मैंने अभी कुछ दिन पहले अपने ब्लॉग का टेम्पलेट बदला है उसको एक नया रूप दिया है लेकिन नया रूप देने के बाद मेरा नुक्सान हो गया...ब्लोगवाणी का HTML CODE जिससे पोस्ट ब्लोगवाणी पर जाती है वो गायब हो गया है....
मैंने बहुत कोशिश की, ब्लोगवाणी पर ईमेल किए लेकिन वहां से कोई जवाब नही आ रहा है, मेरी समझ नही आ रहा है की मैं क्या करू .... आगे पढ़े....
25.5.09
मेरी मदद कीजिये...किसी के पास ब्लोगवाणी का कोड है...?
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काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif
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8.8.08
केपी त्रिपाठी जी ने करुनाकर को दी ५०० की मदद
मेरठ के सांध्य दैनिक प्रभात के वरिष्ट उप संपादक केपी त्रिपाठी जे ने भड़ास के द्वारा करुनाकर के बारे में जानकर उसे ५०० रूपये की मदद दी है। उन्होंने कहा है की करुनाकर की मदद के लिए हम हर सम्भव प्रयास करेंगे। उन्होंने भड़ास की इस मुहिम की सराहना की।
अमित द्विवेदी
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अमित द्विवेदी
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13.7.08
थैंक्यू नवभारत टाइम्स, मुंबई- करूणाकर के लिए भड़ास की मुहिम को सराहा
करूणाकर के मामले को और भड़ास के अभियान को अब मुंबई के एक प्रतिष्टित अखबार नवभारत टाइम्स ने कवरेज दी है, जिंदगी और बता, तेरा इरादा क्या है शीर्षक से। अगर आप मुंबई के रहने वाले हैं तो करूणाकर की ख़बर पेज नम्बर पांच पर नवभारत टाइम्स में ज़रूर देंखें। डाक्टर रूपेश जी और रजनीश भाई से अनुरोध है कि इस कवरेज को भड़ास पर डालें ताकि बाकी भाई भड़ासी भी पढ़ सकें। मुंबई में आज प्रकाशित स्टोरी को पढ़कर मुंबई से बहुत से लोग करूणाकर से जुड़ गए हैं। कई लोगों ने करूणाकर के लिए आर्थिक मदद भी दी है।
मुंबई के वार्ष्णेय चेरीटिबल ट्रस्ट के दिनेश वार्ष्णेय ने करूणाकर को 2000 रुपये की मदद की है जो कि सोमवार तक उसके खाते में आ जायेगी। इसके साथ ही नोएडा के सेक्टर 18 में कपड़े का शोरूम चलने वाले अमित गुप्ता ने 500 रुपये, अमर उजाला के सीनियर सब एडिटर गौरव त्यागी ने 1000 हज़ार रुपये और अजय नथानी जी की अगुवाई में उनके स्पोर्ट्स डेस्क ने भी 1000 रुपये देने का वादा किया है। ये सभी लोग ये राशि सोमवार को करूणाकर के खाते में जामा करवा देंगे। भड़ास परिवार इनका हार्दिक आभार व्यक्त करता है।
इन लोगों ने करूणाकर की तबीयत के बारे में जानने की इच्छा जताई। मैं इसके लिए माफी चाहता हूँ की करूणाकर की कुशल क्षेम भड़ास पर नहीं दे सका। पर आज मैं आपको सारी जानकारी दे देता हूँ।
करूणाकर अब पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहा है। उसे भूख लग रही है तथा नींद भी अच्छी आ रही है। डॉक्टर साहब के दवाइयों को नियमित सेवन कर रहा है और उनके बताए परहेज व चिकित्सा विधि का पालन कर रहा है। अभी जब मैंने उसे फोन किया तो नेटवर्क सही नहीं आ रहा था तो करूणाकर फोन लेकर अपनी छत पर लकड़ी की सीढियों के सहारे चढ़ गया, मुझसे बात करने के लिए। वहां जब वो बात कर रहा था तो उसकी सांसें ऊपर नीचे हो रहीं थीं। मैंने उसे खूब डांट लगाई की अब आगे से ऐसा मत करना। डांट खाकर वो सॉरी बोल रहा था पर वो बात करते हुए पूरी तरह से खुश था।
