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13.11.08

मेरी ब्लॉग यात्रा!

एक और सरदी का आगमन हो गया, ज्यादा पुरानी बात नही है जब पिछले सर्दियों में मैं आगरा में था। बेतरतीब सरदी और दिन से लेकर अहले रात तक कंपकपाते ठण्ड में काम के साथ गप्पें और ठण्ड सभी का आनंद। मगर इसी ठण्ड में बहुत कुछ हुआ, जिन्दगी के कुछ बहुत ही तकलीफदेह पल आए, समवेदना के ज्वार भाटा में उलझा रहा क्यूंकि जो बहुत करीब था वो अचानक से बहुत दूर हो गया। गुमसुम सा सन्नाटे की तरह पसरा बीतती रात की तरह काम से लिपट कर उस एकाकी पल को दूर करने का हरसंभव प्रयास विफल हो रहा था, मुहब्बत का जन्नत ताज का शहर आगरा मेरे उस एक एक पल को भारी कर रहा था।
आगरा से प्रकाशित होने वाला समाचारपत्र अकिंचन भारत उस समय मेरा ठिकाना हुआ करता था। जहाँ सुबह से लेकर रात के दो से तीन बजे तक में अखबारनवीसों के बीच हुआ करता था, एक नए बच्चा अखबार में कुछ बेहतरीन लोगों का साथ मानों एक परिवार का साथ हो। वरिष्ट पत्रकार गजेन्द्र यादव जी का बड़े भाई का प्यार और स्नेह तो वैभव पाण्डेय का छोटे भाई का प्यार मगर यहाँ चर्चा मैं इस बात का कर रहा हूँ की ये ही वो दिन थे जब ब्लॉग का खुमार मुझ पर भी चढा और ब्लॉग की दुनिया में मैंने भी पदार्पण किया।
यहीं पर सेन्ट्रल डेस्क पर विनीत उत्पल हुआ करते थे, समभाषी होने के कारण, अन्य कारण भी कि हमारी मित्रता भी हुई, पत्रकारों का तकनिकी में रुझान हमेशा मुझे आकर्षित करता रहा है और ये भी एक वजह थी कि विनीत के साथ हमारी गाहे बगाहे बात चीत होती रही। जहाँ मैंने विनीत को ब्लॉग पर लिखते पढ़ते पाया, एक हिन्दी भाषी और हिन्दी प्रेमी का आकर्षित होना निश्चित था सो हुआ भी, और कम्पूटर से तकनिकृत होने के बावजूद ब्लॉग की दुनिया से अनजान मैं ने ब्लॉग में कदम रखा, धन्यवाद विनीत । मुझे कोई हिचक नही शर्म नही की विनीत उत्पल मेरे ब्लॉग गुरु हैं। ब्लॉग बनाने से लेकर ब्लॉग का संचालन (अग्रगेटर) करने वालों पर पंजीकरण तक, या फ़िर विभिन्न ब्लोगों पर भ्रमण तक सब विनीत की ही देन है।
विनीत के बारे में बतात चलूँ कि जब मैं रायपुर के भाष्कर में था तो वहां के वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा ने एक बार एक झा जी पत्रकार से मेरी बात करायी जो दिल्ली में थे और प्रशांत जी के साथ काम कर चुके थे, और अकिंचन भारत में आके पता चला कि वो दूर का भाष होने वाला और कोई नही विनीत ही हैं, तभी कहते हैं कि दुनिया गोल है, कोई भी कहीं भी मिल सकता है।
भड़ास का रास्ता भी विनीत का ही दिखाया हुआ है। न्योता पाओ भडासी बनो अद्भुत था वो यशवंत जी का स्लोगन, बिना आकर्षित हुए आप रह ही नही सकते थे सो मैं भी हुआ और बन बैठा भडासी।
आरंभिक दिनों में मैं बस चिट्ठाजगत या ब्लोग्वानी, और नारद सरीखे अग्रगेटर पर ही घुमा करता था, लिखने का वक्त नही सो गाहे बगाहे बस नजर मार लिया करता था, भडास पर आने के बाद भी मजे से पढ़ना और बस पढ़ना इससे ज्यादा नही कर पा रहा था। आगरा से वापिस भी आ चुका था और लिखने की तीव्र इच्छा हिलोरें भी मार थी सो बस कैसे-कैसे के उहा पोह में पड़ा हुआ था की यशवंत सिंह भड़ास वाले मेरे दुसरे गुरु बने जब उन्होंने बताया की कैसे मैं पोस्ट लिख सकता हूँ, (मेरा मतलब भड़ास पर से है), गुरुदेव प्रणाम प्रणाम।
ब्लॉग पर पोस्ट करना तो सीख गया था मगर समयाभाव की बस सिर्फ़ टिपिया कर निकल लेता था, और महीनों सिर्फ़ पढने और टिपियाने का सिलसिला चला, इस बीच मैं रायपुर, नागपुर, दिल्ली होते हुए मायानगरी मुंबई पहुँच गया था। टीका टिपण्णी से लगता था की डॉक्टर रुपेश आजिज आ गए हैं जब मेरे पीछे ही पड़ गए की बहुत हो गया टिपियाना अब जल्दी से पोस्ट डाल दो, और सच्चे अर्थों में कहूं तो पोस्ट लिखने और निरंतर लिखने की प्रेरणा बस डॉक्टर रुपेश का किया धारा है, डॉक्टर साहब को प्रणाम और प्रणाम अपने तीनो गुरुओं को जिनके कारण थोड़ा बहुत लिख कर अपने भाव व्यक्त कर पाता हूँ।
यात्रा जारी है और संग ही जारी है मेरे गुरुओं के आशीष जिस से मैं अपने पथ पर अग्रसर हूँ। विचारों का कारवां शायद इसे ही तो कहते हैं।
साल के बदलाव ने बदलते पथ पर बहुत कुछ बदला है और आगे भी बदलेगा।

