इस महान पुस्तक के बारे में आपको एक छोटी सी बात बताना चाहती हूँ। पिछले दिनों मेरे ब्रेस्ट में एक बड़ी गांठ हुई, स्पाइन में भी कई जगह बहुत दर्द रहने लगा। मेरा चेकअप हुआ। तीन एम.आर.आई. स्केन करवाए गए। डॉक्टर्स को पूरा शक था कि मुझे कैंसर हुआ है। एम.आर.आइ. स्केन की रिपोर्ट आने में समय था। तभी मैंने अमेज़ोन से डॉ.ओ.पी.वर्मा की पुस्तक कैंसर कॉज़ एंड क्योर मंगवाई। यह मेरे लिए ईश्वर का एक तोहफ़ा था। मैं डरी हुई थी और अपने उपचार की तैयारी कर रही थी। एक रात को मैं परेशान थी और नींद भी नहीं आ रही थी। तभी मैं उठी और अपनी प्यारी पुस्तक को सीने से चिपका लिया। मुझे लगा जैसे मैं बडविग की बाहों में हूँ और उनके शरीर से निकले इलेक्ट्रोन्स मुझे ठीक कर हे हैं। मैं जानती थी कि बडविग महान है और वे ही मुझे जीवन दे सकती है। यह सोचते-सोचते पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गई। दूसरे दिन डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे कोई कैंसर नहीं है। मैं बहुत खुश थी। मुझे इस पुस्तक की ताकत पर भरोसा था। मैं बडविग और उनकी क्वांटम फिजिक्स से बहुत प्रभावित हूँ। ऐसी बेमिसाल पुस्तक लिखने के लिए मैं डॉ. ओ.पी.वर्मा की बहुत आभारी हूँ। दोस्तों, आज मैं परी की तरह हवा में उड़ रही हूँ। 28.7.15
श्रद्धा और विश्वास की जीत
इस महान पुस्तक के बारे में आपको एक छोटी सी बात बताना चाहती हूँ। पिछले दिनों मेरे ब्रेस्ट में एक बड़ी गांठ हुई, स्पाइन में भी कई जगह बहुत दर्द रहने लगा। मेरा चेकअप हुआ। तीन एम.आर.आई. स्केन करवाए गए। डॉक्टर्स को पूरा शक था कि मुझे कैंसर हुआ है। एम.आर.आइ. स्केन की रिपोर्ट आने में समय था। तभी मैंने अमेज़ोन से डॉ.ओ.पी.वर्मा की पुस्तक कैंसर कॉज़ एंड क्योर मंगवाई। यह मेरे लिए ईश्वर का एक तोहफ़ा था। मैं डरी हुई थी और अपने उपचार की तैयारी कर रही थी। एक रात को मैं परेशान थी और नींद भी नहीं आ रही थी। तभी मैं उठी और अपनी प्यारी पुस्तक को सीने से चिपका लिया। मुझे लगा जैसे मैं बडविग की बाहों में हूँ और उनके शरीर से निकले इलेक्ट्रोन्स मुझे ठीक कर हे हैं। मैं जानती थी कि बडविग महान है और वे ही मुझे जीवन दे सकती है। यह सोचते-सोचते पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गई। दूसरे दिन डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे कोई कैंसर नहीं है। मैं बहुत खुश थी। मुझे इस पुस्तक की ताकत पर भरोसा था। मैं बडविग और उनकी क्वांटम फिजिक्स से बहुत प्रभावित हूँ। ऐसी बेमिसाल पुस्तक लिखने के लिए मैं डॉ. ओ.पी.वर्मा की बहुत आभारी हूँ। दोस्तों, आज मैं परी की तरह हवा में उड़ रही हूँ।
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Shri Sitaram Rasoi
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27.7.15
आवश्यकता है
उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के सभी जिलों, शहरों में संवाददाताओं की आवश्यकता है। युवाओं को वरीयता दी जाएगी। आपके पास कैमरा अथवा कैमरे वाला फोन, इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए।
संपर्क करें
Email- upuklive@gmail.com
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यशवंत सिंह yashwant singh
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सत्रारंभ कार्यक्रम से विद्यार्थियों के जीवन का नया अध्याय प्रारम्भ होगा- उमाशंकर गुप्ता
भोपाल। सत्रारम्भ कार्यक्रम से विद्यार्थियों के जीवन का नया अध्याय प्रारम्भ होगा। नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन के लिए प्रारम्भ हुआ सत्रारम्भ कार्यक्रम गुरुकुल परम्परा की तरह है। जिसमें विद्यार्थी को शिक्षा के साथ-साथ भविष्य में किये जाने वाले कार्य की नवीन विधाओं एवं चुनौतियों से परिचित कराया जाता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी पत्रकारिता, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दिग्गज हस्तियों से संवाद करते हैं और उनके जीवन के अनुभव से सीखने का प्रयास करते हैं। यह विचार आज मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सत्रारम्भ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कहे। कार्यक्रम का उद्घाटन टी.टी. नगर स्थित समन्वय भवन में हुआ। इस अवसर पर प्रख्यात टीवी पत्रकार श्री विनोद कापड़ी एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला उपस्थित थे।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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लोकायुक्त को सौंपे आईपीएस अमिताभ ठाकुर की छुपी सम्पत्तियों का ब्योरा
लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन 'तहरीर' के मुखिया और आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने आज लोकायुक्त को यूपी के निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर के विरुद्ध बीते 21 जुलाई को दायर परिवाद में अमिताभ ठाकुर के परिवार की छुपी सम्पत्तियों, अमिताभ की पत्नी नूतन ठाकुर द्वारा एक सोसाइटी के सचिव के साथ धोखाधड़ी कर गरीबों की जमीन हड़पने और अमिताभ द्वारा अपनी अधीनस्थ महिला कार्मिकों की जासूसी कराने के साक्ष्य सौंपकर इनको जांच में सम्मिलित करने का अनुरोध किया है।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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सोसायटी फॉर एज्युकेशन डेमोक्रेसी (म.प्र.)
डीमेट परीक्षा को आनलाईन करवाने के लिये माननीय जबलपुर उच्च न्यायालय में विपिन उपाध्याय द्वारा लगाये गये आय.ए. नं. 7640 का सिर्फ मेन पिटीशन नं. 8810ॅच्ध्2015 के अन्तर्गत सुब्बाई करके अन्य पिटीशन ॅच्10859 एवं 10860 के बिन्दुओ को न्यायालय के रिकार्ड पर होने के बावजूद भी अधिवक्ता कार्यालय द्वारा डीमेट परीक्षा से सीधा-सीधा सम्बन्ध होने के बावजूद भी माननीय न्यायालय में पक्ष भी रखकर सीधा-सीधा डीमेट एसोसिएशन को ऑनलाईन परीक्षा करवाने में अप्रत्यक्ष सहयोग किया जा रहा है। जिसकी उच्च स्तरीय जांच करवाकर अधिवक्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही की मांग पिटीशनकर्ता विभोर चोपडा द्वारा की गई।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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चैनलों पर बकबकियों की बहस...!!
तारकेश कुमार ओझा
फिल्म गदर करीब डेढ़ दशक पहले आई थी। लेकिन यह शायद इस फिल्म की लोकप्रियता का ही परिणाम है कि अक्सर किसी न किसी चैनल यह प्रदर्शित होती ही रहती है। यूं तो फिल्म में कई रोचक व दिल को छू जाने वाले प्रसंग है। लेकिन इस फिल्म का एक सीन वर्तमान राजनीति पर भी सटीक बैठता है। जिसमें पाकिस्तानी राजनेता बने अमरीश पुरी अपनी बेटी के साथ हुई त्रासदियों में भी राजनैतिक फायदे की संभावना देखते है। वे बेटी बनी अमीषा पटेल से कहते हैं... सब्बो ... हम सियासती लोग है। तुम चाहो तो इसके जरिए सियासत की सबसे ऊंची सीढ़ी तक पहुंच सकती हो।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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नि:शुल्क पुस्तिका - "यह आजादी झूठी है"
गीतकार, लेखक और स्वराज को समर्पित चर्चित त्रैमासिक पत्रिका "दाल-रोटी" के संपादक अक्षय जैन की नई पुस्तिका "यह आजादी झूठी है" नि:शुल्क उपलब्ध है। जनहित में जारी इस पुस्तिका में कई रोचक लेख और काव्यांश शामिल किए गए हैं। संपर्क: "दाल-रोटी", 13, रशमन अपार्टमेंट, उपासनी हॉस्पिटल के ऊपर, एस.एल. रोड, मुलुंड (प), मुंबई 400080. मोबाइल 080807 45058
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यशवंत सिंह yashwant singh
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कब तक बर्दाश्त करें आतंक के इस दंश को?
30 जुलाई को मुंबई बम धमाकों के आरोपी याकूब मेनन की प्रस्तावित फांसी, 26 जुलाई को कारगिल विजय का जश्न और सोमवार 27 जुलाई को तड़के पंजाब के गुरदासपुर जिले के दीनानगर पुलिस थाने पर आतंकी हमला; देखने पर ये तीनों घटनाएं भले ही अलग प्रतीत हों किन्तु इनके बीच समानता की एक महीन लकीर नज़र आती है। याकूब मेनन की प्रस्तावित फांसी के विरोध में जिस तरह कथित बुद्धिजीवी पत्र लिखते हुए भारतीय न्याय व्यवस्था का मखौल उड़ा रहे हैं, उसे पूरी दुनिया देख रही है। क्या संभव नहीं कि याकूब के पाकिस्तानी आका भी उसकी फांसी पर देश के भीतर छिड़ी धर्म आधारित बहस का फायदा उठाना चाह रहे हों? क्या भरोसा कि पंजाब के आतंकी हमले को याकूब की फांसी से जोड़कर सियासतदां इस पर भी राजनीतिक रोटियां सेंकने लगें? हो सकता पाक समर्थित आतंकी संगठन याकूब की फांसी का बदला लेने का मंसूबा पाले हों जैसा उन्होंने कसाब की फांसी के बाद कहा और किया।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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24.7.15
यूपी में इंसाफ के बदले मुंह बंदकराई का चलन
उत्तर प्रदेश ने अपने इतिहास में अराजकता और अव्यवस्था के कई दौर देखे हैं, लेकिन ऐसा दौर कभी नहीं देखा जिसमें सरकार ने मुआवजे और नौकरियों को इंसाफ मांगने वालों की मुंह बंदकराई में बदल दिया हो और उनकी आड़ में की गई डीलों से ‘अपने’ अपराधियों को बचाने में सफलता पाने पर विजयदर्प से मुसकुराती हो! कोई तो समझाए उसे कि यह मुसकुराने का नहीं चुल्लू भर पानी तलाशने का मामला है।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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हम हैं, नकलचियों का देश!
