पूरे दो साल हो गए। 6 मई को ही सबसे बड़े आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत व 350 को घायल करने वाले खूंखार आतंकी अजमल कसाब को मौत की सजा सुनायी गई थी। अफसोस व हैरानी सभी के दिलों में है। पाकिस्तान भी अपनी हांडी के सड़े चावल को जिंदा पाकर खुश है। आतंकियों ने लाखों दिलों को कभी न भरने वाले जख्म दिये हैं। जनता के करोड़ों रूपयों से सुविधाओं के बीच जिंदा रहकर उसकी उम्र बढ़ रही है। देश को आर्थिक चोट हमले से भी मिली ओर कसाब से भी मिल रही है, क्योंकि इस कसाब पर अब तक सरकार के करोड़ों रूपये खर्च हो चुके हैं। उसे सुविधाओं के बीच जिंदा रखना मजबूरी जरूर है, लेकिन यह भी सच है कि देश के लाखों लोगों को प्रतिदिन दो जून की रोटी भी नसीब नहीं होती। इतनी रकम से बहुत गरीबों का भला हो सकता था। इस बात की सख्त जरूरत महसूस होती है कि आतंकियों के मामले में अलग कानून होना चाहिए तुरंत फैंसला और तुरंत अमल। वैसे लोग राक्षस को सजा देने के लिये तैयार है, लेकिन......
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7.5.12
अफसोस कि कसाब अभी जिंदा है....
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Nitin Sabrangi
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Labels: attack, deth, hanging, journalism, kasab, kasmir, low, mumbai, nitinsabrangi, pakistan, terrorism, terrorist
18.9.11
अपनी तो लकड़ी की टाल है साहिब..
विशेष टिप्पणी- अतुल कुशवाह
इस बार पहले दिल्ली को दहलाया, और अब आगरा के जय अस्पताल में विस्फोट. मकसद वाही, बेगुनाहों की मौत, मागी किसलिए, पता नहीं. आतंक का एक और तमाचा.हम फिर गाल सहलाते रह गए. दिल्ली ब्लास्ट. दो संगठनों ने ली जिम्मेदारी.मगर देखिये. जाँच एजेंसियां खाली हाथ. प्रधानमंत्री ने कहा.अख़बारों ने छापा. आतंक से निपटा जायेगा.हमला निंदनीय है. पक्ष-विपक्ष के बयान. पब्लिक का हंगामा.बेअसर सत्ता. पीड़ितों के गुस्से की आग पर मुआवजे की सहानुभूति का पानी. लेकिन नहीं. जरा सोचिये. क्या यह अंतिम धमाका है. नहीं. तो फिर अगला ब्लास्ट किस शहर में.? पता नहीं. लेकिन वो शहर देश में ही होगा. लोग मरेंगे. नेता बयान देंगे. ख़ुफ़िया तंत्र चूकेगा. मीडिया छापेगा. कहाँ हुई चूक. जाँच होगी. जाँच चलेगी. चलती रहेगी. मगर इस बीच. दोषियों पर ठोस कार्रवाई के बयान भी उड़ेंगे. खुद सोचिये. लोकतंत्र निशाना, जनतंत्र की हत्या. मगर आतंक के आगे सत्ता नपुंसक . २६-११ तो फिर लौटेगा. जख्म हरे और दर्द ताजा करने. कहीं ऐसा न हो. की नए जख्म और दे जाये. तो संभलो. योद्धा बनो. सियासत पर भरोसा मत करो. क्योंकि. हर धमाके के बाद सियासत जंग लगे तर्कों के खोल में घुस जाती है. काला हो चुका चेहरा छिपाने. बेशर्म सरकार. भयानक भ्रष्टाचार. बस यहीं तक सीमित इसका आकार. अफजल जिन्दा है. कसब भी. सजा हो गई. फिर भी क्या हुआ. किस बात का इंतज़ार. अब नए की तलाश. क्यों. पकड़ भी लिया तो फिर. क्या कर पाओगे. जाँच कर रहे हैं, मगर किसलिए. ? उठो. जागो. देखो. समझो. जांबाज योद्धाओं. तुम ही करोगे.तुम ही बढ़ोगे.और जब तुम ही तलाशोगे. इसका हल. तभी बचेंगी, बेगुनाह, मासूम, और लाचार जिंदगियां. जो हो रही हैं. आतंक की शिकार. अन्यथा. सियासत में महफूज रहना भ्रम है...क्योंकि. सियासत तो यही चाहती है....
लोग मरते रहें तो अच्छा है,
अपनी तो लकड़ी की टाल है साहिब..
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Atul kushwah
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Labels: atul kushwah, delhi blast, terrorism
10.9.11
ये कैसा भारत निर्माण है ? ye ksa bharat nirmaan hai?
अश्रु बहते है आँखों से ,मन को ना विश्राम है
चारों तरफ लहू बह रहा ये कैसा भारत निर्माण है ?
बम के धमाको से दहला भारतवासी कराह रहा
शरीर के परखच्चे देखकर आतंकवाद दहाड़ रहा
क्रंदन से कांपी है धरती ,हर गली चोबारा खाली है
हर कोई आशंकित है बड़ी विपदा आने वाली है
चारों तरफ लहू बह रहा ये कैसा भारत निर्माण है ?
