Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Showing posts with label सीधी बात नो बकवास. Show all posts
Showing posts with label सीधी बात नो बकवास. Show all posts

29.4.11

ये देश हैं वीर जवानों का.... या ये देश हैं भ्रष्ट नेताओ का....


ये देश हैं भ्रष्ट नेताओ का,
रिश्वतखोरो का, नमकहरामो का !!
इस देश का यारो होए!!
इस देश का यारो क्या कहना
ये देश था कभी दुनिया का गहना.......
ओ ओ ओ ओ ...

यहाँ मरते हैं गरीब अमीरों की बस्ती में
उडती हैं धज्जिया कानूनों की बस्ती.....
यहाँ चलती हैं सिर्फ भ्रष्टाचारियो की
यहाँ भोली हैं शक्ले आम लोगो की
यहाँ लुटती हैं जनता भोली-भाली, नित नए-नए घोटालो में.
ओ ओ ओ ओ ओ........

यहाँ रोता हैं आम आदमी अपनी किस्मत पे
कोसता हैं अपनी किस्मत को.
पैरो में बेडिया रिश्वत की..
राहों में रूकावटे भ्रष्टो की
यहाँ रोता हैं आदमी अपनी किस्मत पे
कोसता हैं अपनी किस्मत को.
ओ ओ ओ ओ ...

कभी होते थे दंगल सोख जवानो के
कभी होते थे करतब तीर कमानों की
कभी नित नित मेले होते थे
कभी नित नित मेले सजते थे
नित नित ढोल ताशे बजते थे
ओ ओ ओ ओ ओ.....................

अब देखो सूरत इस देश की
जहाँ रोती हैं जनता अपनी किस्मत पे
ओ ओ ओ ओ ओ.......
लूटते हैं भ्रष्टाचारी देश को मिलकर
रोकते हैं उन्नति को मिलकर
ओ ओ ओ ओ ओ.........

अब और न सहेंगे कहते हैं हम सब मिलकर,
करेंगे सामना भ्रष्टाचार से हम मिलकर..
क्योंकि.....
दिलबर के लिए दिलदार हैं हम
दुश्मन के लिए तलवार हैं हम
मैदान में अगर हम आ जाएँ!!
दुश्मन के छक्के छोट जाये....
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ............

क्यों न आवाज को बुलंद कर दे हम
अपने बच्चो को सुनहरा भविष्य दे दे हम
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ .........

गर मिल के सामना करे हम सब मिल कर
फिर से हो गुनगुनायेंगे सब मिलकर......

ये देश हैं वीर जवानों का
अलबेलो का, मस्तानो का
इस देश का यारो होए!!!!!
इस देश का यारो क्या कहना
ये देश हैं वीरो का गहना.
ओ ओ ओ ओ ओऊ ओ ओ ओ ओ ......................

s
Re - Written by : Pawan Mall

Source : http://goo.gl/E5F0J
Read more : http://blog.pawanmall.net/

20.5.10

देश में सरकार की क़ानून व्यस्था क्या ठीक हैं ?


मेरे दिमाक में कुछ दिनों से एक कीड़ा उछल रहा हैं और बार बार कुछ सवालो के जवाब मांग रहा हैं की ये जो हमारी सरकार हैं और जो भी पुराने और नए क़ानून हैं उनमे हम जैसे गरीबो का ही शोषण क्यों होता आ रहा हैं?
या फिर इन कानूनों को किसी अमीर पैसे वाले व्यक्तियों के द्वारा तैयार किया गया हैं?
इसके बारे में तो मैं कुछ भी नहीं कह सकता हु, लेकिन जो भी हो शायद ये क़ानून जब बनाये जा रहे होंगे तो इसमें गरीबो का हित नहीं देखा गया होगा, तभी तो इनमे कुछ कमिया रह गयी हैं.
मैं अभी आपका ध्यान सिर्फ दो बातो की तरफ ध्यान दिलाना चाहता हु, जिनसे आप भी सोचने पर मजबूर हो जायेंगे की सरकार गरीबो और अमीरों के साथ भेदभाव करती हैं या नहीं?

