Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

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19.3.09

लीजिए, गूगल बाबा के घर की वर्चुअल बिटिया सबके सामने आ गईं, आप भी इनसे बतियाइए

आज मैं गूगल के नए गैजेट्स देख रहा था तो वर्चुअल गर्ल दिख गई। सोचा भड़ासियों से भी इसकी बात करा दूं। आप इस लड़की से खूब बात कर सकते हैं लेकिन आवाज से नहीं, लिखकर चैट के जरिए। नीचे जो बालिका है, उसके सिर के ऊपर जो खाली बक्सा बना है, उसमें आप इंग्लिश में कोई सवाल पूछिए और क्लिक टू चैट विथ सिमोन बटन को दबा दीजिए, सिमोन जी तुरंत जवाब देंगी। जरा देखिए। मुझे तो मजा आया।
यशवंत
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6.9.08

गूगल के पब्लिक-सर्विस विगयापनो से छुटकारा

भडासी भाइयो को राजा सांगवान का नमस्कार। तो भाई लोगो एक बार फ़िर से हाजिर हु अक नई और अची ख़बर लेकर । आप सब लोग हिन्दी में लिखते है । ये भुत ही अच्छी बात है। वैसे तो मैंने आप लोगो के ब्लॉग पैर किसी तरह का विगय्पा नही देखा फ़िर अगर आप लोग अपने ब्लॉग पर विगयापन डालना चाहते है लकिन विगेपन इसलिए नही दल प् रहे की गूगल हिन्दी ब्लॉग और साइट्स पैर हमेसा पब्लिक सर्विस विगेपन डालता है तो आपकी प्रॉब्लम ख़तम हो गई समझे । इसका हल क्या हा ये आप इस ब्लॉग पर देख सकते है-
http://onlinemoney.blogsmine.com
और अगर आपको इसका नमूना देखना हो तो आप मेरे हिन्दी ब्लॉग लोफ़र पर देखा सकते है पता है-
http://lofer.blogsmine.com
बस आज के लिए मेरे पास इतनी ही ख़बर है तो भडासी भाइयो खुस रहो और इसी तरह अपनी भड़ास निकलते रहो जय-हिंद ।

3.8.08

हथौड़ा चालू

बड़े भाई

मेरा ब्लॉग हथौड़ा चालू हो बया है। गूगल ने आज ही उसका ताला खोला है।

आपका
अंशुमाली

(इस मामले को जानने के लिए पहले की पोस्ट पढ़ें...अंशुमाली का ब्लाग गूगल ने किया लाक)



बधाई हो अंशु भाई....अंत में सच की जीत होती ही है, थोड़ी देर व अंधेर से घबराने की जरूरत नहीं। यशवंत

8.7.08

अंशुमाली का ब्लाग गूगल ने किया लाक


भाई यशवंत जी
एक समस्या आन खड़ी हुई है। गूगल ने मेरा ब्लॉग लॉक कर दिया है। इस मेल के साथ मैं वो प्रिंट-स्क्रीन भी भेज रहा हूं जोकि मेरे ब्लॉग पर दिखाई दे रही है। पोस्ट नहीं दे पा रहा हूं। क्या करूं। कोई समाधान हो तो बताएं। हां गूगल की समीक्षा के लिए मैंने अपनी स्वीकृति दे दी है ४ जुलाई को ही। उत्तर की प्रतिक्षा में।
आपका
अंशुमाली
(अंशुमाली भाई, मैं तो खुद स्तब्ध हूं आपका मेल पढ़कर। ये गूगल ने क्यों किया? हो सकता है आपकी तरह किसी दिन भड़ास पर भी ऐसी ही गाज गिर जाए। आपका मेल पढ़कर तो हम भड़ासियों को यह सोच के रखना चाहिए कि एक दिन भड़ास भी इसी तरह किसी साजिश का शिकार बनाकर बंद कराया जा सकता है। आपको मेरी सलाह यही है कि गूगल से पत्राचार करें और पत्राचार को जारी रखें। मैं इस मामले में आपकी तरह ही अज्ञानी हूं। मैं आपका पत्र इसलिए डाल रहा हूं ताकि कोई प्रबुद्ध ब्लागर आपकी मदद तो करे ही, हम सभी लोगों का ज्ञानवर्द्धन भी करे। आभार के साथ, यशवंत)

16.6.08

"भारतीय" सुधर गए या गूगल ?