बम के धमाको से दहला भारतवासी कराह रहा
शरीर के परखच्चे देखकर आतंकवाद दहाड़ रहा
क्रंदन से कांपी है धरती ,हर गली चोबारा खाली है
हर कोई आशंकित है बड़ी विपदा आने वाली है
पूरी पोस्ट पढने के lie blog par aae
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kanu.....
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Labels: delhi bomb blast, terrorism
9.9.11
लौट आओ तुम (ए लव स्टोरी -destroyed by terrorism )
वो मासूम सा लड़का उसे बचपन से भला लगता था ,छोटी छोटी सी आँखें,घुंघराले बाल ,वो हमेशा से छुप छुप के उसे देखती आई थी ,जब वो अपना बल्ला लेकर खेलने जाता,अपने दीदी की चोटी खींचकर भाग जाता,मोहल्ले के बच्चो के साथ गिल्ली डंडा खेलता हर बार वो बस उसे चुपके से निहार लिया करती थी .जैसे उसे बस एक बार देख लेने भर से इसकी आँखों को गंगाजल की पावन बूदों सा अहसास मिल जाता था .घर की छत पर खड़ा होकर जब वो पतंग उडाता वो उसे कनखियों से देखा करती थी जेसे जेसे उसकी पतंग आसमान में ऊपर जाती, इसका दिल भी जोरों से धड़कने लगता और फिर वो भागकर नीचे आ जाती की इंजन की तरह आवाज करते इस दिल की आवाज कही आस पास के लोगो को ना सुनाई दे ,कितनी पगली थी वो जानती ही नहीं थी दिल की आवाज़ बस उसी को सुनाई देती है जिनका दिल आपके दिल से जुड़ा होता है बाकि लोग तो बस शब्द सुन सकते है अनंत आकाश में हमेशा गूंजने वाले शब्द....
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kanu.....
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Labels: Love Story, terrorism
30.7.11
हे अतिथि (कसाब) तुम कब जाओगे ?"
कल शाम से ही स्वर्ग और नरक या कहे तो जन्नत और जहन्नुम दोनों में हडकंप मचा हुआ है कारण आप सब जानते है. वो एसा कारण तो है ही जिसके कारण हडकंप मच सके आखिर उसने २६ नवम्बर २००८ को पूरे मुंबई में हडकंप मचा दिया था. हाँ में उसी महान (अन्यथा ना ले पर पिछले दो साल से जिस तरह से उसे सर आँखों पर बिठाकर उसकी मेहमाननवाजी कर रहे हैं उसे देखकर अब यही लगता है) आतंकवादी ,हत्यारे कसाब की बात कर रही हू .हमारे देश में जब जमाई (बेटी का पति) घर आता है तो उसकी खूब खातिरदारी की जाती है उसे किसी तरह की कोई तकलीफ ना हो ये ध्यान रखा जाता है.कसाब को जेल में जो सुविधाएं प्रदान की गई उन्हें देखकर लगता है वो जमाई जेसे मजे लूट रहा है .

हम स्वर्ग- नरक पर थे वहा हडकंप मचा हुआ है क्यूंकि कसाब ने अपनी फासी की सजा के खिलाफ उच्चतम नयायालय जाने का फैसला लिया है अब साल भर वो वहा निकाल लेगा और फिर भी संतुष्टि ना मिली तो राष्ट्रपति के पास अर्जी दे देगा....हाँ तो स्वर्ग में हडकंप इसलिए है क्यूंकि २६/११ के हमले में जो बेकुसूर मारे गए उनकी आत्माएं कराह रही है बार बार कह रही है "हमें किसी ने मौका क्यों नहीं दिया काश हमें भी मौका मिला होता कुछ पल और जीने का" .इन आत्माओं के साथ वो आत्माएं भी दुखी है जो हाल ही में हुए मुंबई हमले के कारण वहा पहुंची है.आखिर सबका एक ही दुःख है हम उस हत्यारे को सजा तक नहीं दे पा रहे जिसने इतने मासूम लोगो को अधूरी जिंदगी और अकाल मृत्यु की सौगात दी.

हम स्वर्ग- नरक पर थे वहा हडकंप मचा हुआ है क्यूंकि कसाब ने अपनी फासी की सजा के खिलाफ उच्चतम नयायालय जाने का फैसला लिया है अब साल भर वो वहा निकाल लेगा और फिर भी संतुष्टि ना मिली तो राष्ट्रपति के पास अर्जी दे देगा....हाँ तो स्वर्ग में हडकंप इसलिए है क्यूंकि २६/११ के हमले में जो बेकुसूर मारे गए उनकी आत्माएं कराह रही है बार बार कह रही है "हमें किसी ने मौका क्यों नहीं दिया काश हमें भी मौका मिला होता कुछ पल और जीने का" .इन आत्माओं के साथ वो आत्माएं भी दुखी है जो हाल ही में हुए मुंबई हमले के कारण वहा पहुंची है.आखिर सबका एक ही दुःख है हम उस हत्यारे को सजा तक नहीं दे पा रहे जिसने इतने मासूम लोगो को अधूरी जिंदगी और अकाल मृत्यु की सौगात दी.
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kanu.....
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