दुनिया के विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठता का मूल्यांकन करनेवाले एक विश्व-केंद्र का ताजा मूल्यांकन भारत को चैंकानेवाला है। उसके अनुसार दुनिया के पहले 340 श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में भारत का एक विश्वविद्यालय भी नहीं है। 341 वें नंबर पर है, दिल्ली का ‘इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नाॅलाजी’! 379 नंबर पर है, दिल्ली विश्वविद्यालय और फिर हमारे कई नामी-गिरामी विश्वविद्यालयों का नंबर 400, 500 या 600 पर जाकर टिकता है। क्या वजह है कि हमारा देश पढ़ाई-लिखाई में इतना पिछड़ा हुआ है? ऐसा नहीं है कि दुनिया के सारे श्रेष्ठ विश्वविद्यालय अमेरिका में हैं। वे यूरोप में तो हैं ही, चीन और जापान में भी हैं। इस्राइल, द.कोरिया, बेल्जियम, स्पेन और स्विटजरलैंड जैसे छोटे-छोटे देशों में भी हैं और वे भारत से बहुत आगे हैं।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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अलीगढ़ के डीएस कालिज में जमकर हुआ हंगामा
अलीगढ़! शुक्रवार को डीएस कालिज में प्रवेश मेरिट लगने से पहले जमकर हंगामा हुआ,प्रवेश मैरिट प्रवेश परीक्षा के साथ हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट के अंक मिलाकर बनायी जा रही थी तो सभी छात्र नेताओं ने मिलकर इसका विरोध किया,छात्र नेताओं की प्राचार्य से जमकर नोंकझोंक हुई तथा चीफ प्राक्टर ने छात्र नेताओं को समझाने का खूब प्रयास किया लेकिन जब बात न बनी तो प्रचार्य ने पुलिस को खबर दे दी तो मौके पर पुलिस भी कालिज कैम्पस में पहुँच गई,अचल चौकी इन्चार्ज ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया परन्तु छात्रों की हठ थी कि प्राचार्य से मिल कर ही इस मुद्दे पर बात होगी अन्यथा कोई समझौता नहीं इसके पश्चात सभी छात्र नेताओं की प्राचार्य से बात कराई गयी और इस पर प्राचार्य ने अपना बचाव करते हुए कहा कि यह विश्वविधालय का आदेश है और इसकी एक प्रति छात्रनेताओं को देने की बात कही तब जाकर मामला शांत हुआ।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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विवेक अग्रवाल ‘यंग एंटरप्रन्योर अवार्ड-2015’ से सम्मानित
नई दिल्ली : भारतीय उद्योग जगत के उभरते हुए युवा उद्यमी श्री विवेक अग्रवाल को ‘यंग एंटरप्रन्योर अवार्ड-2015’ से सम्मानित किया गया है। यह अवार्ड उन्हें केन्द्रीय कौशल विकास मंत्री श्री राजीव प्रताप रूढि़ ने प्रदत्त किया। विदित हो श्री अग्रवाल को यह पुरस्कार युवा व्यवसायी के रूप में विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों के लिए दिया गया है। 28 वर्षीय श्री विवेक अग्रवाल रियल स्टेट, दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा से जुड़े विभिन्न उद्यमों में सक्रिय हैं एवं उनके पास दो हजार से अधिक कर्मियों की ताकत है। वे आईटी और टेलिकाम में भी सफलता के नये कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। इस अवसर पर प्रख्यात व्यावसायिक हस्तियों एवं कारपोरेट दिग्गजों को उनकी उत्कृष्ट व्यावसायिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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इस्लामिक स्टेट का झण्डा फूंका
चंडीगढ़। (कलसी): - आज वीएचपी-बजरंग दल चंडीगढ़ की टोली ने भारत में मुस्लिम युवकों के इस्लामिक स्टेट के प्रति बढ़ते रुझान और कश्मीर में मुस्लिम युवकों द्वारा बार बार इस्लामिक स्टेट और पाकिस्तान का झण्डा लहराने की वारदात का विरोध करने के लिए आज ट्रिब्यून चौक पर इस्लामिक स्टेट और पाकिस्तान का झण्डा फूंका और विरोध प्रदर्शन किया।
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Hon’ble Mr. Justice S.J. Vazifdar, Acting Chief Justice of Punjab & Haryana High Court has inaugurated the E-filing counter
PRESS RELEASE DATED
Chandigarh : (Kulbir Singh Kalsi) : Today Hon’ble Mr. Justice S.J. Vazifdar, Acting Chief Justice of Punjab & Haryana High Court has inaugurated the E-filing counter, Law Research and Information Kiosks and free software for the members of the High Court Bar Association, in the Judges conference hall. The large number of Advocates has attended the function. Sh. Harpreet Singh Brar, President, G.B.S. Dhillon, Vice President and Sumit Jain,Honorary Secretary, thanked to the Hon’ble Acting Chief Justice S.J. Vazifdar and spoke that this is a great step towards the technical up gradation and modernization.
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यशवंत सिंह yashwant singh
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23.7.15
Anganbadi Workers of Delhi begin their indefinite hunger strike outside Kejriwal's Residence.
23 July| New Delhi | Anganbaadi workers of Delhi who have been protesting for the past 16 days today begun their indefinite Hunger strike outside Arvind Kejriwal's Residence. The Anganbadi Workers of Delhi have been on strike since the 7 of July this month. But the Government has paid no attention to their demands whatsoever. The anganbadi workers have declared to continue their indifinite hunger strike till their short term demands are not met. The striking workers are demanding that their back wages be paid immediately without delay, they should be paid by the 10th of every month, every anganbadi worker should be given an I.D, they should be given Anganbadi worker insurance, the workers kept on Panel should get full wage, they should be given benefits covered under the SABLA scheme. The workers have been protesting outside Kejriwal's residence since 7 july demanding that they be regularized and given permanent appointments, 8 hour work day, minimum wage and other benefits given to a government employee.
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यशवंत सिंह yashwant singh
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विश्व कीर्तिमान बनाकर लौटे बिहार के निसक्त खिलाडिओं का हुआ सम्मान
पटना । विश्व कीर्तिमान बना कर पटना लौटे विकलांग खिलारी अनूराग चंद्रा और संतोष मिश्रा का नया टोला गोपाल मार्केट स्थित अदम्या अदिती गुरुकूल में डा. एम. रहमान व एम. सिवल सर्विसेज के मुन्ना जी ने मेमेंटो और शौल दे कर सम्मानीति किया। इस अवसर पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। डा. रहमान ने इस अवसर पर कहां कि अगर दिल में कुछ कर गुजरने का हौशला हो तो तमाम बाधाओ के बावजूद विजय मिल ही जाती है। इस कहावत को अक्षरसः सत्य सिद्ध कर दिखाया है बिहार के दो निशक्त खिलाडिओं अनुराग चन्द्र और संतोष मिश्रा ने । दोनों खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दिल्ली से लेह का सफर 1267 किलोमीटर का है।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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तीस्ता सीतलवाड एवं अन्य व्हिसल ब्लोवरों पर मोदी सरकार में हो रहे सतत उत्पीड़न के खिलाफ NSUI द्वारा चर्चा की गयी एवं नियमित सूचनाधिकार सहायता शिविर की प्रेस विज्ञप्ति
आज दिनाँक 23 / 07 / 2015 बृहस्पतिवार को लंका स्थित टंडन टी स्टॉल ( हेरिटेज हॉस्पिटल के ठीक नीचे ) लंका बी एच यू रोड पर NSUI द्वारा नियमित सूचनाधिकार सहायता शिविर लगाया गया एवं प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्त्री तीस्ता सीतलवाड एवं अन्य व्हिटसल ब्लोवरों पर मोदी सरकार में हो रहे सतत उत्पीड़न के खिलाफ चर्चा की गयी। वर्तमान मोदी सरकार ने पिछले एक साल के कार्यकाल में हजारो सामाजिक संस्थाओं पर प्रतिबन्ध लगाया है और उनकी वित्तीय श्रोतों एवं सामाजिक कामों पर नजर बनाये रखे हुए है।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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"राष्ट्र निर्माता शिक्षक"
बहुत कुछ कहना चाहता हूँ इस बारे में , पर आज की घटना अप्रत्यक्ष रूप से ही काफी कुछ कह जाती है ... जहां अधिकतम निजी विद्यालय एक बड़े व्यवसाय के रूप में उभर रहे हैं.. वहीँ सरकारी विद्यालयों की स्थितियां उन्ही के लोग बिगाड़ने में लगे हैं ....
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यशवंत सिंह yashwant singh
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संचार माध्यमों की नजर में भारतीय डायस्पोरा
सक्षम द्विवेदी
पांच सौ छियासी ई0पू0 ग्रीक भाषा से उत्पन्न शब्द डायस्पोरा आज भी जनमानस के बीच एक प्रचलित शब्द नहीं कहा जा सकता है। परन्तु इतना तो स्पष्ट है कि भारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं के लिए डायस्पोरा एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में हमारे समक्ष उपस्थित है। दरअसल डायस्पोरा का सामान्य अर्थ प्रवासन से है परन्तु ‘डायस्पोरा’ शब्द इसलिए प्रचलित है क्यों कि यहूदियों द्वारा बेबीलोन को छोड़कर जाने की घटना को इसी शब्द द्वारा परिभाषित किया गया। अर्थात जो लोग किन्ही कारणांे से अपने मूल निवास को छोड़कर किन्ही अन्य स्थानों पर गये तथा वहां रहकर भी अपने मूल स्थान व संस्कृति से न सिर्फ जुड़े रहे बल्कि उसको सांस्कृतिक,भाषाई और राजनैतिक स्तर पर प्रभावित भी करते रहे।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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यार ये वैन इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी सिर्फ फेसबुक पर ही चलती हैं क्या ?
