6.1.13
हिन्दू सामग्री देवल देवी
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Sudheer Maurya 'Sudheer'
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सोच बदल लो वर्ना बन जाओगे इतिहास !
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तब नाबालिग दरिन्दे को सजा जनता देगी-ब्रज की दुनिया
मित्रों,अगर कानून उस दरिन्दे को जिसने कथित रूप से दामिनी के साथ दो-दो बार सर्वाधिक बेरहमी से बलात्कार किया और भीषण शारीरिक-मानसिक क्षति पहुँचाई, सजा नहीं दे सकता क्योंकि उसके हाथ बंधे हैं तो देश की 125 करोड़ जनता खोलती है कानून के बंधे हाथों को और हुक्म देती है कि इसको भी फाँसी पर चढ़ाओ। अगर कानून फिर भी ऐसा नहीं कर सकता तो सौंप दे इसको जनता के हाथों में,इन्साफ जनता खुद करेगी। नाबालिग रेपिस्ट का इन्साफ हम करेंगे। तीन-तीन बेटियों का बाप होने की दुहाई देनेवाले मनमोहन सिंह और सुशील कुमार शिंदे से मैं पूछना चाहता हूँ कि अगर दामिनी उनकी बेटी होती (हालाँकि ऐसा होना नितान्त असंभव है क्योंकि इनकी बेटियाँ तो हमेशा जेड प्लस सुरक्षा में रहती हैं) तब भी क्या सरकार का रवैया इसी तरह उदासीन रहता? क्यों नहीं बुलाया जा रहा है संसद का विशेष सत्र? क्या जरूरत थी विधि आयोग के अस्तित्व में रहने पर भी एक और आयोग बनाने की? ऐसे कितने आयोगों या समितियों की सिफारिशों को सरकार ने लागू किया है? क्या सरकार ने सिर्फ टालने की सोंचकर ऐसा नहीं किया है? मैं पूछता हूँ कि कानून आयोग बनाएगा या संसद बनाएगी? फिर आयोग बनाने जैसे विलंबकारी कदम उठाकर क्यों जनता के धैर्य की सरकार परीक्षा ले रही है? पिछले कई सप्ताहों से अनशन पर बैठे जागरूक युवाओं में से कोई अगर मर जाता है तो उसकी मौत के लिए जिम्मेदार कौन होगा,सोनिया गांधी का चमचा मनमोहन सिंह या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह या कई बेटियों का बाप मनमोहन सिंह? इसलिए वक्त की नजाकत को समझते हुए सरकार को तुरन्त संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए और बलात्कारियों को फाँसी की सजा का प्रावधान करना चाहिए। इतना ही नहीं इस नाबालिग दरिंदे को भी फाँसी पर चढ़ाने का इन्तजाम करना चाहिए। संसद देश से है देश संसद से नहीं इसलिए भी सरकार और संसद को जनभावना का ख्याल रखना चाहिए। अगर संसद ऐसा नहीं कर सकती तो नहीं चाहिए हमको ऐसी संसद और ऐसी व्यवस्था जो निर्दोषों पर कहर ढाती हो और बलात्कारी-हत्यारे को इनाम देती हो। याद रखिए कि जब तक दामिनी के कातिल जिन्दा हैं दामिनी की आत्मा को तब तक शांति नहीं मिल सकती। फिर उसकी अंतिम इच्छा भी तो यही थी कि इन दरिन्दों को जिन्दा जलाकर मारा जाए। अंत में कवयित्री डॉ. संगीता अवस्थी द्वारा रचित कविता "माँ की व्यथा" के कुछ अंश प्रस्तुत करना चाहूंगा-
माफ करना हे प्रभु
जिस साँप को मैंने जन्मा
उसने तमाम बहन बेटियों को
डसने से नहीं बख्शा
वो दरिन्दा भूल गया कि वो भी
किसी औरत की कोख से ही जन्मा है
लानत है उस वहशी को जो अपनी दरिन्दगी से
न देख पाया अपनी माँ-बहन का रूप
चीत्कार करती माँ की ममता को
तभी मिलेगा त्राण
जब दरिन्दे का शरीर होगा छलनी और
तड़प-तड़प कर निकलेंगे उसके प्राण।
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ब्रजकिशोर सिंह
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5.1.13
बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा..!
