ब्लोगर साथियों को प्यार और दुलार....
एक हफ्ते वाइरल फीवर से निपटने के बाद आज भड़ास देखने का मौका मिला...इस बीच बहुत कुछ हो गया जो वाकई नही होना चाहिए था...
एक होनहार नौजवान का असमय कैंसर जैसी बीमारी की चपेट में आना...अपने बेहद प्रिय रुपेश भाई साहब का सभी ब्लोगरों से मदद के लिए गुहार लगाना ...ये सब कुछ वैसा ही था जिसे इस रूप में कभी नहीं देखना चाहता था...लेकिन नियति शायद इसे ही कहते हैं...तो अग्रज रुपेश जी के इस अभियान में हर तरह से साथ हूँ... अगले २४ घंटे में करुनाकर को आर्थिक मदद मैं भेज दूंगा...रही बात उसके जन्मदिन की उसे भी शानदार तरीके से मनाया जायेगा...और हर माह एक नियत राशि करुनाकर के अकाउंट में पहुंचाता रहूँगा...ये वायदा है...
इस बीच जब हम कल करुनाकर का जन्मदिन पूरे जोश-खरोश के साथ मनाने जा रहे हैं तो इस वक्त हम अगर भड़ास और नए ब्लागरों के मार्गदर्शक सुरेश नीरव जी का का जन्मदिन भी लगे हाथ मना लें और उनको देर से ही सही, अपनी शुभकामनाएं दें तो शायद सबको अच्छा लगेगा...
नीरव जी अपने जन्मदिन के वक्त शहर से बाहर थे जिस वजह से उनका जन्मदिन मनाने की हसरत हम जैसे कई ब्लोगरों के मन में ही रह गई...हमें नही भूलना चाहिए की जब-जब हम ग़लत हुए हैं, भ्रमित हुए हैं, भटके हैं, अपनी कविताओं के माध्यम से नीरव जी ने हमें रास्ता दिखाया है...हमारे मार्गदर्शक, मित्र और प्रदर्शक रहे हैं...और करुनाकर के लिए इससे बड़े सम्मान और गौरव की बात कोई नहीं हो सकती की बेहद सम्माननीय नीरव जी के साथ करुनाकर का जन्मदिन मनाया जाए...उम्मीद है मेरे इस प्रस्ताव पर सहमति बनेगी और हम सब कल डबल उत्साह के साथ मिलेंगे...
(प्रिय रुपेश दादा आप अपने अभियान में सफल हों यही प्रार्थना है....करुनाकर के सफल, उज्जवल और सेहतमंद जीवन की प्रार्थनाओं के साथ .... रुपेश दादा... with u, for u always....
-हृदयेंद्र
2.7.08
हर माह करूणाकर के एकाउंट में एक निश्चित राशि पहुंचाएंगे
27.5.08
अबे चिल्लर ...निजी पत्र व्यवहार को बिना इजाजत ब्लॉग पर प्रकाशित करना किस पत्रकारिता का सिद्धांत है....
लोकतंत्र और विचारों के बारे में बात करने का दावा करने वाले इस काले आदमी की काली करतूतों का सच देखिये...
अगर इसकी कही, सुनी एक भी बात का आपने विरोध किया या इसके मित्र मंडली में से किसी पर कोई उंगली उठायी तोः येः बाकायदा आपको कुंठित और ना जाने किन किन नामों से सम्बोदित करेगा...
यकीन न हो तोः इसके ख़िलाफ़ कुछ कहकर देखिये तो।
सही...अब येः भी तय करने का वक्त आ गया है...की इस नीच आदमी ब्लोग्गिंग को दूर किया जाए..
संसदीय बने रहकर सारे असंसदीय काम करने वाला ये इंसान ब्लोग्गिंग में आगे भी इसी तरह के कुचक्रों को अंजाम देता रहेगा...इसलिए इसका खेल हमें ख़त्म करना ही होगा...
इस आदमी में मेरी आस्था इंसान होने के नाते कुछ देर पहले तक भी थी..लेकिन इसकी कमीनगी से पहली बार पाला पड़ा...जब इसने बड़े सलीके से मक्कारों के ठिकाने पर ख़ुद को मसीहा और मुझ को दुर्जन साबित करने की कोशिश की....
