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5.7.08

पैसे के लिए नहीं रुकेगा करूणाकर का इलाज, डा. रूपेश मुंबई लौटे

करूणाकर के इलाज के लिए आए डा. रूपेश मंगला एक्सप्रेस से मुंबई के लिए वापस लौटते।
सिलिगुड़ी से रेडियो मिष्टि 94.3 एफएम के वाइस प्रेसीडेंट दिलीप डुग्गर ने कहा है की करूणाकर का इलाज पैसे के लिए किसी कीमत पर नही रुकेगा. डुग्गर जी ने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता करने के साथ ये बताया है कि जब तक करूणाकर स्वस्थ नहीं हो जाता, हम सब मिलकर ये प्रयास जारी रखेंगे. डुग्गर जी के साथ साथ और भी कई ऐसे लोग हैं जो भारत के विभन्न शहरों में रह रहे हैं, वो भी लगातार करूणाकर से फ़ोन में सम्पर्क में हैं। सभी के इस प्रयास ने करूणाकर को जीने की सकारात्मक सोच दे दी है. वो अब किताबें पढता है, टीवी देखता है. लोगों से बातें करता है. कहानियाँ सुनाता है.

डॉक्टर रुपेश आज सुबह मंगला एक्सप्रेस से मुंबई रवाना हो गए हैं. उन्होंने जाते समय स्टेशन से ही करूणाकर से बातें करके सारे परहेज़ और दवाइयाँ कैसी लेनी है, ये समझाते रहे. कल मुंबई जाकर डॉक्टर साहब करूणाकर के लिए दवाइयाँ तैयार करेंगे. लोगों के सहयोग से अब कुछ भी मुश्किल नहीं लगता. ऐसा लगने लगा है भगवान भी एक बार लोगों की सकारात्मकता और दुवाओं पर अपनी मुहर ज़रूर लगायेगा.

-अमित द्विवेदी

राकेश जी ने करूणाकर के लिए 2100/- दिए

प्रवासी संसार के सम्पादक राकेश पाण्डेय जी ने भड़ास पर करूणाकर की दास्तान पढ़कर इस नौजवान की मदद के लिए 2100 रुपये देने की घोषणा की है। राकेश जी 'प्रवासी संसार' नाम की पत्रिका के संम्पादक हैं. यह एकलौती ऐसी हिन्दी पत्रिका है जो प्रवासी भारतीयों के लिए समर्पित है. राकेश जी ने रात को ११ बजे फ़ोन लगाकर कहा कि अमित जी, सबसे पहले मैं इस बच्चे को अपनी तरफ़ से २१०० रूपये दे रहा हूँ जो इसके अकाउंट में पहुंचा रहा है और इसके साथ मैं ये वादा करता हूँ की करूणाकर का इलाज पैसे के कारण किसी कीमत पर नहीं रुकेगा.

करूणाकर, तेरे हौसले को सलाम


(अमर उजाला, नोएडा संस्करण में प्रकाशित)

4.7.08

कुछ यूं मना करूणाकर का बर्थडे

करूणाकर के लिए भागदौड़ में लगे अमित द्विवेदी, जिनके जीवन का फंडा है- किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार, जीना इसी का नाम है.......।
चेहरे पे आई रौनकः डा. रूपेश की त्वरित आयुर्वेदिक थिरेपी के बाद से करूणाकर न सिर्फ भर पेट खा पी रहा है बल्कि दर्द गायब होने से वह जी भर सो रहा है। उससे उसके चेहरे पर अब अनायास मुस्कान आ जाती है और भड़ासियों को देखते ही खिलखिलाने लगता है। ज़िंदगी के प्रति उम्मीदें बढ़ती देख वो अब फिर से जीने का अर्थ तलाशने लगा है।