वैसे आपको ये बताना ज़रूरी है कि डॉक्टर रूपेश जिस तरह से उसकी मदद कर रहें हैं, वैसा और कोई भी करूणाकर के लिए नहीं कर सकता था क्योंकि पैसा तो हर कोई दे सकता है पर इलाज़ तो एक डॉक्टर ही कर सकता है।
फिलहाल इतना ही, मैं अगली पोस्ट ज़ल्द लिखूंगा।
-अमित द्विवेदी
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अमित द्विवेदी
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Labels: करुनाकर, नभाटा, पहल, भड़ास, मदद, मनुष्यता, मीडिया कवरेज
8.7.08
अंशुमाली का ब्लाग गूगल ने किया लाक
5.7.08
पैसे के लिए नहीं रुकेगा करूणाकर का इलाज, डा. रूपेश मुंबई लौटे
डॉक्टर रुपेश आज सुबह मंगला एक्सप्रेस से मुंबई रवाना हो गए हैं. उन्होंने जाते समय स्टेशन से ही करूणाकर से बातें करके सारे परहेज़ और दवाइयाँ कैसी लेनी है, ये समझाते रहे. कल मुंबई जाकर डॉक्टर साहब करूणाकर के लिए दवाइयाँ तैयार करेंगे. लोगों के सहयोग से अब कुछ भी मुश्किल नहीं लगता. ऐसा लगने लगा है भगवान भी एक बार लोगों की सकारात्मकता और दुवाओं पर अपनी मुहर ज़रूर लगायेगा.
-अमित द्विवेदी
राकेश जी ने करूणाकर के लिए 2100/- दिए
प्रवासी संसार के सम्पादक राकेश पाण्डेय जी ने भड़ास पर करूणाकर की दास्तान पढ़कर इस नौजवान की मदद के लिए 2100 रुपये देने की घोषणा की है। राकेश जी 'प्रवासी संसार' नाम की पत्रिका के संम्पादक हैं. यह एकलौती ऐसी हिन्दी पत्रिका है जो प्रवासी भारतीयों के लिए समर्पित है. राकेश जी ने रात को ११ बजे फ़ोन लगाकर कहा कि अमित जी, सबसे पहले मैं इस बच्चे को अपनी तरफ़ से २१०० रूपये दे रहा हूँ जो इसके अकाउंट में पहुंचा रहा है और इसके साथ मैं ये वादा करता हूँ की करूणाकर का इलाज पैसे के कारण किसी कीमत पर नहीं रुकेगा.
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अमित द्विवेदी
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4.7.08
कुछ यूं मना करूणाकर का बर्थडे
करूणाकर के लिए भागदौड़ में लगे अमित द्विवेदी, जिनके जीवन का फंडा है- किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार, जीना इसी का नाम है.......।
बाएं से दाएं- डा. रूपेश श्रीवास्तव, करूणाकर मिश्रा, अमित द्विवेदी और यशवंत सिंह।2.7.08
रंग लाया प्रयास, पिता ओंकार जेल से रिहा, करूणाकर का इलाज शुरू
कहते हैं इंसानी हौसलों की न कोई सीमा होती है और न कोई दायरा...बस इस बार जो हुआ उसमे नया कुछ नही था जीत थी, महक थी छोटे प्रयासों की बड़ी सफलता की, उम्मीद थी उजाले की...
कैंसर से जूझ रहे करुनाकर और जेल में बंद उनके पिता को न्याय दिलाने के यशवंत सिंह, डॉ रुपेश श्रीवास्तव, अमित द्विवेदी व अन्य ब्लागरों की मुहिम और भड़ास के प्रयासों से जेल में बंद करुनाकर के पिता ओंकार मिश्रा को जमानत मिल गई है...
अपने होनहार बेटे से मिलने के लिए लालायित पिता कल अपने बेटे के जन्मदिन पर उसकी खुशियों में भागीदार बन सकेगा, उसके दुख को साझा कर सकेगा..एक पिता के लिए इससे बड़े गौरव की दूसरी बात क्या हो सकती है...हर बार जब उम्मीदें ख़त्म होती लगती हैं तो लोग भड़ास की तरफ़ रुख करते हैं और हर बार भड़ास के गैर दुनियादार, असमाजिक, कुंठित, बेकार और दूसरे कई अलंकारों से नवाजे गए लोग करिश्मा कर डालते हैं...