क्या ये मक्कार आदमी किसी को पत्रकारिता और इंसानियत के बारे में कहने के लायक है...जो सिर्फ़ इसे नाते किसी से सम्बन्ध तोड़ लेता हो जो इसके अनुसार ग़लत आदमी है...
जिस आदमी का अपना इतिहास दागदार और निजी जिंदगी बदबूदार और कमिनागी से भरी हो वह आदमी किसी को पत्रकारिता सिखायेगा...
मैने भी कई बार देखे हैं ऐसे रीड विहीन लोग जो इसे नीच, कुंठित, कमीने और काले इंसान से रिरियाते रहते हैं...सर मेरी पोस्ट प्रकाशित कर दीजिये...सर मेरी ब्लॉग का लिंक अपने घटिया जगह पर लगा दीजिये...
जो लोग अपनी लिंक जुड़ाने के लिए किसी से इस कदर रिरियाते हैं....उनसे कोई समझदार आदमी क्या उम्मीद रखेगा....
यशवंत की सरलता की वजह से भड़ास पर लिखता हूँ..इसके लिए किसी से रिरियाना नही पड़ता..जो कि मुझ जैसे लोग कर भी नही सकते...
हाल में बात बात में यशवंत जी से अपने ब्लॉग के बारे में बात होने लगी...उन्होने मुझसे तुरंत अपनी लिंक भेजने का आग्रह किया....
एक तरफ़ आग्रह एक तरफ़ अहम्....
जाहिर है हर कोई आग्रह को ही चुनेगा....
कालिया ने मुझे विवाद में घसीटा ही है तो मैने भी उसका जवाब देना सही समझा ..
मजेदार बात देखिये...मुझे बेहतर पत्रकार और इंसान बनने की सीख वह इंसान दे रहा है जिसे इंसानियत और पत्रकारिता का मतलब ख़ुद नही पता...
अबे चिल्लर ...निजी पत्र व्यवहार को बिना मेरी इजाजत के अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर देना किस पत्रकारिता का सिद्धांत है....
सहानुभूति लेने के लिए सिर्फ़ वही पोस्ट दर्शाना जो ख़ुद के लिए लोगों की सहानुभूति बटोरें...किस पत्रकारिता का सिद्धांत है....
हर जगह गालिया खाना, ख़ुद के साथ अपने परिवार को भी अपनी महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ाना...
ऐसे आदमी से क्या कोई इंसानियत का सबक सीखना चाहेगा....
अपने ताजा कारनामे से इसकी हिटलरशाही और कमीनगी का एक और नमूना इस इंसान ने हमारे सामने पेश किया है...
सिर्फ़ मैं भड़ास पर लिखता हूँ....इसलिए मैं यशवंत का कार्यकर्ता हुआ...क्या ये इस आदमी के दिमाग के दिवालियेपन का नमूना नही है...
इतना तंगदिल और अलोकतांत्रिक सोच रखने वाला आदमी ब्लॉग को कुछ बेहतर देगा ये, इस पर बाबा लोगों को सोचना होगा...
इमानदारी से एक निवेदन सबसे की ये इंसान भयंकर रूप से मानसिक बीमारी की चपेट में है...वैसे तो ये अस्पताल जायेगा नहीं लेकिन इसे पकड़कर किसी अच्छे मनोचिकित्सक को जरूर दिखाना चाहिए...वरना हम सब यूँ ही घटिया विवादों में उलझकर ब्लोगिंग का बंटाधार करने में इसे नीच का साथ देंगे...
आगे इसे घटिया आदमी के साथ हुए पत्र व्यवहार का पुरा विवरण है....जिस आधार पर गुनी जन ब्लोग्स को इसे नीच से बचाने के बारे में सोचें....
ना चाहते हुए भी काले और कमीने इंसान द्वारा बेवजह मुझे फंसाने के चलते ये पोस्ट लिखना पड़ा...उसके लिए मैं ब्लॉग जगत का गुनाहगार रहूंगा....सजा वक्त तय करेगा....
आपका
हृदयेंद्र
fuhaar.blogspot.com
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hridayendra
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