Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Showing posts with label जुडीशियरी. Show all posts
Showing posts with label जुडीशियरी. Show all posts

30.4.08

जुडीशियरी और विधायिका में जूतम-पैजार : सूचना का अधिकार


चीफ़ जस्टिस के.जी.बालाकृष्णन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सूचना के अधिकार के दायरे से उनका कार्यालय बाहर है इस लिये उनसे किसी सूचना की उम्मीद न करी जाए लेकिन दूसरी ओर लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी और विधि मंत्री एच.आर.भारद्वाज ने इस बात का विरोध किया है। विधि,कार्मिक एवं न्याय के लिये गठित करी गयी खड़ी समिति (स्टैंडिंग कमिटी) के कुर्सीमानव(चेयरमैन) ई.एम. सुदर्शननटचिअप्पन ने कहा है कि जब प्रधानमंत्री तथा लोकसभा जैसे बड़े संसदीय अधिकार रखने वाले कार्यालय इसके दायरे में आते हैं तो फिर संपूर्ण न्यायपालिका भी इसके दायरे में आनी ही चाहिये और आती भी है। लेकिन अब हो ये रहा है कि जो सपना मैं बरसों से देख रहा था कि न्याय खुले प्रांगण में क्यों नहीं होता और जस्टिस आनंद सिंह जैसे लोग खुद न्याय के लिये दसियों बरस न्याय के लिये जूझते क्यों रहते हैं और न्याय नहीं मिल पाता? जस्टिस आनंद सिंह ने जब न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ें कुरेदना शुरू करीं तो ये हाल हुआ कि आज मुफलिसी से जूझ रहे हैं, राजद्रोह के मुकदमें में सभी भाइयों को फंसा दिया गया,पांच साल तक अंडरट्रायल रहे लेकिन अंततः मुकदमा जीते लेकिन अभी तक माफ़िया का भूत उन्हें और उनके परिवार को भुखमरी के दिन दिखा रहा है। अब न्यायपालिका और विधायिका एक दूसरे पर कीचड़ फेंक रही हैं। ये वो प्रणालियां हैं जो कि लोकतंत्र को सही तरीके से चलाने के लिये बनाई गयी थीं लेकिन स्वार्थ की दीमक ने इन्हें चाट कर खोखला कर डाला लेकिन सूचना का अधिकार शायद एक मल-मूत्र भरी हंड़िया की तरह हो गया है जिससे हर आदमी बचना चाह रहा है चाहे वो न्यायपालिका हो,कार्यपालिका हो या फिर विधायिका बल्कि मेरा तो विचार है कि मीडिया को भी इस दायरे में लाना चाहिये और साथ ही उन तमाम NGOs को भी जो मलाई छान रहे हैं अपने मंत्री चाचा या मामा के कारण।

जय जय भड़ास

23.2.08

कानून के पिछवाड़े उंगली नही डालनी चाहिए वहां दांत होते हैं

मुझे बताया गया कि जी न्यूज के जिस जांबाज और दिलेर संवाददाता विजयशेखर ने कानून के पुरोधाओं की एक स्टिंग आपरेशन चला कर यह सिद्ध करा था कि जुडीशियरी में कितना कुत्तापन व्याप्त है ,उसे ही सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस दिया है कि छह सप्ताह के भीतर माफ़ीनामा प्रस्तुत करो वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहो । सारे भड़ासी भाई बहन जान लीजिए कि इस बहादुर ने क्या किया था ,इस पट्ठे ने अपनी खून पसीने की कमाई के मात्र चलीस हजार रुपए खर्च करे और एक थाने में झूठी रपट लिखवा कर वहां के जज महोदय से चार लोगों के खिलाफ़ वारंट निकलवा दिये ;जानते हैं उनमें से दो कौन थे भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और भारत के चीफ़ जस्टिस वी.एन.खरे । चार्ज लगाया था कि इन लोगों ने एक सोने के व्यापारी को ठगा है .....भौं भौं भौं ....भूं भूं भूं ... कांय कांय कांय...... अभी फटी होगी ।
अबे कितनी बार बोला कि कानून के पिछवाड़े में उंगली नहीं करने का ,अबी भुगत साला ; जैसे एक शाणा वो है जस्टिस आनंद सिंह जिसने जुडीशियरी में व्याप्त भ्रष्टाचार की तरफ उंगली उठाई तो आज तक भोग रहा है पूरे परिवार समेत .....
लेकिन भड़ासी लोग अपना एक सल्ला है कि तुम लोग बस होली-बीली का पोस्ट लिखने का ,रंग गुलाल वगैरे का ;जास्ती शाणा बन कर पत्रकारिता करके ऐसा प्रोबलेम में उंगली डाला तो मालुम क्या तेरे कूं ,उंगली इच गायब हो जाएंगी बाप । ये कानून वाला लोग के पिच्छू बी दांत होता है साला उंगली करने वाले की उंगली चबा लेते हैं । अबी सीरियसली होली मनाने का कांयकूं फुकट का टेन्चन लेने का जब अपनी फटेगी तबी चिल्लाने का नईं तो गपचिप बैठ कर औरत लोग का मुक्ति-बिक्ति पर बात करने का ऐसा भंकस में क्या रखेला है भिड़ू, अपन को तो अक्खा लाइफ़ उदर मूं इच नईं करने का । ठी है ना भाई लोग ? चल अबी होली मनाने का........
जय जय भड़ास