अरे यह क्या आप तो द्रवित हो गए जरा सी बात पर एक आम हिंदू की तरह.....
प्रभु! आपसे किसने कहा कि मैं हिंदू हूं और वो भी "आम"???? या खुद ही प्रमाणपत्र बनाते रहते हैं?
आपने धर्म ग्रंथों का अध्ययन नहीं किया या सिर्फ आँखें बंदकर घंटा ही बजाते रहे......
धर्म ग्रंथों का अध्ययन आपकी तरह नहीं करा और रही बात घंटा बजाने की तो क्या कभी आपका घंटा बजाया है?
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5.12.08
तो ब्लाग पर क्यों कूदा?
Posted by
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
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Labels: जस्टिस आनंद सिंह, डा0 रूपेश श्रीवास्तव, ब्लागिंग, मीडिया
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