होगा, सिर्फ बर्र के छत्ते होंगे और उस छत्ते पर ढेला हम लोग मारेंगे।


तुम्हारे पास 24 घंटे का वक्त है अविनाश। या तो तुम अपनी सभी पोस्टों से बलात्कार के प्रयास के आरोपी शब्द को हटाओ या फिर तुम कालिया कमीना फादरचोद कहे जाने के लिए व अन्य दुष्परिणाम झेलने के लिए तैयार रहो।

मुझे कानून की धाराओं का नहीं पता। न कभी पता करने की जरूरत पड़ी। पर मुझे इतना पता है कि कालिया मुझे उखाड़ने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है और कोई भी लैंग्वेज इस्तेमाल कर सकता है।



नंबर तीन
अविनाश, पुलिस के नाम का इस्तेमाल करके डराना भी एक अपराध है। तुम्हें शायद नहीं पता। हमारे पास सारे सबूत इकट्ठे हो रहे हैं। तुमने गीदड़भभकियों के जरिए सामने वाले को डराने का खेल रांची, पटना और देवघर में खेला होगा जिससे लोग डरे भी होंगे। या तो फिर तुमने दिल्ली में सरल सहज व संवेदनशील बुद्धिजीवियों से पंगा लिया होगा जो तुम जैसे थेथर, नंगे और कुंठित पंगेबाज से भिड़ने में डरते होंगे। इस बार ही तुम असल लोगों से भिड़े हो। तुम्हें अगर फाटा पायजामा साबित करते हुए सड़क पर न टहलवा दिया तो हम लोगों का नाम भी हरामी द ग्रेट नहीं।


जय भड़ास
यशवंत

(....भाई भड़ासियों से माफी के साथ कि मैंने इस मुद्दे पर न लिखने का वादा किया था पर मजबूरन व आत्मरक्षार्थ मुझे ये जंग लड़नी पड़ रही है। उम्मीद है अन्यथा न लेंगे और अपना प्यार बनाये रखेंगे)

तुम मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी साबित करो वरना मैं तुम्हें कालिया-कमीना-फादरचोद कहूंगा

दिल्ली का कालिया दैत्य अपने बुने जाल में धंसता चला जा रहा है। यकीं न हो तो नीचे के प्वाइंट्स पर नजर डालिए....

नंबर एक
एनडीटीवी के बैनर का दुरुपयोग करने का सिलसिला अविनाश अब भी जारी रखे हुए है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और एनडीटीवी प्रबंधन से इसे स्वतः संज्ञान में लेने का अनुरोध करते हैं। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि ....

कालिया ने जो मेल दिल्ली पुलिस के लिए तैयार की है और हम लोगों को डराने के लए भेजी है, उसमें मुद्दा तो ब्लागिंग से जुडे़ झगड़े का है लेकिन उसने अप्लीकेशन में अपना काम और पद एनडीटीवी का दिखाया है, मोहल्ला और माडरेटर का नहीं दिखाया है। ये दोगलापन है। वैसे तो आप दिन भर मोहल्ला मोहल्ला और माडरेटर माडरेटर और ब्लाग ब्लाग चिल्लाएंगे, जब खुद पर पड़ेगी तो पुलिस के पास एनडीटीवी का बैनर लेकर जाएंगे। यह बताता है कि कालिया अंदर के कितना दोहरा, खोखला और धूर्त टाइप प्राणी है।

जहां जिस तरह काम बने, बना लो के फंडे पर जीने और सोचने वाला यह बंदा एक और बड़े फंदे में फंस गया है।

अतीत में भी अविनाश ने एनडीटीवी के बैनर के सहारे पत्रकारों को नौकरी देने का झांसा देते हुए उन्हें अपने ब्लाग पर लिखने के लिए बाध्य करता रहा है। यह सरासर किसी संस्थान की प्रतिष्टा का दुरुपयोग है। हम इस कृत्य की घोर निंद करते हैं और एनडीटीवी प्रबंधन से ऐसे भेड़िए टाइप आदमी के बारे में छानबीन करने की गुजारिश करते हैं।

((अपने भड़ासी साथियों और शुभचिंतकों से अनुरोध है कि वो एनडीटीवी के कर्ताधर्ता प्रणय राय या अन्य किसी शीर्षस्थ अधिकारी की मेल आईडी मुझ तक मेल से पहुंचाएं। मेरी मेल आईडी है yashwantdelhi@gmail.com))


