14.8.12
जो टिकट खरीदता है...लाटरी भी उसी की खुलती है।
Posted by
Unknown
1 comments
जो टिकट खरीदता है...लाटरी भी उसी की खुलती है।
Posted by
Unknown
0
comments
13.8.12
तुम याद आ गए । (गीत)
Posted by
Markand Dave
0
comments
Labels: geet, Hindi, MARKAND DAVE, MKTVFILMS, SONG
आत्मदर्शन Visualization
Posted by
Shri Sitaram Rasoi
2
comments
12.8.12
दिल की तबाही । (गीत)
Posted by
Markand Dave
0
comments
Labels: geet, Hindi, MARKAND DAVE, MKTVFILMS, SONG
नीरो का रोम और सोनिया का भारत-ब्रज की दुनिया
मित्रों,आज सोनिया के उस महान त्याग को 8 साल बीत चुके हैं। देश में खूब बदलाव हुआ है लेकिन धनात्मक की जगह ऋणात्मक। लगता है जैसे भारत के लिए समय की घड़ी उल्टी दिशा में चल पड़ी है। इन आठ सालों में देश की ऐसी की तैसी हो गई है। अर्थव्यवस्था पातालवासिनी होने को व्याकुल है तो कमजोर मानसून में भी घोटालों की बाढ़-सी आई हुई है। कांग्रेस अध्यक्षा और उनकी सरकार के मंत्रियों को देश की जनता के बैंक बैलेंस की चिंता होने के बदले (वोट) बैंक बैलेंस की चिंता है। अर्थव्यवस्था से लेकर आतंरिक सुरक्षा और बाह्य सुरक्षा प्रत्येक मोर्चे पर भारत और भारतीय संप्रभुता की हार हो रही है परन्तु सोनिया गाँधी एंड (फेमिली) कम्पनी उनके मूल देश के अब तक के महानतम शासक नीरो की तरह चैन (सत्ता) की बंशी बजाने में तल्लीन है। सत्ता लोलुपता की लाईलाज बीमारी से वे इस कदर ग्रसित हो गई हैं कि अपने कथित प्राणप्रिय पति द्वारा किए गए वादे और समझौते भी याद नहीं रहे। तभी तो उन्होंने (चाहे तो उनकी सरकार भी कह सकते हैं बात एक ही है) कल उच्चतम न्यायालय में यह झूठ बोला कि अब बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानना संभव ही नहीं है। क्यों नहीं है और कैसे नहीं है? जो चीज म्यांमार के लिए संभव है वही सोनिया के लिए असंभव क्यों और कैसे है? मैं बताता हूँ रास्ता। मुझे पता है लेकिन आश्चर्य है कि सोनिया एंड कंपनी को पता नहीं है! सीधी बात है कि जिन बांग्लाभाषियों के पास 1971 के पूर्व के आवासीय प्रमाण हैं वे भारतीय बंगाली हैं (स्व. राजीव गाँधी द्वारा 1985 में किए गए समझौते के अनुसार भी) और जिनके पास नहीं हैं वे बांग्लादेशी घुसपैठी हैं। हो सकता है ऐसा करने से कुछ निर्दोष भी इसकी चपेट में आ जाएँ। लेकिन ऐसा करना ही पड़ेगा और कोई ऐसा विकल्प नहीं है जिससे भारत का भला होता हो। अगर आप ऐसा नहीं करती हैं तो 'कूदे बैल न कूदे तंगी' की तर्ज पर जो बांग्लादेशी परसों तक असम को जला रहे थे और जिन बांग्लादेशियों ने कल मुम्बई को जलाया है,आने कल में वही दिल्ली,कोलकाता और कटिहार को भी जला कर रख देंगे। फिर भी अगर आपको इस दिशा में कुछ भी करना नहीं है तो बना लीजिए चाहे जो भी बहाने बनाने हैं। आपकी आराम फरमाती सरकार फरमाती है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूचियों से हटाना असंवैधानिक होगा। तो क्या उनको विशेष अभियान चलाकर भारत का मतदाता बना देना संवैधानिक है और संविधानसम्मत है? असलियत तो यह है कि भारतीय संविधान के अनुसार 19 जुलाई,1948 के बाद पूर्वी पाकिस्तान या वर्तमान बांग्लादेश से भारत में प्रवर्जन करने वाला प्रत्येक अप्रवासी अवैध है अगर उसने बिना विहित प्रक्रिया के नागरिकता अर्जित कर ली है तब भी। दरअसल सोनिया जी को प्रत्येक उस कदम से सख्त नफरत है जिससे भारत का कुछ भी भला होता हो। वे और उनकी कंपनी ने अपने जहाज को डूबने से बचाने के लिए भारत के भविष्य की संभावनाओं को ही डूबाकर रख दिया है। सच्चाई यह भी है कि उनके जैसा शासक जब तक सत्ता में है कोई जरुरत नहीं है आई.एस.आई. या चीन को भारत को कमजोर या अस्थिर करने के किसी तरह के प्रयास करने की और तब तक वे भारत के एशिया में शक्तिशाली होकर उभरने की आशंका से बेफिक्र होकर कान में मोम डालकर सो सकते हैं।