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तुम किस पंक्ति में हो ?
तुम किस पंक्ति में हो ?
एक आदमी नगर के विद्वान के पास बैठा युग के पतन पर गहरी चिंता कर रहा था।उसने
विद्वान् से कहा- देखो,हमारे परम्परागत मूल्यों का ह्रास हो रहा है।
विद्वान ने कहा- सही बात है।
उस आदमी ने कहा- ज्यादातर लोग उदात्त भावना खोते जा रहे हैं।
विद्वान ने कहा-सही बात है।
उस आदमी ने कहा-लोग भ्रष्ट और अनैतिक होते जा रहे हैं।
विद्वान ने कहा-सही बात है।
उस आदमी ने कहा-हमारा कानून गतिहीन या पंगु हो गया है।
विद्वान ने कहा-सही बात है।
उस आदमी ने कहा-हमारे नेता भी आदर्शों का अनुकरण नहीं कर रहे हैं और सत्ता लोभी
हो गए हैं।
विद्वान ने कहा-सही बात है।
उस आदमी ने कहा- गुरु और शिक्षक भी लोभी और असंस्कारी हो गए हैं।
विद्वान ने कहा-सही बात है।
उस आदमी ने कहा-नारी भी पाश्चात्य रंग में रंग के लज्जा के भूषण को छोड़ रही है।
विद्वान ने कहा-सही बात है।
उस आदमी ने कहा-व्यापारी मुनाफाखोर और मिलावटी सामान बेच रहे हैं।
विद्वान ने कहा-सही बात है।
उस आदमी ने कहा-प्रशासनिक अधिकारी कामचोर और रिश्वत लेने वाले हो गए हैं।
उस आदमी ने कहा-सही बात है।
उस आदमी ने कहा-आप मान रहे हैं कि ये सब सही है परन्तु इन बुराइयों से समाज को
मुक्त कैसे करे ?क्या आपके पास कोई समाधान ने है।
विद्वान ने कहा- हाँ ,मेरे पास उपयुक्त समाधान है ।
वह व्यक्ति खुश होकर बोला -हमे वह उपाय शीघ्र बताएं ताकि हम समाज को बदल सके?
विद्वान बोला - उपाय बताने से पहले मैं एक बात तुमसे जानना चाहता हूँ ?
वह व्यक्ति बोला -पूछिये ?
विद्वान बोला -इन सब में आप खुद को किस पंक्ति में पाते हैं?
वह व्यक्ति विद्वान के प्रश्न को सुनकर कुछ देर चुपचाप बैठा रहा और फिर सर झुका कर
चलता बना।
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Dr Dwijendra vallabh sharma
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4.1.13
INSTRUMENTAL-Aansu Bhari Hain Ye Jivan Ki Rahen.flv
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Markand Dave
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Labels: AANSOO, AANSU, AHMADABAD, Ele.Guitar, instrumental, JIVAN, MARKAND DAVE, MKTVFILMS
अबे पुतला नहीं, कोच है हमारा, नाम है डंकन फ्लेचर!
after 2nd ODI:
रोहित: मैच के साथ साथ सीरिज़ भी हार गए
आज!
धोनी: क्या बात है.. शाबाश लड़के..
बल्लेबाज़ी तेरी कितनी भी घटिया हो,
Observation power कमाल की है!
रोहित: यार आज तो मैं खेला ही नहीं, आज
तो मुझे मत बोल.इन सबने
घटिया बल्लेबाज़ी की, इनको बोल!
सहवाग: मुँह संभाल के बात कर रोहित,
मेरी पारी ठीक थी.
गंभीर: रहने दे वीरू, हम वहीं थे. आधे रन तो तेरे
Overthrow से बन रहे थे.
सहवाग: गौती, तेरी तरह बोल्ड तो नहीं हुआ,
विकेट तो बच गई!
