बड़े दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हरे भाई और पंडित सुरेश नीरव जी अब नहीं रहे। ये लोग भड़ास की दुनिया से विदा हो गए हैं। इन लोगों ने दूरभाष पर मुझे सूचित किया कि किन्हीं कारणों के चलते वे भड़ास के साथ खुद को जोड़े रख पाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं इसलिए उनकी सदस्यता और उनके कंटेंट भड़ास से हटा लिए जाएं।
दोनों महान आत्माओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए भड़ास से उनके नाम को धो-पोंछ दिया गया है। उम्मीद है कि वे लोग अब राहत महसूस कर रहें होंगे।
जितने दिन तक साथ दे पाए, उसके लिए शुक्रिया। आप लोग आबाद रहें, नई दिल्ली में रहें या इलाहाबाद या अहमदाबाद रहें।
बाकी भड़ासी भाई अपने इन दोनों साथियों के विदा होने से दुखी तो जरूर होंगे लेकिन मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वे भाई भड़ासियों को इन दोनों साथियों के विदा हो जाने से पैदा दुख को सहने की ताकत प्रदान करेंगे।
जय भड़ास
यशवंत सिंह
10.7.08
हरे भाई और पंडित नीरव जी नहीं रहे
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यशवंत सिंह yashwant singh
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21.4.08
रोको मत पतवार मुझे तुम
रोको मत पतवार मुझे तुम
देखें कितनी ताकत है इन लहरोंवाले सागर में
रखते हैं अणुधर्मी ऊर्जा हम शब्दों की गागर में
नाव नहीं जो डूब जाऊंगा मुझको आंधी-सा बहने दो
रोको मत पतवार मुझे तुम मुझको सागर सहने दो
दुख की फुहार में भीगे पर छीजे नहीं कभी
सुख के डिस्को में भी नाचे पर रीझे नहीं कभी
नपी-तुली सुविधा के सपने डगर-मगर ढहने दो
रोको मत पतवार मुझे तुम मुझको सागर सहने दो
बहुत किया शोषण लहरों का अब सब लहरें बागी हैं
खारापन तुम रहे पिलाते अब सभी मछलियां जागी हैं
मौसम की मुद्रा में परिवर्तन है हार जाओगे रहने हो
रोको मत पतवार मुझे तुम मुझको सागर सहने दो
पं. सुरेश नीरव
.९८१०२४३९६६
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