''कई लोग जब करुनाकर के मामले में बहुत कुछ होने की उम्मीद खो बैठे थे तब भड़ास ने उम्मीद पालने की जिद पकड़ ली'' और हमारे प्रयासों का जब पहला ही परिणाम आसमान चूमने का हौसला पैदा करता हो तो असफलता की बात इस मंच से करना बेमानी है...
सारी दुश्वारियों को धता बताकर जब रुपेश जी मुंबई से दिल्ली पहुँच गए हैं और देखते ही देखते कई मदद करने वाले हाथ साथ जुड़ गए हैं तो करुनाकर के साथ कुछ ग़लत होगा, ऐसा कोई मूर्ख और अज्ञानी ही सोच सकता है...
कहते हैं दुआओं में असर होता है...और अब तो असर दिख भी रहा है....
करुनाकर के पिता जेल से छूट गए हैं, जमानत पर। करुनाकर का जीवन आयुर्वेद के पुरोधा के हाथ में है। जन्मदिन पर परिवार के सारे बुजुर्गों का आशीर्वाद है और दुआ के लिए भड़ास के ३६० हाथ हर वक्त तैयार हैं...
क्या अब भी किसी को भड़ास के इस अभियान की सफ़लता पर शक है...ये वक्त है जश्न मनाने का है...करुनाकर को बधाइयां देने का...साथ ही उन सबको विनम्र धन्यवाद देने का जो इस मुहिम में करुनाकर के साथ डटकर खड़े रहे...
''जन्मदिन की पूर्वसंध्या पर करुनाकर को ह्रदय की असीम गहराइयों से हार्दिक बधाइयां और बेहतर जीवन की शुभकामनाएं''...
''हृदयेंद्र''
हर माह करूणाकर के एकाउंट में एक निश्चित राशि पहुंचाएंगे
ब्लोगर साथियों को प्यार और दुलार....
एक हफ्ते वाइरल फीवर से निपटने के बाद आज भड़ास देखने का मौका मिला...इस बीच बहुत कुछ हो गया जो वाकई नही होना चाहिए था...
एक होनहार नौजवान का असमय कैंसर जैसी बीमारी की चपेट में आना...अपने बेहद प्रिय रुपेश भाई साहब का सभी ब्लोगरों से मदद के लिए गुहार लगाना ...ये सब कुछ वैसा ही था जिसे इस रूप में कभी नहीं देखना चाहता था...लेकिन नियति शायद इसे ही कहते हैं...तो अग्रज रुपेश जी के इस अभियान में हर तरह से साथ हूँ... अगले २४ घंटे में करुनाकर को आर्थिक मदद मैं भेज दूंगा...रही बात उसके जन्मदिन की उसे भी शानदार तरीके से मनाया जायेगा...और हर माह एक नियत राशि करुनाकर के अकाउंट में पहुंचाता रहूँगा...ये वायदा है...
इस बीच जब हम कल करुनाकर का जन्मदिन पूरे जोश-खरोश के साथ मनाने जा रहे हैं तो इस वक्त हम अगर भड़ास और नए ब्लागरों के मार्गदर्शक सुरेश नीरव जी का का जन्मदिन भी लगे हाथ मना लें और उनको देर से ही सही, अपनी शुभकामनाएं दें तो शायद सबको अच्छा लगेगा...
नीरव जी अपने जन्मदिन के वक्त शहर से बाहर थे जिस वजह से उनका जन्मदिन मनाने की हसरत हम जैसे कई ब्लोगरों के मन में ही रह गई...हमें नही भूलना चाहिए की जब-जब हम ग़लत हुए हैं, भ्रमित हुए हैं, भटके हैं, अपनी कविताओं के माध्यम से नीरव जी ने हमें रास्ता दिखाया है...हमारे मार्गदर्शक, मित्र और प्रदर्शक रहे हैं...और करुनाकर के लिए इससे बड़े सम्मान और गौरव की बात कोई नहीं हो सकती की बेहद सम्माननीय नीरव जी के साथ करुनाकर का जन्मदिन मनाया जाए...उम्मीद है मेरे इस प्रस्ताव पर सहमति बनेगी और हम सब कल डबल उत्साह के साथ मिलेंगे...
