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9.5.09

आखिर ओवर स्‍पीडिंग किसके लिए करते हैं हम

आज सुबह मुझे अपने दोस्‍त सौरव के यहां जाना था। वह दिल्‍ली के ज्‍वालानगर में रहता है। सुबह जल्‍दी जाकर जिम करके आया और तैयार हो गया। बाइक उठाकर सुबह साढे आठ बजे हौजखास से निकला। रास्‍ते में बहुत ज्‍यादा भीड नहीं थी आधे घंटे में मैं आईटीओ पुल क्रास करके लक्ष्‍मी नगर के मोड पर पहुंचा जहां पर कुछ निर्माण कार्य की वजह से रास्‍ता परिवर्तित किया गया है। इसके चलते एक खतरनाक मोड लक्ष्‍मीनगर में प्रवेश से पहले बन गया है। मेरे सामने से एक पल्‍सर बाइक पर सवार दो युवक तेजी के साथ मोड पर आए जिनकी स्‍पीड 90 से भी उपर रही होगी सडक के साथ डिवाइडर पर टकरा गए। उसमें से एक व्‍यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे युवक को पुलिस हास्पिटल ले गई उसकी हालत बहुत ही नाजुक थी। यह दर्दनाक हादसा सुबह-सुबह देखकर दिल द्रवित हो उठा। उन दोनों युवकों ने हेलमेट नहीं पहना था मुझे ऐसा लगा अगर आज इन भाइयों ने हेलमेट पहना होता तो शायद इनकी जिंदगी बच जाती। इतना कुछ नियम बनने के बाद भी लोग पता नहीं क्‍यों ओवर स्‍पीडिंग करके अपनी मौत को दावत दे रहे हैं यह बात समझ से बाहर है। आखिरकार अपने लिए न सही अपने परिवार के लिए तो ऐसा नहीं करना चाहिए। भले ही इस घटना के कुछ घंटे बाद सबकुछ सामान्‍य हो गया उस रोड पर यातायात गुलजार हो गया पर जिस घर का चिराग भरी जवानी में बुझ गया उस पर क्‍या गुजरी होगी यह सोचने वाली बात है। आजकल हम लोगों को हर तरह से जागरूक बनाने की बात करते हैं ऐसे मैं लोगों से एक और बात के लिए गुजारिश करना चाहूंगा कि ओवरस्‍पी‍डिंग कभी भी किसी के लिए अच्‍छी नहीं होती अपने अमूल्‍य जीवन के लिए ऐसा मत कीजिए। मैं पूरे देश को इस माध्‍यम से यह जागरूकता फैलाना चाहता हूं अगर इस बात को सिर्फ एक ही युवा मान ले तो मेरा प्रयास सार्थक हो जाएगा। आखिरकार जिंदगी के इस सुहाने सफर को हादसे का सफर बनाने का हमारा क्‍या अधिकार है। आइए प्रण करें हम अपने जीवन को अमूल्‍य समझेंगे और ओवर स्‍पीडिंग से हमेशा बचेंगे। इसके साथ ही मैं इस घटना के शिकार हुए युवकों के परिवार के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए यही गुजारिश करुंगा कि इस मुश्किल घडी में भगवान उनको धैर्य दे।

5.1.09

अपशब्दों के इस्तेमाल से बचकर निकालें भड़ास



पिछले कुछ दिनों से भड़ास पर जो लोग लिख रहे हैं उसकी क्वालिटी किसी अच्छे अखबार केसंपादकीय लेखन से कम नहीं है। इस केलेखन से प्रभावित होकर हजारों लोगों ने Žलागिंग की दुनिया में कदम रखा है। कई बार ऐसी चीजें घटती हैं जिसके बारे में हम बहुत कुछ कहना चाहते हैं। पर उसके लिए मंच नहीं मिलने केकारण वो चीजें सही होते हुए भी हम व्यक्त नहीं कर पाते। समाचार पत्रों और टेलीवीजन की अपनी सीमाएं हैं। पर भड़ास एक ऐसा मंच है जिसकी कोई सीमा नहीं है पर हां इसकी सीमा वो हर भड़ासी के मन में होनी चाहिए वो है अपशŽदों के इस्तेमाल से बचना। अगर आप एक आदर्श भड़ासी केरूप में हमसे जुड़े रहना चाहते हैं तो हम आप से उमीद करते हैं कि एक सुंदर शŽदों का चयन करके बिना कोई हताशा दिखाए अपनी बात रखें। पिछले कुछ दिनों में कई भाषाओं में छप रहे अखबारों के माध्यम से हमने देखा कि किस तरह से उन लोगों ने भड़ास के बारे में एक सकारात्मक रिपोर्ट प्रकाशित की है। हम एक परिवार के सदस्य हैं और हर किसी केसुख-दुख में शरीक होने का प्रण हमारे दिल में होना चाहिए। मुझे लगता है कि भड़ास का यह एक नया अवतार है जहां पर सबसे हम उमीद करते हैं कि अपनी अच्छी-अच्छी रचनाएं, अच्छे लेख, कविताएं और यात्रा वृत्तांत के साथ अपने शहर की विशेषताओं के बारे में यहां पर प्रकाशित करेंगे। मेरी आप सबसे गुजारिश है, आइए हम इस मंच को और बड़ा बनाएं जिसमें स्वच्छता और सुंदरता का आभास हो।
जय भड़ास और जय भड़ासी परिवार

14.7.08

मुंबई नवभारत टाइम्स से..........


