30.12.12
माफ करना दामिनी! हम भी गुनाहगार हैं!
19.12.12
कानून के खौफ की सख्त जरूरत
दिल्ली की बस में एक युवती के साथ हुई शर्मनाक घटना जैसी घटनाओं पर अरब का कानून याद आता है। समाज से लेकर सरकार तक कहीं भी इस बाबत शाब्दिक सहानुभूति से आगे कोई अर्थपूर्ण चिंता दूर-दूर तक नजर नहीं आती। लड़कियां कहीं भी खुद को सुरक्षित नहीं पातीं। आबादी के लिहाज से दुनिया में दूसरे नंबर वाले भारत में हालात शायद सबसे शर्मनाक हैं। छेड़छाड़ के मामलों में तो देश के अधिकांश हिस्सों में हालात एक जैसे हैं। इस पीड़ा को नजदीक से महसूस करना है, तो उन कामकाजी महिलाओं व लड़कियों से बात करिये जो प्रतिदिन सफर से लेकर कार्यालय तक में मानसिक यंत्रणा सहती हैं। कोई एक कारण नहीं है बल्कि बड़े सामाजिक मंथन की जरूरत है। जरूरत कानून के खौफ की? क्योंकि कानून लचीला है। मामलों की जल्द सुनवाई के साथ ही सख्त सजाएं ही डर पैदा करती हैं। स्वार्थपूर्ण मुद्दों पर चीखने-चिल्लाने वाले संगठनों को भी इसके लिये आगे आना चाहिए। जो हालात हैं उसमें ज्यादा प्रतिशत लोग बेटियां पैदा करने से डरेंगे ही। इस हकीकत का स्वीकार कर लेना चाहिए कि ऐसे लोगों को कानून का खौफ नहीं है?
19.3.09
लीजिए, गूगल बाबा के घर की वर्चुअल बिटिया सबके सामने आ गईं, आप भी इनसे बतियाइए
आज मैं गूगल के नए गैजेट्स देख रहा था तो वर्चुअल गर्ल दिख गई। सोचा भड़ासियों से भी इसकी बात करा दूं। आप इस लड़की से खूब बात कर सकते हैं लेकिन आवाज से नहीं, लिखकर चैट के जरिए। नीचे जो बालिका है, उसके सिर के ऊपर जो खाली बक्सा बना है, उसमें आप इंग्लिश में कोई सवाल पूछिए और क्लिक टू चैट विथ सिमोन बटन को दबा दीजिए, सिमोन जी तुरंत जवाब देंगी। जरा देखिए। मुझे तो मजा आया।
यशवंत
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यशवंत सिंह yashwant singh
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Labels: गूगल, गैजेट, चैट, टेक्नालजी, भड़ास, लड़की, वर्चुअल गर्ल
28.2.08
लड़की का नाम रुचिका, लड़के का नाम नासिर....संदर्भ वो पतिता फिर भाग गई ...पार्ट टू
पिछले दिनों पतिता सीरिज में दो पार्ट में मैंने दो स्त्रियों की सच्ची कहानी लिखी, दूसरी कहानी मेरठ के जिस लड़की की थी, जिसने एक मुस्लिम लड़के से प्रेम विवाह किया था और घर से भाग गई थी.......लंबी कहानी, उसका इंटरव्यू दैनिक जागरण मेरठ संस्करण में प्रकाशित किया था उस वक्त। उस बारे में मेरे अनन्य मित्र और दैनिक जागरण मेरठ की शोध व लाइब्रेरी टीम के इंचार्ज राकेश जुयाल ने मुझे मेल से जानकारी दी कि उस लड़की का नाम रुचिका था, और वो लड़का नासिर नाम का था। बाद में हाईकोर्ट ने उन दोनों को एक साथ रहने व समाज के ठेकेदारों को उनकी जिंदगी से दूर रहने का निर्णय सुनाया था।
साथी राकेश जुयाल का दिल से आभार जो उन्होंने यह महत्वपूर्ण तथ्य मेल के जरिए मुझे भेजा। मैं उनके पत्र को यहां हू ब हू प्रकाशित कर रहा हूं ताकि जिन लोगों ने उस स्टोरी को पढ़ी होगी, वे ये तथ्य भी जान लें। जिन लोगों ने वो स्टोरी नहीं पढ़ी होगी वो.....वो पतिता फिर भाग गई...पार्ट टू....शीर्षक से पिछले दिनों भड़ास में प्रकाशित पोस्ट जरूर पढ़ें।
जय भड़ास
यशवंत