(प्रिय रुपेश दादा आप अपने अभियान में सफल हों यही प्रार्थना है....करुनाकर के सफल, उज्जवल और सेहतमंद जीवन की प्रार्थनाओं के साथ .... रुपेश दादा... with u, for u always....
-हृदयेंद्र
इंजीनियर बनने की बारी आई तो रूठ गई तकदीर, कैसर के चलते काटना पड़ा था पैर
कल जो खबर डाली गई थी, उसमें शेष पृष्ठ दो पर.. वाला पार्ट शामिल नहीं था। आज इसमें शेष वाला पार्ट भी शामिल कर लिया गया है। तस्वीर पर क्लिक कर इसे बड़ा करें, फिर पढ़ें।
करूणाकर को पाँच हज़ार की मदद दी
दिल्ली के एक संपन्न परिवार के अनीश गुप्ता ने करुनाकर के इलाज़ के लिए पाँच हज़ार रुपये की मदद देते हुए उसके जल्दी ठीक होने की कामना की है। उनका कहना है अगर इसी तरह से एक दूसरे की मदद के लिए हम आगे आयें तो हमारे जेब से थोड़ा भी निकलकर किसी के सारी विपदा दूर कर सकता है। यहाँ रहने वाले हर बन्दे में भगवान् बसता है। तो क्यूँ न हम किसी की बढ़कर मदद करें।
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करूणाकर की हालत बिगड़ी
करूणाकर की हालत मंगलवार की रात अधिक ख़राब हो गयी जिसके कारन वो मुंबई नही जा पाया। उसके कमर में दर्द और सीने में तेज़ दर्द हो रहा था। जिसके कारण उसे बहुत खांसी आ रही थी। इसकी ख़बर रात में ही डॉक्टर रुपेश को दी। जिन्होंने कुछ दवाइयाँ बतायी पर रात होने के कारण वो मिल न सकी। करूणाकर के हालत को दखते हुए मैंने रात में डॉक्टर रूपेश से बात की और डेल्ही आने को कहाँ। वो फटाफट तैयार हो गए। मैंने रात में ही गो ऐरवेज़ से उनका टिकेट बुक करवाया। डॉक्टर साहब की ज़हाज़ मुंबई से १२.२० पर उडेगा और वो यहाँ पर २.२० पर पहुँच जायेंगे। करूणाकर के मदद के लिए जो यहाँ से लोगों का सहयोग मिला उसी के बदौलत आज हम तुंरत उसके कुछ कर पा रहे हैं। मैं भगवान से यही दुआ करूंगा की कोई ऐसा करिश्मा कर दें जिससे करुनकर बिल्कुल अछा हो जाए। डॉक्टर साहब के आने के बाद मैं अगली पोस्ट भेज दूंगा।
अमित द्विवेदी
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amit dwivedi
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1.7.08
मैं 2100/- करुनाकर के ईलाज खर्च के लिए ट्रांसफर कर रहा हूँ- पीसी रामपुरिया
from
P. C. Rampuria (rampuriapc@gmail.com)
to
Yashwant Singh (yashwantdelhi@gmail.com)
date
1 Jul 2008 12:47
subject
transfering Rs.2100/- to karunakar's a/c
प्रिय यशवंत जी
मैं अपनी तरफ़ से रुपया 2100/- करुनाकर के ईलाज खर्च के लिए उसके खाते में आन लाइन ट्रांसफर कर रहा हूँ! आज मैंने कोशिश की है, पर आज बैंकों का आनलाइन बंद है! कल यह राशि उसके खाते में ट्रांसफर हो जायेगी!
ईश्वर से उसके तुंरत स्वस्थ होने की प्रार्थना के साथ...
