Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Showing posts with label भारत सरकार. Show all posts
Showing posts with label भारत सरकार. Show all posts

5.8.11

भाड़ में जाये आम आदमी के सपने.............


आते जाते मैं अक्सर उस दुकान पर ठिठक जाता हूँ और उसमे सजाई चीजों को बड़ी हसरत से देखा करता हूँ. ये दुकान हैं सपनो की, काफी गहमा-गहमी का माहौल होता हैं पर मेरी निगाहें सीधे अपने सपनों पर ही जाकर टिक जाती हैं. हर बार मन करता हैं कि उनमें से कोई सपना साथ ले लू, लेकिन मजबूरी हैं की मैं चाह कर भी कुछ नहीं खरीद पता हूँ. मैं ही क्यों वहां आने वाला कोई भी व्यक्ति आसानी से कुछ भी नहीं खरीद पाता हैं क्योंकि अपना एक सपना खरीदने के लिए कम से कम दो सपने बेचने पड़ेंगे और मुझे तो बहुत सारे सपने खरीदने हैं, कुछ अपने लिए और कुछ अपनों के लिए. लेकिन इन सपनो की कीमत चुकाना मेरे बस में नहीं रहा. अब बस यही कशमकश में जी रहा हु आजकल की कैसे अपने और अपनों के सपनो को पूरा किया जाये और किन सपनो की क़ुरबानी दी जाये और किन्हें साकार करा जाए.....





आखिर इन सपनो पर भी महंगाई का असर हो ही गया, कई सपने अपने पापा के लिए देखे थे, कई सपने अपनी बेटी के लिए देखे थेकई सपने अपनी माँ के लिए देखे थे, और कई सपने अपने लिए भी सजाये थे पर लगता हैं इन सपनो को पूरा करने में कितने सपने ही टूटेंगे और फिर मैं भ्रम रूपी आयाम से बहार निकल वास्तविकता का सामना करूँगा और निराशा का एक डर जो अभी सता रहा हैं, का सामना जल्द ही करूँगा अगर जल्द ही हमारे हुक्मरानों ने कुछ नहीं किया तो, कितने ही आम लोगो को अपने सपनो से समझौता करना पड़ेगा !!!!!!!

जय हो भारत सरकार की जिन्हें सिर्फ और सिर्फ अपने ही स्वार्थ रूपी सपनो की पड़ी है आम आदमी के सपनो की कोई कदर नहीं, भाड़ में जाये आम आदमी के सपने.............


via : My Thought & My Life

s
Follow me on : - bloggerfacebookgooglelinkedinpicasatwitter

27.7.11

बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से पाए!!!


ये कहना गलत नही होगा की,
बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से पाए!!!

आप सभी सोच रहे होंगे ये क्या हो गया हैं मुझे और मैं ऐसा क्यों बोल रहा हु अरे मित्रो अभी कुछ दिनों से हो रहे बम धमाको से पूरा पडोसी मुल्क सकते में हैं अब जिसने उस तालिबान नाम के साप को पाला अब वो उसी को  ही डस रहा  हैं तो ये कहावत तो सही माईने में पडोसी मुल्क के ऊपर लागू होना जायज सी बात हैं. अगर वहां की हकुमत सही माईने में अपने लोगो की परवाह करती तो शायद पडोसी मुल्क भी अपने नाम की तरह पाक कहलाता और तरक्की की और बढता पर अब वहां की हकुमत ने भारत से हमेशा द्वेष की भावना ही रखी हैं और हमेशा ही मुह की ही खायी हैं.
अभी हाल ही में मैंने कहीं टेलीविजन में एक वृत्तचित्र देखा जिसमे ये बताया जा रहा था की पडोसी मुल्क किस तरह से अपने विद्यालयों में कैसे गुमराह की शिक्षा अपने आने वाले पीढियों को दे रहा हैं जहाँ भारत का चित्रण एक आतंकवादी देश के रूप में किया जाता हैं, अब वो तो बेचारे बच्चे हैं जो कोरे कागज की तरह होते हैं जिनपे द्वेष, आतंक की स्याही से कुछ भी लिख दो वो हमेशा के लिए ही छाप छोड़ जाता हैं उन मासूमो के दिमाक में.

खैर यही कारन हैं की वह की आम जनता भी अब अपनी सरकार का वो भयानक रूप देख चुकी हैं और अगर जल्द कुछ नही किया गया तो ये डर का साया यहाँ भी पहुँच जाएगा. और शायद पहुच भी सकता हैं क्योंकि यहाँ तो हमारे देश में ही पीठ पर छुरा घोपने वाले मौजूद हैं.
वो कहते हैं न की,
जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो दुसरो से क्या उम्मीद रखी जा सकती हैं.

अब देखते हैं कब वो मदारी आते हैं और कब अपने इशारो पे इन्हें नाचना शुरू करते हैं. अगर हम अब नहीं जागेंगे तो फिर हमारी आवाम भी पडोसी मुल्क की तरह हो जाएगी असहाय और बेबस....


By : Pawan Mall
via : http://goo.gl/gIV4F

19.7.11

वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा


अभी हाल ही में मैंने किसी न्यूज चैनल में कुछ ऐसा देखा की मेरा आप सा खो गया मन ही मन खूब कोस रहा था भारतीय शासको को.
जो इस देश की हुकूमत पर अपना एकल स्वामित्व समझते हैं और इस देश को सोने का अंडे देने वाली मुर्गी की संज्ञा के रूप में देखते हैं.
उस न्यूज में कुछ किसी परिवार के बारे में बता रहे थे की कोई परिवार पिकनिक के लिए गया था और एक दे से नदी में पानी का स्तर बढ़ जाने की वजह से 5 लोगो के परिवार में से सिर्फ दो ही लोग जिन्दा बचाए गए. और सरकार का इसपे ये कहना था की "ऐसे हादसे साल में एक दो तो होते ही हैं".
अब मुद्दा ये था की सरकार जब इन लोगो की मदद नही कर सकी तो उन्हें ये बोलने का भी हक़ नहीं था की "ऐसे हादसे साल में एक दो तो होते ही हैं".
अब सरकार को ये नहीं पता की जिन हादसों को ये स्वाभाविक बता रही हैं उन हादसों में जिन-जिन लोगो की भी मृत्यु हुई हैं उन लोगों के भी चाँद वोट शामिल हैं जिन्होंने ये सोचकर उन्हें वोट किया होगा की सरकार हमारे बारे में जरूर सोचेगी. पर यहाँ तो नदी उलटी ही बह रही हैं उल्टा सरकार तो ऐसे तेवर दिखा रही हैं जैसे की हमपे अहसान कर रही हैं ........

अब आप ही बताये आखिर क्या बीती होगी उस परिवार के बचे हुए लोगो पर जिन्होंने अपनों के खोने का दुःख झेल रही हैं और साथ ही साथ ऐसे कटु वाक्य सुनने के बाद क्या बीती होगी उन बचे हुए लोगो पर..

वाह री, भारत सरकार, क्या खूब कहा