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9.6.12

टुकड़ैल हैं सारे पत्रकार


बीकानेर के पत्रकारों ने नई बनी पत्रकार कॉलोनी में विकास कार्य करवाए जाने की मांग को लेकर अरबन इंप्रूवमेंट ट्रस्‍ट की ओर से नीलामी रुकवा दी। इससे नाराज यूआईटी के अधिशासी अभियंता ने सभी पत्रकारों को टुकड़ैल घोषित कर दिया। इससे नाराज पत्रकारों ने आज कलक्‍ट्री ऑफिस के सामने धरना लगा दिया। बाद में दोषी अधिकारियों की शिकायत राज्‍य के मुख्‍य सचिव एवं मुख्‍यमंत्री से किए जाने तथा कार्रवाई के आश्‍वासन के बाद धरना खत्‍म किया गया है। इसके साथ ही पत्रकारों को अपील की गई है कि सोमवार सुबह तक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में एक बार फिर धरना शुरू कर दिया जाएगा। 
बीकानेर में यूआईटी ने पत्रकारों को सरकारी रियायती दर पर जो जमीन आवंटित की है। यह जमीन हाइ टेंशन पावर लाइन के नीचे है और जमीन में बड़े बड़े गड्ढे हैं। यूआईटी ने सालों तक प्रयास किया, लेकिन जमीन नहीं बिकी। बाद में पत्रकारों को स्‍वर्ण जयंती नगर योजना के नाम से यहां प्‍लाट काटकर दे दिए गए। जब बीकानेर में जमीनों के भाव आसमान छू रहे हैं, तब इस कॉलोनी की जमीनों के भाव रेंग रहे हैं। इसके बावजूद पत्रकारों ने धैर्य रखा और जिला प्रशासन से कई बार आग्रह किया कि कॉलोनी में विकास कार्य करवाए जाएं। लेकिन प्रशासन ने नहीं सुनी। इसी कॉलोनी में अब सामान्‍य लोगों को भी प्‍लाट काटकर देने की योजना शुरू की गई है। पत्रकार संगठनों के पदाधिकारियों ने नीलामी स्‍थल पर पहुंचकर अपने रसूख से नीलामी रुकवा दी। इससे नाराज यूआईटी अधिकारियों ने पत्रकारों को बुरा भला कहा। बात तब बिगड़ गई जब उन्‍होंने सभी पत्रकारों को टुकड़ैल घोषित कर दिया। इससे बीकानेर के सभी पत्रकार संगठनों ने एक छत के नीचे आकर इसका विरोध किया। पत्रकारों ने जिला प्रशासन को दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए 24 घंटे का समय दिया, लेकिन अधिकारी चैन की बंसी बजाते रहे। आखिर आज सुबह ग्‍यारह बजे संयुक्‍त संघर्ष समिति ने जिला कलक्‍टर कार्यालय के आगे धरना लगा दिया। अपरान्ह साढ़े तीन बजे जिला कलक्‍टर पृथ्‍वीराज ने पत्रकारों को सभाकक्ष में बुलाकर बातचीत की और निजी तौर पर अधिकारियों के रैवेये के लिए माफी मांग ली। पत्रकार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर डटे रहे। कलक्‍टर ने आला अधिकारियों को इसकी सूचना देने और कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है। इसके बाद धरना स्‍थगित कर दिया गया है। अब अगर सोमवार तक कार्रवाई होगी तो धरना खत्‍म कर दिया जाएगा, वरना अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। 