नंबर दो
वो बार बार मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी बता रहा है। मैं इस मामले में लगातार चुप हूं क्योंकि मैं इसमें कुछ भी बोल के अपने लोगों को तमाशा नहीं बनाना चाहता, अपने लोगों पर कीचड़ नहीं उछालना चाहता। जितनी भी बदनामी होनी है, वो सिर्फ मेरी हो ले। ये मेरा बड़प्पन या त्याग नहीं, ये मेरी सहज वृत्ति है जिसे हमेशा से जीता आया हूं और आगे भी बरकरार रखूंगा।

तो मैं कह रहा था कि हाहाकार मचाकर बंदर कूद गया लंकर के अंदर वाली स्टाइल में कालिया जिस तरह लगातार इस मुद्दे को गलत-सलत तरीके से उछालकर और शब्दों के मैथुन से भांति भांति के एंगिल पैदाकर मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, उसमें वो अब खुद ही फंसने वाला है।

मेरा चैलेंज है कि वो मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी ठहराए वरना मैं उसका नाम सदा के लिए कालिया कमीना फादरचोद रख दूंगा। वो बताए कि उसने किस आधार पर मुझे बलात्कार के प्रयास का आरोपी कहा है। मेरी चुप्पी का मतलब मेरी कमजोरी नहीं, मेरी मजबूरी नहीं, मेरा मनुष्यता में यकीन है जिसके नतीजे में हमेशा मेरे हिस्से दुख, बुराई और दर्द ही आते रहे हैं और इन्हीं से सींचा गया हूं मैं और इसी सिंचाई से अंदर की मजबूती आती है।


डा. रूपेश, यशवंत, रजनीश के झा, हृदयेंद्र प्रताप सिंह, मनीष राज से तुम्हारा कोई निजी झगड़ा नहीं है, ये वैचारिक झगड़ा है और ये केवल पांच से नहीं बल्कि भड़ास के 315 सदस्यों और लाखों पाठकों से है।


तुम्हारी कमीनगी अतीत में कइयों के द्वारा खोली जा चुकी है, लोगों का तुम पे भरोसा नहीं है क्योंकि तुम्हारा हर कदम अपने स्वार्थ को केंद्र में रखकर होता है। अगर तुमने जीवन में इमानदार लड़ाइयां लड़ी होतीं तो हम सारे भड़ासी खुद ब खुद तुम्हें अपना नेता मान लेते लेकिन तुम्हें क्या पता कि इमानदारी किसे कहते हैं, सहजता किसे कहते हैं, सरलता किसे कहते हैं। तुम अभी जीना सीख ले बेटा।

अभी तो तुम एनडीटीवी के बैनर के चलते उछल रहा है, सोच वो दिन जब तुम्हारे उपर कोई बैनर वैनर न होगा, सिर्फ बर्र के छत्ते होंगे और उस छत्ते पर ढेला हम लोग मारेंगे।


तुम्हारे पास 24 घंटे का वक्त है अविनाश। या तो तुम अपनी सभी पोस्टों से बलात्कार के प्रयास के आरोपी शब्द को हटाओ या फिर तुम कालिया कमीना फादरचोद कहे जाने के लिए व अन्य दुष्परिणाम झेलने के लिए तैयार रहो।

मुझे कानून की धाराओं का नहीं पता। न कभी पता करने की जरूरत पड़ी। पर मुझे इतना पता है कि कालिया मुझे उखाड़ने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है और कोई भी लैंग्वेज इस्तेमाल कर सकता है।



नंबर तीन
अविनाश, पुलिस के नाम का इस्तेमाल करके डराना भी एक अपराध है। तुम्हें शायद नहीं पता। हमारे पास सारे सबूत इकट्ठे हो रहे हैं। तुमने गीदड़भभकियों के जरिए सामने वाले को डराने का खेल रांची, पटना और देवघर में खेला होगा जिससे लोग डरे भी होंगे। या तो फिर तुमने दिल्ली में सरल सहज व संवेदनशील बुद्धिजीवियों से पंगा लिया होगा जो तुम जैसे थेथर, नंगे और कुंठित पंगेबाज से भिड़ने में डरते होंगे। इस बार ही तुम असल लोगों से भिड़े हो। तुम्हें अगर फाटा पायजामा साबित करते हुए सड़क पर न टहलवा दिया तो हम लोगों का नाम भी हरामी द ग्रेट नहीं।


जय भड़ास
यशवंत

(....भाई भड़ासियों से माफी के साथ कि मैंने इस मुद्दे पर न लिखने का वादा किया था पर मजबूरन व आत्मरक्षार्थ मुझे ये जंग लड़नी पड़ रही है। उम्मीद है अन्यथा न लेंगे और अपना प्यार बनाये रखेंगे)