यार ये वैन इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी सिर्फ फेसबुक पर ही चलती हैं क्या? और फेसबुक पर भी सिर्फ यही देखने और पढ़ने को मिलता हैं यहां ऑफिस खोला यह ब्यूरो दिया , आज यहां इंटरव्यू हैं आज वहां इंटरव्यू हैं , और मीडिया में बेरोजगारी की भरमार होने के कारण बेचारे कुछ साथी इंटरव्यू देने भी जाते हैं किन्तु आज तक किसी का सलेक्शन होते हुए नही दिखा । और सलेक्शन होने के बाद वह लोग आखिर क्या करेंगे क्योकि वैन इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी अभी तक न तो किसी वेबसाइट पर देखी न ही किसी चैनल या अख़बार में इसकी न्यूज़ चलती हुई दिखी ।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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यूपी में पूरे गाँव के बिजली कनेक्सन कटवा देने की बात से बरपा हंगामा
अधिकारियों की उदासीनता से सपा सरकार की एक और बड़ी किरकरी
अधिकारियों की उदासीनता से पड़ेगा सरकार की छवि पर बुरा असर
रामजी मिश्र 'मित्र'
सीतापुर/ पूरे गाँव के कनेक्सन कटवा देने की बात ने तहलका मचा दिया है। नेताओं और अधिकारियों की निगाह इस गाँव पर गड गयी हैं लेकिन सब दूर दूर से टोह लेते नजर आ रहे हैं। ब्रम्हावली गाँव के लोगों को अधिकारियों की लापरवाही अब बहुत अखर रही है। अगर रेकॉर्ड देखे जाएँ तो पता चलेगा कि समस्याओं के सम्बन्ध में विद्युत् हेल्पलाइन 18001800440 पर इस सम्बन्ध में गाँव से शिकायते दर्ज होती रही हैं। हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत को हर बार हल दिखाकर बंद कर दिया जाता था और दुबारा उसी समस्या को फिर दर्ज कर लिया जाता था। इसके कारण हेल्पलाइन समस्याओं के निस्तारण दिखाकर अपनी पीठ थपथपाता रहा जब्कि अधिकाँश समस्याएं बनी रहती हैं।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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वनस्थली विदयापीठ का फर्जीवाड़ा
न नेट पास किया और न ही पी एच डी किया लेकिन बना दिया गया विभागाध्यक्ष यानि की एच ओ डी.... जी हाँ यही सच्चाई है वनस्थली विद्यापीठ की..यहाँ के मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म विभाग में इन दिनों ऐसा ही फर्जीवाड़ा चल रहा है...सिर्फ मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म विभाग ही नहीं यहाँ के कई सारे विभागों का यही हाल है..राजस्थान के इस विश्वविद्यालय में इन दिनों विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमो की जम कर धज्जियाँ उड़ाई जा रही है...कोर्स के नाम पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से रकम तो मोटी ली जा रही है...लेकिन अनुदान के नियमो का पालन नहीं हो रहा है..बात सिर्फ यही तक ख़त्म नहीं होती हैरत की बात तो ये है की कई विभाग भी दूसरे नाम से चलाये जा रहे है..मसलन अगर मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म विभाग की बात करें तो इसे फाइन आर्ट्स के नाम से चलाया जा रहा है..वाह रे वाह अनुदान आयोग का और आयोग के नियमो का पालन नहीं..ये तो महज बानगी भर है...ना जाने कितने फर्जीवाड़े से भरा हुआ है ये विश्वविद्यालय.
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यशवंत सिंह yashwant singh
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जनसेवा में पगार क्यों?
डॉ. शशि तिवारी
जो घर फूंक आपना चले हमारे संग कबीर की तरह फक्कड़ बनना होगा यदि सही मायने में समाज सेवा का जुनुन है तो वर्ना धन्धे के तो अनेक रूप हैं। आज राजनीति समाज सेवा न रहकर केवल धन्धे का माध्यम भर रह गई है। कल तक फटे हाल घूमने वाला नेता चुनाव जीतते ही चंद महीनों में ही अपने को धनाढ्यों में आगे खड़ा कर लेता है। इस चमत्कार से जनता भी दांतों तले अपनी अंगुलियां न केवल दबा लेते है बल्कि चबाते भी रहते हैं। आज राजनीति में भी कार्पोरेट कल्चर आ गया है अर्थात् चुनाव में टिकिट बांटने/बेचने से लेकर सुनियोजित प्रबंधन के तहत चन्दा उगाई, अवैध खनन/कारोबार से अपने को मालामाल बनाने का गोरखधन्धा पूरी राजनीति बिरादरी में अमरबेल की तरह फल-फूल रहा हैं।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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22.7.15
तब से अब तक कई निर्भया मर चुकी हैं । सबकी चर्चा नहीं हो पाई । हो भी नहीं सकती । सबके लिए कैंडल भी नहीं जलायी जा सकती । सबके लिए आक्रोश पनपना चाहिए पनपता भी है पर दिल में ही दब कर रह जाता है गुस्सा । आखिर कोई साल के तीन सौ पैंसठ दिन तक कैसे सड़क पर आंदोलन कर सकता है ।
वक्त काफी बीत गया है । अब आनंद पर्वत दिल्ली में फिर एक और निर्भया मारी गयी है । नाम मीनाक्षी । कारण लगभग वही । थोड़ा बदला सा । इसके साथ यह समस्या नहीं थी कि कोई इसे देख लेता तो बचा लेता ।इसके साथ यानी आसपास तो बहुत थे पर साथ कोई नहीं था । पुलिस क्या चप्पे चप्पे पर हो सकती है ? संभव नहीं । पडोसी सबसे बड़ा मित्र होता है । लेकिन यहाँ तो तीन घर छोड़कर ही दुश्मन बैठा था । और पडोसी ? कोई नहीं था । पडोसी कोई नहीं था । हाँ , आसपास बहुत से लोग रहते थे । सब मूक से । हम एक प्रार्थना करते हैं अक्सर - मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लंघयते गिरिम् । यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्दमाधवम् । । यानि हम उस ईश्वर को प्रणाम करते हैं जो गूंगे को बोलना सीखा दे लंगड़े को पहाड़ पार करना सीखा दे । लेकिन मीनाक्षी के आसपास जो थे वे सब गूंगे ही बने रहे । हाथ पैर होते हुए भी लंगड़े से ही रहे । अपाहिज । क्या अपाहिज होना सिर्फ शरीर से होता है ? नहीं , मन अपाहिज हो तो ? तो भी अपाहिज ही तो है । वे सब चुप चाप देखते रहे और मीनाक्षी मर गई । एक पडोसी के घर घुसी भी जान बचाने के लिए लेकिन वहां शरण न पा सकी वह । क्योंकि उस घर में भी अपाहिज ही रहते थे । मन से अपाहिज । किसको कोसेंगे ? पुलिस को ? कोसिये । आक्रोश जताइए । दिल्ली के सी एम ने एक विज्ञापन जारी किया है । लोगों से कहा है कि वे अब चुप न रहें । इनके सामने जंतर मंतर पर वह गजेन्द्र चौहान मर गया था पेड़ पर लटक कर । उन्होंने कहा है देश के पी एम से कि आनंद पर्वत की उस गली में पुलिस की व्यवस्था कर दी जाए । क्या अगला अपराध भी उसी गली में होगा । और कहीं नहीं ? बाकि दिल्ली का क्या होगा ? खैर ,
आइये एक बार फिर से मोमबत्ती जलाएं , लेकिन इस बार मीनाक्षी के लिए नहीं बल्कि उन लोगों की उस मरी हुई आत्मा के लिए जिसने मीनाक्षी को सामने सामे मर जाने दिया । उनके उस अपाहिज मन और साहस के लिए जिसके कारण उनकी उस कायर और मृत आत्मा में एक बार भी उसे बचाने की इच्छा नहीं जागी । मीनाक्षी के लिए तो हम फिर से अगली बार दिया जला लेंगे ।
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Dr Dwijendra vallabh sharma
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वाराणसी में बढती यौनहिंसा की घटनाओं पर नियंत्रण और पीड़ित बच्चियों तथा महिलाओं के लिए मुआवजे की मांग
प्रेस विज्ञप्ति:
दिनांक: 22 जुलाई 2015
वाराणसी में आयेदिन बढती यौन हिंसा की घटनाओं से व्यथित होकर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने "साझा संस्कृति मंच" के तत्वावधान में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों से मुलाक़ात की और उनसे ऐसी घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण हेतु प्रभावी कदम उठाने की मांग की. मंच द्वारा गठित 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में डा आनंद प्रकाश तिवारी, वल्लभाचार्य पाण्डेय, रंजू, जागृति राही और अनूप श्रमिक शामिल रहे. दल ने वाराणसी जोन के पुलिस महानिरीक्षक अमरेन्द्र कुमार सेंगर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगेंद्र कुमार, जिलाधिकारी प्रांजल यादव जो वर्तमान में प्रभारी मंडलायुक्त भी हैं, जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात रंजन एवं पुलिस उप महानिरीक्षक कार्यालय के जन संपर्क अधिकारी से मिल कर उनसे कहा कि हम बनारस मे प्रतिदिन महिलाओं एवं बच्चियों की हत्या, आत्महत्या, शोषण, बलात्कार, हिंसा की घटनाओं की बढ़ती हुई संख्या से बेहद चितित है। वाराणसी को स्मार्ट सिटी, हेरिटेज सिटी, सांस्कृतिक राजधानी, क्योटो, सेन्तियागो और न जाने क्या-क्या बनाने के हम सपने देख रहे है। यह माननीय प्रधानमंत्री जी का संसदीय क्षेत्र है , दुनियाभर से बनारस में और अधिक पर्यटक आयें यह कवायद जारी है, बनारस में औरतो, लड़कियों, बच्चियों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी के प्रति समाज व पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में यदि कोई बदलाव नहीं आया तो दुनिया के सामने हमारी छवि नही बचेगी ।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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फीटर रेहड़ा चलाने को मजबूर हैंडबाल का महावीर
: दो बार नेशनल, चौदह बार स्टेट खेल चुके खिलाड़ी ने नीलामी के लिए रखी अपनी उपलब्धियां : जंगलात महकमें में चपरासी की नौकरी मांगने पर झेली राजनेता की फटकार : 500 रुपये के लिए दूसरों के नाम पर खेलकर दिलाई नौकरी, खुद रह गया वंचित :
डीडी गोयल
डबवाली (सिरसा)। हैंडबॉल का 'महावीर नेताओं की उदासीनता के चलते फीटर रेहड़ा चलाने को मजबूर है। दो बार नेशनल तथा चौदह बार स्टेट खेल चुका यह खिलाड़ी अपनी खेल उपलब्धियां नीलाम करने जा रहा है। बुरी तरह से टूट चुके इस खिलाड़ी का कहना है कि देश में प्रतिभा का नहीं। पैसे तथा राजनीतिक पहुंच रखने वालों का सम्मान होता है। खिलाडिय़ों के हिस्से में महज अपमान आता है। जिसे लेकर वह पूरी जिंदगी पछताते हैं।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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19.7.15
बिहार सरकार स्वयं दे रही है बिजली कंपनी में भ्रष्टाचार को प्रश्रय!
