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जय नीरव, जय यशवंत, जय भड़ास।
यशवंत दादा के सम्मान में, महीने भर से मन में दबे गुबार के दबाव में एक हास्य गजल भेज रहा हूं। आशा है मंच देंगे, आभारी रहूंगा। भड़ास को घर-आंगन मानता हूं इसलिए भेज रहा हूं।
मुलाहिजा-----
शीर्षक- पराठे में आइसक्रीम
त्वचा है भैंस की, चेहरे पर विनम्र बैल की मुस्कान है।
बख्शीश लेते देखा मोहल्ले में तो लगा वाकई महान है।।
विचार तस्करी के हैं, एनजीओ की आढ़त से थोक लाता है।
डाल के चुग्गा दिहाड़ी पर रेजा से फटकता, बिनवाता है।।
इंटलेक्चुअल है, रिभोलूसनरी है, ग्यान की बरखा है।
प्रभात से रात तक चलता चमचों का चरखा है।।
आदमी अच्छा है, बस एक पोशीदा बीमारी है।
जो इसके ईगो को आंख मार दे बलात्कारी है।।
नैतिक इतना है कि आइसक्रीम लपेटी है पराठे में।
इसका हर राजदार सिसकता मिला है घाटे में।।
बाप मास्टर है प्राइमरी का प्रोफेसर बताता है।
खाई मकुनी दरभंगा में दिल्ली में बर्गर बताता है।
कर्ज देते कहता- दोस्त है, दास है, दासानुदास है।
न आना फंदे में किसान यह कर्नाटक की कपास है।।
वीरेंदर गठवाला
-किसान-
मुजफ्फर नगर, यूपी।
(भड़ास के लिए आई एक मेल)
13.6.08
पराठे में आइसक्रीम..........Hasya Gazal Sir
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यशवंत सिंह yashwant singh
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Labels: नई कलम, नया भड़ासी, भड़ास, स्वागत, हास्य गजल
30.5.08
आदमी या कुत्ते
yasawant ji
pahali bar BHADAS par POST bhej raha hu. par usame type nahi kar pata is liye word ki file send kar raha hu, ho sake to jagah dejiyega.
SAGAR S PATIl
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(सागर भाई, आपने जो मैटर भेजा था, वो चाणक्या फांट में था। उसे मैंने फांट कनवर्टर के सहारे चाणक्या से यूनीकोड में करके यहां प्रकाशित कर रहा हूं। ....यशवंत)
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आदमी या कुत्ते
सागर एस पाटिल
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आज एक मोबाइल वालों की दुकान में जाने का मौका मिला। वहां दरवाजे पर एक जानवर बना था और नीचे लिखा था हैप्पी टू सी यू और वो जानवर था कुत्ता। तो मन में आया अब यहीं दिन रह गया था देखने के लिए कि एक कुत्ता हमें देखकर खुश हो रहा है। अब आदमी और आदमियत बची ही नहीं हमें देखकर खुश होने के लिए।
खैर जब पत्रकारिता में आया था तभी से कुछ जानवरों की श्रेणी में आ गया था। तब लगा कि शायद यही कीमत रह गई है मेरी और मेरे जैसे और ग्राहकों की जो उस मोबाइल सेवा को ले रहे हैं या लेने की सोच रहे हैं। पर अंदर गया तो कुछ शानदार कपड़े पहने लोग थे। मुझे तो लगा था कि उसी तरह के कुछ जानवर होंगे अंदर।
रिसेप्शन पर एक कुतिया बैठी होगी जीभ निकालकर और लिखा होगा मे आई हैल्प यू या एनी प्राब्लम से टू मी। एक कुत्ता बैठा होगा और लिखा होगा एक्जीक्यूटिव या मैनेजर या और कुछ। लेकिन वैसा कुछ भी नहीं दिखा वहां तो सब आदमी जैसे दिखने वाले ही जानवर थे। मैंने एक सज्जन से मदद मांगी तो उन्होंने पूरे उत्साह के साथ मदद की। जब मैं चलने को हुआ तो देखा उस वैल ड्रेस तथाकथित पढ़ लिखे आदमी की शर्ट पर लिखा था हैपी टू हैल्प यू और नीचे उन सज्जन का नाम लिखा था। तो मुझे लगा कि उन महाशय इनकी पढ़ाई तो गई बेकर क्योंकि बाहर लिखा था हैप्पी टू सी यू और अंदर लिखा है हैप्पी टू हैल्प यू।
मन में इन खयालों को लेकर मैं निकल आया उस दुकान से और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी भी जीभ लटक गई है मेरी भी पूंछ निकल आई है। हड़बड़ा कर चेक किया तो तसल्ली हुई कि नहीं अभी उस जानवर और मुझमे इतना तो फर्क है कि मेरी जीभ नहीं लटकी है और न ही मेरी पूंछ निकली है। लेकिन क्या पता कब तक..........
sagar s patil
srp1330@gmail.com
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यशवंत सिंह yashwant singh
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