from
Shashikant Awasthi (awasthi.shashikant@gmail.com)
to
Yashwant Singh (yashwantdelhi@gmail.com)
date
1 Jul 2008 15:43
subject
करूणा के सम्बन्ध में
बडे भाई यशवंत जी,
सादर प्रणाम
आपने एक बार फिर मुहिम छेड़ दी है एक नेक काम करूणाकर की जिन्दगी बचाने के लिये। मुझको यह पूरा विश्वास है कि पिछली बार की तरह आप एक बार फिर अपने अभियान में सफल हो जायेंगे । जिस प्रकार आपने मां-बेटे का मिलन कराया था, ठीक उसी प्रकार एक बार फिर एक बाप-बेटे का मिलन करा कर ही दम लेंगे। साथ में रूपेश भाई जिस जोश खरोश के साथ लगें है वह भी अविस्मरणीय है।
मैने करूणाकर के खाते में एक हजार रूपये आज जमा करा दिये हैं। मेरे तरफ से एक छोटा सा प्रयास है। आगे जो भी होगा वह करूंगा। इस प्रकार के कार्य आप द्वारा कराये जाते रहेंगे तो निःसन्देह आप उस जगह पहुंच जायेंगे जहां पर लोग जाने हेतु काफी प्रयास करते है, परन्तु पहुंच नहीं पाते। सही मायने में आप द्वारा किया जा कार्य ही ईश्वर पूजा है।
आपका अनुज
शशिकांत अवस्थी
कानपुर
1.7.08
मैने करूणाकर के खाते में एक हजार रूपये आज जमा करा दिये हैं - शशिकांत
11.5.08
अभागिन मां को मदर्स डे के दिन भड़ास का बेमिसाल तोहफा
कल 11 मई को मदर्स डे पर भड़ास एक अभागिन मां को वो तोहफा देने जा रहा है जिसे पाकर उसके नाम के आगे जुड़ा अभागिन शब्द हट जाएगा।
हिंदी ब्लाग जगत में मील का पत्थर कायम करते हुए भड़ास कम्युनिटी ब्लाग ने वो कर दिखाया जिसकी लोग सिर्फ बातें करते हैं। घर से, बेटों से बिछड़ी एक मां को मदर्स डे के दिन भड़ास उसके परिवार और उसके बेटों से मिलवायेगा।
कानपुर के रहने वाले साथी शशिकांत अवस्थी, जो भड़ास के संचालक मंडल में बतौर सलाहकार शामिल हैं, ने एक पोस्ट डाली कृपया मदद करें शीर्षक से। इस पोस्ट को पढ़कर मैं इतना विचलित हुआ कि मैंने शशिकांत जी के पोस्ट से तथ्य उठाकर एक अलग सूचना बनाई और उसे भड़ास पर सबसे उपर बाईं तरफ स्थायी रूप से चिपका दिया। वो सूचना इस तरह थी...
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---------प्लीज, इस अभागिन मां की मदद करें
कल मैं एक स्टोरी करने के लिये कानपुर नगर स्थित एक वृद्धाश्रम गया था। वहां कई वृद्ध थे जिनमें एक थीं लगभग 60 वर्षीय राजमणि दुबे। वह तीन माह पहले दिल्ली से बिहार के रोहतास जिले स्थित सुजानपुर के लिये चली थीं लेकिन दुर्भाग्य से वह कानपुर पहुंच गयीं। यहां काफी भटकने के बाद वृद्धाश्रम पहुंच गयीं। यहां पर वह काफी दुखी व परेशान सी दिख रहीं थीं। यह जानकर की वहां पर अखवार वाले आये हैं तो पास आकर कहने लगीं कि वह मुझे मेरे घर और मेरे बच्चों के पास पहुंचा दें। यह कहकर वे रोने लगीं। वृद्धाश्रम के संचालक छेदीलाल पाल के पास उन्होंने जो पता बताया था, उन्होंने मुझे देकर अनुरोध किया कि मैं पता ढूंढने में मदद करूं लेकिन वास्तव में मुझे भी मालूम नहीं है इसलिये मैं उसे यहां डाल रहा हूं।
नाम- राजमणि दुबे
पति- स्व.कैलाश दुबे
ग्राम- सुजानपुर (कटार से एक किलोमीटर आगे)
पोस्ट- डिहरी
जिला- रोहतास
पुत्रों के नाम- रामप्रवेश, श्रीनिवास व रामबदन दुबे
भड़ासी भाइयों और भड़ास के पाठकों से अनुरोध है कि वे अगर इस मामले में कुछ मदद कर पाएं तो मेरे मेल एड्रेस awasthi.shashikant@gmail.com अथवा मेरे मोबाईल न. 09415068287 पर देने का कष्ट करें।
-शशिकान्त अवस्थी
सलाहकार, भड़ास
इस सूचना के लगे अभी बारह घंटे नहीं हुए होंगे, शशिकांत ने खुशी के मारे, भीगी आंखों से एक पोस्ट लिख मारी धन्यवाद भड़ासियों, जीत ली जंग शीर्षक से।
इस पोस्ट के मुताबिक दिल्ली से राजीव रंजन और मुकेश जी का फोन आया। ये दोनों उसी इलाके के हैं जहां की ये अभागिन मां है। इन दोनों ने पूरा रास्ता शशिकांत जी को समझा दिया है। शशिकांत मदर्स डे के दिन उस मां को अपने परिवार और बच्चों से मिला देंगे, ये उन्होंने बताया है।
बात सिर्फ किसी बिछड़े को उसके परिजनों से मिलाने की नहीं है। बात है हिंदी वालों के बीच बढ़ते प्रेम भाव का। एक अनजाना सा मंच भड़ास और उससे जुड़ने वाले आपस में अनजाने लोग, देखते ही देखते इस देश के कोने कोने तक छा गये, सबको भा गये, प्रेम और प्यार बांट गये। बिछड़ी मां को बेटों से मिलाना , बिछड़े दोस्त को दोस्त से मिलाना, बेरोजागरों को नौकरी दिलाना, गलत करने वालों को खुलकर गरियाना, मन में दबी हुई भड़ास को निकालकर तन और मन को स्वस्थ करना...कितने फायदे दिए इस ब्लाग ने।
मैं नमन करता हूं भड़ास और भड़ासियों को। मैं अकेला कुछ नहीं हूं, पर हम सब मिलकर बहुत ताकतवर हैं, हमारी ताकत का प्रतीक है भड़ास और हम कसम खाते हैं कि इस ताकत का कभी गलत उपयोग नहीं करेंगे।
जय भड़ास
5/10/०८, 12:15 PM
Posted by
यशवंत सिंह yashwant singh
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Labels: अभागिन मां, पहल, बिछड़ना, भड़ास, मदद, मदर्स डे, मिलन, शशिकांत
