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8.5.12

पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह ने किया कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव के बाल-गीत संग्रहों का विमोचन






युगल दंपत्ति एवं चर्चित साहित्यकार व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव के बाल-गीत संग्रह 'जंगल में क्रिकेट' एवं 'चाँद पर पानी' का विमोचन पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह और डा. रत्नाकर पाण्डेय (पूर्व सांसद) ने राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास एवं भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, नई दिल्ली द्वारा गाँधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में 27 अप्रैल, 2012 को किया. उद्योग नगर प्रकाशन, गाजियाबाद द्वारा प्रकाशित इन दोनों बाल-गीत संग्रहों में कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव के 30 -30 बाल-गीत संगृहीत हैं.


इस अवसर पर दोनों संग्रहों का विमोचन करते हुए अपने उद्बोधन में पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह ने युगल दम्पति की हिंदी साहित्य के प्रति समर्पण की सराहना की. उन्होंने कहा कि बाल-साहित्य बच्चों में स्वस्थ संस्कार रोपता है, अत: इसे बढ़ावा दिए जाने क़ी जरुरत है. पूर्व सांसद डा. रत्नाकर पाण्डेय ने युवा पीढ़ी में साहित्य के प्रति बढती अरुचि पर चिंता जताते हुए कहा कि, यह प्रसन्नता का विषय है कि भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी होते हुए भी श्री यादव अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं और यह बात उनकी कविताओं में भी झलकती है. युगल दम्पति के बाल-गीत संग्रह क़ी प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आज का बचपन है और बीते कल का भी और यही बात इन संग्रह को महत्वपूर्ण बनाती है.


कार्यक्रम में राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास के संयोजक डा. उमाशंकर मिश्र ने कहा कि यदि युगल दंपत्ति आज यहाँ उपस्थित रहते तो कार्यक्रम कि रौनक और भी बढ़ जाती. गौरतलब है कि अपनी पूर्व व्यस्तताओं के चलते यादव दंपत्ति इस कार्यक्रम में शरीक न हो सके. आभार ज्ञापन उद्योग नगर प्रकाशन के विकास मिश्र द्वारा किया गया. इस कार्यक्रम में तमाम साहित्यकार, बुद्धिजीवी, पत्रकार इत्यादि उपस्थित थे.

- रत्नेश कुमार मौर्या
संयोजक- 'शब्द-साहित्य'
म्योराबाद, इलाहाबाद.
mauryark@indiatimes.com
http://shabdasahitya.blogspot.in/

16.2.09

ब्लागिंग पर पुस्तक लोकार्पण और संगोष्ठी :: मेरठ से आए बुलावा और मैं न जाऊं, ऐसा संभव नहीं

एक रोज हकबात ब्लाग के संचालक मेरठ निवासी सलीम अख्तर सिद्दिकी का फोन आया कि यशवंत भाई, मेरठ में ब्लागिंग पर संगोष्ठी है और ब्लागिंग पर ही हिंदी में लिखी गई एक किताब का विमोचन है, इसमें आपको आना है तो मेरा जवाब यही था- बिलकुल आउँगा भाई, मेरठ से मेरा पुराना प्यार है। किसी बहाने भी वहां पहुंचने का न्योता मिलता है तो जरूर पहुंचता हूं क्योंकि मेरठ में चार साल गुजारे हैं। और तय तारीख को न सिर्फ मैं पहुंचा बल्कि साथ में अपने पत्रकार मित्र दुर्गानाथ स्वर्णकार और अशोक कुमार को भी कार में लादकर ले गया। दुर्गा भी मेरठ में दैनिक जागरण में काम कर चुके हैं। अशोक कुमार घुमक्कड़ आदमी हैं सो कहीं जाने के नाम पर वे तुरंत तैयार हो जाते है। वहां पहुंचे तो बारिश तेज हो चुकी थी और चौधरी चरण सिंह विवि के उर्दू विभाग का सभागार खाली खाली था। ब्लागिंग पर पुस्तक के लेखक इरशाद भाई और सलीम अख्तर सिद्दिकी मिले। कुछ पत्रकार साथियों ने ब्लाग पर चर्चा शुरू की। देखते ही देखते लोग एक एक कर आते गए और सभागार थोड़ी देर में भरा पूरा नजर आने लगा। समारोह में शामिल होने के लिए मेरठ के कई वरिष्ठ पत्रकार दोस्त भी आए। इनसे मिलना सुखद लगा।

प्रोग्राम खत्म हुआ तो दैनिक जागरण आफिस पहुंचे, वहां लोगों से मिले-जुले और रात आठ बजे के करीब दिल्ली के लिए लौट पड़े। बारिश का मौसम, सेमिनार में वक्ता होने का महान बोध, दुर्गा की नई सरकारी नौकरी और घर के करीब सकुशल पहुंचते जाने की खुशी को कंबाइंड रूप से सेलीब्रेट करने के लिए दारू का एक अद्धा खरीदा गया और चलती कार में सेवन किया गया। जब दो पैग चढ़ जाए तो फिर बात पर बात निकलने लगती है। हुआ यही। दुर्गा-अशोक के साथ दो-दो पैग लड़ाने के बाद नए पुराने दिनों की इतनी सारी बातें होने लगी कि हम लोग तीन घंटे तक दिल्ली के आनंद विहार के आसपास ही अंडा और चना-चबेना खा-खाकर दारू गटकते रहे। रात दस बजे के करीब जब हम लोगों के घरों से फोन आने लगे तब टाटा बाय बाय बोल अपने अपने घरों की ओर भागे।

लीजिए, संगोष्ठी और समारोह की कुछ तस्वीरें यहां देखिए, बाकी तस्वीरें व रिपोर्ट पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें...यशवंत
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संगोष्ठी के श्रोता
संगोष्ठी के श्रोता
यशवंत का संबोधन
संगोष्ठी के श्रोता
सलीम अख्तर सिद्दिकी का संचालन
हरि जोशी का संबोधन
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