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3.1.08

It is not really true democracy...Taslima

तसलीमा से बात करना और अरसे बाद उसे फिर से सुनना एक अलग ही मजा और सोचने के लिए मजबूर करता है। जहाँ वह अपने आसपास की घटनाओं पर जमकर बोलती हैं, वहीं भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश सहित तुर्की पर भी समान अधिकार और आत्मविश्वास के साथ सिर्फ गरजती ही नही बरसती भी हैं। अमेरिका के खिलाफ मुहँ खोलने में भी तसलीमा को गुरेज नही है। लोकतंत्र की जम कर वकालत करती हैं। गुजरे हुए पल को याद करती है। लज्जा और द्विखान्दिता पर भी बात करती हैं.


करीब पौने घंटे बात हुई थी। करीब पन्द्रह सवाल पूछने का मौका मिला था। और जबाब भी मुझे मिला था। मजेदार बातें हुई थी। इंटरव्यू के बाद हंसी के फव्वारे भी छूटे थे। क्यों न अंगरेजी में हुई बातचीत को पढा जाय। भड़ास के अलावा विनीत उत्पल पर भी इसे पढ़ सकते हैं।

मेरे अंगरेजी उतनी अच्छी नही है, इस कारन जहाँ गलती हो, सही कर पढ़ने का कष्ट करेंगे...विनीत उत्पल


It is not really true democracy...Taslima

1.1.08

मैं तसलीमा बोल रही हूँ

कुछ अरसा पहले मैंने अपने ब्लाग पर तसलीमा के बारे में और उनसे इंटरव्यू के बारे में लिखा था। अपनी छोटी सी लाइब्रेरी से रिकार्ड इंटरव्यू को लिपि में बदल तो दिया लेकिन पूरी बातचीत अंगरेजी में है। मैंने सोचा बातचीत हुबहू पढा जाये तो मजा आ जाएगा।

तमाम हिन्दी प्रेमी के लिए बात में उसका अनुवाद आपके सामने हो गा। इंटरव्यू को कल आप भड़ास, विनीत उत्पल और पीस 4 आल पर पढ़ सकते हैं।

बताते चलें यह पूरी बातचीत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के होटल पिकेद्ली में हुई थी जो कई मायने में प्रासंगिक है।