1.बिजली सरकार ने कई दशकों से कार्यरत विद्युत निगरानी कोषांग को बंद कर दिया है। यह कोषांग विशिष्ट रूप से ऊर्जा चोरी एवं बोर्ड के वैसे जनसेवक जो कदाचारपूर्ण कृत्यों में लिप्त होकर बिजली चोरी में सहायता करते थे,उन पर निगरानी रखने के लिए गठित किया था।
2. बिहार राज्य ने निगरानी पुलिस को बिजली चोरी के मामले में हस्तक्षेप को निषेध कर दिया है।
3. बिहार राज्य ने बिजली कंपनी के वैसे जनसेवक जो कदाचारपूर्वक उपभोक्ताओं से बिजली चोरी करवाकर नाजायज लाभ पहुँचाते हैं उन्हें भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के दायरे से मुक्त कर दिया है।
4. बिहार राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2007 में बिहार विद्युत आपूर्ति अधिनियम की कंडिका 114 के तहत यह प्रावधान किया है कि बिजली चोरी करते हुए पकड़े जाने के बाद भी अगर कोई उपभोक्ता स्वैच्छिक घोषणा करता है तो उसे एक निश्चित अवधि के लिए औसत विपत्र देकर आपराधिक कांड और जुर्माना एवं दंडात्मक विपत्र से मुक्ति मिल सकती है। इस बात की पुष्ट जानकारी है कि कम-से-कम एक बड़े उपभोक्ता को निगरानी कोषांग के द्वारा 21 करोड़ रुपये की बिजली चोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद भी एक करोड़ रुपये की स्वैच्छिक घोषणा कर आपराधिक कांड से मुक्त कर दिया गया है। 2007 से अब तक इसका लाभ सिर्फ बड़े HHT/HT एवं रसूख वाले उपभोक्ताओं ने ही उठाया है या फिर उनको ही उठाने दिया गया है।
5.बिजली बोर्ड ने प्रभावशाली और बड़े उपभोक्ताओं तथा साधारण उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग विधिक प्रावधान बना रखा है।
6.वर्ष 2007 में बोर्ड ने टोका फंसाकर 60000 रुपये की बिजली चोरी करनेवाले उपभोक्ताओं पर कांड दर्ज कराया। उपभोक्ता के पक्ष में उच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि पुलिस को नए विद्युत अधिनियम 2003 में कांड दर्ज कर अनुसंधान करने का कोई अधिकार ही नहीं है। बोर्ड ने इस मामले के विरूद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील की और यह कहा कि बिजली अधिनियम 2007 में प्रावधान संशोधित हो चुके हैं। परिणामस्वरूप उच्चतम न्यायालय ने फैसला बोर्ड के पक्ष में सुनाया और अभियुक्त आरोपपत्रित होकर जेल चले गए। इतना ही नहीं हाजीपुर में कई बिजली उपभोक्ताओं पर मीटर को बाईपास कर बिजली जलाने पर मुकदमा कर दिया गया। बाद में बिल जमा कर देने के बाद कहा गया कि कोर्ट फीस जमा कर देने पर मामले को समाप्त कर दिया जाएगा। लेकिन 3000 रुपये से भी ज्यादा कोर्ट फीस के नाम पर जमा करवाने के बाद भी 7000रुपये बकाये का नोटिस भेजा जाता रहा।
7.परंतु बोर्ड ने 20 करोड़ रुपये की चोरी के मामले में दायर सी.डबल्यू.जे.सी. 921/09 आदि में बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय में अपने इस स्टैंड से बिल्कुल भिन्न स्टैंड लेते हुए कहा कि निगरानी (पुलिस) को बिजली चोरी का कांड दर्ज करने का अधिकार ही नहीं है तथा भारतीय विद्युत अधिनियम 1910 के तहत जारी यह अधिसूचना विद्युत अधिनियम 2003 के लागू होने के बाद प्रभावी नहीं रही। इस मामले में 20 करोड़ रुपये की राशि की बिजली चोरी का मामला था। बिजली बोर्ड के इस स्टैंड से अतिधनवान उपभोक्ता एवं उनकी मदद करनेवाले बोर्ड के अध्यक्ष और अन्य इंजीनियर बरी हो गए। बोर्ड ने उच्चतम न्यायालय में एस.एल.पी. दायर करना भी मुनासिब नहीं समझा।
मित्रों,यह घोर आश्चर्य का विषय है कि जहाँ वर्ष 2012-13 में बोर्ड ने 4000 छोटी चोरी में शामिल उपभोक्ताओं से कई करोड़ रुपयों की वसूली की वहीं इसी वर्ष में बिजली बोर्ड की निगरानी कोषांग द्वारा वर्ष 2003 से 2006 में दर्ज किए गए 6 मुकदमें जिनमें कई सौ करोड़ की राशि निहित थी माननीय उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिए गए। बिजली बोर्ड ने न तो औपचारिक रूप से इसका विरोध किया और न ही उच्चतम न्यायालय में अपील ही की।
मित्रों,बिजली बोर्ड एक षड्यंत्र के तहत कई सालों से बड़े उपभोक्ताओं की चोरी को संस्थागत संरक्षण देकर कदाचारपूर्ण कृत्य करता है परंतु यह दिखाने के लिए कि वह बिजली चोरी रोकने के लिए कृतसंकल्पित है गरीब उपभोक्ताओं पर महत्तम शक्ति एवं निरोधात्मक कार्रवाइयाँ करता है। बिजली बोर्ड ने आज भी बहुत सूझबूझ तथा शातिराना ढंगे से बड़े-बड़े उपभोक्ताओं को पुराने मामले से भी मुक्त कराने का जो अभियान चला रखा है,उसकी शुरुआत वस्तुतः तत्कालीन अध्यक्ष स्वप्न मुखर्जी के कार्यकाल में वर्ष 2008 में हुई थी और इस दुरभिसंधि में उन्हें सरकार के शीर्षस्थ स्तर पर पदासीन पदाधिकारियों का पूरा सहयोग मिला था। तब माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को भी इस मामले की पूरी जानकारी थी और उन्होंने भी इस भ्रष्टाचार के खेल को रोकने के बजाए प्रश्रय ही दिया था। बाद में विद्युत निगरानी कोषांग के महानिदेशक आनंद शंकर द्वारा दीना आयरन स्टील,दीना मेटल्स और दादीजी स्टील जैसे बड़े चोरों पर कांड दर्ज होने और इनकी अवैध तरीके से मदद करने के आरोप में बोर्ड अध्यक्ष के खिलाफ कोषांग के उनके बाद महानिदेशक बने मनोजनाथ द्वारा मुकदमा दर्ज करने के बाद कोषांग को बिहार सरकार ने वर्ष 2012 में बंद ही कर दिया। इसके बाद से ही जहाँ से बोर्ड के अध्यक्ष और इंजीनियरों की मोटी कमाई हो रही है वहाँ बिजली चोरी जारी है और बाँकी जगहों पर तड़ातड़ छापेमारी की जा रही है।
हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित
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ब्रजकिशोर सिंह
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16.7.15
अगले 25 सालों में भारत बन सकता है आर्थिक महाशक्ति मगर.......
मित्रों,सबसे पहले तो हमें अपनी सोंच को बदलना होगा। सबको गरीब बनाकर रखना न तो समाजवाद है और न ही साम्यवाद बल्कि सबको अमीर बनाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। अबतक भारत में शासन करनेवाली सभी सरकारों का मूलमंत्र सबको गरीब बनाकर रखना रहा है हमें इस मूलमंत्र को सिरे से पलट देना होगा और ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जिससे सबको अमीर बनाया जा सके। जो अमीर हैं वे तो अमीर रहें ही जो गरीब हैं उनको भी अमीर बनाया जाए।
मित्रों,इसके लिए सबसे पहले तो हमें कृषि-क्रांति करनी होगी। आजादी के 70 साल बाद भी हमारी 65 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। हम इनको गरीब रखकर कभी अमीर राष्ट्रों की श्रेणी में नहीं आ सकते इसलिए हमें ऐसे प्रबंध करने होंगे जिससे कृषि-उत्पादकता में भारी वृद्धि हो। प्रत्येक खेत को सिंचित करना होगा,भूमिगत जल को रिचार्ज करना होगा और किसानों खाद और बीज समय पर उपलब्ध करवाना होगा। साथ ही उनको अपने उत्पादों का सही मूल्य प्राप्त हो इसकी भी व्यवस्था करनी होगी। भूमि स्वास्थ्य कार्ड और प्रधानमंत्री सिंचाई योजना को अविलंब लागू करना होगा। कुल मिलाकर कृषि एक बार फिर से सबसे उत्तम व्यवसाय बने सुनिश्चित करना होगा।
मित्रों,हमें अगर महाशक्ति बनना है तो इसमें कोई संदेह नहीं कि हमें औद्योगिक क्रांति करनी होगी। सेवा क्षेत्र की अपनी सीमाएँ हैं। फिर उसमें भारत की युवा जनसंख्या के लिए रोजगार देने की संभावनाएँ भी नहीं हैं। इसलिए अगर हमें भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाना है तो देश को दुनिया की फैक्ट्री में बदलना होगा। पूरी दुनिया को मेड इन इंडिया वाले सामानों से पाट देना होगा। इस कार्य को शुरू करने के लिए यह समय भी एकदम उपयुक्त है। क्योंकि दुनिया की फैक्ट्री चीन में श्रमिक अब महंगे हो गए हैं। इसके लिए भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव करना होगा और बड़े-बड़े एसईजेड की स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण करना होगा। एक-एक एसईजेड हजारों हेक्टेयर के होने चाहिए न कि दो-चार सौ हेक्टेयर के। जिन किसानों की जमीनें इसमें जाएंगी उनको इनमें नौकरी दी जा सकती है या फिर बाजार-मूल्य से कई गुना ज्यादा दाम देना होगा जिससे वे नए सिरे से अपना जीवन शुरू कर सकें। हमें श्रम-कानूनों को इस प्रकार का बनाना होगा जिससे न तो श्रमिकों का शोषण हो और न ही लगातार हड़ताल-पर-हड़ताल हो। एसईजेड को करों में छूट के अतिरिक्त हर तरह की आधारभूत संरचना यथा सुपरफास्ट सड़क-रेल-जल परिवहन,चौबीसों घंटे बिजली,भ्रष्टाचारमुक्त त्वरित समस्या-समाधान प्रणाली उपलब्ध करवानी होगी।
मित्रों,एसईजेड की जरुरतों के मुताबिक हमें श्रमिक भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध करवाना होगा। इसके लिए हमें देश के हर प्रखंड,विकास-खंड में आईटीआई की स्थापना करनी होगी जिनमें अच्छे प्रशिक्षक हों। आईटीआई को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाना होगा तदनुसार सारी प्रायोगिक सुविधाएँ भी उपलब्ध करवानी होगी। इस दिशा में कल ही भारत सरकार ने कदम भी उठाया है।
मित्रों, इसके साथ ही उद्यमियों को ऋण देने की प्रणाली को सरल और रिश्वतमुक्त बनाना होगा। अभी तो स्थिति ऐसी है कि कुटीर और लघु उद्यमियों को जो 35 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है वो घूस देने में ही चली जाती है। उसके बाद जब वो पैसे वापस करने जाता है तो पता चलता है 10 लाख के ऋण के बदले उसको सूद समेत 15 लाख भरना होगा और वो हक्का-बक्का रह जाता है। इसके साथ ही हमें कारखानों में ऐसी चीजों का उत्पादन करना होगा जिसकी फैक्ट्री के आसपास और हमारे देश के आसपास के क्षेत्रों में मांग है। हमें उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता पर भी पर्याप्त ध्यान देना होगा।
मित्रों,जनसंख्या-विस्फोट भारत की बहुत बड़ी समस्या है और बहुत सारी समस्याओं की जड़ भी है। इसलिए हमें सख्ती के साथ बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना होगा अन्यथा लाख कोशिशों के बावजूद भी हम अपने देश की प्रति व्यक्ति आय नहीं बढ़ा पाएंगे। और जब तक प्रति व्यक्ति आय नहीं बढ़ेगी जीवन-स्तर में भी सुधार नहीं होगा। हम यह नहीं कहते कि हम चीन की तरह हम दो हमारे एक की नीति अपनाएँ लेकिन हम दो हमारे दो की नीति का तो पूरी सख्ती से पालन करवाना ही होगा। हम जानते हैं कि एक संप्रदाय-विशेष इसका विरोध करेगा लेकिन 13 प्रतिशत लोगों की मनमानी के चलते हम देश को बर्बादी की आग में नहीं झोंक सकते।
मित्रों,गांवों से शहरों की ओर पलायन आज बहुत बड़ी समस्या बन गई है। बड़े-बड़े शहरो में झुग्गियों की संख्या में तेजी से ईजाफा हो रहा है। मजदूर अपने परिवार को शहर तो ले आते हैं लेकिन गुणवत्तापूर्ण जीवन नहीं दे पाते। हमें इस प्रवृत्ति पर रोक लगानी होगी और मजदूरों को अपने गांव के आसपास ही नौकरी देनी होगी। साथ ही गांवों में ही वो सारी सुविधाएँ भी देनी होंगी जो शहरों में मिलती हैं जैसे उत्तम व निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा,गुणवत्तापूर्ण व रोजगारपरक शिक्षा,बिजली,बैंकिंग सेवा आदि।
मित्रों,इसके साथ ही हमें अपनी ट्रेनों की रफ्तार को न्यूनतम किराये के साथ इतनी तेज करना होगा कि लोग 500-700 किमी दूर जाकर भी काम करके शाम को घर वापस आ जाएँ।