धोनी: बस करो यार… तुम मियाँ-
बीवी दोनों को अगले मैच से निकाल देते हैं.
तसल्ली से बाहर बैठ कर लड़ना.
सहवाग: दिल्ली मे मैच है माही, दिल्ली के लड़के
तो खेलेंगे.
धोनी: हाँ, दिल्ली के लड़के तो खेलेंगे, विराट और
ईशांत.. दिल्ली के अंकल लोग बाहर बैठेंगे.
सहवाग: ये लड़के?? (कोहली की तरफ
इशारा करते हुए) चीकू ने क्या उखाड़
लिया था आज, वाइड बॉल पर आउट हुआ.
कोहली: क्या वीरू भाई, मेरी जगह परतो नज़र मत
डालो.. मेरी क्या ग़लती है,
पता ही नहीं था कि ये अकमल भी कैच वैच लेने
लग गया है.
जडेजा: किसी को कुछ पता नहीं था कैसे रन
बनाने हैं, मैने फालतू मे इतनी अच्छी गेंदबाज़ी की.
युवराज: साला यही दिन देखना बाकी रह
गया था कि जडेजा भी ताना मारे!
जडेजा: युवी भाई, आज मेरी तरफ से कोई
कमी नहीं थी. आज तो बनता है.
युवराज: चल भाई, तेरा दिन है आज.. जैसे
नासिर जमशेद का था.
रैना: यार ये नासिर का पता करवाओ,
इसका क्या बिगाड़ाहै हमने जो हर मैच मे लेने लग
जाता है.
धोनी: क्या पता करवाना है यार, ऐसेऐसे गेंदबाज़
होंतो कोई भी सर चढ़ कर ले सकता है.
रहाने: कोई नहीं सर, जो हुआ सो हुआ. अगले मैच
मे देख लेंगे उनको.
धोनी: तू तो 2 मैच से देख ही रहा है, और
कितना देखेगा. अब खेलने की तैयारी कर.
चलो अब सब अपना सामान संभालो और होटल
जा कर सो जाओ. अगलेमैच
की रणनीति दिल्ली जा कर बनायँगे. (भुवनेश्वर
कुमार का उठाहुआ हाथ देख कर) हाँ कुमार,
क्या हुआ?
भुवनेश्वर कुमार: सर जब से टीम मे आया हूँ, एक
बात पूछना चाहता था…
धोनी: हाँ हाँ, पूछ!
कुमार: ये पुतला किसका रखा रहता है हर ड्रेसिंग
रूम मे?
धोनी: अबे पुतला नहीं, कोच है हमारा.
नाम है डंकन फ्लेचर!
कहीं से टीपा...! लेकिन पता नहीं कहां से.. एफबी पे मिला.. लेकिन पता नहीं किसकी वाल से.. अब कहाँ से और कैसे मिला छोड़कर पढो..और मजे लो.बढ़ चुके हो तो ढंग से दो चार कमेंट मार दो..! और निकलो..भड़ास निकालो और काम करो अपना..! जय हो
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निर्लज्जता पर चर्चा ना करे ................
निर्लज्जता पर चर्चा ना करे ................
एक व्यक्ति डॉक्टर के पास गया ,डॉक्टर ने उसकी शारीरिक तकलीफ के बारे में पूछा।
रोगी ने सब बात डॉक्टर को बतायी और शीघ्र निरोगी होने का उपाय जानना चाहा।
डॉक्टर ने कहा -आपको अमुक दवाइयाँ समय-समय पर लेनी होगी और खाने -पीने
में परहेज रखना होगा यदि तुम ऐसा करोगे तो शीघ्र ठीक हो जाओगे।
रोगी बोला -डॉक्टर सा'ब, मैं आपके पास घर से चल कर आया,आपके साथ बैठकर
रोग की सांगोपांग चर्चा की ,हर तथ्य को समझा ,जाना, क्या इतने से बात नहीं बनेगी ?