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RJuyal to me
show details 23 Feb (5 days ago)
यशवंत जी वो लड़की रुचिका जिसे आपने क्फ्.फ्.भ् को पहले पेज पर बाई लाइन अपने नाम से छापा था ,दुविधा के दोराहे पर खड़ी हुई जिंदगानी , शीर्षक से प्रकाशित किया था । ख्फ् मई को रुचिका फिर नासिर के साथ भाग गई
ख्� मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट की हां के बाद चले महानगर के प्रेम दीवाने
जाति-धर्म से ऊपर प्रेम की जीत हुई जिसे कोर्ट ने भी स्वीकार किया ।
राकेश जुयाल
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23.2.08
वो पतिता फिर भाग गई.....!!! पार्ट-2
मेरठ की वो लड़की। बेहद सुंदर। जीभर के जिसे देख ले, उसे प्यार हो जाये। परिवार की सबसे बड़ी लड़की। हायर मिडिल क्लास की लड़की। शहरी परिवेश के परिवार की लड़की। स्मार्ट और अक्लमंद लड़की।
स्कूल आते जाते एक नौजवान से उसे प्यार हो गया। नौजवान भी कोई खास नहीं। टपोरी टाइप। वो भी यंग स्मार्ट और फौलादी बदन वाला। दिन के वक्त का ज्यादातर हिस्सा सड़क पर बाल संवारते, बाइक भगाते बिताता था। वह अपने कौशल और स्किल से उस लड़की पर डोले डालने लगा। लड़की को अच्छा लगता था। कभी गुस्साने का दिखावा करती तो कभी मुस्करा कर आगे बढ़ जाती। बकौल कवि हरिप्रकाश उपाध्याय की कविता के शब्दों में कहें तो सबसे सतही मुंबइया फिल्मों ने प्रेम करने के जो तरीके सिखाये, इन दोनों नौजवान दिलों ने उनसे सबक लेकर प्रेम करना सीख लिया।
और एक दिन.............!!!!
लड़की उस लड़के संग भाग गई।
मचा हल्ला। कोहराम। जितने मुंह उतनी बातें। प्रेम में दुनियादारी घुस गई। पकड़ो, मारो, हिंदु, मुस्लिम, आईएसआई, धर्म परिवर्तन, शादीशुदा....। मतलब आप लोग समझ गए होंगे। लड़का मुसलमान था। शादीशुदा था। आईएसआई का एजेंट था। ये मैं नहीं कह रहा हूं, लड़की के परिजनों ने जिन हिंदुवादी नेताओं को पकड़ा उन लोगों ने सड़क पर उतरकर ये सारी बातें माइक से कहीं।
और एक दिन लड़की पकड़ ली गई।
ज्यादा दूर नहीं भागे थे वो। यहीं गाजियाबाद में एक फ्लैट लेकर रह रहे थे। लड़की को मां की याद आई, फोन किया। परिजनों ने उसे पुचकारा। सब कुछ स्वीकारने और बढ़िया से शादी करने का लालच दिया। लड़के फंस गई, उसने अपना एड्रेस बता दिया। घर वाले हिंदुवादी नेताओं और पुलिस के साथ आए और लड़की को उठा ले गए। लड़के को खूब मारा पीटा और उसे छोड़ दिया।
मेरठ में यह मुद्दा सिर्फ प्रेम विवाह और भागने के कारण नहीं बल्कि हिंदू बनाम मुस्लिम के मुद्दे के कारण खूब चर्चित हुआ। हिंदू व मुस्लिम नेताओं के मैदान में आ जाने से मामला ला एंड आर्डर तक जाता दिखा।
दैनिक जागरण के सिटी चीफ के बतौर मैंने खुद उस लड़की से बात करने की ठानी और उसके दिल की राय प्रकाशित करने का निर्णय लिया। एक संपर्क द्वारा उस लड़की के घर पहुंचे जहां वह लगभग कैद में रखी गई थी। मैंने सबसे विनती की कि मुझे अकेले में बात करने दिया जाए। और उस लड़की से बातें करने के बाद मेरा माथा भन्ना गया। सिर्फ वह बेहद खूबसूरत ही नहीं थी बल्कि बेहद बौद्धिक और समझदार भी थी। उसने जो बातें कहीं उसे मैंने एज इट इज छाप दिया।
उसके जो कहा, उसका लब्बोलुवाब ये था...