१३ जुलाई के नभाटा मुंबई संस्करण ने भडास की मुहीम को महानगर के पन्ने पर जगह दिया है, चुकि नभाटा का ईपपेर नही है सो मैं इसे भड़ास पर डाल रहा हूँ। और नभाटा को इस मुहीम का पक्ष रखने के लिए साधुवाद देता हूँ ।
जय जय भड़ास

2.7.08

रंग लाया प्रयास, पिता ओंकार जेल से रिहा, करूणाकर का इलाज शुरू

कहते हैं इंसानी हौसलों की न कोई सीमा होती है और न कोई दायरा...बस इस बार जो हुआ उसमे नया कुछ नही था जीत थी, महक थी छोटे प्रयासों की बड़ी सफलता की, उम्मीद थी उजाले की...

कैंसर से जूझ रहे करुनाकर और जेल में बंद उनके पिता को न्याय दिलाने के यशवंत सिंह, डॉ रुपेश श्रीवास्तव, अमित द्विवेदी व अन्य ब्लागरों की मुहिम और भड़ास के प्रयासों से जेल में बंद करुनाकर के पिता ओंकार मिश्रा को जमानत मिल गई है...

अपने होनहार बेटे से मिलने के लिए लालायित पिता कल अपने बेटे के जन्मदिन पर उसकी खुशियों में भागीदार बन सकेगा, उसके दुख को साझा कर सकेगा..एक पिता के लिए इससे बड़े गौरव की दूसरी बात क्या हो सकती है...हर बार जब उम्मीदें ख़त्म होती लगती हैं तो लोग भड़ास की तरफ़ रुख करते हैं और हर बार भड़ास के गैर दुनियादार, असमाजिक, कुंठित, बेकार और दूसरे कई अलंकारों से नवाजे गए लोग करिश्मा कर डालते हैं...

''कई लोग जब करुनाकर के मामले में बहुत कुछ होने की उम्मीद खो बैठे थे तब भड़ास ने उम्मीद पालने की जिद पकड़ ली'' और हमारे प्रयासों का जब पहला ही परिणाम आसमान चूमने का हौसला पैदा करता हो तो असफलता की बात इस मंच से करना बेमानी है...

सारी दुश्वारियों को धता बताकर जब रुपेश जी मुंबई से दिल्ली पहुँच गए हैं और देखते ही देखते कई मदद करने वाले हाथ साथ जुड़ गए हैं तो करुनाकर के साथ कुछ ग़लत होगा, ऐसा कोई मूर्ख और अज्ञानी ही सोच सकता है...

कहते हैं दुआओं में असर होता है...और अब तो असर दिख भी रहा है....


करुनाकर के पिता जेल से छूट गए हैं, जमानत पर। करुनाकर का जीवन आयुर्वेद के पुरोधा के हाथ में है। जन्मदिन पर परिवार के सारे बुजुर्गों का आशीर्वाद है और दुआ के लिए भड़ास के ३६० हाथ हर वक्त तैयार हैं...

क्या अब भी किसी को भड़ास के इस अभियान की सफ़लता पर शक है...ये वक्त है जश्न मनाने का है...करुनाकर को बधाइयां देने का...साथ ही उन सबको विनम्र धन्यवाद देने का जो इस मुहिम में करुनाकर के साथ डटकर खड़े रहे...

''जन्मदिन की पूर्वसंध्या पर करुनाकर को ह्रदय की असीम गहराइयों से हार्दिक बधाइयां और बेहतर जीवन की शुभकामनाएं''...

''हृदयेंद्र''

22.5.08

दिल्ली का पहला ब्लॉगकैम्प

Amit Gupta (mailto:coolamit@gmail.com)

to Yashwant [bhadaas] (yashwantdelhi@gmail.com)


नमस्कार यशवंत जी,


आशा है कि आप स्वस्थ होंगे।
आने वाले शनिवार 24 मई 2008 को दिल्ली का पहला ब्लॉगकैम्प आयोजित किया जा रहा है। आयोजन नेहरू प्लेस में माइक्रोसॉफ़्ट में निम्न पते पर हो रहा है:


Microsoft Corp

5th Floor,

Eros Towers

Nehru Place,

New Delhi


मेरा विनम्र निवेदन है कि आप अन्य भड़ासी साथियों सहित अवश्य पधारें। :)



पिछली बार जनवरी में हुए ब्लॉग भेंट/सम्मेलन में आपसे मिलना नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार मेरा पहुँचना तय है बशर्ते कोई खुदाई मार न पड़ जाए। आशा है कि इस बार आपसे मिलना अवश्य होगा। :)

Amit Gupta