डॉक्टर बोला - सिर्फ बिमारी को समझ लेने और जान लेने से स्वस्थ होना असंभव है,
स्वास्थ्य को दुरस्त करना है तो दवा भी लेनी होगी और परहेज भी करना होगा।
रोगी बोला -डॉक्टर सा'ब, आपका परामर्श मेरे गले नहीं उतर रहा है,ये तो हजारो सालो
पुरानी पद्धति है रोगों को शमन करने की ,आज हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं।आज
हमने बहुत प्रगति कर ली है अब बिमारी को ठीक करने के जीर्ण-शीर्ण विचार नहीं चाहिए।
मुझे सिर्फ लच्छेदार बातों से ठीक कर दीजिये।
डॉक्टर बोला-मेरे पास अभी तक ऐसी तकनीक नहीं आई है इसलिए मैं आपकी कोई
सहायता नहीं कर सकता हूँ।आप सिर्फ यमराज से अरदास कीजिये ....!!
आज यही हाल हमारा है।हम समस्याओं का सिर्फ बातों से समाधान चाहते हैं या फिर
हम परहेज को भूलकर सिर्फ दवा पर स्वस्थ होना चाहते हैं।हो सकता है दवा के बल पर
हम एक -दो बार ठीक हो जाए लेकिन परहेज से बचेंगे तो फिर रोगी हो ही जायेंगे इसमें
शंका की बात नहीं है।
हम समस्या के निवारण की प्रखर लालसा रखते हैं,उससे निजात पाने के लिए हम उस
व्यक्ति तक पहुँचने का प्रयास भी करते हैं और समस्या के निवारण के लिए दवा भी ले
लेते हैं मगर हम परहेज का प्रयास नहीं करते ,नतीजा यह होता है कि समस्या कम ज्यादा
बनी ही रहती है,उसका शमन नहीं होता।
बियर बार डांसर के अश्लील डांस, डांस-क्लब में फूहड़ता का भोंडा प्रदर्शन,कला के नाम
पर सिनेमा में परोसी जा रही कामुकता,गीत के नाम पर कामुक स्वर लहरियां,हास्य के
नाम पर द्वि अर्थी संवाद ,नारी देह का सार्वजनिक स्थलों पर फूहड़ प्रदर्शन,खेलो में चीयर
गर्ल, इन सबको छोड़े बिना हमे समस्यां से निजात चाहिए ,कैसे होगा ...?
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Labels: chintan
सिर्फ 20 रूपए में बेच दिया ईमान !
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3.1.13
मिट्टी के शेर घर में भी ढेर-ब्रज की दुनिया
मित्रों,इन दोनों देशों ने हमारे घरेलू मैदान के शेरों को माटी का शेर साबित कर दिया है। इन दिनों न तो हमारी गेंदबाजी ही चल पा रही है और न तो बल्लेबाजी ही,क्षेत्ररक्षण के क्षेत्र में भी हमारी स्थिति दयनीय होती जा रही है। समझ में नहीं आता कि करोड़ों का सालाना पैकेज पानेवाले हमारे खिलाड़ियों को हो क्या गया है?क्यों उनको मैदान में उतरते ही साँप सूंघ जाता है?हालाँकि कप्तान धोनी ने अपना कर्त्तव्य आज भी बखूबी निभाया है लेकिन सिर्फ कप्तान के ही अच्छा खेलने से कोई टीम क्या जीत सकती है?क्यों टीम के बाँकी बल्लेबाज लगातार फ्लॉप हो रहे हैं समझ में नहीं आता?क्या उनका मन अब खेलने में नहीं लग रहा और उनको सिर्फ विज्ञापनों में काम करना ही रास आ रहा है।