विनीत खरे

मेरी एक पोस्ट "गुगल करें तो टेक्नोलॉजी और करें अश्लीलता" पर ब्लॉगर मित्रों की अलग-अलग राय थी.
ritu said... सिर्फ s ही नहीं और अक्षर भी टाइप करके देखिए...
June 9, 2008 1:06 PM

ab inconvenienti said... वाह भाई, मेहनत करें हम भारतीय, और क्रेडिट दो तुम गूगल को! आप गूगल के बारे में इतना सब जानते हैं तोफ़िर यह भी मालूम ही होगा की ऑटोसजेस्ट एक स्वचालित प्रक्रिया है, इसमें प्रदर्शित शब्द हिन्दी में अब तक के सबसे अधिक खोजे गए शब्द हैं........... अब अगर ठरकी हिन्दी वाले यही सब सर्च करते हैं तो बेचारा गूगल क्या करे? गूगल 43 भाषाओं में सर्च की सुविधा देता है, पर वह चूँकि हिंदुस्तान की अति पावन संस्कृति षडयंत्र के तहत विनष्ट करना चाहता है, इसीलिए हिन्दी ऑटो सजेस्ट में ऐ से जेड तक हर अक्षर में अश्लील शब्द जानबूझकर घुसा दिए गए , हम उसका मरते दम तक विरोध करेंगे! (और 'एस' क्या सभी अक्षरों में ऐसे ही शब्द ऑटो सजेस्ट हो रहे हैं, ज़रा ये भी पता लगा लें की हिन्दी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग (और शायद सबसे लोकप्रिय साईट भी) मस्तराम मुसाफिर ब्लॉग पर रोज़ कितने हिट्स/कमेंट्स आते हैं)
June 9, 2008 2:28 PM

संजय बेंगाणी said... इस महान संस्कृति की पैदाइश, हम भारतीय अगर सेक्स को खोजते रहेंगे तो यही दिखेगा न... गूगल इसमें क्या करे? और हम भारतीयों की संस्कृति सेक्स शब्द से ही खत्म हो जाती है, पता नहीं तीस से एक सौ बीस करोड़ कैसे हो गए?
June 9, 2008 6:34 PM

चौराहा said... विनीत बाबू दरअसल इसमें गूगल की कोई ग़लती नहीं है। लोग पहले जिन शब्दों से सर्च करते हैं वो उन सबको स्टोर कर लेता है बाद में नए सर्फर को ऑटो सजेस्ट में वो उन्हीं शब्दों को मुहैया करवाता है। ये दो तरफा मामला है। जैसा इनपुट होगा वैसा ही आउटपुट भी मिलेगा। और हां एक काम कीजिएगा निवेदन है कि अपनी टिप्पणियों से मेरे ब्लॉग चौराहा का जो लिंक इनकन्वीनिएंट महोदय ने आपको दिया है उसे हटाने की कृपा करिएगा। ये कोई अश्लील ब्लॉग नही है। वो मेरा एक लेख है जो हिंदी में अश्लील ब्लॉग्स के ऊपर लिखा गया था। उन्होंने उसे कुछ ग़लत संदर्भ में ही पेश कर दिया है।
June 9, 2008 8:12 PM

akumarjain said... विनीत भाई,अपना भारत तो कृष्ण जी की रासलीला और खजुराहो की शिल्पकला और वात्सायन बाबा की चौसठ कलाओं का देश है, फिर गुगल दादा से क्या होना जाना है??भाई, जब स्कूलों मे यौन शिक्षा की बात हो रही हो तो मेरे ख्याल से आपको भी बिना देर किये अपने पट इन बातों के लिये खोल देने चाहियें।
June 9, 2008 11:02 PM
विनीत खरे said... मित्रो गूगल भारत इतना समझदार है कि "S" लिखते ही वह समझ गया कि user "सेक्स" समबन्धित शब्द ही ढूंढ़ रहा है ....वाह
June 9, 2008 11:44 PM