पहली बात :-
किसी भी ट्रेन में अगर आप बिना टिकट यात्रा करते हैं तो आप सरकार द्वारा तय किये गए दंड को भोगने के लिए उतरदायी हैं. जोकि कुछ इस प्रकार हैं :-
(1) अगर आप बिना टिकट यात्रा करते हैं तो 500 तक का जुर्माना भरना होगा,
(2) और यदि आपके पास जुर्माने को भरने की रकम नहीं हैं तो 6 महीने की जेल जाने की सजा मिलेगी.

अब इस क़ानून से ये तो स्पष्ट हो गया की भारतीय क़ानून कितना सख्त हैं मुफ्खोरो के लिए. लेकिन किस हद तक?
क्योंकि अगर कोई अमीर व्यक्ति जो बिना टिकट के यात्रा कर रहा हो और पकड़ा जाये तो वो 500 रूपए देकर आराम से निकाल सकता हैं. लेकिन वहीँ कोई गरीब व्यक्ति अपने हालत के आगे बेबस होकर बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़ा जाये तो और जुर्माना ना भर पाने की स्थिति में 6 महीने की सजा भोगने का उतरदायी हो सकता हैं.
यहाँ पर मेरा एक सीधा सा सवाल आप लोगो और सरकार से ये हैं की क्या 500 रूपए की राशि 6 महीने की सजा के बराबर हैं? और यदि हैं तो उन बेचारो का क्या होगा जिनका परिवार हैं और बिचारे टिकट नहीं खरीदने की वजह से 6 महीने की सजा काटने के लिए अपने परिवार से दूर हो जाते हैं? और यदि वही एक व्यक्ति ही परिवार का आमदनी का जरिया हो तो ?????
क्या ये सरकार द्वारा बनाया गया कानून सही हैं???


दूसरी बात :-
अभी कुछ महीनो पहले की ही बात हैं जब हमरे देश के कुछ खिलाडी ओलम्पिक में गए थे और वहां पर कुछ ने तो पदक जीतकर देश का सम्मान और गौरव को बढाया. लेकिन मुझे सरकार से यहाँ पर भी एक शिकायत हैं की वो सिर्फ परिपूर्ण व्यक्तियों के हित में ही कार्य कर रही हैं.
वो कैसे ? चलिए मैं आपको इसका एक सीधा और सच्ची घटना से समझाने का पर्यास करता हु :-
अभी ओलामिक से स्वर्ण पदक जीत के आये एक तीरबाज और देश का नाम उचा करने वाले शख्स जिनका नाम तो शायद मुझे पता नहीं लेकिन इतना पता हैं की उनके पास काफी धन-दौलत हैं और वो काफी परिपूर्ण व्यक्ति भी हैं, को सरकार के द्वारा लगभग 3 करोड़ की राशि इनाम में दी गयी (जैसा की मैंने सुना हैं). अच्छी बात हैं सरकार उन व्यक्तियों का उत्साह और उन्हें सम्मान दे रही हैं और मुझे ख़ुशी भी हैं सरकार के इस रवैये से क्योंकि देश ये ये गौरवशाली खिलाडियों ने देश का नाम रौशन जो किया हैं.
वही दूसरी और जहाँ बोर्डर पर हमारे देश के जाबांज सिपाही जंग लड़ते हुए शहीद हो जाते हैं और देश को अपना बलिदान देने से नहीं हिचकिचाते, के साथ सरकार क्या कर रही हैं?
अगर कोई सिपाही शहीद हुआ हैं तो उसके परिवार को 1-2 लाख रुपये दिए जाते हैं. और जहाँ सरकार खुद कहती हैं की महंगाई का जमाना हैं तो फिर मैं ये पूछना चाहता हु की अगर महंगाई का जमाना हैं तो क्या आपके द्वारा दी गयी राशि में क्या इनके परिवार का गुजर बसर हो सकता हैं ?
और क्या एक जाबांज सिपाही के जान की कीमत सिर्फ इतनी राशि से लगई जानी चाहिए? और मैं ये नहीं कह रहा की सरकार को बहुत सारे पैसे इनके परिवार को देना चाहिए लेकिन मेरा तथ्य ये हैं की उस सिपाही के बाद उसके परिवार को उबरने में और सामान्य जीवन में दुबारा जाने के लिए सिर्फ इतनी सी राशि से गुजारा कर सकते हैं.

