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30.3.12

लो.. समंदर हो गया हूं मैं

बुझा लो प्यास जितनी हो
लो.. समंदर हो गया हूं मैं,
उजालों की सुहानी बज्म में
फिर से सिकंदर हो गया हूं मैं,
कहो क्या हाल हैं उनके, जिन्होंने
शूल राहों में मेरी फेंके थे,
खबर उनको जरा ये कर देना
कांटों के बीच रहकर के,
लो फूल हो गया हूं मैं...
बुझा लो प्यास जितनी हो,
                        लो.. समंदर हो गया हूं मैं।। - अतुल कुशवाह

29.9.11

जो मैंने की इबादत डूबकर उनकी तो हंगामा

अतुल कुशवाह-
मैं पाता हूँ तो हंगामा, मैं खोता हूँ तो हंगामा, 
किसी की वेबफाई में मैं रोता हूँ तो हंगामा

मैं आता हूँ तो हंगामा, मैं जाता हूँ तो हंगामा,
किसी को देख एक पल मुस्कुराता हूँ तो हंगामा.
.
यही तो एक दुनिया है, ख़्यालों की या ख़्वाबों की, 
मोहब्बत में उन्हें पाने कि कोशिश की तो हंगामा

सभी तालीम देते थे मोहब्बत ही इबादत है, 
जो मैंने की इबादत डूबकर उनकी तो हंगामा.
                                                       

8.9.11

किसी का मख़मली अहसास मुझको गुदगुदाता है


किसी का मख़मली अहसास मुझको गुदगुदाता है
ख़यालों में दुपट्टा रेशमी इक सरसराता है

ठिठुरती सर्द रातों में मेरे कानों को छूकर जब
हवा करती है सरगोशी बदन यह कांप जाता है

उसे देखा नहीं यों तो हक़ीक़त में कभी मैंने
मगर ख़्वाबों में आकर वो मुझे अकसर सताता है

नहीं उसकी कभी मैंने सुनी आवाज़ क्योंकि वो
लबों से कुछ नहीं कहता इशारे से बुलाता है

हज़ारों शम्स हो उठते हैं रौशन उस लम्हे जब वो
हसीं रुख़ पर गिरी ज़ुल्फ़ों को झटके से हटाता है

किसी गुज़रे ज़माने में धड़कना इसकी फ़ितरत थी
पर अब तो इश्क़ के नग़मे मेरा दिल गुनगुनाता है

कहा तू मान दीवाने दवा कुछ होश की कर ले
ख़याली दिलरुबा से इस क़दर क्यों दिल लगाता है !
 

नेताओं से अच्छे सुअर के बच्चे

मुझे इन नेताओं से अच्छे
ये सुअर के बच्चे लगे...
जो रोजाना मेरी गली तो घूम जाते हैं,
और अपने स्तर से गन्दगी खाकर
कुछ तो साफ़ कर जाते हैं...
लेकिन, वो कमबख्त
आएगा सिर्फ चुनाव के वक्त
बस, वोट मांगने...
और ये सफाई देने कि
मैं...सुअर से अच्छा हूँ और कुछ नहीं....- अतुल

4.9.11

मेरी प्रार्थना में

- अतुल कुशवाह
हे प्रभु !मेरी प्रार्थना में
गरीबों को अनदेखा करने वाली
आँखों की पुतलियाँ फट जायें......
घूंस लेने वाले हाथ
कोहनी तक गल जायें...........
असहायों की चीख न सुनने वाले
कानो के परदे
दिमाग तक सड़ जायें .......
किसी मजबूर के सामने
पत्थर के माफिक
अपने में सक्षम -समर्थ
साहब और सरकार का
जो भ्रम पाल बैठे हैं
उनकी औलादें मर जायें .......
हे प्रभु ! मेरी प्रार्थना में
तेरे विश्वास पर
तुझसे न्याय की प्रतीक्षा में
जो आज भी
भूंखे-नंगे बैठे हैं
तू उनके लिए जगह छोड़
आब उन्हें भी मौका दे
एक बार वे भी भगवान् बन जायें.........

21.7.11

अब हर नाखून पर धार लगाई जाएगी...


छीन लो मेरी जमीनें/तोड दो मेरे घर
उजाड दो मेरी बस्ती
मगर-सरकार को बता दो- कि
रोटी अब तुम्हारे खून से
चुपड कर खाई जाएगी
तुम्हारे मांस के लोथडे लपेट कर 
रोटी अब चोंगा बनाकर 
चबाई जाएगी....
रोटी अगर नहीं भी मिली- तो भी
आदगी अब भूखे पेट लडेगा
नंगी देह भिडेगा
युद्ध आदमी और सरकार के बीच
अब होकर ही रहेगा....
कल मेरी पूरी बस्ती ने
नाखून न काटने की कसम खाई
और तय किया- कि अब हर
नाखून पर धार लगाई जाएगी
कुर्सियों पर फूंक दिए जाएंगे
भ्रष्ट साहब...
चौराहों पर नोची जाएगी खद्दर
माननीयों की लाशें
फटे पैरों रौंदकर
नंगी दफनाई जाएगी...
खेत की तो बात ही छोडो
मुट्ठी भी मिट्टी तक भी न दी जाएगी....- Atul Kushwah

20.7.11

पेश हैं अब तक के समाचार...

