फिर शब-ए- तन्हाई में, रोया करते हैं वो..!
१.
ज़िंदगी में कई हादसे, आप ने झेले मगर..!
टूटे ख़्वाबों का शिकवा किया करते हैं वो..!
ख़्वाबों की बातें, अकसर किया करते हैं वो..!
२.
बिखरा सा वो ख़्वाब और अँधेरी वो रात..!
हाँ, मातम अब उनका, मनाया करते हैं वो..!
ख़्वाबों की बातें, अकसर किया करते हैं वो..!
३.
ख़्वाबों की तसदीक़, हम करें भी तो कैसे..!
शब होते हमें, रुकसत किया करते हैं वो..!
ख़्वाबों की बातें, अकसर किया करते हैं वो..!
४.
इस ग़म में, हम भी जागे हैं कई रात, पर..!
अब हमें, दूर से सलाम किया करते हैं वो..!
ख़्वाबों की बातें, अकसर किया करते हैं वो..!