मित्रों,अब टीम में प्रयोग करने का समय भी नहीं रह गया है। अब टीम के चयनकर्त्ताओं को टीम में आमूल-चूल परिवर्तन करने पड़ेंगे। खिलाड़ियों के साथ-साथ टीम के कोच को यथाशीघ्र बदलने की आवश्यकता है और टीम में अच्छे गेंदबाजी,बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण प्रशिक्षकों को भी नियुक्त करने की जरुरत जान पड़ती है तभी टीम में फिर से जान आ सकेगी और भारतीय टीम की गाड़ी एक बार फिर से जीत की पटरी पर सरपट भाग सकेगी।
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ब्रजकिशोर सिंह
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मानव इन्द्रियाँ : निग्रह या दमन
मानव इन्द्रियाँ : निग्रह या दमन
हमें ज्ञान कराने वाली पाँच इन्द्रियाँ है-चक्षु (देखना),श्रोत्र (सुनना),घ्राण (सूंघना),
रसन (स्वाद),स्पर्शन(स्पर्श का अनुभव करना)इन पाँचो शक्तियों के अलग-अलग
अधिष्ठान अंग होते हैं -आँख,कान,नाक,जीभ,त्वचा।ये ज्ञानेन्द्रियाँ सूक्ष्म होने से
दिखाई नहीं देती है हम इनके अंग को देख सकते हैं।इन इन्द्रियों का सम्बन्ध
पञ्च महाभूतों से होता है-आकाश,वायु,अग्नि,जल और पृथ्वी।
इसी तरह पाँच कर्मेन्द्रियाँ होती है -हाथ,पेर,वाणी,लिंग और गुदा।
प्रश्न यह उठता है कि हमें इन इन्द्रियों के साथ कैसे जीना चाहिए क्योंकि इन
इन्द्रियों के कारण ही धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष रूपी पुरुषार्थ बने हैं।इन चारों
पुरुषार्थों के बिना संसार का सृजन नही हो सकता है।
क्या हम इन्द्रियों का दमन करके व्यवस्थित रूप से जी पायेंगे? भारतीय दर्शन
ने इन्द्रियों का दमन करने का नहीं बल्कि इनका निग्रह (control)करने का
निर्देश दिया है।क्योंकि दमन करने से घुटन एवं कुण्ठा पैदा होती है और जिस
कामना का दमन किया जाता है वह हमसे ही शक्ति प्राप्त करके और बलवती
होती जाती है।हम उससे मुक्त नहीं हो पाते बल्कि उसमें और उलझ जाते हैं
और अपनी उर्जा ख़त्म करते रहते हैं।
धृति: क्षमा दमोस्तेयं शौचमिन्द्रिय निग्रह: के अनुसार इन्द्रियों का निग्रह
करना चाहिए ,दमन नहीं।न करने योग्य कर्म को करने से रोक कर ,करने
योग्य कर्म में ही इन्द्रियों को लगाना और कार्यरत रखना 'निग्रह' है।इसी
को आत्म नियन्त्रण या निज अनुशासन का पालन करना कहते हैं।इन्द्रियों
का निग्रह करने में विवेक और धैर्य सर्वाधिक सहायक रहते हैं।मन को वश
में रखना ही इन्द्रिय निग्रह करना है।
यहाँ यह शंका प्रस्तुत की जा सकती है की मन को वश में रखना बहुत कठिन
होता है।किसी सुंदर वस्तु को देखकर आकर्षित हो जाना स्वाभाविक है।किसी
सुंदर स्त्री को देखने या उसके सम्पर्क में रहने और घनिष्ठता होने की स्थिति में
काम वासना सम्बन्धी विचार मन में आ ही जाते हैं।अब इस कामना का दमन
कैसे करे ?