बाएं से दाएं- डा. रूपेश श्रीवास्तव, करूणाकर मिश्रा, अमित द्विवेदी और यशवंत सिंह।
करूणाकर के साथ कुख्यात भड़ासाधीश :) यशवंत सिंह।
नई उम्मीदों का केक...तुम जियो हजार साल।
हैप्पी बर्थ डे.....करूणाकर एंड कंपनी।
करूणाकर को जादू की झप्पी:) देते मुन्नाभाई:) डा. रूपेश।
करूणाकर को केक खिलातीं अमित द्विवेदी की मां। दोनों के बीच में खिलखिला रहे डा. रूपेश।
अपनी मामी के हाथों केक खाता करूणाकर

2.7.08

रंग लाया प्रयास, पिता ओंकार जेल से रिहा, करूणाकर का इलाज शुरू

कहते हैं इंसानी हौसलों की न कोई सीमा होती है और न कोई दायरा...बस इस बार जो हुआ उसमे नया कुछ नही था जीत थी, महक थी छोटे प्रयासों की बड़ी सफलता की, उम्मीद थी उजाले की...

कैंसर से जूझ रहे करुनाकर और जेल में बंद उनके पिता को न्याय दिलाने के यशवंत सिंह, डॉ रुपेश श्रीवास्तव, अमित द्विवेदी व अन्य ब्लागरों की मुहिम और भड़ास के प्रयासों से जेल में बंद करुनाकर के पिता ओंकार मिश्रा को जमानत मिल गई है...

अपने होनहार बेटे से मिलने के लिए लालायित पिता कल अपने बेटे के जन्मदिन पर उसकी खुशियों में भागीदार बन सकेगा, उसके दुख को साझा कर सकेगा..एक पिता के लिए इससे बड़े गौरव की दूसरी बात क्या हो सकती है...हर बार जब उम्मीदें ख़त्म होती लगती हैं तो लोग भड़ास की तरफ़ रुख करते हैं और हर बार भड़ास के गैर दुनियादार, असमाजिक, कुंठित, बेकार और दूसरे कई अलंकारों से नवाजे गए लोग करिश्मा कर डालते हैं...

''कई लोग जब करुनाकर के मामले में बहुत कुछ होने की उम्मीद खो बैठे थे तब भड़ास ने उम्मीद पालने की जिद पकड़ ली'' और हमारे प्रयासों का जब पहला ही परिणाम आसमान चूमने का हौसला पैदा करता हो तो असफलता की बात इस मंच से करना बेमानी है...

सारी दुश्वारियों को धता बताकर जब रुपेश जी मुंबई से दिल्ली पहुँच गए हैं और देखते ही देखते कई मदद करने वाले हाथ साथ जुड़ गए हैं तो करुनाकर के साथ कुछ ग़लत होगा, ऐसा कोई मूर्ख और अज्ञानी ही सोच सकता है...

कहते हैं दुआओं में असर होता है...और अब तो असर दिख भी रहा है....


करुनाकर के पिता जेल से छूट गए हैं, जमानत पर। करुनाकर का जीवन आयुर्वेद के पुरोधा के हाथ में है। जन्मदिन पर परिवार के सारे बुजुर्गों का आशीर्वाद है और दुआ के लिए भड़ास के ३६० हाथ हर वक्त तैयार हैं...

क्या अब भी किसी को भड़ास के इस अभियान की सफ़लता पर शक है...ये वक्त है जश्न मनाने का है...करुनाकर को बधाइयां देने का...साथ ही उन सबको विनम्र धन्यवाद देने का जो इस मुहिम में करुनाकर के साथ डटकर खड़े रहे...

''जन्मदिन की पूर्वसंध्या पर करुनाकर को ह्रदय की असीम गहराइयों से हार्दिक बधाइयां और बेहतर जीवन की शुभकामनाएं''...

''हृदयेंद्र''

हर माह करूणाकर के एकाउंट में एक निश्चित राशि पहुंचाएंगे

ब्लोगर साथियों को प्यार और दुलार....

