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21.7.11

अब हर नाखून पर धार लगाई जाएगी...


छीन लो मेरी जमीनें/तोड दो मेरे घर
उजाड दो मेरी बस्ती
मगर-सरकार को बता दो- कि
रोटी अब तुम्हारे खून से
चुपड कर खाई जाएगी
तुम्हारे मांस के लोथडे लपेट कर 
रोटी अब चोंगा बनाकर 
चबाई जाएगी....
रोटी अगर नहीं भी मिली- तो भी
आदगी अब भूखे पेट लडेगा
नंगी देह भिडेगा
युद्ध आदमी और सरकार के बीच
अब होकर ही रहेगा....
कल मेरी पूरी बस्ती ने
नाखून न काटने की कसम खाई
और तय किया- कि अब हर
नाखून पर धार लगाई जाएगी
कुर्सियों पर फूंक दिए जाएंगे
भ्रष्ट साहब...
चौराहों पर नोची जाएगी खद्दर
माननीयों की लाशें
फटे पैरों रौंदकर
नंगी दफनाई जाएगी...
खेत की तो बात ही छोडो
मुट्ठी भी मिट्टी तक भी न दी जाएगी....- Atul Kushwah

13.6.11

बाबा रामदेव: ये भूख है बड़ी


- अतुल कुशवाह

एक सवाल उनसे जिन्होंने बाबा रामदेव पर सवाल खड़ा किया.. आप क्या चाहते थे कि बाबा सरकार के कट्टरपंथी रवैये का शिकार हो जाते. मॅ बाबा का भक्त नहीं हूँ मगर बाबा की एक शानदार कोशिश का समर्थक जरूर हूँ. बाबा की कोशिश को दाद देता हू. दुनिया मे आदमी को उर्जा भोजन से ही मिलती है बिना भोजन के आदमी का स्वास्थ्य बिगाड़ना तय है. इंसान के पास ऐसा कोई तिलिस्म भी नही है जो कि बिना भोजन के हॅस्ट पुस्त बना रह सके. कोई जादू नही है ऐसा. अगर ऐसा होता तो शायद दुनिया मे पापी पेट के लिए महिलाओं और मासूम अनाथ बcचो को मज़दूरी की झुलसती भट्टी मे खुद को मजबूरन तपाना नही पड़ता. हम बात कर रहे थे बाबा रामदेव की. योग के ज़रिए उन्होने दुनिया मे यश और वैभव कमाया  जिसके लिए हम और आप (आप भले ही न लेकिन मॅ ज़रूर) दिन रात खुद को सिद्ध करने मे जुटे रहते हैं. माना की ग़लत तरीके से उन्होने पैसा कमाया लेकिन हम और आप या वो कितने ईमानदार हैं. कड़वा सच है की हम इमानदर तभी तक हैं जब तक बेईमानी का अवसर नहीं मिलता. सॉफ है की हमाम मे सब.....! सवाल पैदा हुआ कि अगर सभी भूखे हैं तो फिर कौन किसको भोजन परोसे. ? संभव है भोजन मिलते ही भूखा उस पर टूट पड़ेगा. भर पेट खाने के बाद बचा के रख लेगा. जिस चुनाव मे सभी उम्मीदवार भ्रस्ट हो तो ऐसे मे किसे चुनेंगे आप. माना कि दूध का धुला कोई नही मिलेगा. फिर तो केवल यही एक चारा है की जो कम भ्रस्ट हो उसे ही नेत्रत्व सौंप दिया जाए रामदेव ने काले धन का मुद्दा उठाकर सरकार से मामले पर अमल करने की गुहार लगाई. उन्होने लोकतंत्र की व्यवस्था के तहत अपनी बात मनवाने की ज़िद की. लेकिन सरकार तानाशाह निकली. उसने सत्याग्रह का दमन कर दिया. सरकार ने जता दिया कि हम तुम्हारे (जनता) की काले धन जैसी किसी भी माँग को आसानी से पूरा नहीं कर सकते. इस बात पर मत चौंकिये कि पिछले एक दशक में करीब 4.8 लाख करोड़ रुपये (ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी रिपोर्ट) अवैध ढंग से विदेश पहुंचे हैं बल्कि अचरज इस बात पर करिये कि भारत की यह सामानांतर अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है कि देश के भीतर काले धन को खपाने के तमाम विकल्प मिलकर भी इतनी कालिख नहीं पचा पाते। रामदेव आम इंसान से खास बने हैं. उन्हें भूख लगती है प्यास लगती है. 45 डिग्री वेल मौसम मे ज़रा दो दिन उपवास कर के तो देखिए. कोई भले ही ऐसे दो क्या बाबा की तरह 9 दिन तक रह ले. मगर अपन की हालत तो ख़स्ता से भी ख़स्ता हो जाएगी. बाबा ने तो 9 दिन तक भूखा रह के कमाल कर दिया.....