मैं बस ये जानना चाहता हु की हमारी देश की सरकार इन कानूनों में बदलाव क्यों नहीं करती ?

27.4.10

भ्रष्टाचार और घूसखोरी को हमने ही जन्म दिया हैं.


आज कल के इस दौर में अगर कुछ भी काम करवाना हो तो बैगैर पैसे और जान पहचान के संभव नहीं हैं.
 ऊपर लिखे कथनमें कितनी सच्चाई हैं ये तो हर समझदार व्यक्ति के समझ में आ जाएगा. जहाँ तक मेरा मानना हैं की हर व्यक्ति की एक इच्छा होती हैं की वो जिस चीज की चाह कर रहा हैं वो जल्द से जल्द पूरी हो जाये. चाहे उसकी चाह भारत के सविधान का ही उलंघन ही क्यों न कर रही हो. क्योंकि इस दौर में हर व्यक्ति सिर्फ अपने फायदे और अपने हित के लिए ही कार्य कर रहा हैं और उन सभी नियमो और कानूनों का उलंघन करता चला जा रहा हैं जिन्हें हमसे पहले हमारे देश के कुछ महान व्यक्तियों द्वारा देश की हित की रक्षा और कानून व्यस्था बहाल रखने के लिए बनाया था. लकिन क्या हम ये सही कर रहे हैं और किस हद तक और क्या हम उस भारतवर्ष देश के निवासी जिसे आजाद करने के बाद फिर से सोने की चिड़िया बनाने का ख्वाब देखने वाले चाचा नेहरु या फिर महात्मा गाँधी जी आदि जैसे कई महान व्यक्तियों ने देखा था.
वैसे भी आज की क़ानून व्यवस्था ही कुछ ऐसी हो चुकी हैं जैसा की उन अंग्रेजो के ज़माने में थीबस फर्क इतना हिन् की अंग्रेज सैनिक कम से कम अपने देश के लिए तो वफादार थे लेकिन अब तो हमारे देश में कानून नाम की कोई चीज नहीं बची.

आये दिन संचार पत्रों में खबर आती हैं :-
किसी नेता के चमचों ने उस नेता को लाखो करोडो की नोटों की माला पहनाई हैं और बाद में जब पता चला इसके बारे में तो उसका मूल्य कम बता कर उस तरफ से सबका ध्यान भी हटा दिया गया.
और इसमें हमारी देश की मीडिया ने भी कुछ कम साथ नहीं दिया इस खबर को शुरुवात में तूल तो दिया लेकिन बाद में इनको भी पता नहीं क्या हो गया की इन्होने भी ये खबर दिखानी बंद कर दी.
और वहीँ दूसरी तरफ मुबई के एक बड़े राज्यप्रेमी राज ठाकरे की ने शाहरुख़ को सिर्फ इस लिए माफ़ी मंगवाई की उन्होंने दो चार बाते पाकिस्तान की बडाई में क्या कह दी और इस खबर को तो मीडिया ने कितने दिनों तक दिखाया.
बात फिर वहीँ आ गयी की भई यहाँ पर सच्चाई का जमाना नहीं बस अपना घर देखो भई बाकी दुसरो के घर में चाहे कुछ भी दिक्कत क्यों ना आ जाये.


अब आपको किसी सरकारी काम को करवाना हो तो बाबु को घुस दो नहीं तो आपका काम नहीं होगा और या फिर सरकरी दफ्तरों में कोई रिश्तेदार हैं तभी आपका काम होगा वरना नहीं होगा.
वरना फिर चक्कर काटते रहिये कभी ना कभी तो फिर काम आपका हो ही जायेगा.