इसका समाधान यह है कि दमन करने की जरूरत नहीं सिर्फ विवेक से काम
लेकर निग्रह करने की जरूरत है जैसे अपनी सुंदर युवा बहन और बेटी को
देखने और सम्पर्क में रहने पर भी मन में कामुक विचार नहीं आता क्योंकि
विवेक ऐसा विचार नहीं करने देता।मन तभी वश में रहकर उचित विचार
करता है जब विवेक से काम लिया जाए क्योंकि विवेक ही मन को सही विचार
करने की प्रेरणा देने और सही आचरण करने के लिए विवश करने की क्षमता
रखता है।विवेक के साथ धैर्य का होना भी जरूरी होता है क्योंकि धैर्य विवेक
का बल होता है।
हमारा मन हमारे अवचेतन मन में दबे संस्कारों और अतृप्त इच्छाओं से
प्रभावित और संचालित रहता है अत:जो अच्छे संस्कार वाले होते हैं उन्हें
इन्द्रिय निग्रह करने के लिए प्रयास नहीं करना पड़ता बल्कि ऐसा स्वभावत:
स्वयमेव होता रहता है ब्रह्मचार्य इसी स्वभाव और आचार विचार को कहते हैं।
महाराज शिवाजी मुगलों से युद्ध कर रहे थे उस युद्ध में मुगल राजा हार गये
थे।शिवाजी की सेना ने मुगल राजा के महल से युवा सुन्दरी को बंधी बना
लिया और उसे शिवाजी को भेंट देने के लिए अपने साथ ले आये।शिवाजी ने
उस सुन्दरी को देख सैनिको से पूछा -ये कौन हैं ?
सैनिको ने जबाब दिया- मुग़ल राजा युद्ध में हार गया और जान बचा कर
भाग गया हम उसके महल से इसे आपके लिए बंदी बना लाये हैं।
शिवाजी ने कहा -आप लोगों ने यह गलत किया है।यह नारी तो मेरे लिए
माँ के समान है ,आप इसे आदर सहित वापिस पहुँचा देवे।
यह एक अनुपम उदाहरण है इन्द्रिय निग्रह का। हमे समाज को और
नारी को देखने का नजरिया भी बदलना होगा।केवल दण्ड व्यवस्था से पूरा
काम बनने वाला नहीं है।
इस लेख में कुछ अंश निरोगधाम "स्वास्थ्य रक्षक "अंक से लिए हैं।
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Labels: manthan
2.1.13
जनसंदेश टाइम्स में सैलरी को लेकर पेजीनेटरों का हंगामा
अभी मामला ये है कि सोमवार को नगद सैलरी पाने वाले पेजीनेटर अमन कुमार कुमार को नवम्बर की सैलरी नहीं मिली. नाराज अमन ने सोमवार को कार्यालय में सैलरी के लिए हंगामा कर दिया, जिससे काम प्रभावित होने लगा. जिसके बाद अखबार की ऐसी-तैसी कर देने वाले विजय विनीत ने अपने पास से अमन को पैसा देकर मामले को बिगड़ने से बचाया. और अन्य लोगों को आश्वासन की घुट्टी पिलाकर मामले को सलटाया, जिसके बाद किसी तरह अखबार का काम पूरा हुआ.
मंगलवार की रात फिर बवाल हो गया. सात पेजीनेटरों ने सैलरी को लेकर हड़ताल कर दिया. उन लोगों ने काम करने से इनकार कर दिया. प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए. सातों पेजीनेटर किसी भी तरीके से बिना सैलरी के मानने को तैयार नहीं थे. वे आश्वासन देने वाले विजय विनीत की भी बात मानने को तैयार नहीं थे. सूत्रों का कहना है कि बाद में संपादक एवं सीजीएम के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह मामला सलटा. इन लोगों ने किसी तरह पैसे का जुगाड़ कर सभी सातों पेजीनेटरों को उपलब्ध करवाया, जिसके बाद अखबार का फिर से काम शुरू हो सका.
वैसे भी सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से अखबार की आंतरिक स्थिति है तथा अखबार में जूनियर लेबल के लोगों का हस्तक्षेप बढ़ा है, उससे अखबार को चला पाना बहुत ही मुश्किल है. पेज के लेआउट का एबीसी नहीं जानने वाले लोग इसमें हस्तक्षेप करने लगे हैं तभी से इस तरह की स्थिति पैदा हुई है. सूत्र यह भी बताते हैं कि प्रबंधन ने अब इस अखबार को घाटे की स्थिति में चलाने के मामले में हाथ खड़ा कर लिया है. कहा जा रहा है कि मार्च तक इस अखबार को ''पैसे लाओ और अखबार चलाओ'' की स्थिति में लाए जाने का निर्देश दे दिया गया है. अगर मार्च तक स्थिति नहीं सुधरी तो संभव प्रबंधन अपने इस सफेद हाथी पर ताला जड़ देगा.
