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2.11.08

कलंकित चिकित्सक


लखनऊ का संजय गाँधी चिकित्सालय, एक बीस वर्षीया युवती को ह्रदय रोग विभाग में भरती करना था, हस्पताल कहता है की पहले पैसे भरो तब भारती करेंगेसरकारी मदद से उपलब्धता के आधार पर युवती को हस्पताल में भारती किया जाता है और उसके ह्रदय का इलाज भीअब हस्पताल प्रशाशन उसे अस्पताल से छुट्टी नही दे रहा है क्यौंकी हस्पताल के अनुसार उसने बिल नही भरा है, और बिना बिल चुकाए अगर वोह हस्पताल से जाती है तो हम उसके ख़िलाफ़ मुकदमा करेंगेये कहानी नही हकीकत है उत्तर प्रदेश की राजधानी के सबसे बड़े चिकित्सालय की

सलमा के ठीक हुए महीनों बीत चुके हैं, इस दौरान उसके भाई और अब्बा की भी मौत हो चुकी है मगर डॉक्टरों ने उसे अन्तिम संस्कार तक मेंजाने की इजाजत नही दी क्यौंकी उसने डॉक्टरों की फीस और अस्पताल का बिल नही भरा है ऐसा अस्पताल प्रशाशन का कहना है, सलमा की माने तो भरती होने से पहले अस्पताल ने सत्तर हजार रूपये की मांग की थी, पचास हजार रूपये मुख्यमन्त्री रहत कोष से और बीस हजार ख़ुद के इन्तजाम से सलमा के परिवार वालों ने हस्पताल में जमा कराया था जिसके बाद ही सलमा का इलाज किया जा सका.

परिवार में मौत और गरीबी का आलम ऊपर से ठीक हो चुकी सलमा के ऊपर सात महीने का हस्पताल का बिल जो की सिर्फ़ इसलिए क्यौंकी सलमा को अस्पताल प्रशाशन ने छूट्टी नही दी। आज सलमा अस्पताल के थोपे गए बिल को देने में असमर्थ है मगर डॉक्टरों की माने तो उसने कभी सलमा को जबरदस्ती नही रोका है, हाँ बिना बिल चुकाए जाने का मतलब है अस्पताल का सलमा के ऊपर कानुनी कार्रवाई।

भौतिकवादी होते युग में जहाँ आज भी डोक्टर को इश्वर का दर्जा प्राप्त है वहां संजय गांधी चिकित्सालय के डॉक्टरों का ये वर्ताव निसंदेह समाज के लिए चिंतनीय है, प्रश्न की बिभेद की राजनीति से मरने वाले हमारे भाई या भी पीसी की अंधी दौड़ में डॉक्टरों का गरीबों का शोषण, दोनों ही बड़ाबड़ी के गुनाहगार नही? राज ठाकरे हो या संजय गांधी अस्पताल के ये चिकित्षक दोनों में फर्क क्या है?
शायद आप जवाब दें ?
मुझे नही बल्की सलमा को और उस जैसी हजारों गरीबी की मार से दबे लोगों को जो मानवता के पेशेवर होने का शिकार हो रहीं हैं.

साभार:- दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली।

1.7.08

मैने करूणाकर के खाते में एक हजार रूपये आज जमा करा दिये हैं - शशिकांत

from
Shashikant Awasthi (awasthi.shashikant@gmail.com)
to
Yashwant Singh (yashwantdelhi@gmail.com)

date
1 Jul 2008 15:43

subject
करूणा के सम्‍बन्‍ध में

बडे भाई यशवंत जी,
सादर प्रणाम
आपने एक बार फिर मुहिम छेड़ दी है एक नेक काम करूणाकर की जिन्‍दगी बचाने के लिये। मुझको यह पूरा विश्वास है कि पिछली बार की तरह आप एक बार फिर अपने अभियान में सफल हो जायेंगे । जिस प्रकार आपने मां-बेटे का मिलन कराया था, ठीक उसी प्रकार एक बार फिर एक बाप-बेटे का मिलन करा कर ही दम लेंगे। साथ में रूपेश भाई जिस जोश खरोश के साथ लगें है वह भी अविस्मरणीय है।

मैने करूणाकर के खाते में एक हजार रूपये आज जमा करा दिये हैं। मेरे तरफ से एक छोटा सा प्रयास है। आगे जो भी होगा वह करूंगा। इस प्रकार के कार्य आप द्वारा कराये जाते रहेंगे तो निःसन्‍देह आप उस जगह पहुंच जायेंगे जहां पर लोग जाने हेतु काफी प्रयास करते है, परन्‍तु पहुंच नहीं पाते। सही मायने में आप द्वारा किया जा कार्य ही ईश्वर पूजा है।

आपका अनुज
शशिकांत अवस्थी
कानपुर

30.6.08

करुणाकर की इस तरह मदद करें

फेफड़े के कैंसर से जूझ रहे गरीब परिवार का होनहार छात्र करूणाकर जो नोएडा में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है, की मदद के लिए कई लोग आगे आए हैं पर मदद किस तरह करना है, यह अभी तक तय नहीं हो पा रहा था।

करुणाकर के मित्र और पत्रकार अमित द्विवेदी से बातचीत के बात जिस नतीजे पर हम लोग पहुंचे हैं, वो इस प्रकार है....

