अमीबा एक ऐसा प्राणी है जो पूरा का पूरा मात्र एक ही कोशिका से बना होता है यानि कि दिल-दिमाग-मन-आत्मा सभी उसी कोशिका में ठुंसे रहते हैं। उसमें लैंगिक प्रजनन नहीं होता इसलिये इन्हें कभी ही कोई सेक्सुअल प्राब्लम होती ही नहीं, इनमें न नर हैं न मादा और न ही हिजड़े। एक विशेष बात इस प्राणी के बारे में के इसका कभी एक आकृति नहीं रहती है यानि हमेशा शक्ल-सूरत बदलती रहती है यानि कि आप जिस "रामू अमीबा" से कल मिले थे उसे आज आप "श्यामू अमीबा" समझ बैठें। ’एकोहं बहुस्यामि’ की सोच में ये भी विश्वास रखते हैं। ये अपनी प्रकृति कभी नहीं बदलते यानि अमीबा ही रहते हैं ये नहीं कि पैरामीशियम(एक और दूसरा एक-कोशिकीय प्राणी) बन गये। इसलिये अमीबा के बारे में कोई राय कायम करना क्या मानवीय बुद्धिमानी की कसौटी पर सही रहेगी? ये कब पैदा हुए और मर गए पता ही नहीं चलता शायद इसलिये कि इन्हें न तो कब्रिस्तान में दफ़नाते हैं न ही श्मशान में जलाते हैं और तो और शवयात्रा तक नहीं निकालते। "अंगुलिमाल अमीबा" के गले में उंगलियों की माला है वो हर बात में एक उंगली निकाल कर मुद्दे की पिछाड़ी में डाल देता है ऐसा आपने सोचा लेकिन जब अमीबा ने अपनी प्रकृति इतने दिन तक आपको बतायी तो सच बताना कैसा लगा। न पैसा-न प्रसिद्धि-न शान्ति....... यही तो जीवन है; हम सबका अधूरापन ही तो हमें पूर्णता की ओर धकेलता है लेकिन हम किस बात को पूर्णता मानें ये हमारी मर्जी है। बस यावज्जीवेत सुखम जीवेत ही सत्य है, सत्य वही है जिसे हम मानते हैं जिसे नहीं मानते वो सत्य कहां है हमारे लिये? मेरे जीवन में संबंधों की उपलब्धियों में आप श्रेष्ठतम हैं ये मैं बता चुका हूं आज लिख कर दे रहा हूं। शरारतें,गम्भीरताएं,मनोरंजन,महत्त्वाकांक्षाएं,उठापटक,क्षोभ और गुदगुदी के बीच लोटने में बड़ा आनंद है,मुझ सुअर का यही कीचड़ है। मैं ने आपको कितना सताया है और क्यों सताया है ये आप जान पाये या नहीं? मैं नहीं बताउंगा, इस बात में बहुत सारे प्रश्नवाचक चिह्न लगा सकता था पर एक ही लगा कर काम चला लिया।
जय जय भड़ास
21.11.08
यशवंत दादा! सच बताना........
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डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
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24.4.08
मनीषा नाम के हिजड़े का भड़ासियों द्वारा बहिष्कार प्रशंसनीय है,यही होना चाहिये.......
एक तरफ भड़ास से जुड़े लोग भावुक होने का नाटक करते नहीं थकते हैं, लोगों की बातों में मीन-मेख निकालते नहीं थकते हैं, महिला-दलित चिंतन का घंटा इधर भी पूरी ताकत से बजाने से पीछे नहीं हटते हैं तो ऐसे में भला इनके बीच में एक हिजड़े का क्या काम हो सकता है? उसे तो भगवान ने भी दंडित कर रखा है तो भला हम जैसे भावुक किस्म के भड़ासी उसे अपने बीच क्यों जगह दें। इसलिये सबसे सुन्दर तरीका अपनाया है कि इसे तो बस नज़रअंदाज करे रहो, इग्नोर करे रहो तो एक दिन अपने आप ही हौसला पस्त हो जाएगा और वापस लौट जाएगा अपनी नारकीय दुनिया में जहां से आया है। हम जैसे कुछ दो-एक जड़बुद्दि लोग हैं जैसे कि यशवंत दादा,मुनव्वर आपा और मैं जो उनकी ओर तवज्जो देते हैं बाकी लोग इस हिजड़े की तरफ तो देखिये भी मत वरना अशुद्ध हो जाएंगे इसका लिखा पढ़ कर कहीं आप भी हिजड़े बन गए तो गजब हो जाएगा। इसलिये बेहतर है कि लड़कियों को प्रोत्साहित करिये जो कि पुण्य का काम है,महिला मुक्ति का पुनीत कार्य है या फिर किस्सागोई और कविताओं का हलुआ सानिये और एक दूसरे को चटाते रहिये। अगर किसी हिजड़े के लिखे पोस्ट पर कमेंट कर दिया तो उसकी हौसलाअफ़जाई हो जाएगी जोकि हमारे सभ्य समाज के लिये ठीक नहीं है। आज लिख रहा है कल को हमारे साथ बैठ कर खाना खाएगा मुझे तो ये सोच कर भी उल्टी आ रही है। सुन्दर लड़कियों की बात ही कुछ और है मुनव्वर आपा के शब्दों में कहूं तो सुन्दर लोगों का तो पादना भी लोगों को संगीत और हगना भी व्यंजन बनाना लगता है। मैं उन सभी भड़ासियों का आभारी हूं जिन्होंने मनीषा नामक हिजड़े को भड़ास में पर हाशिये पर सरका रखा है भले ही वो ऊपर सलाहकारों में हो। आप सबका हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए एक बार फिर से उनका पोस्ट पेल रहा हूं अब मैं बस आने वाले दस दिनों में यही एक पोस्ट दुराग्रही,हठी,दंभी की तरह से रोज सुबह-सुबह डाला करूंगा और आप लोग इसेनज़रअंदाज करके कविता-कहानी डालते रहना बस शाम तक फिर ये किनारे सरक जाएगा और आप लोग ऊपर आ जाएगें
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डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
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23.2.08
हिजड़े होने का दरद...