मित्रों,चाहे कोई माने या न माने कड़वी सच्चाई तो यही है कि वर्ष 2009 में अपनी दूसरी पारी में सोनिया जी की सरकार ने अब तक जाति और धर्म का कार्ड खेलने के सिवाय ऐसा कुछ भी नहीं किया है,ऐसा कोई एक कदम भी नहीं उठाया है जिससे देश मजबूत होता हो। बल्कि उसने सिर्फ और सिर्फ वही किया है जिससे देश कमजोर होता हो और उनका खुद का बैंक बैलेंस और वोट बैंक बैलेंस मजबूत होता हो। जो सरकार यूपीए-1 में थोड़ा-बहुत अच्छा काम कर रही थी वही सरकार अब सिर्फ गूँ बनाने की फैक्टरी बनकर रह गई हैं। इस सरकार और इसके मंत्रियों के होने या न होने का कोई औचित्य हो नहीं बचा है। घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं और सोनिया जी इससे पूरी तरह अप्रभावित बनी हुई हैं। ऐसा लग रहा है जैसे वे भारत की हैं ही नहीं बल्कि किसी शत्रु देश द्वारा भेजी गई हैं और भारत से अपना पुराना हिसाब गिन-गिनकर चुकता कर रही हैं। 2004 की हमारी कुलगौरव 2012 में कुलबोरनी बन गई है। उनको एक सामान्य और स्वार्थी स्त्री की तरह सिर्फ और सिर्फ अपने घर-परिवार की चिंता है देश की नहीं। कुछ इसी तरह के हालात को बयां करता अमर फिल्म अमरप्रेम का एक अमर गीत इस समय मुझे याद आ रहा है-मँझधार में नैया डोले तो माँझी जान बचाए,माँझी जब नाव डूबोए तो उसे कौन बचाए?
मित्रों,आपके पास कोई उत्तर है क्या इस प्रश्न का?है यक़ीनन है लेकिन आपको याद नहीं आ रहा है। जैसे हनुमान को तब तक अपनी शक्तियाँ याद नहीं आती थीं जब तक कोई उनको याद नहीं दिलाता था उसी तरह आप भी भूल गए हैं कि देश की डूबती नैया को सिर्फ आप ही डूबने से बचा सकते हैं। बस आपको करना यही है कि अगले लोकसभा चुनाव में देश की पतवार को इस विश्वासभंजक सोनिया के हाथों से छीन लेना है। हाँ,लेकिन हमें यह भी ध्यान में रखना है कि कहीं गलती से भी पतवार फिर से किसी कुलघातक के हाथों में न चली जाए।
Posted by
ब्रजकिशोर सिंह
0
comments
11.8.12
‘रामदेव+विवाद’ बहुत गहरा याराना है
अति महत्वाकांक्षी और बड़बोलेपन का प्रमाण देने वाले योग गुरू रामदेव विवादित हो जाते हैं। उनको जन्म भी वह खुद ही देते हैं। रामलीला मैदान में चल रहे इस बार के आंदोलन में सरकार के प्रति उनका प्रेम भी दिख रहा है। यह वही बाबा हैं जो सरकार के विनाश का सपना देखते आये हैं और जी भरकर कोसते हैं। अब सोनिया गांधी को सोनिया माता कहकर कहते हैं कि बातचीत के लिये उनके दरवाजे खुले हैं। कोई इसे नमस्कार योग, तो कोई पलटयोग बता रहा है। मंच पर लगाये गए पोस्टर से भी वह विवादों में आ गए। मीडिया से तूल न देने का आग्रह किया। दरअसल पोस्टर में बालकृष्ण को महापुरूष बताते हुए पोस्टर के दोनों तरफ भगवान श्री कृष्ण के अलावा क्रमबद्व ढंग से राष्ट्रपिता, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार बल्लभ भाई पटेल, चंद्रशेखर आजाद के बाद बालकृष्ण व उनके बाद शहीद भगत सिंह व वीर शिवाजी आदि के फोटों हैं। पोस्टर पर लिखा गया कि ’जेल आंदोलनकारियों का तीर्थ है। आचार्यजी महान हैं, रोगियों के भगवान हैं, भगवान के वरदान हैं, भ्रष्टाचारी परेशान हैं।’ बाबा ने महापुरूषों का अपमान करते हुए पता नहीं बालकृष्ण की ऐसी तुलना शायद इसलिए कर डाली क्योंकि बालकृष्ण उनकी अरबों का कारोबार करने वाली 34 कंपनियों के डायरेक्टर हैं। फर्जी पासपोर्ट मामले में जेल में बंद बालकृष्ण को जबरन महापुरूष बनाने पर बाबा तुले हैं। अपने कृत्यों से व्यक्ति स्वतः ही महान हो जाता है, लोगों के दिलों में जगह बना लेता है उसके लिये कोई प्रयास करने की जरूरत नहीं है।
Posted by
Nitin Sabrangi
2
comments
Labels: झूठ, फर्जी पासपोर्ट, बाबा रामदेव, बालकृष्ण, भ्रष्टाचार, योग गुरू, रामलीला मैदान
जागते रहो । (गीत)