स्‍थानीय अखबारों को भेजी गई रिपोर्ट

पत्रकारों की एकता के आगे झुकी सरकार 
सभी संगठनों ने दिखाई सामूहिक एकता 
दोनों अधिकारियों के नही हटाने पर अनिश्चिितकालीन धरने की चेतावनी
बीकानेर 8 जून। पत्रकारों के साथ अभद्रता से पेश आए न्यास सचिव सुदर्शन भयाना और अभियंता भंवरू खां को पद से हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां कलक्ट्रेट में पत्रकार संगठनों की संयुक्त संघर्ष के धरने से प्रशासन में हलचल सी मची रही। धरना स्थल पर जिलेभर से पहुंचे पत्रकारों समेत राजनैतिक और गैर राजनैतिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि भी समर्थन देने पहुंचे और न्यास सचिव तथा अभियंता द्वारा पत्रकारों के साथ किये गये अपमान जनक रवैये की निंदा कर विरोध जताया।
संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक श्याम मारू और अपर्णेश गोस्वामी ने इस मौके पर अभद्रता से पेश आने वाले न्यास सचिव और अभियंता को जब तक पदों से नहीं हटाया जायेगा हमारा आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर पत्रकारों ने अपने आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी मंथन किया। इधर पत्रकारों के समर्थन में आज भी कई संगठनों ने मुख्यमंत्री समेत उच्च प्रशासनिक अफसरों को ज्ञापन प्रेषित किए। यंहा पर साथ देने के लिए बीकानेर के कई वरिष्ठ पत्रकार भी पहुंचे। पत्रकारों के शिष्टमंडल ने देर अपरान्ह जिला कलक्टर के मार्फत मुख्यमंत्री को अपना ज्ञापन भेजा।
दोपहर बाद करीब 4 बजे जिला कलैक्टर ने राज्य सरकार के आदेशानुसार सभी पत्रकारेां को वार्ता के लिए बुलाया। जिसमें उन्होने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव ने टेलीफोन पर आश्वस्त किया कि संबधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसलिए धरने को समाप्त कर दिया जाए लेकिन पत्रकार अपनी मांग पर अड़े रहे और सेामवार सुबह 10 बजे तक यदि किसी प्रकार की कार्रवाई नही होती है तो 10.30 बजे से अनिश्चिितकालीन समय के लिए धरना दिया जाएगा।
जिला कलैक्टर ने आदोंलनकारी पत्रकारेां से वार्ता करने बाद बताया कि नगर विकास न्यास सचिव सुदर्शन भयाना व अधिशाषी अभियंता भंवरु खां के रवैये के खिलाफ मुख्यमंत्री के प्रमुख शासन सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई कराने की अनुशंषा की है। इसके बाद सभी ने सामूहिक रुप से बैठक कर सोमवार को धरने पर बैठने की रणनीति बनाई। धरना स्थल पर समर्थन देने के लिए पहुंचने वालों में जिला देहात कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मण कड़वासरा, महामंत्री श्याम तंवर, भाजयुमो पूर्व संभाग प्रभारी सुरेन्द्रसिंह शेखावत, भाजपा नेता मोहन सुराणा, जे.पी व्यास, शारीरिक शिक्षक संघ प्रदेशाध्यक्ष नानूसिंह सांखला, समाजवादी पार्टी के शिक्षक सभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय त्यागी, शहर जिला कांग्रेस कमेटी डी ब्लॉक के अध्यक्ष श्रीलाल व्यास, प्रवक्ता नितिन वत्सस, भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ के अध्यक्ष प्रकाश पुगलिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कोहिनूर हर्ष, प्रदेश संगठन मंत्री बालमुकुंद व्यास, अखिल भारत वर्षीय समाचार पत्र संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मदनगोपाल तिवाड़ी, देहात भाजपा महामंत्री कुंभाराम सिद्ध, देहात मंत्री अशोक भाटी, शहर भाजपा उपाध्यक्ष अशोक तिवाड़ी, कर्मचारी महासंघ लोकतांत्रिक के प्रदेश संगठन मंत्री रमेश तिवाड़ी, वरिष्ठ कर्मचारी नेता सत्यनारायण पंवार, अरबन का-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाइज यूनियन के अशोक शर्मा, जन किसान पंचायत के संरक्षक जयनारायण व्यास, माकपा के अंजनि शर्मा, वाम मोर्चा के सरजू गहलोत, जीव रक्षा विश्नोई सभा के शिवराज विश्नोई,स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह शेखावत सहित अनेक संगठनेां ने समर्थन दिया।
यह पत्रकार थे धरना स्थल पर मौजूद
पत्रकार संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आज कलक्ट्री में दिए गए धरने में राजस्थान जर्नलिस्ट यूनियन के जिलाध्यक्ष अपर्णेश गोस्वामी, राजस्थान पत्रकार संघ जार के प्रदेश उपाध्यक्ष भवानी जोशी व राजस्थान पत्रकार परिषद के विक्रम जागरवाल, वरिष्ठ पत्रकार लूणकरण छाजेड़, के.के. गौड़, सुरेश बोड़ा, भवानीशंकर जोशी, मोहम्मद अली पठान, अरविन्द व्यास, जयनारायण बिस्सा, बाबूसिंह कच्छावा, मुकेश पूनिया, राकेश आचार्य, पीयूष लखपत, राजेन्द्र सैन, रामस्वरूप भाटी, सूरज पारीक, के.के.सिंह, रवि विश्नोई, आदर्श शर्मा, नासिर जैदी, मुकेश आचार्य, ओम दैया, रामकिशन गोयतान, बृजमोहन रामावत, सुजानसिंह, नरेश मारू, आर.सी. सिरोही, उमाशंकर आचार्य, मोहम्मद अयूब, श्रीगोपाल व्यास, दिनेश गुप्ता, आनंद जोशी, विनोद जोशी, मोहन कड़ेला, रोहित शर्मा, सिद्धार्थ जोशी, नीरज जोशी, किशनसिंह, अक्षय आचार्य, विमल छंगाणी, शिवकुमार भादाणी,सुजानसिंह राठोड़,महेंद्र मेहरा,अरविंद व्यास, विजय कल्ला, मोहम्मद जमा, पवन भोजक, अजमल हुसैन, जाकिर हुसैन आदि मौजूद थे।
राज्यमंत्री मंजू ने कहा कि सीएम से बात करूंगी 
बीकानेर दौरे पर आई महिला एवं बाल कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती मंजू मेघवाल के यहां सर्किट हाउस पहुंचने पर जब उन्हें पत्रकारों से जुड़े इस प्रकरण और धरने की जानकारी मिली तो उन्होंने जिला कलैक्टर से बातचीत की। बाद में संवाददाताओं से रूबरू हुई मंजू मेघवाल ने कहा कि अगर अधिकारियों ने पत्रकारों को ठेस पहुंचाई है तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रकरण को लेकर सीएम से बात करूंगी।