1- करुणाकर के इलाज के लिए डा. रूपेश ने जिम्मेदारी उठाई है। करूणाकर उनके यहां परिवार के किसी एक सदस्य के साथ मुबंई जाएगा और एक दिन रुकने के बाद दवा लेकर वापस आ जाएगा। डाक्टर रूपेश के मुताबिक वे तीन महीने की दवाएं देंगे और इसमें करुणाकर को ठीक हो जाना चाहिए। डा. रूपेश ने करुणाकर से कई राउंड में उसके मर्ज के बारे में बात की है।

2- करुणाकर को आर्थिक मदद की जरूरत है। इसके लिए जो लोग मदद देना चाहें, वो सीधे करुणाकर के बैंक एकाउंट में रकम डाल दें। करुणाकर अपना बैंक एकाउंट आराम से आपरेट कर रहा है, तो मदद भी उसे सीधे पहुंचाई जानी चाहिए ताकि किसी तरह का कोई विवाद, शक या गलतफहमी न पैदा हो। करुणाकर का बैंक एकाउंट इस प्रकार है...

Karunakar Mishra
State Bank of India
AC No. 30037096026


यहां यह भी उल्लेख करते चलें कि करुणाकर पहले से ही कर्ज में हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन ले रखा है। अगर साढ़े तीन सौ भड़ासियों ने सिर्फ एक एक हजार रुपये डाल दिए तो कल्पना करिए छोटे से प्रयास से कितनी ज्यादा रकम इकट्ठी हो जाएगी।

3-करुणाकर के पिता को जो फर्जी तरीके से फंसाकर जेल में बंद कराया गया है, उन्हें छुड़ाने के लिए मीडिया के साथी अपने अपने स्तर पर लगे हुए हैं। पर इसमें अब भी काफी कुछ करने की जरूरत है। लखनऊ के पत्रकार साथियों से अनुरोध है कि वे प्रदेश प्रशासन के संवेदनशील अफसरों और नेताओं को इस प्रकरण के बारे में जानकारी देकर करुणाकर के पिता ओंकार मिश्रा को गोंडा जेल से रिहा कराने का प्रयास करें ताकि पिता अपने पुत्र का देखभाल करने के साथ साथ उचित इलाज भी करा सकें।

4- करुणाकर का जन्मदिन 3 जुलाई है। 3 जुलाई को हम सभी साथी करुणाकर के नोएडा स्थित घर पर, अगर वो घर पर हुए तो, इकट्ठा होकर उनके जन्मदिन का केक काटेंगे। अगर आप न पहुंच सकें तो अपनी शुभकामनाएं भड़ास के माध्यम से करुणाकर तक पहुंचाएं।

5- इस प्रकरण के बारे में जिन लोगों को अभी तक न पता हो वो कृपया भड़ास पर पड़ी नीचे की पोस्टों को देखें, उसमें करुणाकर के बारे में तफसील से जिक्र किया गया है। करुणाकर के बारे में अन्य किसी जानकारी के लिए आप उनके मित्र अमित द्विवेदी से उनके मोबाइल नंबर 09911045467 पर संपर्क कर सकते हैं।

फिलहाल इतना ही....
जय भड़ास
यशवंत

28.6.08

करुणाकर मौत के मुहाने पे है, पिता जेल में हैं, कौन बचाएगा? कौन इन्हें मिलाएगा?