विनीत खरे said... अगर हम हिन्दी भाषी यही तलाशते है तो google.co.in के इग्लिश वर्ज़न में ऑटो सजेस्ट मैं "S" लिखने पर ऑटो सजेस्ट क्यों नहीं आता है? क्या यह हिन्दी भाषियों को बदनाम करने की शजिश तो नहीं ?
June 10, 2008 5:57 PM

आलोक said... विनीत जी, आपका लेख और उस पर की टिप्पणियाँ पढ़ीं। लंबा जवाब था इसलिए अपने चिट्ठे पर लिखा है। अपनी प्रतिक्रिया दीजिएगा।
June 10, 2008 11:55 PM

akumarjain said... आलोक जी,आपका चिट्ठा छान मारा लेकिन गूगल वाली पोस्ट नही दिखाई दी। अगर आप अपने चिट्ठे के बदले पोस्ट का लिंक दे देते तो जरा सुविधा होती।
June 11, 2008 12:06 AM
आलोक said... आपको हुई असुविधा के लिए क्षमा, यह है लेख की कड़ी - गूगल सुझाव, टेक्नोलॉजी, अश्लीलता, और प्रयोक्ता का अनुभव - सुधारना आपके हाथ में है
June 12, 2008 6:24 PM

akumarjain said... आलोक जी, कडी के लिये धन्यवाद। आपके आलेख पर मैने एक छोटी सी छीटाकशी की है, उसका अवलोकन जरूर करें। मुझे लगता है कि हिंदी ब्लागिंग तथा मीडिया से जुडे बंधुओ को इसके लिये गुगल से विरोध जताना चाहिये। विरोध सामुहिक भी हो सकता है और व्यक्तिगत भी।
June 13, 2008 9:54 AM

14.6.08

चार लाइनें

पेश-ए-खिदमत हैं चार लाइनें.....


यशवंत जी को मिल गया गूगल जी से चैक,
इसके पीछे है सभी हम मित्रों का बैक।
चैक प्राप्ति की यात्रा को लगे न कोई चेक,
समय तेरा अनुकूल है दांव बड़े तू फेंक।।


-Maqbool


13.6.08

भड़ास संचालक मंडल भंग, अब संचालन समिति

भड़ास अब जिस ऊंचाई पर है, उसे संचालित करने के लिए एक छोटी, सक्रिय और मजबूत टीम की जरूरत महसूस की जा रही थी। भड़ास संचालक मंडल ने अपनी उपयोगिता अब तक साबित की पर नई स्थितियों में एक ऐसी संचालन समिति की जरूरत महसूस की जा रही थी जो छोटी हो, लगातार सक्रिय हो, लगातार टच में हो और किसी मसले पर तुरंत निर्णय लेने के लिए हर वक्त मौजूद हो। तो इस पैमाने पर खरे तो ढेर सारे लोग उतरे पर उसमें से भी हमें छांटकर एक बेहद छोटी टीम बनानी थी इसलिए चाहते हुए भी हमें कई ऐसे वरिष्ठ और सक्रिय साथियों को टीम में न रख सके जिन्हें हम संचालक मंडल में रखे हुए थे। उम्मीद है, वे कतई बुरा नहीं मानेंगे क्योंकि ये जो कुछ किया जा रहा है, ब्राडर पर्सपेक्टिव में इसके पीछे भड़ास का स्मूथ संचालन है, किन्हीं भी विषम स्थितियों से उबरने और आगे बढ़ने की रणनीति है और साथ में है संचालन करने में स्मूथनेस रखने की आकांक्षा।



अब जो संचालन समिति बनाई गई है, उसमें किसी का कोई पद नहीं है। सभी सिर्फ संचालन समिति के सदस्य हैं। इनकी संख्या 7 है और इनके नाम इस प्रकार हैं...



