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4.7.08

कुछ यूं मना करूणाकर का बर्थडे

करूणाकर के लिए भागदौड़ में लगे अमित द्विवेदी, जिनके जीवन का फंडा है- किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार, जीना इसी का नाम है.......।
चेहरे पे आई रौनकः डा. रूपेश की त्वरित आयुर्वेदिक थिरेपी के बाद से करूणाकर न सिर्फ भर पेट खा पी रहा है बल्कि दर्द गायब होने से वह जी भर सो रहा है। उससे उसके चेहरे पर अब अनायास मुस्कान आ जाती है और भड़ासियों को देखते ही खिलखिलाने लगता है। ज़िंदगी के प्रति उम्मीदें बढ़ती देख वो अब फिर से जीने का अर्थ तलाशने लगा है।

बाएं से दाएं- डा. रूपेश श्रीवास्तव, करूणाकर मिश्रा, अमित द्विवेदी और यशवंत सिंह।
करूणाकर के साथ कुख्यात भड़ासाधीश :) यशवंत सिंह।
नई उम्मीदों का केक...तुम जियो हजार साल।
हैप्पी बर्थ डे.....करूणाकर एंड कंपनी।
करूणाकर को जादू की झप्पी:) देते मुन्नाभाई:) डा. रूपेश।
करूणाकर को केक खिलातीं अमित द्विवेदी की मां। दोनों के बीच में खिलखिला रहे डा. रूपेश।
अपनी मामी के हाथों केक खाता करूणाकर