Posted by
Markand Dave
0
comments
Labels: Hindi, MARKAND DAVE, MKTVFILMS, SONG
10.8.12
इंतज़ार । (गीत)
Posted by
Markand Dave
0
comments
Labels: hindi song, LOVE, MARKAND DAVE, MKTVFILMS
चाँद-ब्रज की दुनिया
दूधिया आकाश में;
चाँदी-सा चमकता हुआ,
निकलता है चाँद।
रोटी-सा गोल-गोल,
भात-सा धवल श्वेत;
वृहत गोला नवनीत का,
प्रतीक प्रकाश की जीत का;
रजत रश्मियाँ लुटाता पल-पल;
जेठ की रात में,
मित्रों के साथ में;
सोते हुए मैदान में,
कहीं खेत-मध्य मचान में;
जब रह-रह के फूटते हैं हँसी के फव्वारे;
हँसते हुए आता है देता है साथ चाँद;
पूर्णमासी की रात में,
दूधिया आकाश में;
चाँदी-सा चमकता हुआ,
निकलता है चाँद।
मिलता नहीं कोई जिन्हें बोलने-बतियाने को,
दौड़ती है सारी दुनिया मारने-लतियाने को;
शीतलता देने मन को,
चीरकर विस्तृत गगन को;
प्रकट होकर रात्रि में मुलाकात करने को,
मीठी बात करने को,
दुःख-ताप हरने को;
आता है तब अपने विश्राम को त्याग चाँद;
पूर्णमासी की रात में,
दूधिया आकाश में;
चाँदी-सा चमकता हुआ,
निकलता है चाँद।
Posted by
ब्रजकिशोर सिंह
0
comments
Labels: चाँद:ब्रज की दुनिया
9.8.12
रामलीला के बाद क्या ?
Posted by
Unknown
0
comments
'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' हेतु कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव चयनित
गौरतलब है कि यादव दम्पति की सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को पिछले साल हिंदी भवन, नई दिल्ली में 'श्रेष्ठ नन्हीं ब्लागर' सम्मान से सम्मानित किया गया था तो 14 नवम्बर, 2012 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में भारत सरकार द्वारा अक्षिता को आर्ट और ब्लागिंग के लिए 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' भी प्रदान किया गया. मात्र साढ़े चार साल की उम्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्त कर अक्षिता ने जहाँ भारत की सबसे कम उम्र की बाल पुरस्कार विजेता होने का सौभाग्य प्राप्त किया, वहीँ पहली बार भारत सरकार द्वारा किसी ब्लागर को कोई राजकीय सम्मान दिया गया. फ़िलहाल अक्षिता गर्ल्स हाई स्कूल, इलाहाबाद में प्रेप में पढ़ती है. अक्षिता के ब्लॉग का नाम है- पाखी की दुनिया.
परिकल्पना दशक का ब्लॉगर सम्मान के तहत सम्मानित होने वाले ब्लागर हैं - पूर्णिमा वर्मन(शरजाह, यू ए ई), समीर लाल समीर(ओटरियों, कनाडा), रवि रतलामी (भोपाल, म.प्र.), रश्मि प्रभा (पुणे, महाराष्ट्र), एवं अविनाश वाचस्पति (नयी दिल्ली). इसके अलावा पञ्च चयनित श्रेष्ठ ब्लॉगों के संचालकों को भी सम्मानित किया जायेगा.(परिकल्पना ब्लॉग दशक सम्मान-2012 की पूरी सूची हेतु क्लिक करें)
उपरोक्त सम्मान दिनांक 27 अगस्त 2012 को लखनऊ के क़ैसर बाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन मे प्रदान किया जायेगा. इस अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन का आयोजन तस्लीम व परिकल्पना समूह कर रहा है । इस समारोह में देश व विदेश के तमाम चर्चित ब्लॉगर जुटेंगे और नए मीडिया जैसे कि ब्लॉग, वेबसाईट, वेब पोर्टल,सोशल नेटवर्किंग साइट इत्यादि के सामाजिक सरोकार पर भी बात करेंगे ।
*****************************************************************************************
Posted by
Unknown
2
comments
Labels: आकांक्षा यादव, कृष्ण कुमार यादव, शब्द-साहित्य
.......इन्तजार !!
एक बार
यूं ही आँखे
बंद किए हुए
दिवास्वप्न में !
अब फिर वही,
अचानक उस दिन
बिना कुछ कहे
निकल गई
सामने से !!
उस दिवास्वप्न के बाद
हर रोज
कोशिश की थी
मैंने दिन में
फिर से सोने की !
मगर फिर कभी
आँखों में
नींद नहीं थी
था, तो, सिर्फ
उसी
दिवास्वप्न
के
दुहराए जाने
का इन्तजार!!
Posted by
Unknown
0
comments


















