भाई लोग,जो लोग भी किसी स्त्री के मोबाइल नंबर को कच्छे-बनियान की तरह छिपा कर रखने की बात कर रहे हैं वे लोग स्त्री को दोयम दर्जे पर रखना चाहते हैं वरना जो लड़की खुद नहीं डर रही है आप सब उसे क्यों फ़ीमेल-फ़ीमेल कर के कुछ अलग सा महसूस करवाना चाहते हैं । रही बात डा.रूपेश की तो उन्हें किस बात का डर होगा वो तो पैदाइशी नंगे हैं और अंदाज़ फकीराना है ,चौबीस घंटे में एक टाइम खाना खाने वाले को क्या पैसा ,क्या प्रसिद्धि खोने का डर ? मैं अल्लाहताला से शिकायत रखती हुं कि उन्हें मेरा बेटा बना कर क्यों नहीं भेजा ? जो बंदूक की गोलियों से नहीं डरता उसे कौन धमका सकता है ,मेहरबानी करके यशवंत भाईसाहब उनकी वकालत न करें इस मुद्दे पर । मुझे पक्का यकीन है कि यह मनीषा पांडेय नाम की लड़की जो है वह मात्र औरत होने का नाजायज़ फायदा ले रही है और सस्ती शोहरत कमाने के टोटके आजमा रही है । उस पर ध्यान देकर उसका भाव मत बढ़ाइए । मनीषा दीदी को तो मैं भी जानती हूं और अब मैं खुद अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर रही हूं ,मेरा नंबर है - ०९८९२८०९६९२
यशवंत भाईसाहब मेहरबानी करके मेरा नंबर न हटाएं ।
भड़ास ज़िन्दाबाद
29.2.08
सस्ती शोहरत कमाने के टोटके और मनीषा पांडेय
Posted by
मुनव्वर सुल्ताना Munawwar Sultana منور سلطانہ
1 comments
Labels: डा. रूपेश, धमकी, भड़ास, मनीषा पांडेय, विवाद
मुझे तो कई बार फ़ांसी की सजा होनी चाहिए
डरे हुए,सत्ता हिल जाने के कारण,मठाधीशी खतरे में आ जाने की वजह से बौखलाए हुए लोग ऐसी ही प्रतिक्रिया कर सकते हैं । आवाज को दबाने के लिये इस तरह की हरकतें तो हमेशा से होती आयी है । आज अभी हाल ही में मुझे मनीषा पांडेय जी की तरफ़ से मेरे मोबाइल पर फोन आया कि उनके परिवार से सारे लोग मुंबई में हैं सभी एडवोकेट हैं वगैरह वगैरह ..... आप लोग मुझे बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं, मेरे मम्मी-डैडी आपके साथ जाकर मनीषा से मिलेंगे.......(बहन लिखती हिन्दी में हैं और अंग्रेजी बोलने में विशेष गर्व महसूस करती हैं शायद अंग्रेजी में प्रखर अभिव्यक्ति हो सकती है उनका मानना हो ) ...... उन्होने अजीब से अंदाज में बोला कि मेरे पास आपका मोबाइल नंबर है अब मैं आपको बताती हूं कि मैं क्या करती हूं (क्योंकि मैंने उन्हें यह कहा कि अब तो मैं मनीषा दीदी से तभी किसी को मिलवाऊंगा जब मेरी लिखी हालिया पोस्ट की शर्तों में से कोई एक शर्त उन्हें मंजूर हो ,मैंने यह भी कहा कि अगर आपको मंजूर नहीं है तो आप मुझे जाहिल ,गंवार,अनपढ़,उजड्ड जो चाहें मान लीजिए ; क्योंकि बहन तो भड़ास देखने को भी राजी नहीं थीं तो मैंने कहा तो मैं आपसे बात करने को राजी नहीं हू )...... हो सकता है कि उन्होने मुझे यह बात साधारण ढंग से कही हो पर भाई हम तो डर गए और हाथ पांव सब कांप रहे हैं ,टाइप करने में भी हवा तंग है कि कब पुलिस हथकड़ियां लगा कर जेल में न डाल दे कि पूरे देश में एक ही तो मनीषा है और तू उस महान लेखिका,महानतम ब्लागर के नाम की बेइज्जती कर रहा है तुझे तो कई बार फ़ांसी की सजा होनी चाहिए । लेकिन हो सकता है कि इससे पहले ही हार्ट अटैक से मेरी मौत हो जाए तो भाई लोग आज से ठीक तेरह दिन बाद आप सब लोग मेरी त्र्योदशी में आमंत्रित हैं क्योंकि मेरा तो कोई मेरे बाद निमंत्रण देने वाला भी नहीं है...........
अब तो जय भड़ास लिखने में भी डर लग रहा है पर डरते-डरते ही सही लिख रहा हूं । चलो भाई-भैन लोग गुड बाय नर्क के ग्राऊंड फ़्लोर पर सारे भड़ासी मिलेंगे मैं सबसे पहले वहां पहुंचने वाला हूं आप सब की अगवानी का इंतजाम करके रखूंगा.....
Posted by
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
8
comments
Labels: डा. रूपेश, धमकी, भड़ास, मनीषा पांडेय, विवाद