मुझे पहले से पता था कि वो शादीशुदा है लेकिन अब वो तलाक दे चुका है। जो आदमी तलाकनामा मुझे दिखा चुका है और उसे मेरे ही साथ रहना है तो फिर क्या दिक्कत है।
वो बेहद शरीफ लड़का है। उसे लोग फर्जी तौर पर आईएसआई का एजेंट बता रहे हैं। मैं उसके साथ रहना चाहती हूं क्योंकि वो मुझे अच्छा लगता है। मुझे नहीं चाहिए ये सुख। मैं उसके साथ गरीबी में जी लूंगी।
ये देखिए तस्वीरें, जो छिपाकर ले आई हूं। हम लोगों ने बाकायदा निकाह किया है और निकाह मैंने अपनी मर्जी से किया है।
ये देखिए तस्वीरें जिसमें उनके घर के सारे लोग हैं और कितने प्यार से मुझे घर में ले जाया गया। रखा गया। पार्टी हुई। वहां के जो छोटे बच्चे हैं वो मुझे इतने प्यारे लगते हैं, कि मैं उन्हें याद करके रोती हूं। हम लोगों को उनका घर छोड़कर इसलिए गाजियाबाद जाना पड़ा क्योंकि पुलिस हम लोगों को गिरफ्तार कर लेती।
मैं तो मां की ममता में पकड़ ली गई। इन्होंने (मां ने) मेरे साथ धोखा किया है। ये समझा रही हैं कि मुस्लिम से शादी करने से नाक कट गई। मैं कहती हूं कि क्या सुनील दत्त ने नरगिस से शादी करके अपने खानदान की नाक कटा ली। मुझे समझ में नहीं आता, इतने पढ़े लिखे होने के बावजूद लोग इतनी घटिया बातों को क्यों जीते रहते हैं।
-----उस कम उम्र की लड़की (मेरे खयाल से ग्रेजुएशन सेकेंड इयर में थी वो) के इतने मेच्योर व शानदार विजन को देखकर मैं दंग रह गया। उसने मेरी राय इस बारे में जानने की कोशिश की तो मैंने कहा कि तुमने सौ फीसदी ठीक किया है। अगर तुम उसके साथ खुश हो और तुम्हें उस पर भरोसा है तो बाकी किसी को कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए।
मैंने उसकी कही हुई सारी बातें उसकी तीन तस्वीरों के साथ दैनिक जागरण पहले पन्ने पर बाटम में प्रकाशित किया। और मामला फिर गरम हो गया।
पूरे मेरठ में एक बात का जमकर प्रचार किया जाता है कि मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को सायास तरीके से फंसाते हैं और शादी कर लेते हैं। ऐसे वो अपने मजहब के विस्तार व हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मकसद से करते हैं। पर मैं ये बात नहीं मानता। पहली बात तो हम ये क्यों मान लेते हैं कि हिंदू लड़कियां गाय बकरी हैं जिनके पास कोई दिमाग नहीं है और वो जो फैसला ले रही हैं उसमें उनका दिमाग नहीं बल्कि मुस्लिम लड़कों का हिप्पोनेटिज्म काम आता है। अरे भाई, लड़कियां दिमाग रखती हैं। उन्हें अपने फैसले लेने दो। ये तो तुम्हारे अपने धर्म और संस्कार की दिक्कत है ना कि वो लड़कियां तुम्हारे वर्षों के रटाये जिलाये संस्कारों को प्रेम के धागे के चलते झटके में तोड़ डालती हैं। इसका मतलब तु्म्हारे संस्कारों व सिखाये विचारों में दम नहीं है, तुम्हारी ट्रेनिंग में कमजोरी है।
खैर, बहस भटक रही है। वापस लौटता हूं मुद्दे पर।
इंटरव्यू छपने के बाद उस लड़की पर पहरा और बढ़ा दिया गया और किसी भी मीडिया से मिलने पर एकदम से पाबंदी लगा दी गई क्योंकि उसके खुले विचारों को मैंने हू ब हू जागरण में प्रकाशित कर दिया था। कहां उसकी मां ये मानकर चल रही थीं कि उनके पक्ष में सब छपेगा, और कहां इंटरव्यू ने लड़की के पक्ष को मजबूत कर दिया।
वो लड़की हिंदूवादियो और परिजनों के लिए विलेन बन चुकी थी। उधर लड़के ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी कि मेरी पत्नी को जबरन ले गये हैं वो लोग। खैर, लड़की को रोज दर्जन भर लोग समझाने पहुंचने लगे उसके घर। शुरू में तो वो चीखती चिल्लाती उनसे बहस करती रही, जबान लड़ाती रही। लेकिन समझानों वालों की बेहिसाब संख्या देखकर वो मौन हो गई। वो केवल सामने बोलते लोगों को निहारती और शांत रहती।