एक हफ्ते वाइरल फीवर से निपटने के बाद आज भड़ास देखने का मौका मिला...इस बीच बहुत कुछ हो गया जो वाकई नही होना चाहिए था...

एक होनहार नौजवान का असमय कैंसर जैसी बीमारी की चपेट में आना...अपने बेहद प्रिय रुपेश भाई साहब का सभी ब्लोगरों से मदद के लिए गुहार लगाना ...ये सब कुछ वैसा ही था जिसे इस रूप में कभी नहीं देखना चाहता था...लेकिन नियति शायद इसे ही कहते हैं...तो अग्रज रुपेश जी के इस अभियान में हर तरह से साथ हूँ... अगले २४ घंटे में करुनाकर को आर्थिक मदद मैं भेज दूंगा...रही बात उसके जन्मदिन की उसे भी शानदार तरीके से मनाया जायेगा...और हर माह एक नियत राशि करुनाकर के अकाउंट में पहुंचाता रहूँगा...ये वायदा है...

इस बीच जब हम कल करुनाकर का जन्मदिन पूरे जोश-खरोश के साथ मनाने जा रहे हैं तो इस वक्त हम अगर भड़ास और नए ब्लागरों के मार्गदर्शक सुरेश नीरव जी का का जन्मदिन भी लगे हाथ मना लें और उनको देर से ही सही, अपनी शुभकामनाएं दें तो शायद सबको अच्छा लगेगा...

नीरव जी अपने जन्मदिन के वक्त शहर से बाहर थे जिस वजह से उनका जन्मदिन मनाने की हसरत हम जैसे कई ब्लोगरों के मन में ही रह गई...हमें नही भूलना चाहिए की जब-जब हम ग़लत हुए हैं, भ्रमित हुए हैं, भटके हैं, अपनी कविताओं के माध्यम से नीरव जी ने हमें रास्ता दिखाया है...हमारे मार्गदर्शक, मित्र और प्रदर्शक रहे हैं...और करुनाकर के लिए इससे बड़े सम्मान और गौरव की बात कोई नहीं हो सकती की बेहद सम्माननीय नीरव जी के साथ करुनाकर का जन्मदिन मनाया जाए...उम्मीद है मेरे इस प्रस्ताव पर सहमति बनेगी और हम सब कल डबल उत्साह के साथ मिलेंगे...
(प्रिय रुपेश दादा आप अपने अभियान में सफल हों यही प्रार्थना है....करुनाकर के सफल, उज्जवल और सेहतमंद जीवन की प्रार्थनाओं के साथ .... रुपेश दादा... with u, for u always....

-हृदयेंद्र

इंजीनियर बनने की बारी आई तो रूठ गई तकदीर, कैसर के चलते काटना पड़ा था पैर




कल जो खबर डाली गई थी, उसमें शेष पृष्ठ दो पर.. वाला पार्ट शामिल नहीं था। आज इसमें शेष वाला पार्ट भी शामिल कर लिया गया है। तस्वीर पर क्लिक कर इसे बड़ा करें, फिर पढ़ें।
((अमर उजाला, गोरखपुर के एडीटर केके उपाध्याय और उनकी संपादकीय टीम के हम शुक्रगुजार हैं जिन्होंने न सिर्फ करूणाकर के मामले को पूरी संवेदनशीलता के साथ उठाया बल्कि उसे लगातार मुद्दा बनाए हुए हैं। आज भी वहां करूणाकर पर खबर है जिसमें सारे ताजे डेवलपमेंट का जिक्र है। उम्मीद करते हैं कि आज की कटिंग भी जल्द ही भड़ास के पास पहुंच जाएगी।))

1.7.08

मैं 2100/- करुनाकर के ईलाज खर्च के लिए ट्रांसफर कर रहा हूँ- पीसी रामपुरिया

from
P. C. Rampuria (rampuriapc@gmail.com)
to
Yashwant Singh (yashwantdelhi@gmail.com)

date
1 Jul 2008 12:47

subject
transfering Rs.2100/- to karunakar's a/c


प्रिय यशवंत जी

मैं अपनी तरफ़ से रुपया 2100/- करुनाकर के ईलाज खर्च के लिए उसके खाते में आन लाइन ट्रांसफर कर रहा हूँ! आज मैंने कोशिश की है, पर आज बैंकों का आनलाइन बंद है! कल यह राशि उसके खाते में ट्रांसफर हो जायेगी!