भड़ासियों, फिर आ पड़ी है किसी के काम आने की बेला

दूसरों के दुखों से आंख फिराकर खुद के लिए अपार सुख तलाशने वाले हम कथित सुसभ्य शहरियों के लिए अमित द्विवेदी की दो पोस्टें आइना दिखाने वाली हैं। इसी दिल्ली - नोएडा में रह रहा एक पत्रकार अमित द्विवेदी किस तरह एक दूसरे शख्स की पीड़ा के साथ खुद को जोड़े हुए है, उसके साथ कंधा से कंधा मिलाकर चल रहा है, लड़ रहा है.....वो जानने के बाद मैं खुद पर शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं। कहने को हम सब इतने मीडिया वाले भड़ास पर हैं, ब्लागिंग में हैं, अखबार में हैं पर किसी जेनुइन की मदद करने का माद्दा नहीं जुटा पाते क्योंकि इसमें समय खर्च होगा, पैसा खर्च होगा और मिलेगा कुछ नहीं। हां, कुछ नहीं मिलेगा पर जो लोग जीने का मतलब और मकसद तलाशते हैं उन्हें बहुत कुछ मिलेगा। हम भड़ासियों के लिए यह मुद्दा जीवन मरण का मुद्दा है। कुछ उसी तरह जिस तरह कानपुर के भड़ासी साथी शशिकांत अवस्थी ने एक बिछुड़ी मां को उसके बेटों से मिलवाया और उसके घर पहुंचाया, उसी तरह हम करुणाकर नामक छात्र जो बस्ती के हरैया तहसील के गांव का रहने वाला है और गरीब घर का है लेकिन पढ़ने में बेहद प्रतिभावान है, अपनी जिंदगी के बचे हुए पांच छह महीने जियेगा और उसके बाद यह दुनिया छोड़कर चला जाएगा। दुख तो यह कि इन बचे हुए छह महीनों में डाक्टरों की सलाह के मताबिक उसे मां बाप के साथ रहने का सुख भी नहीं नसीब हो सकेगा क्योंकि उसके पिता को कुछ प्रभावशाली लोगों ने जेल भिजवा रखा है। उसके पिता को और खुद करुणाकर को यह नहीं पता कि करुणाकर की उम्र अब छह महीने है। यह बात केवल अमित द्विवेदी को पता है जो करुणाकर के साथ सिर्फ भावना और मनुष्यता के नाम पर जुडे़ हैं, उनका इलाज कराने में मदद कर रहे हैं, उन्हें आज सुबह एम्स के डाक्टर ने बताया कि इस करुणाकर की उम्र बस छह महीने बची है। इन दिनों को वो अपने परिजनों के संग गुजारे। कुछ नहीं हो सकता अब।

पूरा मामला इस तरह है---


उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के हरैया तहसील के एक गांव के गरीब ब्राह्मण ओंकार का बेटा करुणाकर पढ़ाई में इतना तेज था कि वो हर एक्जाम में ब्रिलियेंट पोजीशन पाता। उसकी रुचि और इच्छा को देखते हुए ओंकार ने बेटे को करुणाकर को पढ़ाने के लिए नोएडा के एक इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला दिला दिया। इसके लिए खेत बेचकर पैसे दिए। बेटा जब यहां पढ़ने लगा तो उसे दर्द वगैरह हुआ और कई चरण की जांच पड़ताल के बाद उसके फेफड़े में कैंसर पाया गया। डाक्टरों ने कह दिया है कि वो अब जिंदा नहीं बचेगा, जीवन के जो कुछ दिन शेष हैं, उसे घर में परिजनों के साथ गुजारे।

उधर, उसके पिता ओंकार मिश्रा इन दिनों जेल में है। उन्होंने अपने गांव में किसी बुजुर्ग की खूब सेवा की और उस बुजुर्ग ने अपने नौ दस बीघे खेत ओंकार के नाम लिख दिए। बुजुर्ग की मृत्यु के बाद उनके कथित चाहने वालों ने पैसे के बल पर ओंकार को जल भिजवा दिया, यह आरोप लगाते हुए कि उन्होंने चार सौ बीसी करके जमीन अपने नाम लिखवा लिया है। इन दिनों वो गोंडा जेल में बंद हैं। पिता को नहीं पता कि उनका लाडला और तेज तर्रार बेटा अब कुछ दिनों का मेहमान है।

जैसे इस परिवार पर आफत का पहाड़ ही टूट पड़ा हो। पिता जेल में, बेटा मृत्यु शैय्या पर। घर में फूटी कौड़ी नहीं। मामला हाइकोर्ट में है। लखनऊ में करुणाकर के एक मामा रहते हैं सोहन तिवारी। वे ओंकार के मामले में पैरवी कर रहे हैं।

इस मामले में मैं हिंदी दुनिया के सभी साथियों, दोस्तों, दुश्मनों, परिचितों, अपिरिचितों से अपील करूंगा कि वे जो कुछ बन पड़े इस मामले में करने के लिए आगे आए।

कुछ तथ्य यहां और दे रहा हूं....