मित्रों,आरक्षण के चलते हम गुणवत्ता से समझौता करते हैं। मेधावी छात्र घर बैठे रह जाते हैं और औसत लोगों को नौकरी मिल जाती है। हमें इस स्थिति को बदलना होगा। आरक्षण को 50 प्रतिशत से कम करके 10-15 प्रतिशत करना होगा। इसके साथ ही आरक्षण के आधार को भी जातीय से बदलकर आर्थिक करना होगा क्योंकि गरीबी हर जाति,हर तबके और हर मजहब में है।
मित्रों,अंत में हमें अपनी शिक्षा-प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन करना होगा। मैकाले की शिक्षा-प्रणाली ऐसी है कि वो सिर्फ किरानी पैदा करती है कुशल श्रमिक या उद्यमी नहीं। हमें इस स्थिति को पूरी तरह से पलटना होगा और कुशल श्रमिकों और उद्यमियों का निर्माण करना होगा। जो लोग कला या विज्ञान या अन्य कोई अव्यावसायिक कोर्स लेते हैं उनको भी एक-न-एक ऐसा विषय लेना होगा जिसके बल पर वे अपनी रोजी-रोटी का इंतजाम कर सकें। साथ ही पाठ्यक्रम को वैश्विक-बाजार की भविष्यगत जरुरतों के मुताबिक समय-समय पर बदलना पड़ेगा। इसके साथ ही युवाओं को नैतिक-शिक्षा भी देनी होगी क्योंकि आज दुनिया में आदमियों की आबादी तो खूब बढ़ी है लेकिन उसी अनुपात में उनके भीतर आदमियत की कमी भी हो गई है।
मित्रों,मेरे हिसाब से अगर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इतने कदम उठा लें तो भारत अगले 20-पच्चीस सालों में जरूर दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन जाएगा। हमारे पास प्राकृतिक संसाधन हैं,मानव संसाधन हैं बस जरुरत है सही व्यवस्था कायम करने की और उनको सही दिशा देने की।
हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित
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ब्रजकिशोर सिंह
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15.7.15
Statement Condemning CBI Raid on Teesta Setalvad’s Residence and Office
Dear All,
The raid on Teesta Setalvad and her associates on the basis of flimsy and non-existent charges, is a further criminal act on Human Rights Defenders which is motivated and a wanton misuse of power. Instead of lauding Teesta and her associates for exposing the communal killings in Gujarat 2002 when Narendra Modi was the Chief Minister, the NDA has decided to make Teesta a scapegoat.
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यशवंत सिंह yashwant singh
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14.7.15
अमिताभ ठाकुर मामले में रेप की पुष्टि नहीं, लेकिन जान का खतरा बरकरार
जी हां, लखनउ के गोमतीनगर थाने में आईपीएस अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर के खिलाफ दर्ज रेप के मामले में रेप की पुष्टि तो नहीं हुई, लेकिन निलम्बन के बाद उनकी जान का खतरा बढ़ गया है। सूत्रों का कहना है कि ठाकुर दंपत्ति को किनारे लगाने के लिए ह रवह हथकंडे अपनाएं जा सकते है जिस तरह मध्य प्रदेश के व्यापम मामले में हो रहा है। राजनीतिक-आपराधिक व बाहुबलि जनप्रतिनिधियों के काले कारनामों का भांडा न फूटे इसके लिए गुंडाराज एंड कंपनी किसी भी सीमा तक जा सकती है। ऐसे में समय रहते सीबीआई जांच और ठाकुर दंपत्ति को सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त नहीं किए गए तो किसी बड़ी अनहोनी से भी इंकार नहीं किया जा सकता
फिरहाल, सीनियर आईपीएस अमिताभ ठाकुर एवं उनकी पत्नी एवं एडवोकेट नूतन ठाकुर के उपर फर्जी तरीके से दर्ज मामले में मेडिकल परीक्षण में रेप की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन ठाकुर दंपत्ति को पंगु बनाने व धौंस बना रहे, इसके लिए उन्हें निलंबित जरुर कर दिया गया है। सूत्रों की मानें तो ठाकुर दंपत्ति पर हत्या जैसे संगीन वारदात के खतरे के बादल मंडरा रहे है। क्योंकि सत्ताघारी लोगों ने मामले को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। सरकार रहे या जाय, जनता का समर्थन मिले या ना मिले, लेकिन वह अपने बाहुबलि विधायकों, मंत्रियों द्वारा किए जा रहे हर तरह के कुकर्मो, अवैध खनन, बलातकार आदि जैसे काले कारनामों की पर्दा नहीं उठने देना चाहते।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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'हिन्दी चेतना' का जुलाई-सितम्बर 2015 अंक
कैनेडा से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका 'हिन्दीचेतना' का जुलाई-सितम्बर 2015 अंक (वर्ष : 17, अंक : 67) अब इंटरनेट परउपलब्ध है। सम्पादकीय, उद्गार, साक्षात्कार: प्रताप सहगल: प्रेम जनमेजय। कहानियाँ: प्रश्न-कुंडली: गीताश्री, काँच की दीवार: नीलम मलकानिया, केस नम्बर पाँच सौ सोलह: माधव नागदा, अग्निपरीक्षा: प्रो. शाहिदा शाहीन। व्यंग्य: जब मैं अमरीका गया, सुधाकर अदीब। लघुकथा: शादी का शगुन: डॉ.राम निवास मानव , बीमार आदमी: रणजीत टाडा, ख़ास आप सबके लिए!: अनिता ललित। निबन्ध: डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल। लेख: अर्चना पैन्यूली।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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13.7.15
व्यापक... व्यापमं....!!
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यशवंत सिंह yashwant singh
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आतंक पर लगाम बिना बातचीत का औचित्य नहीं
बीते हफ्ते शुक्रवार को रूस के उफा में हिंदुस्थानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपने समकक्ष पाक प्रधान नवाज़ शरीफ से हुई मुलाक़ात के कई गहरे अर्थ निकाले जा सकते हैं। हालांकि शुक्रवार को दोनों की मुलाक़ात के बाद जारी साझा बयान में कश्मीर मुद्दे का जिक्र नहीं था किन्तु एक दिन बाद ही पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने दावा किया कि प्रधानमंत्रीद्वय मोदी और नवाज कश्मीर मुद्दे पर बैक चैनल डिप्लोमेसी अर्थात पर्दे के पीछे चलने वाली बातचीत, जिसका औपचारिक एलान नहीं होता; से बात करने पर राजी हो चुके हैं। उनके इस बयान ने इस बात की आशंका जता दी है कि बिना कश्मीर मुद्दे के सुलझे, दोनों देशों के बीच किसी भी स्तर की वार्ता बेमानी है।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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यूपी में कब थमेगी दहशत की राजनीति
सुरेश गांधी
जी हां, सत्ता के धौंस की आड़ में यूपी में जो कुछ हो रहा है वह ब्रतानिया हुकूतम को भी मात दे गया है। फर्क इतना है पहले सच लिखने, सच बोलने, जुर्म सहने के बजाय डटकर विरोध करने पर सरेराह गोली मार दी जाती थी, अब जिंदा जला दिया जाता है या फर्जी मुकदमा दर्ज कर शारीरिक व मानसिक शोषण किया जाता है। सत्ता के शीर्ष नेतृत्व की धमकी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज करने के बजाय उल्टे पीड़ित पर ही फर्जी मुकदमा दर्ज हो जाता है। मतलब साफ है यूपी में कब तक धौंस और दहशत के सहारे सत्ता चलती रहेगी। कब तक काले कारनामों की खुलासा करने पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर घर-गृहस्थी लूटवाना या जिंदा जलवाना या फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर प्रताड़ित कराते रहेंगे। अगर यही सरकार का मकसद है, इसे गुंडाराज नही ंतो और क्या कहेंगे?
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यशवंत सिंह yashwant singh
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सरकारी उपेक्षा के शिकार जम्मू-कश्मीर के बच्चे... यूजीसी और एआईसीटीई की लालफीताशाही का शिकार जम्मू-कश्मीर के गरीब बच्चे
पिछले
दिनों संसद में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू –कश्मीर के बच्चों
की विशेष स्कॉलरशिप योजना पर उदासीनता बरतने के लिए केंद्र सरकार की खिचाई
करते हुए इससे सम्बंधित सवाल उठाया था । महबूबा मुफ्ती के अलावा जम्मू
–कश्मीर के सांसदों ने भी इस मुद्दे को सदन में कई बार उठाया लेकिन केंद्र
सरकार ने शिक्षा से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं
की है न कोई संजीदगी दिखाई है । जबकि केंद्र और राज्य दोनों जगह ही एनडीए
की सरकार है ।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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12.7.15
पत्रकारिता विश्वविद्यालय में केरोलीना यूनिवर्सिटी, अमेरिका के छात्रों का शैक्षणिक भ्रमण
भोपाल । भोपाल आए नार्थ और वेस्ट केरोलीना यूनिवर्सिटी के छात्र मंगलवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के छात्रों से रुबरु हुए। केरोलीना यूनिवर्सिटी से आए 16 विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसरों एवं शैक्षणिक विभागों का भ्रमण किया साथ ही वे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से भी मिले। इस दौरान छात्रों ने अमेरिकी संस्कृति, शिक्षा और समाज के बारे में बताया, वहीं पत्रकारिता विश्वविद्यालय के छात्रों ने भारतीय सांस्कृति एवं देश-विदेश के मुददों पर चर्चा की।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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जान बचाने की फरियाद में भटकता मीडियकर्मी (पत्रकार)
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यशवंत सिंह yashwant singh
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फर्जीवाडे के सहारे उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति तक का सफर
मध्यमा से लेकर स्नात्कोत्तर तक की अंकतालिकाओं व प्रमाण पत्रों में संदेह... उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति प्रो महावीर अग्रवाल के शैक्षणिक अभिलेखों पर छाया कुहांसा सूचना अधिकार अधिनियम से प्राप्त अभिलेखों से छंटाता दिख रहा है। हालांकि राजभवन के कडे रुख के बाद ही अपीलकर्ता को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति के सभी शैक्षणिक दस्तावेजों तो मिल गये हैं लेकिन उत्तराखंड क्रांतिदल , संस्कृत प्रशिक्षित बेरोजगार संघ व आरटीआई कार्यकर्ताओं की राज्यपाल से की गई शिकायत पर फिलवक्त तक कोई कार्रवाई अम्ल में नहीं हो पाई है। इसको लेकर जल्दी ही आंदोलन की रणनीति को अंजाम दिया जा सकता है। पूरे प्रकरण पर प्रमुख राजनीतिक दलों की खामोशी इन दलों की नीयत पर सवाल खडा कर रही है। संस्कृत शिक्षा मंत्री ने जरूर कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन उनकी कार्यशैली को देखते हुए इसकी उम्मीद कम ही है।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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धमकियों से परेशान संपादक ने सुरक्षा की लगाई गुहार
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यशवंत सिंह yashwant singh
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रिजल्ट आने के पहले ही उसे पता था कि सेलेक्शन हो जाएगा
Rajya Sabha tv ka result abhi out hua hain...direct walking interview ke liye nov 2014 main interview hue the..jisme senior producer or producer shamil the...phir interview canceled karke feb 2015 main phir parliment house main interview liye gaye...jiske result ab ghoshit hue hain...