भड़ास संचालन समितिः हरे प्रकाश उपाध्याय, सुरेश नीरव, डा. रूपेश श्रीवास्तव, यशवंत सिंह, रजनीश के झा, मनीष राज और हृदयेंद्र प्रताप सिंह।



(इनमें से सिर्फ मनीष राज ऐसे हैं जो बहुत दिनों से भड़ास पर कुछ लिख नहीं पा रहे हैं पर उनके बारे में एक जानकारी दे दूं कि वे भड़ास के लिए पूरा वक्त देने के लिए इस समय दिल्ली में ही मौजूद हैं और भड़ास4मीडिया में सक्रिय हैं। उनकी पूरी सक्रियता भड़ास और भड़ास4मीडिया की भावी योजनाओं के लिए है।)



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एक खुशखबरी

अपने भड़ासी साथियों को सूचित करना चाहता हूं कि भड़ास पर लगे विज्ञापनों से मिले पैसे का चेक गूगल ने भेज दिया है और मुझ तक पहुंच भी गया है। यह रकम पांच हजार रुपये से कुछ कम है। इसे भजाने के लिए चेक बैंक में डाल दिया है। आप सबकी पार्टी भड़ास संचालन समिति की तरफ से हरे भइया पर बकाया है:)



अगर कभी दिल्ली आना तो समझो भड़ास की तरफ से अद्धे-पव्वे का इंतजाम पक्का हो गया। अगर ये न लेते हों तो मुसम्मी का जूस तो पिलवा ही दिया जाएगा क्योंकि पांच हजार रुपये में जितने भड़ासी सदस्य हैं, उन्हें एक-एक पव्वा (बिना चिखना के) भी खरीदकर भेंट करेंगे तो वो रकम दिल्ली में दारू के रेट के हिसाब से पहुंचेगी पंद्रह हजार रुपये। इसलिए ज्यादा अच्छा है कि कुछ लोग केवल एक गिलास मुसम्मी के जूस से मान जायें :)





दूसरी सूचना

भड़ास की सदस्य संख्या नित बढ़ रही है। अब भड़ासियों की संख्या हो गई 320। उम्मीद करते हैं कि इस साल के अंत तक यह संख्या 500 के करीब पहुंच जायेगी। ये 320 लोग ऐसे हैं जिनके मोबाइल नंबर, पते और प्रोफाइल भड़ास संचालन समिति के पास उपलब्ध है। मतलब, इनमें अनाम, बेनाम या अनजान टाइप के प्राणी नहीं हैं और हम हमेशा भड़ास पर लोगों को अपनी पहचान के साथ आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे क्योंकि दुनिया में कुछ भी नया करने के लिए आपको साहस के साथ, अपनी पहचान के साथ आगे आना ही पड़ेगा, आज नहीं तो कल, भड़ास पर नहीं तो संडास पर ही सही, आपको खुलना तो होगा ही।



अंत में सभी साथियों से विनम्र विनती के साथ कि वे भड़ास पर किसी दूसरे व्यक्ति को काटने, निगेट करने में ऊर्जा लगाने के बजाय अपनी भड़ास निकालने के सार्थक काम करें जिससे आपकी पर्सनाल्टी के दोष दूर हों और आप लीडर की भांति जीवन में आगे बढ़ सकें।



फिलहाल इतना ही, उम्मीद है आप का प्यार और विश्वास हम लोगों पर यूं ही बना रहेगा और दिन ब दिन बढ़ता रहेगा।



जय भड़ास

यशवंत

9.6.08

वाह भाई, मेहनत करें हम भारतीय, और क्रेडिट दो तुम गूगल को!