9.1.08

हर तरफ हिलेरी क्लिंटन ही क्लिंटन

न्यूयार्क टाइम्स के पहले पन्ने पर मिस क्लिंटन के जीत की खबर छाई हुयी है। लीड स्टोरी में उनके बयान को छपा गया है, जिसमे उसने कहा है कि बहस निर्णायक मोड़ साबित हुआ। पूरी बातचीत एन बी सी पर प्रसारित सुबह के सो के दौरान लिया गया इंटरव्यू है।

इसी पन्ने पर छपे ऐक्जित पोल में कहा गया कि क्लिंटन की जीत में औरतों में जबरदस्त उत्साह देखा गया और आज की जीत में औरतों के हाथ रह है। अख़बार की दुसरी बड़ी खबर बुश का मिडिल ईस्ट यानी इसराइल और फिलिस्तीन का दौरा है। वे एक सप्ताह के दौरे पर जाने वाले हैं।

इरान की खबर भी छपी गयी है, जिसमे विडियो औए जहाज के मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट है।इंटरनेट संस्करण में ब्लाग में छपी खबरों के लिए अलग बाक्स बनाया गया है और कई मनोरंजक और ख़बरों का पिटारा है।

बच्चों को खाने से होने वाला एलर्जी पर अक खबर है, जो जानकारी से परिपूर्ण है।

विशेष...हिलेरी क्लिंटन के राष्ट्रपति की दौड़ में शामिल होने पर ओपैद पेज पर ग्लोरिया स्तेनेम का लेख छापा है जिसका शीर्षक है, औरत कभी भी अग्रिम मोर्चे पर नही डटी । इसे आलेख पर विस्तृत चर्चा अगले चिठे में करूँगा।

विदेशों के अख़बारों मी छपने वाली ख़बरों के लिए क्लिक करें मीडिया हंगामा

7.1.08

अब तो जग जाओ बावा


कॉफी अरसे से मंजीत बावा कोमा में है। पिछले दिनों अमर उजाला में भी उनके बारे में काफी विस्तृत रूप में पढा। दिन तो याद नही है, लेकिन लेख काफी कुछ कह गया.


मुझे आज भी याद है जब दैनिक जागरण के लिए उनसे इंटरव्यू लिया था और उन्होने कहा था कुछ नया करो। नयी दिशा में काम करो। लेकिन कई महीनों से उनका कोमा मी रहना क्या कहलाता है। क्या मैं सोचूँ बावा नया कर रहें हैं, कुछ नया सोच रहे हैं। बस अब उठ कर बैठेंगे और नयी कलाकृति पेश कर एक नयी कृति को जन्म देंगे।

फिर भी जब तक साँस तब तक आस। क्यों न उनकी बातों को फिर से याद कर लें। क्लिक करें ..कुछ नया

3.1.08

It is not really true democracy...Taslima

तसलीमा से बात करना और अरसे बाद उसे फिर से सुनना एक अलग ही मजा और सोचने के लिए मजबूर करता है। जहाँ वह अपने आसपास की घटनाओं पर जमकर बोलती हैं, वहीं भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश सहित तुर्की पर भी समान अधिकार और आत्मविश्वास के साथ सिर्फ गरजती ही नही बरसती भी हैं। अमेरिका के खिलाफ मुहँ खोलने में भी तसलीमा को गुरेज नही है। लोकतंत्र की जम कर वकालत करती हैं। गुजरे हुए पल को याद करती है। लज्जा और द्विखान्दिता पर भी बात करती हैं.