अभी ब्लाग तो बना लिय है पर टाइप करने का ज्यादा प्रैक्टिस नही है तो दो लाइन में ही उंगलियां दरद करने लगती हैं । जो हाथ बरसों से तालियां बजाते हैं ,बस झूठे आशिर्वाद देते और भीख मांगते रहे उन्हें नया काम करने में तकलीफ तो होयेगी न ? मैं केरल की रहने वाली हूं ग्रेजुएट हूं इधर मुंबई आना पड़ा क्योंकि उधर तो रिस्तेदार हैं जान पहचान के लोग हैं तो बहोत दुख होता था । इधर आई तो गुरू ने सहारा दिया है रोटी खाने को मिल जाती है पर पढ़ी लिखी हूं तो मन में लगता था कि कुछ नया करने का है तो एक दिन कम्प्यूटर इस्टीट्यूट चली गयी अपनी दो बहनों सोना और भूमिका के साथ कि हमें भी कम्प्यूटर सीखना है तो उसने बिना कुछ सुने ही मना कर दिया कि आप लोग के कारण उसका इस्टीट्यूट बंद हो जायेगा लोग अपने लडके लडकियों को हटा लेंगे कि इधर हिजड़ा लोग को सिखाया जाता है । जितना दुख जिन्दगी में अपने हिजड़े होने का नहीं हुआ था उससे ज्यादा दुख हुआ लोगों का ऐसा व्यवहार देख कर । फिर एक दिन डॉक्टर भाई से मुलाकात हुई वो हम लोग को रात में ट्रेन में मिल जाते थे और हम लोग उधर परेल से गंदा काम करके रात को लास्ट गाड़ी से आते थे । वो खुद आकर हमसे बात करते तो शुरू में हमें लगा कि कोई फोकट वाला होगा जो बस अच्छी बातों में निपटाना चाहता है । ऐसा सोच कर हमको बहोत पाप लगा होगा कि हम उनका बारे में ऐसा सोचा थे क्या करें अभी तक ऐसे ही लोग मिले थे तो लगता था कि ऐसा इंसान हो ही नहीं सकता है । पर होता है उसने हमको रक्षाबंधन से एक दिन पहले पूछा कि दीदी आपको भाई है मैने बोला नहीं ,जबाब नहीं दिया । क्या जबाब देती भाई है पर मिलना नही चाहता । दूसरे दिन वो खुद राखी लेकर आये और वो रिश्ता जिन्दगी भर के लिये के लिये जुड़ गया । अभी उंगलियां अकड़ने लगी हैं कुछ लिखना है बाद में लिखूंगी । नमस्ते
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हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा
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22.2.08
हम हिजड़ों की तो सुनो
आप सब लोगों को मेरा प्रणाम ,मेरा नाम मनीषा है और मैं डॉक्टर रूपेश की दोस्त हूं । लोग हमें हिजड़ा कहते हैं लेकिन डॉक्टर भाई कहते हैं कि हम लैंगिक विकलांग हैं । उन्होंने बताया कि आपके ब्लाग पर आदमी - औरत की बात लेकर बहस हो रही है अगर डॉक्टर रूपेश भाई की अरह हम लोग भी आप सब भड़ासियों की नजर में इंसान हैं तो जरा हिम्मत करके हमारी चर्चा करिए । डॉक्टर भाई ने हम लोग को कम्प्यूटर सिखाया ,हिन्दी लिखना और टाइप करना सिखाया और मदद किया कि ब्लाग क्या होता है ये बताया अभी आप लोग से रिक्वेस्ट है कि हमारी बात को भड़ास के द्वारा लोगों तक पहुंचाइये । हमारा ब्लाग है
adhasach.blogspot.com
हम चार पांच लोग जैसे सोना ,भूमिका ,शबनम मौसी ,डॉक्टर भाई मिल कर लिखेंगे आज पहली बार हिजड़ों की समस्याओं के बारे में जैसे हमें डाईविंग लाईसेंस से लेकर राशन कार्ड तक नहीं मिल पाता आसानी से क्योंकि हम न तो स्त्री हैं न पुरूष और आप लोग हैं कि फालतू बातों पर बहस कर रहे हैं ।
यशवंत भाई को आशीर्वाद
जै भड़ास
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हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा
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