विनीत खरे ने अपनी नीचे लिखी पोस्ट में (गूगल करे तो टेक्नालजी, कोई और करे तो अश्लीलता) गूगल पर पर कुछ आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि हिंदी लैंग्वेज में गूगल को कनवर्ट करने के बाद अगर सर्च में एस लिखिये तो गूगल अपने आप हिंदी के सेक्स वाले ढेर सारे आप्शनल सर्च के शब्द मुहैया करा देता है। इस चीज को उन्होंने गलत ठहराया। उन्हीं की पोस्ट पर एक सज्जन ने कमेंट कर तस्वीर का दूसरा रूप दिखाया है। इनका कहना है कि हम हिंदी वाले जो चीज सबसे ज्यादा सर्च करते हैं, उसी को गूगल हमें आटो सजेस्ट करता है क्योंकि उसकी तकनीक आटोमेटेड है। कहने का आशय यह कि पहले हम्ही यह काम करते हैं, फिर गूगल हमें सुझाता है।

लीजिए, विनीत की पोस्ट पर आए कमेंट को पढ़िए

यशवंत
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ab inconvenienti has left a new comment on your post "गुगल करे तो टेक्नोलॉजी, कोई और करे तो अश्लीलता !!":

वाह भाई, मेहनत करें हम भारतीय, और क्रेडिट दो तुम गूगल को!

आप गूगल के बारे में इतना सब जानते हैं तो फ़िर यह भी मालूम ही होगा की ऑटोसजेस्ट एक स्वचालित प्रक्रिया है, इसमें प्रदर्शित शब्द हिन्दी में अब तक के सबसे अधिक खोजे गए शब्द हैं.

अब अगर ठरकी हिन्दी वाले यही सब सर्च करते हैं तो बेचारा गूगल क्या करे?

गूगल 43 भाषाओं में सर्च की सुविधा देता है, पर वह चूँकि हिंदुस्तान की अति पावन संस्कृति षडयंत्र के तहत विनष्ट करना चाहता है, इसीलिए हिन्दी ऑटो सजेस्ट में ऐ से जेड तक हर अक्षर में अश्लील शब्द जानबूझकर घुसा दिए गए, हम उसका मरते दम तक विरोध करेंगे!

(और 'एस' क्या सभी अक्षरों में ऐसे ही शब्द ऑटो सजेस्ट हो रहे हैं, ज़रा ये भी पता लगा लें की हिन्दी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग (और शायद सबसे लोकप्रिय साईट भी) मस्तराम मुसाफिर ब्लॉग पर रोज़ कितने हिट्स/कमेंट्स आते हैं)


Posted by ab inconvenienti to भड़ास at 9/6/08 2:20 PM

गुगल करे तो टेक्नोलॉजी, कोई और करे तो अश्लीलता !!

http://paankidukaan.blogspot.com
विनीत खरे
गुगल (http://www.google.co.in/ ) पर जा कर पेज को भाषा को हिन्दी में बदलें, आपका पूरा पेज हिन्दी में हो जाएगा लेकिन सर्च बार में "s" लिखते ही आप चौक जायेंगे। उस में सिर्फ "सेक्स" संबंधित शब्द ही आते है।


गुगल ने एक टेक्नोलॉजी प्रयोग करके user के लिए ऑटो सजेस्ट की टेक्नोलॉजी तैयार की है जिससे user एक वर्ड को लिखते ही आपको उस वर्ड से संबंधित शब्द आ जायगे।


मित्रों, गूगल के लोगो (Google's Logo) के नीचे भारत लिखा है, भारत की संस्कृति पर हमला नहीं है ये? क्या भारत में इतना खुलापन है की "s" लिखते ही सेक्स के शब्द ऑटो सजेस्ट हों?