23.1.08

बाहुबलियों का विध्वंसकारी रूप!!

देश के लोकतंत्र की बागडोर जब सत्तालोलुप एवं विध्वंसक प्रवृत्तियों के स्वामी बाहुबलियों के हाथ में हो तो जनता का लहू बहना निश्चित है।
हमलावर: बघरा विधानसभा सीट से विधायक पंकज मलिक के समर्थक (तथाकथित)
स्थान : मुज़फ़्फ़रनगर और जडौदा नारा रेलवे स्टेशन के बीच।
निशाने पर: 372 हरिद्वार दिल्ली पैसेन्जर ट्रेन मे सवार आम यात्री तथा ड्राईवर।
मुद्दा : राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना पर बहस: विधायक- डीडीओ से मारपीट।

आज दोपहर करीब 2 बजे 372 हरिद्वार दिल्ली पैसेन्जर सवारी गाडी पर
विधायक समर्थकों द्वारा जम कर पथराव किया गया।
हमलावर साथ ही साथ विधायक के समर्थन में नारे भी लगा रहे थे।
हमले में करीब 3 यात्रीओं के सिर फ़ूट गये और 7-8 यात्री पत्थर लगने से घायल हो गये।
ड्राईवर केबिन पर भी हमला किया गया गया जिसके चलते ड्राईवर केबिन के
शीशे चकनाचूर हो गये, खुद ड्राईवर अपने हाथ पर पत्थर लगने से घायल हो गया।
घटना के बाद गाडी़ करीब १ घंटा लेट चली, मेरठ पहुंचते पहुंचते ड्राईवर की
हालत बिगडने के कारण दूसरे ड्राईवर को बुलवाकर ट्रेन आगे भेजनी पडी।
एक ओर जहां रेल यातायात बाधित हुआ वहीं दूसरी ओर आम यात्रियों के चेहरों
पर खौफ़ नज़र आ रहा था। एक के बाद एक धडधडाकर खिडकियां बंद होती चलीं गईं,
माओं ने अपने बच्चों को अपने सीने से सटा लिया।
बडी मुश्किल से मै अपने आप को इन दंगईयों के पथराव से बचा पाया।
रेल, बस एवं पब्लिक यातायात के अन्य साधन अराजक तत्वो के
लिये एक आसान सा साफ़्ट टार्गेट बन चुके हैं।
इन साधनों को जब चाहे तब कोई ना पार्टी समर्थक फ़ूंक देते हैं, पत्थर बाज़ी करते हैं।
आप ही सोचें वोट देते समय जनता का (हमारा) विवेक
और अक्ल कहां घास चरने चली जाती है। बाद में हम सभी पछताते हैं।
समझ नही आता, इस प्रकार के विरोध, या प्रदर्शन न्यायपालिका की दृष्टि में किस
प्रकार से देखे जा सकते हैं या देखे जाते होंगे?
क्यों नही इन असामाजिक तत्वों को चिह्नित कर, उन पर कार्यवाही की जाती?
अपने विरोध को दर्ज कराने के और भी न्यायसंगत तरीके हैं,
क्यों लोग देश की व्यवस्था को बिगाडने पर आमादा हो जाते हैं?
उम्मीद है, कि चुनाव आयोग कुछ ठोस कदम उठायें जिससे कि
आपराधिक पॄष्ठ्भूमि वाले व्यक्तियों का राजनीति में प्रवेश रोका जा सके।
धन्यवाद...
अंकित माथुर...