करीब पौने घंटे बात हुई थी। करीब पन्द्रह सवाल पूछने का मौका मिला था। और जबाब भी मुझे मिला था। मजेदार बातें हुई थी। इंटरव्यू के बाद हंसी के फव्वारे भी छूटे थे। क्यों न अंगरेजी में हुई बातचीत को पढा जाय। भड़ास के अलावा विनीत उत्पल पर भी इसे पढ़ सकते हैं।

मेरे अंगरेजी उतनी अच्छी नही है, इस कारन जहाँ गलती हो, सही कर पढ़ने का कष्ट करेंगे...विनीत उत्पल


It is not really true democracy...Taslima

1.1.08

मैं तसलीमा बोल रही हूँ

कुछ अरसा पहले मैंने अपने ब्लाग पर तसलीमा के बारे में और उनसे इंटरव्यू के बारे में लिखा था। अपनी छोटी सी लाइब्रेरी से रिकार्ड इंटरव्यू को लिपि में बदल तो दिया लेकिन पूरी बातचीत अंगरेजी में है। मैंने सोचा बातचीत हुबहू पढा जाये तो मजा आ जाएगा।

तमाम हिन्दी प्रेमी के लिए बात में उसका अनुवाद आपके सामने हो गा। इंटरव्यू को कल आप भड़ास, विनीत उत्पल और पीस 4 आल पर पढ़ सकते हैं।

बताते चलें यह पूरी बातचीत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के होटल पिकेद्ली में हुई थी जो कई मायने में प्रासंगिक है।

30.12.07

पृथ्वी पर गहराता जलवायु संकट


आगरा से छपने वाले अकिंचन भारत के सम्पादकीय पेज पर अग्रलेख मी मेरा एक लेख २५ दिसम्बर,२००७ को छपा है। 'पृथ्वी पर गहराता जलवायु संकट ' नामक इस लेख में कुछ खास विन्दुओं पर गौर फ़रमाया गया है। दो भागों में हूबहू लेख आपके सामने है।.... विनीत





पृथ्वी पर गहराता जलवायु संकट


विनीत उत्पल

दशक से अंतरारास्त्रीय जगत में जलवायु परिवर्तन को लेकर पर्यावरणविदों की चिंताएँ उभर कर सामने आयी हैं। कभी वायुमंडल में ग्रीन हॉउस गैस कार्बन दी आक्साइड की मात्रा तो कभी दक्षिणी समुद्र की हवाओं में हो रहे परिवर्तन से भी वैग्घनिकों को गहरे स्तर पर सोचने के लिए मजबूर किया है। यदि जलवायु के विभिन्न पहलुओं को देखा जाये तो पिछले दस वर्षों में उत्तरी भूभाग में स्थित समुद्रों की कार्बन आक्साइड सोखने की छ्मता घटी है। समुद्र के जलस्तर में बढोतरी हो रही है। बावजूद इसके दुनिया के कई इलाके ऐसे हैं, जहाँ लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। इतना ही नही, लोगों के शरीर के प्रतिरोधक छ्मता में भी लगातार कमी आ रही है।

जलवायु परिवर्तन से जुडे कई मसलों को लेकर इंडोनेशिया के बली में तीन दिसम्बर को पूरी दुनिया के बडे-बडे दिग्गजों ने बैठक की। विभिन्न मामलों पर जमकर बहस हुई, मतभेद भी उभरकर सामने आये। बातचीत हुई, सहमती बनी, कई मुद्दे अनछुए भी रहे। बैठक में जिन मामलों पर बातचीत हुई और सहमति हुई, उन पर विचार-विमर्श अभी भी चल रह है। लेकिन इससे इतर, बैठक के ठीक छः दिन पहले २७ नवंबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा पूरी दुनिया में जरी ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट २००७--०८ की रिपोर्ट काफी चौकाने वाली हैं। इस रिपोर्ट को ब्राजील में एक भव्य समारोह में वाहन के राष्ट्र पति इनको लूला द सिल्वा और सपन के इंटर नेशनल कोर्पोरेशन के राज्य सव्हिब लेयर पेजिन ने जारी किया।

जारी....

आभार- अकिंचन भारत, आगरा