पेश हैं अब तक के समाचार...
राजधानी के कमबख्त
सदन में
आदमी के अंग बेचने का
विधेयक पास करके
सुहागरात पर टैक्स
लगाना चाहते हैं...
महिला आरक्षण पर
सरकार ने अपनी नीतियां
स्पष्ट करते हुए आज
एक प्रेस वार्ता में कहा- कि
विकास चाहने वाली औरतें
अपना जिस्म बेंचकर
पूर्ण विकास कर सकती हैं...
आज सदन की कार्यवाही के दौरान
देश में भूख से मरने वालों पर
चर्चा होते ही
पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा....
और अंत में मुख्य समाचार एक बार फिर....- अतुल कुशवाह

''गाँधी'' तुम ग़लतफ़हमी में हो!

''गांधी'' तुम्हारा अहिंसा का पाठ
कृष्ण अगर मानते-तो
महाभारत ही न हो पाती
और धर्म पर अधर्म की
विजय हो जाती
''गांधी'' तुम्हारी अहिंसा की बात पर
राम-अगर चलते-तो
युद्ध रोककर
सीता-रावण को ही सौंपकर
तसल्ली कर लेते....
''गांधी'' तुम्हारी गलतफहमी है- कि
तुम्हारा अहिंसा का पाठ
दुनिया में पढा जा रहा है
गांधी सच तो ये है कि 
तुम्हारा अहिंसा का प्रचार
सिर्फ वे लोग कर रहे हैं
जिन्हें खौफ है कि
भूखी-खूंख्वार भीड
बदले की गरज से
अपने हक के लिये कहीं एक दिन
                                                  उनकी देह पर आक्रमण न कर दे... - अतुल कुशवाह

19.7.11

अम्मा! क्या मेरा ये सपना सच होगा...

- अतुल कुशवाह

अम्मा! कल भगत सिंह ने
चलती संसद में बम क्या फेंका-कि
माननीयों की लाशें इस कदर दिखीं-जैसे
अपनी तनख्वाह/भत्ता का
बढोत्तरी विधेयक की तरह
सारा पक्ष-विपक्ष
आपस में मिल गया हो...
किसी का पांव किसी के सर पे
किसी की टोपी पर किसी के जूते
कटे हाथ/फटी तोन्दें
ऐसा लगता- कि मांस के चीथडे
जनता से माफी मांग रहे हों...
अम्मा, पंजे में खूनी खद्दर!
और चोंच में मांस के लोथडे दाब कर
हाय..चील जैसे ही उडी
मैं तो डर गया...उठ बैठा...
देखा कि- सवेरा हो चुका था....
अम्मा! कहीं ऐसा तो नहीं कि -
कल रात पेशाब करके बिना हाथ धोये
मैं कई दिनों का भूखा सोया था
तू तो कहती है कि बेटा
सवेरे के सपने सच होते हैं
अम्मा! क्या मेरा ये सपना सच होगा...

18.7.11

मैं हूं इंसान खान, मैंने किये हैं धमाके


ठहरो...हिंदुस्तान की जांच एजेन्सियों
कौन था हमलों के पीछे...
इस खोजबीन में
क्यों अपना वक्त
जाया कर रही हो,
मुंबई में हुए धमाके
हमने किये हैं,
इससे पहले भी
भारत में
हमने कई जगहों पर
सफलतापूर्वक बम फोडे थे...
और इस बार
हम फिर हुए कामयाब...
तुम्हारी सरकार में
अगर है हिम्मत तो 
...दे मुझे फांसी
मुझे पता है कि 
हिंदुस्तान की सरकार
किसी भी कीमत पर
ऐसा कर नहीं सकती...
हमारे 23 भाइयों को
तुम्हारे कानून ने 
फांसी मुकर्रर कर दी..
लेकिन राजनेताओं का शुक्रिया
कि अभी तक नहीं हुई
किसी को भी फांसी..
जांच एजेन्सियों
मैं कहता हूं, तुम्हारी  मेहनत
बेकार ही जाएगी ..
तुम्हारे देश के नेताओं
में आतंक के खिलाफ
बोलने के अलावा 
कोई ताकत नहीं है...
हमारे कई आतंकवादी भाई
तुम्हारी सरकारों के कब्जे में हैं..
पहले उन्हें ही सजा देकर दिखाओ
बाद में हमें फांसी देना..
जाओ जांच एजेन्सियों
अपने परिवार को देखो..
और मुझे अगले बम धमाके की
तैयारी करने दो..
तुम्हारे नेता कहते हैं..कि
बीते छह माह से देश में
कोई भी घटना नहीं हुई..
मैं उनकी बात को
करता हूं समर्थन..
कि अगला धमाका हम
एक साल बाद ही करेंगे..
तब तक यदि हमारा कोई 
अन्य भाई सफल हो जाता है
किसी बडे धमाके को
अंजाम देने में..तो
उसके लिए आप जानो...
मैं तो बस इस बात से 
खुश हूं कि भारत में
हमारे किसी भी भाई को
नहीं है कोई खतरा
यदि वह पकडा भी जाता
है तो सरकार उसे देगी
पूरी कडी सुरक्षा..
किंतु पाक में तो 
अलकायदा के आका
भी हैं असुरक्षित...