Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Showing posts with label शिकार. Show all posts
Showing posts with label शिकार. Show all posts

20.4.13

माफ करना प्यारी गुड़िया हम शर्मिंदा हैं!

-नितिन सबरंगी
राजधानी दिल्ली में 5 साल की कोमल उम्र में गुड़िया रूह कंपा देने वाली हैवानियत का शिकार हो गई। घटना दम तोड़ती इंसानी संवेदनाओं का घिनौना चेहरा भर है। चमक-दमक के बीच कंकरीट के जंगलों में लगी भीड़ में इंसान तो हैं, लेकिन उनकी इंसानियत मर चुकी है ओर जो बची भी है वह कोढ़ग्रस्त है। दरिंदगी की शिकार हुई होनहार छात्रा दामिनी के मामले को भी नया-पुराना कहना बेमानी होगा क्योंकि ऐसी घटनाओं के दर्द उन परिवारों से पूछिए जो इससे रू-ब-रू
होते हैं। झूठी तसल्लियां उनके जख्मों को ओर भी दर्दनाक बनाती हैं। ऐसी घटनाओं के लिये किसी एक को दोषी नहीं बल्कि समूची व्यवस्था जिम्मेदार होती है। टूटती-बिखरती परम्पराएं, रिश्ते-नाते, जीवनशैली, मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता, विज्ञापनों में भावनाओं को भड़काने वाली कलाएं व ओर भी बहुत कुछ।  घटनाएं हमारे उस देश की हैं जहां कन्याओं पूजा जाता है, लेकिन क्या कोई दावे से कह सकता है कि नौ दिन तक चलने वाले आस्था के व्रतों में कन्याओं के भू्रण कत्ल व उन पर होने वाले अत्याचारों पर अंकुश लग जाता है।  ऐसी घटनाएं गुस्से के साथ सभी को शर्मसार करती हैं। लाख टके का सवाल वही कि आखिर कब तक?

30.12.12

माफ करना दामिनी! हम भी गुनाहगार हैं!


रूह कंपा देने वाली दरिंदगी का शिकार हुई दामिनी आखिर इस दुनिया से रूखसत हो गई। वह भी तक जब वह जीना चाहती थी। उसने लिखकर कहा था-‘माँ मैं जीना चाहती हूं।’ दुःख व गुस्से का गुबार हर भारतीय के दिल में है। पूरी घटना कोढ़ग्रस्त इंसानियत की ऐसी नंगी हकीकत है, जो हमेशा शर्मसार करती रहेगी। कड़वी हकीकत है कि लड़कियां महफूज नहीं हैं और लोग बेटियां पैदा करने से भी डरते हैं। आबादी के लिहाज से दुनिया में दूसरे नंबर वाले भारत में हालात ज्यादा शर्मनाक हैं। ऐसी घटनाओं पर अरब के सख्त कानून की जरूरत याद आती है। दुनिया में सबसे कम अपराध वहीं होते हैं। इस हकीकत का स्वीकार कर लेना चाहिए कि ऐसे लोगों को कानून का खौफ नहीं है?  कोई दोराय नहीं कि घटना ने युवा क्रांति की एक बड़ी अलख जगायी। पुलिस की दमनकारी प्रवृत्ति और सरकार की लीपापोती को सभी ने बहुत नजदीक से देखा। सवाल खड़े हैं क्या कानून बदलेगा? फिर किसी के साथ दरिंदगी नहीं होगी? लड़कियां सुरक्षित हो गईं? देखिए वक्त क्या जवाब देता है। दामिनी हमें माफ करना! बेहद दुःख के साथ सभी की तरफ से भावपूर्ण श्रृंद्वाजली!