-करुणाकर ने आरकुट पर अपनी प्रोफाइल भी बना रखी है। उसका लिंक अमित द्विवेदी मुझे मुहैया कराने वाले हैं।

-करुणाकर की तस्वीर और उनके गांव घर के डिटेल अमित द्विवेदी मुझे जल्द ही मेल करने वाले हैं।

-करुणाकर के मामा सोहन तिवारी जो लखनऊ में हैं और करुणाकर के पिता ओंकार के जेल में होने के मामले में छुड़ाने के लिए पैरवी कर रहे हैं, उनका मोबाइल नंबर मेरे पास अमित ने भिजवा दिया है।

-लखनऊ के एक बड़े अखबार के स्थानीय संपादक और एक नेशनल न्यूज चैनल के लखनऊ स्थित मुख्य रिपोर्टर को इस मामले के बारे में मैंने जानकारी दे दी है। दोनों लोगों ने इस मामले को मीडिया में फ्लैश कर इस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का वादा किया है। जल्द ही दोनों लोगों तक इस मामले के सारे डिटेल मेल के जरिए पहुंचा दूंगा।

अपील
-अगर आप मीडिया में हैं और इस पोजीशन में हैं कि गोंडा, बस्ती और इलाहाबाद में वकील, अफसर, नेता के जरिए दबाव बनाकर पिता ओंकार को जेल से रिहा करा सकें तो कृपया इस दिशा में पहल करें। मुझे रिंग कर सकते हैं -09999330099 पर। मुझसे डिटेल ले सकते हैं yashwantdelhi@gmail.com पर मेल करके।

-अगर आपके परिवार, दोस्त, जानकारी में कोई इलाहाबाद में ठीकठाक वकील हों, बस्ती और गोंडा में प्रशासनिक अफसर या नेता हों तो उन्हें इस मामले में पहल करने के लिए अनुरोध करें। यह सिर्फ और सिर्फ मनुष्यता का मामला है। घनघोर स्वार्थ के इस दौर में अगर हम थोड़ी सी पहल करके किसी का भला करा सकते हैं तो हमें करना चाहिए।

-अगर आपकी जानकारी में कोई डाक्टर ऐसा हो जो फेफड़े के कैंसर का इलाज करने में सक्षम हो तो ओंकार को दुबारा उन डाक्टरों से दिखवाने की पहल करें।

-प्लीज, करुणाकर हमारी आपकी तरह है। उसके पिता हमारे आपके पिता की तरह हैं। हम अलग अलग शरीर भले ही धारण किए हुए हैं पर हमारे होने की पहचान एक दूसरे को मदद देने, एक दूसरे को बेहतर बनाने से है, इसलिए इस मामले में आगे आइए।

- अगली पोस्ट में भड़ास पर करुणाकर की तस्वीर और उससे जुड़े सारे तथ्य डिटेल में डालूंगा। अमित द्विवेदी से अनुरोध है कि वे शीघ्र सारी जानकारियों को मेल करके मुझ तक पहुंचाएं।

(उपरोक्त जानकारियां अमित द्विवेदी से फोन पर हुई बातचीत पर आधारित है)

भड़ास के सदस्य और पत्रकार साथी अमित द्विवेदी ने इस मामले में जो दो पोस्टें भड़ास पर डाली हैं, उन्हें आप जरूर पढ़िए.... (यह ध्यान रखिए कि अमित अभी हफ्ते भर भी नहीं हुए, भड़ास के मेंबर बने हैं, और आनलाइन हिंदी लिखना सीख रहे हैं, इसके चलते गूगल ट्रांसलेशन वाले सिस्टम से लिखने में कई शब्द अशुद्ध रूप से हिंदी में अनुवादित हुए हैं, इसलिए इन शब्द व व्याकरण के दोषों को नजरअंदाज करके पढ़ें.....)

पहली पोस्ट
एक कहानी जो जारी है

दूसरी पोस्ट
उसकी जिंदगी अंतिम पड़ाव पर आ गई

जय भड़ास
यशवंत

13.4.08

रामनवमी और अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभेच्छा....

हिंदू धर्म के आदर्श माने जाने वाले भगवान श्री राम के जन्म के रूप में आज रामनवमी मनाते हैं इस दिन, वहीं दूसरी ओर संविधान के आधार स्तंभ स्व.डा.बाबा साहब अम्बेडकर की भी आज जयंती है। इन दोनो शुभ घटनाओं को उन महान विभूतियों के संदेशों को स्मरण करते हुये हम प्रयास करें कि उनके दिये संदेशों को मानवता के उत्थान के लिये अमल में लाएं(अगर जमे तो वरना जैसे जीना हो जीते रहिये ये लोग आपको दोष देने नहीं आएंगे)। आप सबको हार्दिक शुभेच्छा।