धीरे धीरे ये मामला शांत हो रहा था। लोग लगभग इस प्रकरण को भूलने लगे थे। वो लड़की गंदी लड़की, खराब लड़की, पतित लड़की घोषित की जा चुकी थी। न सिर्फ परिवार द्वारा समाज द्वारा बल्कि पूरे शहर के हिंदुओं द्वारा।
उस लड़की के चेहरे की रौनक गायब हो चुकी थी। हां, मुझे याद आया। उसकी मां अध्यापिका थीं। उन्होंने बेटी को खुले माहौल में पाला था और कभी किसी चीज के लिए बंदिश नहीं लगाई। अब उन्हें अपने किए पर पछतावा हो रहा था। वो ये नहीं सोच पा रही थी कि चलो बेटी ने गलत ही सही, फैसला ले लिया है तो उसका साथ दें। समझाया बुझाया फिर भी नहीं मान रही है तो उसे उसकी मन की करने दो। बहुत बिगड़ेगा तो क्या बिगड़ेगा। वो मुस्लिम युवक उसे छोड़ देगा, जैसी की आशंका परिजनों द्वारा जताई जा रही थी। तो इससे क्या होगा? क्या किसी के छोड़ने से किसी की ज़िंदगी खत्म हो जाती है। मैं तो मानता हूं कि मुश्किलें और चुनौतियां हमेशा आदमी की भलाई के लिए ही आती हैं। ज्यादातर महान लोगों ने जीवन के हर मोड़ पर मुश्किलों का सामना किया और उससे जीतकर या हारकर, उससे सबक लेकर और आगे बढ़ गए। हो सकता है, वो लड़की खुद अपने जीवन के अऩुभवों से जो सबक लेती उससे वो समझ पाती कि उसने जो निर्णय लिया है वो सही या गलत है।
बात फिर भटक रही है। मैं कह रहा था कि समय बीतने के साथ माहौल लगभग शांत हो चुका था।
और एक दिन फिर खबर आई। वो लड़की उस लड़के के साथ फिर भाग गई।
हुआ यूं कि समय बीतने के साथ लड़की ने थोड़ा नाटक किया। उसने मां के सामने झुकने का नाटक किया। बाहर निकलने की थोड़ी थोड़ी आजादी उसे मिलने लगी। उसे भागते न देखकर उसे थोड़ी और आजादी दे दी गई। नौंचदी मेले में घूमने के लिए भी कह दिया गया। उसके साथ कोई घर का हमेशा होता था। मेले में वो भाई के साथ गई और जाने कब भाई को महसूस हुआ कि उसकी बहन उसके साथ नहीं है। खूब ढूंढा तलाशा गया पर वो नहीं मिली। बाद में मालूम चला, दोनों फिर भाग गये। इस बार बेहद दूर चले गए।
उसके बाद क्या हुआ, मुझे कोई खबर नहीं मिली। पर मैं उस लड़की के चेहरे को आज भी नहीं भूल पाता हूं।
सच्ची कहूं तो मैं उसे अंदर ही अंदर प्यार करने लगा था। वो लड़की पतित घोषित कर दी गई थी, समाज के द्वारा, शहर के द्वारा, परिवार के द्वारा। उस लड़की का नाम दूसरे घरों की लड़कियों के सामने इसलिए लिया जाता था ताकि बताया जा सके कि पतित, गंदी, बुरी लड़कियां होती कैसी हैं और वो कितना नुकसान कर देती हैं, अपना, खानदान का और समाज का। उन दिनों मेरठ के बाकी घरों की लड़कियों को उनकी माएं उस जैसी कभी न बनने की नसीहत देती थीं। मुझे खुद याद है कि मेरे मोहल्ले पांडवनगर में कई घरों की माएं अपनी बच्चियों से हंसते हुए बतियाती थीं और उस बेशरम लड़की के किस्से पढ़कर, सुनाकर ईश्वर से अनुरोध करती थीं कि हे ईश्वर ऐसी पतित लड़कियां किसी मां-पिता को न देना।
मैं उस लड़की का नाम भूल चुका हूं। मेरे मेरठ के साथी अगर इसे पढ़ रहे हों तो जरूर बतायें उसका नाम, कमेंट के रूप में लिखकर। पर उस पतिता प्यारी गुड़िया को मैं आज भी दिल से प्यार करता हूं। उसके लिए दुवा करता हूं कि वो जहां रहे, सुखी रहे।
जय भड़ास
यशवंत
19.2.08
बलात्कारियों का नया हथियार...Rohypnol, date rape drug