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यशवंत सिंह yashwant singh
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पत्रकारों ने राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा
सीतापुर। समाज में जिस गति से पत्रकार उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं, वह चिन्ता जनक है। अभी शाहजहांपुर के पत्रकार जोगेन्द्र सिंह की चिता की आग भी ठण्डी नहीं पड़ी थी कि बाराबंकी में एक पत्रकार की मां को पुलिस कर्मियों ने थाने में जला दिया। जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गयी। पत्रकारों के साथ हो रही घटनाएं निन्दनीय हैं।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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नभाटा मुम्बई छाप रहा है भ्रामक ख़बरें जिनका सत्यता से दूर दूर तक कोई सरोकार नही है
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यशवंत सिंह yashwant singh
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क्या दिल्ली पूर्ण राज्य बनेगी?
देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग तेज़ हो गयी है..दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों इस प्रस्ताव की कड़ी निंदा कर रहें हैं..दोनों का कहना है कि इस तरह जनमत संग्रह कराने का प्रावधान संविधान में नहीं है जिस कारण जनमत संग्रह एक अवैध और असंवैधानिक तरीका है..
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यशवंत सिंह yashwant singh
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कानपुर प्रेस क्लब में चल रहे विवाद में डिप्टी रजिस्ट्रार महामंत्री ने माँगा आख्या देने के लिये और समय
कानपुर। एस.आर.न्यूज़ द्वारा की गयी कानपुर प्रेस क्लब में हुए फर्ज़ीवाड़े की शिकायत पर डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म, सोसायटी एवं चिट्स ने वर्तमान महामंत्री अवनीश दीक्षित की नोटिस जारी कर शिकायती पत्र में लिखित बिंदुओं पर अपना पक्ष साक्ष्यों सहित प्रस्तुत करने के लिए आज 8 जुलाई 2015 दोपहर 2 बजे तक का समय दिया गया था।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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सुलक्षणा पंडित (12 जुलाई जन्म दिन पर विशेष) : एक खूबसूरत / नेक दिल अभिनेत्री की दर्दनाक दास्तान
नारी प्रधान फिल्में बनाने वाले ‘जे.ओम.प्रकाश‘ की फिल्म ‘अपनापन‘ (1977) से एक खूबसूरत व दिलकश आवाज की मल्लिका ‘सुलक्षणा पंडित‘ चर्चा में आई। ‘आदमी मुसाफिर है आता है जाता है‘ गीत वाली यह फिल्म सुपरहिट रही। इस फिल्म में आदर्श किरदार निभाने वाली सुलक्षणा को असली जिन्दगी में आदर्शवाद निभाना भारी पड़ा। एक दूसरी फिल्म ‘उलझन‘ में काम करते हुये उसे अपने सह सितारे संजीव कुमार के साथ प्यार हो गया। यह जानते हुये कि संजीव हेमा मालिनी से ठुकराये जाने के बाद भी उसके दीवाने है। सुलक्षणा यह सोचकर इंतजार करती रही कि कभी संजीव हेमा द्वारा जख्मी हुये दिल पर मरहम लगवाने उसके पास आयेंगे। एक समय आया जब संजीव को हार्ट अटैक हुआ। बकौल सुलक्षणा जव संजीव के दिल की बाई पास सर्जरी के बाद वह दोनों दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर गये तो सुलक्षणा ने उस हालत में भी संजीव से शादी का प्रस्ताव रखा। परन्तु संजीव कुमार ने यह कहते हुये साफ मना कर दिया कि वह अपने पहले प्यार हेमा मालिनी को कभी नहीं भूल सकते। आखिर संजीव हेमा से टूटे दिल के साथ 6 नवम्बर 1985 को दुनिया से विदा हो गये। सुलक्षणा के अवसाद (डिप्रेशन) में जाने के लिये यह काफी था।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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मानवता को आईएस से बचाने को समय रहते एकजुट हो दुनिया
मित्रों,आज भी इस्लामिक चरमपंथी संगठन आईएस एक के बाद एक देश पर कब्जा करता जा रहा है। रोजाना सैंकड़ों लोगों के सिर कलम कर रहा है। यजीदी महिलाओं व पुरूषों का बर्बरतापूर्ण सामुहिक बलात्कार किया जा रहा है,सेक्स गुलाम बनाया जा रहा है,यौनेच्छा पूरी करने से मना करने पर उनके बच्चों को मारा-पीटा जा रहा है,उनकी जांघों के बीच गरम पानी डाल दिया जा रहा है और अमेरिका और पूरी दुनिया मूकदर्शक बने हुए हैं क्योंकि सऊदी अरब आईएस का समर्थन कर रहा है।
मित्रों,हमारे शास्त्रों में राक्षसों के बारे में काफी कुछ लिखा गया है लेकिन यह आईएस तो हिटलर और राक्षसों से भी कई कदम आगे जा चुका है। आज आईएस से न सिर्फ विश्वशांति को खतरा है बल्कि मानवता व मानवीय मूल्यों को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। अतिशय पाशविकता व क्रूरता कभी भी मानवीय मूल्य नहीं हो सकते बल्कि दया,करूणा,संयम और क्षमा ही मानवीय मूल्य हो सकते हैं। ऐसे में अगर दुनिया ने एकजुट होकर समय रहते आईएस पर लगाम नहीं लगाया तो वह दिन दूर नहीं जब पूरी दुनिया पर राक्षसी संस्कृति के छा जाने का खतरा मंडराने लगेगा और तब तक काफी देर हो चुकी होगी ठीक उसी तरह जिस तरह से 3 सितंबर,1939 तक जर्मनी के खिलाफ फ्रांस और इंग्लैंड द्वारा युद्ध की घोषणा करने तक हो गई थी।
मित्रों,अगर ऐसा होता है वह निश्चित रूप से नितांत दुर्भाग्यपूर्ण होगा क्योंकि आज दुनिया तृतीय विश्वयुद्ध को झेल सकने की स्थिति में नहीं है। विश्व-जनसंख्या का एक बड़ा भाग आज भी गरीबी से जूझ रहा है। साथ ही आज दुनिया के देशों के पास सामुहिक विनाश के अस्त्र-शस्त्रों की संख्या 1939 के मुकाबले कहीं ज्यादा है। इतनी ज्यादा कि दुनिया की पूरी मानव-आबादी को तीन-तीन बार पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।
हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित
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ब्रजकिशोर सिंह
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11.7.15
अब हिंदी में पढ़ पाएंगे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय
उदयपुर। कानून एवं न्याय मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक मंगलवार को शहर के निजी होटल में हुई। इसकी अध्यक्षता कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय किए गए। बैठक में सामने आया कि मंत्रालय की विशेष पत्रिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को हिंदी में रूपातंरित कर प्रकाशित किया जाता है। हाईकोर्ट आदेशों की जानकारी के लिए भी दो पत्रिकाएं प्रकाशित की जाती हैं।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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अटल बिहारी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध सब एक हों
अटल बिहारी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध सब एक हों और इस मैटर को सभी पढ़े और फॉर्वड भी करें ताकि इस भ्रष्ट प्रोफेसर का सच सबके सामने आए-
आदरणीय महोदय,
इस पर ध्यान दें
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में चल रही उठापटक का स्वार्थी तत्व किस तरह फायदा उठाते हैं इसका जीता-जागता उदाहरण है अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य विद्यालय। विवि में जो भी उठापटक चलती रहती है उसका फायदा न सिर्फ यहां के प्रोफेसर उठा रहे हैं वरन अपने लगे-बंधे छात्रों को रैंक दिलवाकर अन्य पढऩे वाले योग्य छात्र और छात्राओं का मनोबल भी तोड़ रहे हैं। कुछ प्रोफेसर तो खुलेआम अपनी पहुंच होने का दम भरते है और कहते हैं जो चाहो कर लो।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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हिंदी समय में इस हफ्ते क्या है खास...
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यशवंत सिंह yashwant singh
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मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिया मनोरंजन कर को रिव्यू करने का आश्वासन
नई दिल्ली । दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को केबल आपरेटर्स वेलफेयर फेडरेशन (काफ) के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि वे मनोरंजन कर को रिव्यू करेगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की जनता के हितों और काफ के सदस्यों की किसी भी हालत में अनदेखी नहीं होगी। दिल्ली सचिवालय में आयोजित इस बैठक में आप के दिल्ली के संयोजक नेता दिलीप पांडेय के अलावा काफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरजीत सिंह, कनवीनर रमेश जादू, महासचिव कुलदीप रावल, राजकुमार थापा, रमेश चन्द्र शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, लोकेश व प्रमोद महेश्वरी व अन्य सदस्य मौजूद थे।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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संबरंग समारोह 2015: भोजपुरी पंचायत का तृतीय वार्षिकोत्सव मुंबई के विलेपार्ले में
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यशवंत सिंह yashwant singh
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10.7.15
बिहार में सरकार बनी तो शराब बैन करेंगे नीतीश कुमार,फिर बिहार में किसकी सरकार है?
हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,महिलाओं की ओर से की जा रही मांग के आगे झुकते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वादा किया कि यदि अगली बार वे सत्ता में आए तो शराब पर पाबंदी लगा देंगे। समाज कल्याण विभाग के एक ग्राम्य वार्ता कार्यक्रम के दौरान नीतीश के संबोधन के दौरान कुछ महिलाओं ने यह मांग की और फिर मुख्यमंत्री ने शराब पर पाबंदी लगाने का वादा किया।
मित्रों,नीतीश ने कहा, ‘‘जब मैं अगली बार सरकार बनाऊंगा तो शराब पर पाबंदी लगाई जाएगी।’’ इस वादे को सुनकर महिलाएं खुशी से झूम उठीं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण को लेकर अपनी सरकार की कोशिशें गिनाईं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास स्वयं-सहायता समूह (एसएचजी) से डेढ़ करोड़ महिलाओं को जोड़ने का है।
मित्रों, सवाल यह उठता है कि इस समय बिहार में सरकार किसकी है? क्या नीतीश कुमार जी अभी बिहार के नहीं नेपाल के मुख्यमंत्री हैं? अगर उनको उनकी सरकार की शराब नीति से बिहार को हुई क्षति से इतनी ही शर्मिंदगी हो रही है तो उनको चाहिए कि वे कल से ही बिहार में पूर्ण शराबबंदी की घोषणा कर दें और जिन लोगों को शराब दुकानों की बंदोबस्ती की गई है उनको हर्जाना देकर चलता करें।
मित्रों,अभी पूर्ण शराबबंदी लागू करने में नीतीशजी को कौन-सी परेशानी हो रही है? अभी तो राज्य में किसी तरह की आचार-संहिता भी लागू नहीं है फिर नीतीश जी ऐसी बरगलानेवाली बातें क्यों कर रहे हैं? अगर वे अभी सत्ता में होते हुए ऐसा नहीं कर सकते या नहीं कर रहे तो क्या गारंटी है कि वे अगली बार जीतने के बाद ऐसा करेंगे ही? हद हो गई कि जिस व्यक्ति ने राजस्व के चलते पूरे बिहार में किराने की दुकानों से भी कहीं ज्यादा संख्या में शराब की दुकानें खुलवा दीं और पूरे बिहार को शराबी बना दिया आज कह रहा है कि मुझे एक बार और जितवाओ तब शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दूंगा? ये तो वही बात हुई कि कोई बलात्कारी नेता कहे कि मुझे एक बार और जितवाओ तो मैं लड़कियों को बहन मानने लगूंगा।
हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित
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ब्रजकिशोर सिंह
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Labels: फिर बिहार में किसकी सरकार है?, सरकार बनी तो शराब बैन करेंगे नीतीश कुमार
9.7.15
जब संता ने टाइम्स आफ इंडिया के चेयरमैन विनीत जैन को फोन किया...
आजकल सोशल मीडिया पर यह चुटकुला खूब पढ़ा जा रहा है...
Santa calls up TOI Chairman Vineet Jain....
Santa: "I want to be the news anchor in place of Arnab Goswami on TimesNow"
Vineet Jain : "Are you an idiot??"
Santa: "Why?? is it Compulsory???"
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यशवंत सिंह yashwant singh
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Poetry on Vyapam scam and Journalist Akshay death by Atul kushwah
मध्य प्रदेश में व्यापमं घोटाले पर स्टिंग करने गए आज तक चैनल के पत्रकार अक्षय सिंह की मौत पर, पत्रकारिता पर और मध्य प्रदेश सरकार से सुलगते हुए सवाल करती वरिष्ठ पत्रकार और कवि अतुल कुशवाह की ये कविता...।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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7.7.15
कैब में बैठी महिला के सामने मस्टरबेट करता रहा ड्राईवर
दिलवालों
की दिल्ली न जाने कितनी बार महिलाओं के प्रति यौन हिंसा के मामलों से
शर्मसार हुई है. राष्ट्रीय राजधानी के हालात यह हैं कि यहाँ महिलाओं को आये
दिन यौन हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. इसी सिलसिले में एक और
शर्मनाक मामला जुड़ गया है.
मामला बीते हफ्ते का है, दिल्ली से सटे
फरीदाबाद की रहने वाली एक महिला ने दिल्ली से घर जाने के लिए रात में कैब
हायर की. उसने यह कैब ओला कैब्स की टैक्सी फॉर श्योर से यह कैब हायर की थी.
महिला मुंबई की एक डिजिटल और सोशल मीडिया कंसल्टेंसी फर्म में बतौर
क्रिएटिव स्ट्रैटिजिस्ट के तौर पर काम करती है. महिला ने रास्ते में
ड्राइवर से तीन बार म्यूजिक की आवाज कम करने के लिए कहा ताकि वह फोन पर बात
कर सके.
पूरी खबर पढने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएँ
कैब में बैठी महिला के सामने मस्टरबेट करता रहा ड्राईवर
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Sharapova
#HappyBirthdayDada
Bavalan Pathmanathan
#Ifgounderintwitter
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अनुराग तिवारी
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Budwig Protocol check-mates Cancer
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Shri Sitaram Rasoi
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Rs.200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement Scam of Bihar : Supreme court of India will hear Shobhana Bhartia's SLP No.1603 of 2013 on July, 14,2015 next
By ShriKrishna Prasad, advocate, Munger, Bihar
New Delhi : In the globally talked Rs.200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement Scandal, the Supreme Court of India on June 24,2015, has notified through its website that it is likely that the Supreme Court of India (New Delhi) will list ''the Special Leave Petition(Criminal) No-1603 of 2013 for hearing on July 14, 2015 next. "It is Smt. Shobhana Bhartia, w/o Shri Shyam Sunder Bhartia, a resident of 19, Friends Colony(West), New Delhi -110065, who has filed the S.L.P(Criminal) No-1603 of 2013 in the Supreme Court of India,praying the supreme court to quash the Munger(Bihar) Kotwali P.S case No.445 of 2011,dated 18-11-2011).
It is important to note that Smt. Shobhana Bharatia is the Chairperson of Mess. Hindustan Media Ventures Limited(New Delhi).Smt.Shobhana Bhartia's company prints, publishes and distributes the popular Hindi daily 'Dainik Hindustan'. What is in the Munger(Bihar) Kotwali P.S CaseNo.445 /20111(dated 18 Nov.2011) ? In the F.I.R No.445/2011, dt 18 Nov.2011,one social worker, Mantoo Sharma, a resident of Puraniganj locality of the Munger town has accused (1) the Principal accused Shobhana Bhartia(Chairperson, Hindustan Publication Group-Mess. Hindustan Media Ventres Limited, Head Office- 18-20, Kasturba Gandhi Marg, New Delhi, (2) Shashi Shekhar(Chief Editor, Dainik Hindustan, New Delhi, (3)Aakku Srivastawa(Acting Editor, Dainik Hindustan, Patna Edition),(4) Binod Bandhu(Regional Editor, Dainik Hindustan,Bhagalpur edititon,Bhagalpur) and (5) Amit Chopra, Printer & Publisher , Mess. Hindustan Media Ventures Limited,Lower Nathnagar Road, Parbatti,Bhagalpur of violating different provisions of the Press & Registration of Books Act, 1867 and the IPC,printing and publishing the Bhagalpur and Munger editions of Dainik Hindustan (A Hindi daily) using the wrong registration No. and obtaining the govt. advertisements of the Union and the State governments upto Rs. 200 crore approximately in the advertisement head by presenting the forged documents of registration before the Bihar and the Union governments.
The Munger(Bihar)Kotwali police have lodged a criminal case(F.I.R No.445/2011) u/s 8(B),14 &15 of the Press and Registration of Books Act, 1867 and sections 420,471 & 476 of the Indian Penal Code against (1) Shobhana Bhartia,(2) Shashi Shekhar,(3) Aakku Srivastawa,(4) Binod Bandhu and (5) Amit Chopra on Nov, 18,2011 .All five are named accused persons in this criminal case of forgery and cheatings.
The present status of the police investigation in this case: The Deputy Police Superintendent(Munger) ,A.K.Panchlar and the Police Superintendent(Munger) ,P.Kannan have submitted the '' Supervision Report No.01 '' and '' the Supervision Report No.02'' in this criminal case.In the Supervision Report No.01 & 02,the Dy.S.P and the S.P have concluded the following facts:
"On the basis of facts, coming in course of investigation and supervisions , and available documents, the Kotwali P.S case No.445/2011 is prima-facie true."
Patna High Court Order: It is worth mentioning that the Hon'ble Justice, Smt. Anjana Prakash , in the Criminal Miscellaneous No. 2951 of 2012( Smt. Shobhana Bhartia ,Petitioner Vs (1) State of Bihar,(2) Mantoo Sharma,Munger & others) on Dec, 17, 2012, has passed an order and has directed the Munger Investigating Police officer to expedite the investigation and conclude the same within a period of three months from the date of receipt of this order.(EOM)
By ShriKrishna Prasad
Munger
Bihar
M-09470400813
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यशवंत सिंह yashwant singh
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(बीपी गौतम की कलम से) व्यापमं नामक माहमारी से संघ के केएस सुदर्शन, सुरेश सोनी, सुधीर शर्मा, सीएम शिवराज सिंह चौहान और राज्यपाल राम नरेश यादव तक का नाम जुड़ चुका है!