अब तो किसी व्यक्ति की शिकायत हमारे क़ानून के रखवाले पुलिस वालो से करनी हो तो भी डर लगता हैं.
क्योंकि ये भी क़ानून की खूब धज्जिय उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. बेकसूरों को मार मार कर मर डालते हैं और कसूरवार बहार घूमते हैं अपने पैसे के बल पर. और जिस देश में क़ानून के रखवालो का ही ये हाल हैं तो वहां पर सब बन्दे ही ऐसे होंगे.अपने अगर किसी बदमास के खिलाफ कोई भी रिपोर्ट दर्जभी कराई तो और वो बदमास थोडा पैसे वाला हुआ तो फिर आपकी शामत आ गयी फिर आप अपने आप को ही कोसेंगे.




फिर अभी मैंने कहीं पढ़ा की अब शिक्षा के साथ भी बहुत बड़ा खिलवाड़ हो रहा हैं क्योंकि बिना चंदा सिये किसी भी अच्छे स्कूल में आपके बच्चे का प्रवेश या दाखिला नहीं हो पायेगा.
लेकिन इसके लिए हम जिम्मेदार हैं क्या ?

अभी भी आप मे से कई लोग सोच रहे होंगे की मैं तो नहीं हूँ इन घूसखोरी जैसी चीजो के लिए लेकिन कहैं ना कहीं आप भी इससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं.
मैं आपको इसका सीधा सा एक उदहारण से समझाता हु जिससे मैं आशा करता हु की आपलोगों को भी समझ आ जाये की मैं क्या कहना चाहता हु, होता क्या हैं की

आप का बेटा बड़ा हो गया हैं और आपको उसका दाखिला करवाना हैं और वो भी बढ़िया से बढ़िया स्कूल में और आप स्कूल जाते हैं उसके दाखिले के लिए और वहां के प्रधानाचार्य से आप मिलते हैं और वो आपको बोलता हैं की भई हमारे यहाँ पर तो सीते काफी कम हैं और हम सिर्फ उन्ही विद्यार्थियों का दाखिला करेंगे जो इन सीटो के लिए उपयुक्त होंगे और जिनके नंबर भी अच्छे होंगे. लेकिन अब आपके बच्चे के नमबर कम हैं और दाखिला नहीं हो पाया, फिर ? आपने सोचा की क्यों ना प्रधानाचार्य जी से थोड़े से लेन-देन की बात की जाये और दाखिला हो जाये. बस यहीं पर आकर अपने एक ऐसा सिलसिला चालू कर दिया की जो बाद में दुसरो के लिए कठिनाई पैदा कर देगा. क्योंकि आपके एक बच्चे का तो दाखिला तो हो गया लेकिन उस बेचारे दुसरे बच्चे के बारे में अओने बिल्कुल भी नहीं सोचा जिसके जगह पर आपके बच्चे को दाखिल किया गया. चलिए इसे भी छोड़े आपने जो एक सिलसिला चला दिया घुस देने का वो शायद ही भविष्य में कभी रुकेगा क्योंकि अब उस प्रधानाचार्य के पास और धन कमाने के साधन के रूप में एक नया जरिया भी मिल गया जिसमे उसे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.

बात आईने की तरह साफ़ हो गयी की ये घूसखोरी का सिलसिला भी अपने ही शुरू किया हैं और जब आपका बुरा वक्त चल रहा हो और आपसे भी कोई
घुस मांग रहा हो तो आपबस दिमाक में यहीं ख्याल लेंगे की कितना भ्रष्टाचार और घूसखोरी के दलदल में हमारा देश डूब चूका हैं लेकिन आपको हक़ नहीं हैं ऐसा ख्याल लाने का क्योंकि शुरुवात भी तो आपलोगों से ही हुई हैं.

इसे शुरू भी आपने किया हैं तो बंद भी आपको ही करना पड़ेगा. तो लग जाईये अपने भविष्य को बचाने में अभी से. और इस मुहीम को और लोगो तक भी पहुचाये और उन्हें भी जागरूक बनाये क्योंकि वो पैसा जो पानी की तरह आप घूस में बहा देते हैं वो आपकी मेहनत की कमाई का हैं और आप इसे ऐसे ही व्यर्थ में ना जाने दे.