पी.सी.रामपुरिया (मुदगल)
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यशवंत सिंह yashwant singh
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मैने करूणाकर के खाते में एक हजार रूपये आज जमा करा दिये हैं - शशिकांत
from
Shashikant Awasthi (awasthi.shashikant@gmail.com)
to
Yashwant Singh (yashwantdelhi@gmail.com)
date
1 Jul 2008 15:43
subject
करूणा के सम्बन्ध में
बडे भाई यशवंत जी,
सादर प्रणाम
आपने एक बार फिर मुहिम छेड़ दी है एक नेक काम करूणाकर की जिन्दगी बचाने के लिये। मुझको यह पूरा विश्वास है कि पिछली बार की तरह आप एक बार फिर अपने अभियान में सफल हो जायेंगे । जिस प्रकार आपने मां-बेटे का मिलन कराया था, ठीक उसी प्रकार एक बार फिर एक बाप-बेटे का मिलन करा कर ही दम लेंगे। साथ में रूपेश भाई जिस जोश खरोश के साथ लगें है वह भी अविस्मरणीय है।
मैने करूणाकर के खाते में एक हजार रूपये आज जमा करा दिये हैं। मेरे तरफ से एक छोटा सा प्रयास है। आगे जो भी होगा वह करूंगा। इस प्रकार के कार्य आप द्वारा कराये जाते रहेंगे तो निःसन्देह आप उस जगह पहुंच जायेंगे जहां पर लोग जाने हेतु काफी प्रयास करते है, परन्तु पहुंच नहीं पाते। सही मायने में आप द्वारा किया जा कार्य ही ईश्वर पूजा है।
आपका अनुज
शशिकांत अवस्थी
कानपुर
हरिशंकर ने दिया करुनाकर को एक हज़ार रुपया
हरिशंकर त्रिपाठी ने करुनाकर को की एक हज़ार रुपये की मदद की। कहा भाई करुनाकर तुम जल्दी से अच्छे हो जावोगे। हरिशंकर जी अमर उजाला में इस समय नॉएडा में कार्यरत हैं। करुनाकर को भड़ास पर पढ़कर इतना प्रभावित हुए हैं की उसकी हर तरह से मदद करना चाहते हैं।
रक्त और पानी में बड़ा अंतर है पत्थर और नगीने में बड़ा अंतर है
साँस लेते हो जी लेते हो मगरसाँस लेने और जीने में बड़ा अंतर है
हरिशंकर के घर में उनकी बहन की आठ जुलाई को शादी है। पर वे कहते हैं की जब से भड़ास पर करुनाकर की स्टोरी पढी है तब से अपने घर का काम भूल गए हैं। तथा करुनाकर की सारी जानकारी हासिल करना चाहते हैं। वो जल्द ही भडास के मेंबर बनेंगे।
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amit dwivedi
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30.6.08
करुणाकर की इस तरह मदद करें
फेफड़े के कैंसर से जूझ रहे गरीब परिवार का होनहार छात्र करूणाकर जो नोएडा में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है, की मदद के लिए कई लोग आगे आए हैं पर मदद किस तरह करना है, यह अभी तक तय नहीं हो पा रहा था।
करुणाकर के मित्र और पत्रकार अमित द्विवेदी से बातचीत के बात जिस नतीजे पर हम लोग पहुंचे हैं, वो इस प्रकार है....
1- करुणाकर के इलाज के लिए डा. रूपेश ने जिम्मेदारी उठाई है। करूणाकर उनके यहां परिवार के किसी एक सदस्य के साथ मुबंई जाएगा और एक दिन रुकने के बाद दवा लेकर वापस आ जाएगा। डाक्टर रूपेश के मुताबिक वे तीन महीने की दवाएं देंगे और इसमें करुणाकर को ठीक हो जाना चाहिए। डा. रूपेश ने करुणाकर से कई राउंड में उसके मर्ज के बारे में बात की है।
2- करुणाकर को आर्थिक मदद की जरूरत है। इसके लिए जो लोग मदद देना चाहें, वो सीधे करुणाकर के बैंक एकाउंट में रकम डाल दें। करुणाकर अपना बैंक एकाउंट आराम से आपरेट कर रहा है, तो मदद भी उसे सीधे पहुंचाई जानी चाहिए ताकि किसी तरह का कोई विवाद, शक या गलतफहमी न पैदा हो। करुणाकर का बैंक एकाउंट इस प्रकार है...
