Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

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13.5.14

Short story-11. `बला ।`


 Short story-11. `बला ।`

करीब साठ साल की आयु के सेठ प्रताप राय के यहाँ, उनकी, करीब तेईस साल की, दूसरी पत्नी `सतवंती`ने सेठ जी को नन्हा वारिस दिया था । इसीलिए आज सुबह से, धार्मिक हवन आयोजन के चलते कोठी में काफी चहलपहल थी ।
 
पर..,ये क्या..! युवा पंडित `रतिराज` हवन में शुद्ध घी की आहुति दे रहे थे कि अचानक, एक छिपकली का बच्चा, ऊपर छत से, हवन-कुण्ड में आ गिरा..! पूजा में बैठी सेठानी `सतवंती` और 'रतिराज', दोनों ने  यह दृश्य देखा । हालाँकि,कोई दूसरा इसे देख ले उस से पहले ही, युवा पंडित,'रतिराज` ने  ज़ोर-ज़ोर से तुरंत, "॥ ॐ बला टली स्वाहा ॥' मंत्र जाप करते हुए हवन-कुण्ड  में शुद्ध घी का पुरा पात्र  उड़ेल दिया जिस से, छिपकली का बच्चा पलभर में भस्म हो गया...!
 
धार्मिक कर्म संपन्न होने के पश्चात, `सतवंती`ने अपने कर कमलों से, युवा पंडित 'रतिराज' को दान-दक्षिणा देते हुए धीमे स्वर में कहा," सुनिए, आप के लिए तीन लिफाफे है..! पहला-आप ने, मेरी सारी बला का तोड़ निकाला, दूसरा-निर्विघ्न हवन कर्म संपन्न कराया और तीसरा- इस घर में वारिस के लिए जो आशीर्वाद दिया, इसके बदले इस लिफाफे में  आप की दक्षिणा के मैंने एक लाख रुपये ज्यादा रखें हैं..! 

और हाँ आज के बाद, हम कभी आमने-सामने नहीं होंगे । 
समझना, आप के जीवन से भी  `सतवंती` नाम की एक `बला` टल गई..!"
मार्कण्ड दवे ।
दिनांकः १३-०५-२०१४.



MARKAND DAVE

10.5.14

Short story-10. प्याऊ ।



 Short story-10. प्याऊ ।

https://www.youtube.com/watch?v=0WwDHXiXcIE&feature=youtu.be

http://mktvfilms.blogspot.in/2014/05/short-story-10.html

"अय बुढ़िया..! चुनाव सर पर है,आज प्रधान मंत्री जी आने वाले है, उनकी सुरक्षा का जिम्मा हम पर है, चल उठा तेरा प्याऊ का सामान और भाग यहाँ से..!" गाँव की कच्ची सड़क के किनारे स्थित पेड़ के नीचे, आते-जाते राहदारी को शीतल जल पिलाने वाली बूढ़ी मैया पर, दरोगा साहब ने रोब दिखाया और डंडे से प्याऊ की सारी मटकी फोड़ कर, ज़ोर-ज़ोर से गुर्राने लगे..!

बूढ़ी मैया बिना कुछ बोले, प्याऊ का बाकी सामान ले कर सामने वाले झोंपड़े में चली गई । थोड़ी ही देर में, प्रधान मंत्री जी का काफ़िला आया और वही पेड़ के नीचे रुक गया..! 

प्रधान मंत्री जी ने दरोगा जी से पूछा, " यहाँ एक बूढ़ी मैया का प्याऊ था ना, कहाँ  है?"
 
यह प्रश्न सुन कर दरोगा हकलाने लगा । इतने में सामने से शीतल जल की एक छोटी मटकी और  प्याला ले कर बूढ़ी मैया आती दिखाई दी । प्रधान मंत्री जी फौरन उसकी तरफ दौड़े और उन्होंने ने मैया का चरणस्पर्श किया," कैसी हो मैया ?"
 
निर्दोष भाव से हँस कर बूढ़ी मैया बोली,

" बेटा, इतना बड़ा आदमी हो गया, फिर भी तेरे बचपन के दिन, तुझे अब भी याद है? "
मार्कण्ड दवे ।
 
दिनांकः ०९-०५-२०१४.


6.5.14

Short Story - 09. 'उधार ।'


 Short Story - 09. 'उधार ।'


" मेरी पुरी ज़िंदगी में, इतना भ्रष्ट इंस्पेक्टर, मैंने कभी नहीं देखा..! अपने मित्र की हत्या करने वाले आरोपी को बचाने, उसके पिता के साथ अंदर दस पेटी (लाख) में सौदेबाजी हो रही है ?" पुलिस इंस्पेक्टर साहब की केबिन के बाहर दो पुलिस वाले एक दूसरे के साथ फुसफुसाहट कर रहे थे कि अचानक..!
 
पत्थर सी शुष्क आँखों के साथ, एक वृद्ध, ग़मगीन आदमी, पुलिस वालों के पास आकर बोला," मुझे साहब से मिलना है ।"
 
एक पुलिस वाले ने कहा,"साहब मीटिंग में हैं, क्या काम है, मुझे बताओ ।"
 
"साहब, चौराहे पर जिसकी हत्या हुई है, उसका मैं बाप हूँ, मेरी दवाई के लिए मेरे बेटे ने, अपने इस मित्र से,उधार रुपये लिए थे पर वह चुका न सका । बेटे की आखिरी इच्छा थी, मैं  ये उधार चुका दूँ ..!  कृपा कर के, आप उस आरोपी युवक को, ये दो सौ रुपये दे देंगे?"
 