5.2.08

भड़ास और विज्ञापन

भड़ास पर गूगल एडसेंस का विज्ञापन कई बार आए और गए। दरअसल आप सब लोग जिस तरह भड़ास का मेंबर बनने और पोस्ट लिखने में दिमाग लगाते हो, उसी तरह मैं भड़ास से कमाई करने में दिमाग लगाता हूं। जब समझ में नहीं आता है तो गूगल एडसेंस को डिलीट कर देता हूं। मतलब विज्ञापन डिलीट कर देता हूं। आज गूगल की चिट्ठी आई है, भइया अपना पासवर्ड ले लो, पिन नंबर ले लो, और अपनी रकम इसके बाद ले लो। बड़ा खुश हुआ। चलो, हरेप्रकाश उपाध्याय को सर्वश्रेष्ठ भड़ासी कविता के लिए अपनी जेब से एक हजार रुपये देने से बच जाऊंगा। सो, गूगल बाबा के आदेश मानते हुए उनके विज्ञापन लगा दिए, गूगल एकाउंट की औपचारिकता पूरी कर दी। पर अब भी लग रहा है, कई चीजें अपन की समझ से बाहर हैं। हो सकता है, जो विज्ञापन दिख रहे हों, फिर डिलीट हो जाएं। और तो और, ये भड़ास फिर डिलीट हो जाए। ये ब्लाग फिर खत्म हो जाए। जैसे अपन की ज़िंदगी, नौकरी और चूतियापे पर कोई लगाम नहीं है, उसी तरह इस ब्लाग या इस धंधे पर कैसे लगाम रखने की गारंटी कर सकता हूं। हां, मैं चाहता हूं कि ये भड़ास जो अब तक मेरा निजी चूतियापा है, सामूहिक चूतियापा बन जाए। इस बारे में जल्द ही बड़ी घोषणा करने वाला हूं। उसके पहले विचार विमर्श कर रहा हूं। तो दोस्तों, भड़ास पर हो तो ये न मान लेना कि ये भड़ास ज़िंदगी भर यूं ही दिखता रहेगा, हरामजादों और माधड़चोदों की फौज तैयार है, जो भड़ास को खत्म करने पर तुली हुई है, मुजे नष्ट करने पर आमादा है। देखते हैं, कब तक जीते हैं, मैं और भड़ास और आप सब साथी। पर ये जो दौर चला है, लगता है, वो न अब आपके वश में है, न मेरे। सो, यह काफिला बड़ा रिजल्ट देकर जाएगा। चलिए, गपोड़ी टाइप की बात करने की बजाय बात बस यूं ही खत्म कर देते हैं। लेकिन अंतिम बात के बाद, जैसे मैं गूगल एडसेंस लगाना और हटाना सीख रहा हूं, वैसे ही आप भी लगातार नया कुछ सीखो, अपना मूल काम करते हुए। इसमें कोई गलत नहीं है। जो कोई कहता है कि गलत है उसकी बाप की गाड़ फाड़। तो मैं अब भी सीख रहा हूं....

...पर ये जो कोशिश सीखने की है, हिंदी लिखने, मेंबर बनने, ब्लाग बनाने, ब्लाग चलाने, कम्युनिटी ब्लाग चलाने, विज्ञापन लगाने, विज्ञापन से कमाने....वो शायद कुछ बढ़िया ही करिश्मा दिखाएगी, ये मान कर चल रहा हूं। तो, मेरा अनुरोध है कि विज्ञापनों पे ध्यान न दीजिये, उनकी गांड़ में घुस जाइए। भड़ास को स्वालंबी बनाने की कोशिश है ताकि कम से कम भड़ास एवार्ड भड़ास की कमाई से शुरू हो सकें।

आगे के दिनों में भड़ास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं होनी हैं। इंतजार करिए, और तब तक कहते रहिये...सूअर की औलाद, हरामजादे की जात....

कई गंदी गंदी गालियां देने को जी हो रहा है पर भड़ास में शामिल महिलाओं का ध्यान आ रहा है, सो थोड़ा संयम सीखने की कोशिश कर रहा हूं। मेरे खयाल से ये गलत है...पर कई गलती मजबूरी में की जाती है। बाकी डाग्डर साहब और पंचों की राय...
जय भड़ास...यशवंत