Karunakar Mishra
State Bank of India
AC No. 30037096026
यहां यह भी उल्लेख करते चलें कि करुणाकर पहले से ही कर्ज में हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन ले रखा है। अगर साढ़े तीन सौ भड़ासियों ने सिर्फ एक एक हजार रुपये डाल दिए तो कल्पना करिए छोटे से प्रयास से कितनी ज्यादा रकम इकट्ठी हो जाएगी।
3-करुणाकर के पिता को जो फर्जी तरीके से फंसाकर जेल में बंद कराया गया है, उन्हें छुड़ाने के लिए मीडिया के साथी अपने अपने स्तर पर लगे हुए हैं। पर इसमें अब भी काफी कुछ करने की जरूरत है। लखनऊ के पत्रकार साथियों से अनुरोध है कि वे प्रदेश प्रशासन के संवेदनशील अफसरों और नेताओं को इस प्रकरण के बारे में जानकारी देकर करुणाकर के पिता ओंकार मिश्रा को गोंडा जेल से रिहा कराने का प्रयास करें ताकि पिता अपने पुत्र का देखभाल करने के साथ साथ उचित इलाज भी करा सकें।
4- करुणाकर का जन्मदिन 3 जुलाई है। 3 जुलाई को हम सभी साथी करुणाकर के नोएडा स्थित घर पर, अगर वो घर पर हुए तो, इकट्ठा होकर उनके जन्मदिन का केक काटेंगे। अगर आप न पहुंच सकें तो अपनी शुभकामनाएं भड़ास के माध्यम से करुणाकर तक पहुंचाएं।
5- इस प्रकरण के बारे में जिन लोगों को अभी तक न पता हो वो कृपया भड़ास पर पड़ी नीचे की पोस्टों को देखें, उसमें करुणाकर के बारे में तफसील से जिक्र किया गया है। करुणाकर के बारे में अन्य किसी जानकारी के लिए आप उनके मित्र अमित द्विवेदी से उनके मोबाइल नंबर 09911045467 पर संपर्क कर सकते हैं।
फिलहाल इतना ही....
जय भड़ास
यशवंत
28.6.08
ये रही करुणाकर की तस्वीर और उनकी आरकुट प्रोफाइल के डिटेल

smoking: no
drinking: no
living: alone, friends visit often
music: SOFT OLD SONGS
tv shows: INDIAN IDEAL PART TWO
movies: MUNNA BHAI MBBS;PARDESH;
ideal match: that is in pending
first thing you will notice about me: MY simplicity
my idea of a perfect first date: i do't like dating becoc i will do all these things after achieving all my goals
from my past relationships i learned: i do't have any relationship inspite of my parents and sister brothere and from these i am learning continously no endpoints
five things I cant live without: i can live without anything in the presense of air water and food
in my bedroom you will find: i have't here bedroom but i have my flat in that me and my freinds lives together so u find alot of things like MY PC,MY freinds laptop and as i am student then
और उसकी ज़िंदगी अन्तिम पडाव पर आ गयी
आज सुबह जब मैं उससे मिला तो वो एक नयी कमीज़ और पन्त में था मुरझाई आँखों में एक आशा की नयी किरण नज़र आ रही थी। एम्स के ओपीडी के सामने वोह बैठा मेरा अखबार यानी की अमर उजाला पढ़ रहा था। मुझे देखते ही उसका चेहरा खुशी से खिल गया। मैंने कहा क्या बात है करुनाकर तुम तो एकदम हीरो लग रहे हो। देखो हमेशा खुश रहा करो। हम साथ साथ एम्स के एक्सरे डिपार्टमेन्ट की तरफ़ रूम नम्बर एक में गए। सुबह के यही कोई सवा आठ बजा रहा होगा। डॉक्टर ने सिटी स्कैन की रिपोर्ट और अन्य रिपोर्ट जामा करवा ली और बाहर वेट करने को कहा। हम बेसब्री से बाहर डॉक्टर का इंतज़ार कर रहे थे। अंदर से डॉक्टर अरविन्द लगभग १० बजे बाहर आए। उन्होंने हमारा नाम पुकारा। जब हम उनके पास गए तो उन्होंने