एक दुःखी, वृद्ध पिता की बात सुनकर तुरंत, सारे पुलिस स्टेशन में  गहरा सन्नाटा छा गया मानो, मृतक के सम्मान में सभी ने दो मिनट का मौन धारण किया हो..!
 
मार्कण्ड दवे । दिनांक- ०३-०५-२०१४.


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1.5.14

SHORT STORY - 08. 'वयस्क ।'



SHORT STORY - 08.  'वयस्क ।'

http://mktvfilms.blogspot.in/2014/05/short-story-08.html

https://www.youtube.com/watch?v=xfJ-IS6Q6Ck

छह मास पहले, अपने गुजरे हुए पति की प्रतिकृति समान, मानस ने जब अपना पहला वेतन, सीधा  माधुरी मम्मी के हाथ में रखा तब, माँ को पहली बार यह अहसास हुआ, 

"क्या, उसका नन्हा सा बेटा 'वयस्क' हो  रहा  है ?"
 

शायद इसीलिए, दस दिन पहले ही माधुरी ने, मानस की पसंद 'प्रिया' को अपनी बहु के रूप में, खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया था और आजकल दोनों लव बर्ड अपनी प्यार भरी मस्ती में मस्त थे..!
 

इतना सोचते हुए माधुरी की आंखों में खुशी के आँसू  छलक उठे ही थे कि अचानक, मानस के आ जाने से, उसने अपने आप को संभाला और बोली," बेटे, आज तो तेरी सैलेरी का दिन है ना? आज मुझे कुछ बिल चुकाने हैं..!"
 

यह सुन कर मानस ने पूरे वेतन की बजाए चंद रुपये, माधुरी के हाथ में थमा दिए और कहा, " मम्मी, आज के बाद, तुम्हें जब भी पैसे चाहिए,  मुझे एक दिन पहले बता देना और हाँ, मैं  प्रिया के साथ बाहर जा रहा हूँ, मुझे शायद देर हो जाएगी..! "
 

माधुरी के चेहरे पर विस्मय के भाव जाग उठे और उसे लगा, 
"उसका बेटा आज सचमुच ही 'वयस्क' हो गया..!"
 

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०१-०५-२०१४.

26.4.14

Short Story-7. `पाप-पुण्य ।`


Short Story-7.  `पाप-पुण्य ।`
 
"मैं  किसी  पाप-पुण्य  में  नहीं  मानता..! Please forgive me and now get lost." कहते हुए मनचले देवांग ने, गर्लफ्रेन्ड मनीषा से पीछा छुड़ा लिया ।

अत्यंत दुःखी मन और 'भारी पैर' के साथ, कॉलेज की बॉय्स हॉस्टल की सीढ़ियां उतर कर, मनीषा  `भारी पैर, हल्का करने`, हॉस्टल के सामने स्थित अस्पताल की सीढ़ियां चढ़ गई..!

 छह माह पश्चात्, कॉलेज की बॉय्स हॉस्टेल के उसी कमरे में, नयी गर्लफ्रेन्ड पायल के सामने देवांग, वही घीसा-पीटा डायलोग, बोल रहा था, "मैं  किसी  पाप-पुण्य  में  नहीं  मानता..! Please forgive me and..!"

 " एक मिनट...!" अचानक ज़ोर से चीखती हुई, मनीषा कमरे में दाखिल हुई," देवांग, आज के बाद, तुम ऐसा पाप दोहरा भी नहीं सकोगे ? जिस पायल को तुम आज छोड़ रहे  हो, वह मेरी फ्रेन्ड  है  और..अ..अ..अ..!" मनीषा ने एक लंबी सांस भरी और आक्रोशित मन से फिर चिल्लाई,

" तेरे  जैसे  किसी  मनचले की  वजह से  पिछले  एक  साल से, 
वह HIV+  की मरीज़ है । तेरे साथ, मैंने  ही उसे  प्लांट किया था,
अब  हिसाब  बराबर, Now you get lost..!  पायल, चल  यहाँ से...!"

मनीषा के चीखने की आवाज़ सुन कर इकट्ठा हुए, बॉय्स हॉस्टल के सारे लड़के अवाक्  थे और शायद हॉस्टल की (पुण्यशाली?) सीढ़ीयां भी....!

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २६-०४-२०१४.



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21.4.14

Micro Short story - 5. `विष पान ।`


Micro Short story - 5.
`विष पान ।`
बैंक के वोशरूम में, कैशियर शिव अत्यंत दुःखी मन के साथ, हाथ में ज़हर की शीशी लिए  बैठा  था कि अचानक, वॉशररूम का दरवाजा किसी ने खटखटाया, " शिव, मैनेजर साहब ने फौरन तलब किया है..!"  किसी कठपुतली की भाँति, खुद को घसीटता हुआ, शिव मैनेजर की केबिन तक पहुंचा ।

" शिव, ये मि. शर्मा हैं, दो लाख रुपये का आज हिसाब नहीं मिल रहा है, वह गलती से तुमने इन्हें दे दिया था, अब कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होगी..!"

शर्मा जी बोले, "मुझे याद है..! लॉकर से निकाले हुए लाखों के ज़ेवर, जब मैं यहीं भूल गया था, तब आप ने ही तो सारे ज़ेवर सही-सलामत मुझे वापस किए थे..!"

शिव ने आँसू की बूँदो के साथ, मैनेजर साहब के टेबल पर, ज़हर की शीशी और स्यूसाईड नोट भी रख दिया, जिसे पढ़ कर, उपस्थित सभी लोग रो पड़े..!  

हाँ, आँसू  तो थे मगर, खुशी के,  क्योंकि, भोला-भाला शिव विष पान से बाल-बाल बच गया?

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २१-०४-२०१४.



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