ईश्वर से उसके तुंरत स्वस्थ होने की प्रार्थना के साथ...

पी.सी.रामपुरिया (मुदगल)

मैने करूणाकर के खाते में एक हजार रूपये आज जमा करा दिये हैं - शशिकांत

from
Shashikant Awasthi (awasthi.shashikant@gmail.com)
to
Yashwant Singh (yashwantdelhi@gmail.com)

date
1 Jul 2008 15:43

subject
करूणा के सम्‍बन्‍ध में

बडे भाई यशवंत जी,
सादर प्रणाम
आपने एक बार फिर मुहिम छेड़ दी है एक नेक काम करूणाकर की जिन्‍दगी बचाने के लिये। मुझको यह पूरा विश्वास है कि पिछली बार की तरह आप एक बार फिर अपने अभियान में सफल हो जायेंगे । जिस प्रकार आपने मां-बेटे का मिलन कराया था, ठीक उसी प्रकार एक बार फिर एक बाप-बेटे का मिलन करा कर ही दम लेंगे। साथ में रूपेश भाई जिस जोश खरोश के साथ लगें है वह भी अविस्मरणीय है।

मैने करूणाकर के खाते में एक हजार रूपये आज जमा करा दिये हैं। मेरे तरफ से एक छोटा सा प्रयास है। आगे जो भी होगा वह करूंगा। इस प्रकार के कार्य आप द्वारा कराये जाते रहेंगे तो निःसन्‍देह आप उस जगह पहुंच जायेंगे जहां पर लोग जाने हेतु काफी प्रयास करते है, परन्‍तु पहुंच नहीं पाते। सही मायने में आप द्वारा किया जा कार्य ही ईश्वर पूजा है।

आपका अनुज
शशिकांत अवस्थी
कानपुर

28.6.08

अनुरोधः करूणाकर के लिए फंड बनाएं

इधर कई दिनों से कुछ ज्यादा ही परेशान रहा.यों परेशान तो हमेशा ही रहता हूं. परेशानियों के बीच पैदा हुआ हूं.इसलिए परेशान रहना कुछ हद तक अच्छा भी लगता है.भडास पर अपलेख लिखकर कई मित्रों की अपेक्षाएं पूरी करना चाहता था.कई मित्रों को धन्यवाद देना चाहता था. लेकिन करुणाकर के बारे में पढ़कर अपने भगवान सूर्य (वे ऐसे भगवान हैं जो दिखाई पड़ते हैं) से निवेदन करने के अतिरिक्त कुछ सूझ ही नहीं रहा था.लेकिन भला हो डा.रूपेश का जिनके आलेख ने, जिनके शब्दों ने, मेरी व्यथा को क्षण भर में दूर कर दिया.यशवंत भाई,हालांकि मैं अपने को सुझाव देने लायक नहीं समझता ,बावजूद इसके मेरा अनुरोध है कि करुणाकर की चिकित्सा के लिए हम भड़ासी एक फंड बनाएं.आखिर डा.रूपेश के पास मुंबई आने जाने,इलाज व रहने खाने में भी तो काफी खर्च आएगा.कृपया मेरे अनुरोध पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर अनुग्रहीत करने की कृपा करें.उम्मीद है कि नाउम्मीदी नहीं होगी.जय भड़ास.
जगदीश त्रिपाठी