मुझे बताया की सर्जरी नही हो सकती क्यूंकि दोनों तरफ़ का लुंग प्रभावित हो चुका है। आप एक काम करो डॉक्टर जुल्का से मिलो और उनसे कीमियो थेरेपी के लिए बात कर लो। बस यही एक अब इसका इलाज़ है। हम एम्स के रेड बिल्डिंग में गए तो पता चला की डॉक्टर जुल्का कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर गए हुए हैं। रूम नम्बर चार में एक दूसरे डॉक्टर बैठे थे मैंने उनके पास पर्चा जामा करवा दिया। थोड़ी देर बाद में मुझे उन्होंने कॉल किया जब मैं गया की ये तुम्हारा क्या लगता है। मैंने बोला भाई। उन्होंने करुनाकर को रूम से बाहर भेज दिया और मुझे बताया की इसकी उम्र अब सिर्फ़ ६ या ७ महीने बची है। आप को इसके मम्मी पापा को ये बता देना चाहिए। यहाँ पर इसे भरती करवाने का कोई फायदा नही है। इसे अपने परिवार के पास रहना चाहिए। इसका इलाज़ जहाँ पहले करवाया था आप वहां ही करवाते रहें। और आगे भगवान् पर छोड़ दें। मैं जब बाहर निकला तो करुनाकर से बात नही की बस यही बोला की मैं गाडी लेकर आता हूँ। जब मैं आया तो उसने कहा भैया मुझे अब की दवा नही करवानी है कुछ दिन और जीकर क्या करूंगा। उसकी यह बात सुनकर मैं बहुत दुखी हुआ। मेरे आंखों से आंसू निकल पड़े। मैं उसे क्या बोल्लूँ समझ में नही रहा था। बस पूरे रस्ते एक बात सोचता रहा की भगवान् मुझे इसकी जगह मुझे क्यूँ नही अपने पास बुला लेता। उसके सारे सपने जो थे सब टूट गए। उसे इस बात की चिंता खाए जा रही है की उसके माँ बाप ने उसके लिए इतना किया पर बदले में उसने उन्हें क्या दिया। जब देने की बारी आयी तो मौत ने दस्तक दे दी। दिल को दहला देने वाला ऐसा वाक्या पहली बार मेरे साथ घटा है। मैं इतना दुखी अपने पूरे जीवन में नही हुआ था जितना की आज हूँ। किसी से बात करता हूँ तो आंसू टपकने लगते हैं। बस मैं एक चीज़ चाहता हूँ की किसी तरह उसके पापा जेल से बाहर आ जायें और उसकी बची हुयी ज़िंदगी में उसका साथ दें। मैं चाहता हूँ की कोई एक कदम इसके लिए बढाये जिससे इस दर्दनाक स्टोरी में कुछ तो गम दूर हों। किसी को यह पता चल जाए की उसकी ज़िंदगी बस इतने दिन और बची है इसका दर्द क्या होता है इसे एक बार सोचकर भी महसूस किया जा सकता है।
................ अभी भी बाकी है ये कहानी
अमित द्विवेदी
27.6.08
एक कहानी ऐसी भी जो जारी है
मैं ऑरकुट का मेंबर बना तो कई ऐसे दोस्त मुझे मिल गए जिन्हें मैं भूल चुका था। अचानक इसी कडी में एक तकनीकी शिखा ग्रहण कर रहे एक बन्दे का मुझे स्क्रैप मिला उसने मुझे बताया की वोह भी बस्ती का रहने वाला है । आजकल नॉएडा के एक ingeeneering कॉलेज से पढाई कर रहा है। मैंने उसे अपना दोस्त मान लिया एक दिन उसने मेरा नम्बर माँगा तो मैंने उसे दे दिया और उसने मुझे कॉल किया तो पता चला की वो मेरे गांव के पड़ोस का रहने वाला है। मुझे उससे बात करके अच्छा लगा क्यूंकि वो एक बहुत ही अच्छा लड़का था। दिन रात मेहनत करके वो पढाई करता था उसके पिता जी उसकी हर एजूकेशन को दिलवाने के लिए कृतसंकल्प थे। मैंने एक बार जब गांव गया तो पुछा अंकल आप अपने बच्चों को इतना पढा कैसे रहे ही जब आपके पास इतना पैसा नही है तो उन्होंने जवाब दिया की बेटा अगर वो गानों में रहते तो खेती बड़ी करते जब मैंने देखा की वो पढ़ना चाहता है तो उसे मैंने शहर भेज दिया की जावो कुछ बनकर दिखावो। उसके लिए मैंने अपने कुछ खेत बेंच दिए। अब मुझे अच्छा लग रहा है की वो अच्छा कर रहा है।