भारतीय राजनीति का घोटाले शर्मनाक सच बनते जा रहे हैं। घोटाला सार्वजनिक होने पर अब कोई स्तब्ध नहीं होता। घोटाला करने वाले नेताओं और अफसरों की छवि पर भी कोई बड़ा विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि अब आम धारणा बन गई है कि नेता और अफसर ईमानदार होते ही नहीं हैं। अब कोई ईमानदार दिखता है, तो लोग स्तब्ध रह जाते हैं। हालात भयावह हो चले हैं, इसके लिए कोई एक व्यक्ति, कोई एक दल, या सिर्फ सरकार ही जिम्मेदार नहीं ठहराई जा सकती। सर्वसमाज की सोच में ही परिवर्तन आया है।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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4.7.15
संपूर्ण विनाश हो,रक्तरंजित बिहार हो,फिर से नीतीश कुमार हो
मित्रों,अब हम चलते हैं फ्लैश बैक में। बात वर्ष 2007 की है। तब हम हिंदुस्तान के पटना कार्यालय में कॉपी एडिटर हुआ करते थे। एक दिन वहाँ चर्चा छिड़ गई कि बिहार की कानून-व्यवस्था में सुधार आने के कारण क्या हैं। तब दिलीप भैया ने कहा था कि चूँकि बिहार सरकार ने सारे बदमाशों को शिक्षामित्र बना दिया है इसलिए अपराध कम हो गया है। उत्तर सुनते ही मैं काँप गया था। इस आशंका से कि बदमाशों की अगली पीढ़ी जब आएगी तब कानून-व्यवस्था का क्या होगा। बदमाश शिक्षक शरीफ बच्चों का निर्माण तो करेंगे नहीं। नीतीश राज में स्कूली शिक्षकों की बहाली में किस कदर मनमानी और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा इसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी कल-परसों ही हाईकोर्ट के भय से 1400 ऐसे शिक्षामित्रों ने इस्तीफा दे दिया है जिनकी डिग्रियाँ फर्जी थीं।
मित्रों,आज के बिहार के कानून-व्यवस्था की स्थिति कमोबेश नीतीश कुमार की उसी गलती का परिणाम है जिसकी ओर तब दिलीप भैया ने ईशारा किया था। सिर्फ राजधानी पटना की ही बात करें तो कल पूर्व मंत्री एजाजुल हक के फ्लैट में घुसकर उनको चाकू मार दिया गया, नीतीश सरकार की नाक के नीचे जीपीओ गोलंबर के पास कल रात गोविंद ढाबा के मालिक गोविंद से 50 हजार रुपये छीन लिए गए, कपड़ा व्यवसायी से नक्सली संगठन के नाम पर 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई और एयरपोर्ट थानान्तर्गत किसी जज साहब की धर्मपत्नी से चेन छीन ली गई। ये तो हुई बिहार के कानून-व्यवस्था की खबर अब हम बात करेंगे बिहार पुलिस पर बिहार की जनता के विश्वास की। आज आप बिना घूस दिए या बिना कोर्ट के आदेश के बिहार के थानों में एफआईआर भी दर्ज नहीं करवा सकते। बिहारवासियों का पुलिस पर विश्वास इतना कम हो गया है कि लोगों ने अपराधियों को पकड़ने के बाद पुलिस के हवाले करना ही बंद कर दिया है और ऑन द स्पॉट अपराधियों का निपटारा कर दे रहे हैं। आज एक बार फिर से बिहार में जंगलराज कायम हो चुका है और लोग बिहार में निवेश करने से डरने लगे हैं।
मित्रों,जब नीतीश कुमार ने बिहार का राजपाट संभाला था तब नक्सलवाद सिर्फ गंगा के दक्षिण में ही सक्रिय था। आज नक्सलवाद उत्तर बिहार के अधिकांश क्षेत्रों में भी अपने पाँव पसार चुका है। हमारा वैशाली जिला जो नक्सलवाद के मायने भी नहीं जानता था का बहुत बड़ा इलाका इस समय नक्सलवाद की चपेट में आ चुका है। जिले के कई प्रखंडों में बिना लेवी दिए कोई ठेकेदार न तो सड़क ही बनवा सकता है और न ही कोई उद्योगपति फैक्ट्री ही डाल सकता है। क्या यही है नीतीश कुमार का सुशासन? हमारे हाजीपुर शहर में ही लूट रोजाना की घटना बन गई है।
मित्रों,बिहार की आम जनता का मानना है कि लालू-राबड़ी राज के मुकाबले राज्य में घूसखोरी घटी नहीं है बल्कि बढ़ी है। पहले लालू-राबड़ी राज में खद्दरधारी लोग बिना पैसे के भी काम करवा देते थे लेकिन आज बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता। पहले 250 रुपये में जमीन की दाखिल खारिज हो जाती थी आज 5 हजार से कम में नहीं होती। बिजली विभाग बिजली कम देती है अनर्गल बिलिंग के झटके ज्यादा देती है। नीतीश राज में बने पुल 5 साल में ही गिर जा रहे हैं। क्यों? इतना ही नहीं नीतीश जी ने शासन में आने के बाद कहा था कि ठेकेदारों को सड़कों के निर्माण के समय गारंटी देनी पड़ेगी कि सड़कें कितने सालों तक चलेगी। अब नीतीश सरकार जनता पर यह जिम्मेदारी छोड़ रही है कि कहीं पर सड़क टूट जाती है तो टॉल फ्री नंबर पर फोन करे। सरकार उसके बाद ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट में डाल देगी और इस प्रकार भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा। सरकारी अस्पतालों की स्थिति में नीतीश राज की शुरुआत में जो सुधार आया था अब फिर से स्थिति बिगड़ चुकी है। कहीं दवा घोटाला है तो कहीं यंत्र खरीद घोटाला। जहाँ नजर डालिए बस घोटाला ही घोटाला। सरकार किसानों से धान खरीदती है तो वहाँ भी घोटाला हो जाता है। यानि जहाँ भी कोई काम राज्य सरकार अपने हाथ में लेती है वहीं पर एक घोटाला हो जाता है और इस तरह से राज्य में सुशासन का राज स्थापित किया जा रहा है।
मित्रों,जहाँ तक शिक्षा का सवाल है तो मैंने शुरू में ही अर्ज किया कि बिहार के स्कूलों में नीतीश कुमार ने अयोग्य और असामाजिक तत्त्वों को शिक्षक बना दिया इसलिए प्राथमिक शिक्षा का जो हाल होना चाहिए था वही हो गया है। किसी भी सरकारी स्कूल में यूँ तो पहले से ही पढ़ाई न के बराबर हो रही थी अब दूरदर्शी नीतीश जी ने उपस्थिति की अनिवार्यता को समाप्त करके हालत को और भी चौपट करने की दिशा में महान कदम उठा दिया है। अब जबकि छात्र स्कूलों में आएंगे ही नहीं तो पठन-पाठन का माहौल कहाँ से बनेगा? यही कारण है कि जब बिहार में मैट्रिक या इंटर या बीए की परीक्षा आयोजित होती है तो बिहार को शर्मशार होना पड़ता है। पिछले 10 सालों में प्राइमरी स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक शिक्षा के माहौल को षड्यंत्रपूर्वक नीतीश सरकार द्वारा समाप्त कर दिया है। बिहार सरकार प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन करती है और बहाली कर दी जाती है कभी मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के परिजनों की तो कभी स्वास्थ्य मंत्री की सुपुत्री की।
मित्रों,नीतीश कुमार जी ने कल-परसों ही एक बार फिर से आरक्षण और अपने भेजा का बेजा इस्तेमाल किया है। नीतीश जी ने ठेकों में आरक्षण लागू कर दिया है। इससे पहले भी मोहम्मद बिन तुगलक के 21वीं शताब्दी अवतार श्रीमान ने पंचायती राज में विचित्र आरक्षण व्यवस्था लागू की थी। आप सभी जानते हैं कि लोकतंत्र बहुमत से चलता है लेकिन बिहार की पंचायती राज व्यवस्था में लोकतंत्र तुगलकी आरक्षण से चलता है। किसी पंचायत में भले ही सवर्णों या यादवों की आबादी 99 प्रतिशत रहे लेकिन गाँव का मुखिया बनेगा कोई दलित या महादलित ही भले ही उस पंचायत में उनका एक ही परिवार क्यों न रहता हो।
मित्रों,तो ये है संक्षेप में नीतीश राज में बिहार की स्थिति। अब आप ही बताईए कि बिहार में बहार हो,नीतीश कुमार हो नारा लगा देने मात्र से कैसे बिहार में बहार आ सकती है? ठीक इसी तरह से यूपी सरकार कहती है कि यूपी में दम है क्योकि यूपी में जुर्म कम है। क्या यूपी सरकार के ऐसा कह देने या ऐसे नारे लगा देने भर से यूपी में जुर्म कम हो गया या हो जाएगा। वास्तविकता तो यह है कि यह नारा बिहार की स्थिति पर फिट तो नहीं ही हो रही है बल्कि पूरी तरह से विरोधाभासी है। नारा तो कुछ इस तह से होना चाहिए कि संपूर्ण विनाश हो,रक्तरंजित बिहार हो,फिर से नीतीश कुमार हों।
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ब्रजकिशोर सिंह
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Labels: फिर से नीतीश कुमार हो, रक्तरंजित बिहार हो, संपूर्ण विनाश हो
3.7.15
आडवाणी जी यूपी में तो कई साल से आपातकाल लागू है
हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,अपने भीष्मपितामह लालकृष्ण आडवाणी जब
भी कुछ बोलते हैं तो उसके अनगिनत अर्थ लगाए जाते हैं। श्री आडवाणी ने कहा
कि आपातकाल लगाने वाली प्रवृत्तियाँ आज भी हमारे देश में मौजूद हैं और
लोगों ने इसे सीधे-सीधे केंद्र की मोदी सरकार से जोड़ दिया जबकि अभी तक
मोदी सरकार ने ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया है जिससे अभिव्यक्ति की
स्वतंत्रता को खतरा पैदा होता हो। अगरचे भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर
प्रदेश में जरूर वर्ष 2012 से ही यानि समाजवादी सरकार के आने के बाद से ही
अघोषित आपातकाल लागू है।मित्रों,अगर आप यूपी में रहते हैं तो आप सुपर चीफ मिनिस्टर आजम खान के खिलाफ लिखने की सोंच भी नहीं सकते हैं। पता नहीं कब आपको पुलिस घर से उठा ले। अभी पिछले दिनों एक पत्रकार जगेंद्र सिंह को तो यूपी सरकार के कद्दावर मंत्री राममूर्ति वर्मा के खिलाफ लिखने पर खुद जनता की रक्षा की शपथ लेनेवाले पुलिसवालों ने ही घर में घुसकर जिंदा जला दिया और वर्मा यूपी सरकार में आज भी मंत्री बना हुआ है। संकेत साफ है कि हमारे खिलाफ लिखोगे तो जिंदा जला दिए जाओगे और हमारा कुछ भी नहीं बिगड़ेगा। मैं समझता हूँ कि ऐसा तो 1975 के आपातकाल में भी नहीं हुआ था।
मित्रों,कल ही पूर्व बसपा सांसद शफीकुर्ररहमान बर्क के खिलाफ दो साल पहले फेसबुक पर की गई टिप्पणी के चलते एक स्वतंत्र टिप्पणीकार को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बार यूपी पुलिस ने 66 ए के तहत मामला दर्ज नहीं किया है बल्कि सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने के ज्यादा संगीन धारा के तहत मुकदमा किया है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है और पूर्व की तरह सुप्रीम कोर्ट मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित पत्रकार को नहीं छुड़वाता है तो आगे उम्मीद की जानी चाहिए कि धड़ल्ले से इस सूत्र का यूपी पुलिस द्वारा प्रयोग किया जाएगा और यूपी में पत्रकार बिरादरी का जीना मुश्किल कर दिया जाएगा।
मित्रों,कहने का तात्पर्य यह है कि देश में आपातकाल लागू करने के लिए न तो संसद की अनुमति चाहिए और न ही केंद्र सरकार की पहल ही जरूरी है बल्कि राज्य सरकारें भी चाहें तो बिना घोषणा किए ही आपातकाल जैसी परिस्थितियाँ पैदा कर सकती हैं और यूपी की समाजवादी सरकार यही कर रही है। यूपी में पिछले तीन सालों से लोकतंत्र को खूंटी पर टांग दिया गया है और एक पार्टी की सरकार चल रही है। उसी एक पार्टी के लोग प्रतियोगिता परीक्षाओं में पास हो रहे हैं,उसी एक पार्टी के लोग रंगदारी वसूल रहे हैं,उसी एक पार्टी के लोग थानेदारों को हुक्म दे रहे हैं और उसी एक पार्टी के लोग पत्रकारों को जिंदा जला भी रहे हैं। सवाल यह है कि इस एक पार्टी के सरकार-समर्थित गुंडाराज को रोका कैसे जाए? फिलहाल तो कोई मार्ग दिख नहीं रहा। वैसे भी जनता ने जब बबूल का पेड़ लगाया है तो उसको आम खाने को कहाँ से मिलेगा? गिनते रहिए गिनती कि कितने पत्रकार अंदर कर दिए गए और कितनों को मोक्षधाम पहुँचा दिया गया।
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