Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Showing posts with label औरतें. Show all posts
Showing posts with label औरतें. Show all posts

21.1.08

अबे, सुन बे, ओ लड़कियां, दीदी जी, हरामी साले को

तुमको सुनता हूं
पढ़ता हूं
तो अट्टाहस करता हूं
तरस खाता हूं तुम पर
हम मर्द हरामी के,
कितना समझदार हो गए हैं
सोचते हैं रोज, हर रोज
हरामीपने के तोड़
और तुम हो कि
बस, वही जीती रहती हो
अपनी खोल में
सती सावित्री से लेकर
नीलिमा, घुघूती, मनीषा
प्रेमिका, दोस्त, पत्नी
बीवी, भाभी, बहन...
जो भी हो तुम लोग
लेकिन बहुत पर्सनल
होती हैं तुम्हारी बातें
सरेआम होते हुए भी
जीती रहती हो अपने
दर्द, और अपनी दुनिया में
कितना गैप है तुममें और हममें
मेरी जान ताकि
तुम लोग भी खुल के
निकाल सको अपनी भड़ास
अपने किसी भड़ासी मंच पर
बिना रोये, बिना बताये
साफ साफ,सहज, सरल, तरीके से
कि कहती कि हां, मैं....
तुम कुत्तों में से
किसी एक के साथ भी
रहने के कायल नहीं
क्योंकि तुम हो जो
लड़ते समझते हो
ना जाने किन मुद्दे
विषयों, हरामजदगियों
सूअरपनों, कुत्तेपनों को
और हम लोग हैं
जो हमेशा कहते
बोलते आते हैं कि
हम लोग जो हैं
सो हैं, समझो
पर.....
पता नहीं तुम लोग
और हम लोग में
इतना गैप है कि
अगर कभी पाटने की कोशिश करो
तो खुद मैं चिल्ला उठूंगा
क्या कर रही हो तुम सब
चुप, बंद, बस करो....

शायद....
इस गैप को पाटने
न पाटने के बीच
के बीच की जन्मी है ये खाई
क्योंकि तुम छायावादी लोग हो
और जो होती हो क्रांतिकारी तो
तुम औरत होने के काबिल
नहीं कही जाती

बावजूद इसके कहना चाहूंगा
कि बनाओ सब औरतें
एक कामन ब्लाग
अनाम नाम से
और गाओ
अपनी मस्त धुन
बिना मस्त कमेंट पाने
और चाहने की इच्छा के बगैर
ताकि ढेर सानी अनाम लड़कियां
जी सकें कई जनरेशन से आगे
ये मानते हुए
कि वे हो गई हैं
बराबर इन कुत्तों के
जिनके अगल बगल उन्हें
उठना बैठना जीना खाना पड़ता है
.......
.......
........
......


((शायद मैं अपनी बात कह नहीं पा रहा हूं, माफ करें औरतें, और गरियायें मर्द....सालों कि परवाह न करना....जय भड़ास.....यशवंत))

15.1.08

तुम् केवल अनुगमन करो.....!

तुम् को हक नहीं
धर्म के उपदेश देने का ।
जीने के सन्देश देने का ।
तुम् केवल औरत हों तुम् केवल अनुगमन करो.....!
**************
तुम,और तुम्हारी सुन्दरता
हमारी संपदा .... !
तुम से हमारी सत्ता प्रूफ़ होती है !
तुम सत्ता में गयीं तो आती है आपदा ....!
तुम केवल स्वपन देखो शयन करो ........
******************
तुम पद प्रतिष्ठा से दूर रहो ....
कामनी वामा रमणी के रूप में
बिखेरो हमारे लिए लटें अपनी
मध्य रात्री में...अल्ल-सुबह की धूप में ...!
तुम हमारे लिए केवल सौन्दर्य - सृजन करो .....
******************
तुम काम और काम के लिए हों
तुम मेरी तृप्ति और मेरे मान के लिए हों.....!
तुम धर्म की ध्वजा हाथ में मत उठाओ
हमको अयोग्य मत ठहराओ.....!
तुम् वस्तु थीं वस्तु हों और वस्तु ही रहोगी .....!!
रमणी सुकोमल शैया पर सोने वाली मठों में रहोगी.......?
*********************
मैं आगे चलूँगा सदा तुम केवल मेरा अनुगमन करो ....!
मेरी अंक शयना मेरे स्वपन लिए सेज पर प्रतीक्षा रत रहो !