पर जो ऊपर वाला बैठा है उसकी परीक्षा इतनी कठिन है की शायद ही उसे कोई पास कर पाए। २००४ में करुनाकर नाम के उस होनहार बच्चे ने तुमेर के चलते अपना दाहिना पैर गंवा दिया। फिर भी उसने हिम्मत नही हरी। इतना कुछ होने के बवोजूद उसने अपने मुकाम को पाने के लिए मेहनत जारी रक्खी और नॉएडा के एक अच्छे से तकनीकी कॉलेज में उसे प्रवेश भी मिल गया। अच्छे मार्क्स से उसने अपने सारे सेमेस्टर क्लीअर किए बाद में जब उसका अन्तिम साल रहा गया तो इस होनहार बहादुर छात्र को सीने में दर्द उठा और खांसी आयी। जब उसने इसे डॉक्टर को दिखाया तो पता चला की उसके फेफडे में कैंसर हो गया है। उसका इलाज़ ठीक तरीके से नही हो सका क्युकी उसके पिता जी को गांव के कुछ लोगों ने जमीन के एक मामले में जेल भिजवा दिया। और इसमें सबसे बड़ी दिलचस्प बात ये है की छोटे से ज़मीन के मामले में पैसे वाली पार्टी ने पुलिस को घूस देकर उन्हें अन्दर करवाया है। जिसमे कोर्ट उन्हें जमानत देने में झिझक रही है जैसे वो बड़े क्रिमिनल हों कोई। करुनाकर ने एक दिन मुझे फ़ोन किया और उस समय जब वो बिल्कुल टूट चुका था। कोई उसके पास नही था। दिल्ली के करोल्बाघ के यूनानी मेडिकल कॉलेज में वो भरती हो चुका था। मैं उससे मिलने गया तो वो ऐसे टूट गया था जैसे उसके लिए दुनिया में कुछ रहा ही नही। पूरी दुनिया को देखने का सपना देखने वाला बहादुर लड़का बीमारी से हार गया था। यह ऐसा हॉस्पिटल था जहाँ उसका कोई इलाज़ नही था। घर का उसके साथ कोई नही था। क्यूंकि हर कोई उसके पापा की ज़मानत के लिए चक्कर लगा रहा है। जेब में उतने पैसे नही थे जिससे किसी अच्छे हॉस्पिटल में दवा कराई जा सके। मैंने उसकी हालत देखी तो रो पडा। भइया कहकर मुझे जब भी वो पुकारता मुझे अपने पर शर्म आती क्यूंकि मेरे हाथ में उसके करने के लिए कुछ नही था। मैंने एम्स में उसके लिए बात करनी शुरू की। तीन दिन बाद किसी तरह से सर्जरी डिपार्टमेन्ट में डॉक्टर अरविन्द को उसे दिखने में सफल रहा। पर डॉक्टर अरविन्द ने उसकी एक्सरे रिपोर्ट देखकर जो जवाब दिया उसने मुझे हिला दिया। उन्होंने कहा की इन्फेक्शन फेफडे में दोनों तरफ़ फ़ैल गया है। आप इसका सिटी स्कैन करवाकर शनिवार मोर्निंग में यानी की २८ जून को मिलिए फिर हम आपको बताएँगे की हम इसे सही कर पाएंगे या नही। अभी कल सुबह आने में १२ घंटे हैं पर मैं बहुत दुखी हूँ की एक बाप ने अपने बेटे पर वो सारी पूंजी लगा दी जिससे उसने उम्मीद की थी की एकदिन वो कुछ बन जायेगा पर बेटा लायक होते हुए भी अपने बीमारी से हरता जा रहा है। उसे अपने पापा के जेल से बाहर आने का इंतज़ार है। उसे अब कुछ नही सिर्फा अपने पापा चाहिए। पर इस घूसखोर प्रथा में मुझे नही लगता की एक बाप ज़िंदगी मौत से जूझ रहे अपने बेटे तक पहुँच पायेगा। मुझे पता है इस भडास से बहुत से पत्रकार जुड़े हैं अगर किसी की पहुच हो तो चाहूंगा की एक बेटे की आख़िर खवाहिश पूरी करने में कुछ कर सकें तो करके दिखाएँ। यह कहानी नही असलियत है और मैं तब तक लिखता रहूँगा जब तक एक इक्कीस साल के नौजवान को ठीक ना करवा लूँ। उससे मेरा कोई रिश्ता नही है पर हाँ आज की डेट में मेरे लिए वो सबसे बढ़कर है जिसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ। ......... ये कहानी जारी रहेगी यूँ ही।
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amit dwivedi
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