पूजा प्रसाद जर्नलिस्ट हैं, उन्होंने एक मेल मुझे फारर्वड किया जो आजकल महिलाओं के बीच खूब सरकुलेट है। इस मेल के जरिए महिलाओं, लड़कियों को आगाह किया गया है कि बच्चू, बच के रहना, अगर कहीं पार्टी वार्टी में गई तो जरा ध्यान से। ऐसा न हो भेड़िये, शिकारी एक छोटी सी गोली के जरिए न सिर्फ आपके जीवन की काली रात रच डालें बल्कि उस काली रात की बुरी स्मृतियों को भी आपके दिमाग से हटा दें ताकि आप अगले रोज किसी घटना, किसी शक्ल, किसी हादसे की रिकाल करने की कोशिश करें तो वो याद भी न आ सके।
एक छोटी सी गोली जिसे बलात्कारी लड़की के ड्रिंक में डाल देते हैं। लड़की को अगली सुबह होश आने पर यह तक याद नहीं रहता कि रात में क्या हुआ। मतलब स्मृति खत्म कर देती है वो दवा। आप फिर इन वहशियों से कोई कानूनी जंग तक नहीं लड़ सकतीं क्योंकि आप संज्ञा शून्य हो चुकी होंगी।
पूजा ने इस इरादे से मुझे फारवर्ड किया कि भड़ास पर इस डाल दिया जाये ताकि जो भी लड़कियां पढ़ें वो सावधान रहें। मेरा दूसरा कहना है। इसे लड़कियां पढ़ें और जिस छोटी सी गोली का जिक्र है, उसका नाम याद करके उसे खरीद कर खुद रखें। पार्टी वार्टी में जाएं और जो थोड़े मनचले-मसखरे किस्म के अति-उत्साही जीव दिखें तो उनकी ड्रिंक में इस गोली को डाल दें ताकि किसी तरह के खतरे के आगाज को ही खत्म कर दिया जाए। माने उनके हथियार से उन्हें ही मात देने की सोची जाय.....जय भड़ास, यशवंत
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और वो मेल ये है, जिसे हर लड़की को पढ़ना चाहिए...
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Important for girls....don't hesitate to FORWARD..
Forward this to all your frnds and save them from a possible
situation.
A woman at a Gas nightclub (Mumbai) on Saturday night
was taken by 5 men,Who according to hospital and
police reports, gang raped her before
Dumping her at Bandstand Mumbai. Unable to remember
the events of the evening, tests later confirmed the
repeat rapes along with traces of rohypnol in her
blood.
Rohypnol, date rape drug is an essentially a small
sterilization pill.
The drug is now being used by rapists at parties to
rape AND sterilize their victims. All they have to do
is drop it into the girl's drink. The girl can't
remember a thing the next morning, of all that had
Taken place the night before. Rohypnol, which
dissolves in drinks just as easily, is such that the
victim doesn't conceive from the rape and the rapist
needn't worry about having a paternity test
identifying him months later.
The Drug's affects ARE NOT TEMPORARY - they are
PERMANENT. Any female that takes it WILL NEVER BE
ABLE TO CONCEIVE. The weasels can get this drug from
anyone who is in the vet school or any university.
it's that easy, and Rohypnol is about to break out big
on campuses everywhere.
Believe it or not, there are even sites on the
Internet telling people how to use it. Please forward
this to everyone you know, especially girls.
Girls, becareful when you're out and don't leave your
drink unattended.
(added - Buy your own drinks, ensure bottles or cans
received are Unopened or sealed; don't even taste
someone else's drink)
There was already been a report in Singapore of girls
drink been Spiked by Rohypnol.
Please make the effort to forward this to everyone you
know.
For guys - Pls inform all your women friends and
relatives.
Posted by
यशवंत सिंह yashwant singh
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