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yashwant
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INSTRUMENTAL YE NAYAN DARE DARE
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Markand Dave
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Labels: GUITAR, instrumental, KOHARA, MARKAND DAVE, MKTVFILMS, YE NAYAN DARE DARE
बुद्धिमान कौन ? क्या कहते हैं शास्त्र ...........
बुद्धिमान कौन ? क्या कहते हैं शास्त्र ...........
जिसे विद्याध्ययन,साहित्य,संगीत,कला,सांसारिक वैभव,सुखों के भोग,धन-संपदा,
सुन्दर वस्तुएं,सुन्दर स्त्री,और सुख-दु:ख का अनुभव -इन सब में रूचि न हो वह या
तो सिद्ध महापुरुष है या फिर मानव रूप में मूढ़ पशु है।सामान्य पुरुष इनसे अवश्य
आकर्षित होता है पर जो सामान्य रूचि लेता है वह बुद्धिमान है।
जो प्राप्त वस्तु से संतुष्ट रहता है और अप्राप्त के लिए दुखी नहीं रहता ,जिस हाल में हो
उसी में प्रसन्न रहता है और सब कुछ ईश्वर की इच्छा मान कर राजी रहता है वह
व्यक्ति दुख से बचा रहता है और जो व्यक्ति दुख से बचना जानता है वह बुद्धिमान है।
जो बात के मर्म को तुरन्त समझ लेता है,सुनने योग्य बातों को एकाग्रचित हो सुनता
हैऔर व्यर्थ की बातों में रूचि नहीं रखता,खूब सोच-विचार करके ही कोई काम शुरू
करता है और हाथ में लिए काम को अधूरा नहीं छोड़ता और बिना पूछे किसी को
सलाह नहीं देता,वही बुद्धिमान है।
जो नष्ट हुयी वस्तु के लिए शोक नहीं करता,जो विपत्ति पड़ने पर धैर्य और विवेक का
साथ नहीं छोड़ता,जो पराई वस्तु का लालच नहीं करता और सदा शुभ कर्म करके
अपने पुरुषार्थ से ही कोई वस्तु प्राप्त करता है और जो सफल होकर इतराता नहीं,वही
बुद्धिमान है।
जो यश और आदर सम्मान मिलने पर अभिमानी नहीं होता,आदर न मिलने पर
अप्रसन्न नहीं होता,जो अपनी विद्या का अहंकार नहीं करता और अपने धन का
दुरूपयोग नहीं करता,जो गहन गंभीर और उदार स्वभाव रखता है और किसी के प्रति
भी वैर भाव नहीं रखता ,वही बुद्धिमान है।
जो अपने द्वारा किये गए उपकार और दूसरों के द्वारा अपने प्रति किये गए अपकार को
याद नहीं रखता , जो अपनी बुराईयों और दूसरों की भलाइयों को भूलता नहीं ,जिसके
साथ रहने से किसी का अहित नहीं होता बल्कि भला ही होता है और जो किसी भी
समस्या को ठीक ढंग से सुलझा लेता है,वही बुद्धिमान है।
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1.1.13
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Dr Dwijendra vallabh sharma
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भूखे भजन जपो गोपाला, पीते रहो विष का प्याला !!
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Sachin Agarwal
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मुसलमान की खामोशी
मैने उन्हें एक क्षण तक घूर कर देखा फिर कहा --मियां दिक्कत यही है तुम तमाम बौद्धिकता के बाद बांटने पे आ जाते हो और हम हजार धोखे खाकर जोडने की बात करते हैं।२०-२१ साल पुरानी ये बात मुझे आज याद आने की खास वज़ह है।कुछ लोगों ने इस गैंग रेप कांड की आड में शरीयत और इस्लामी कानून की बात शुरू कर दी तो कुछ सेना और सरकार के बहाने भारत राज्य के विरूद्ध माहौल बनाने लगे।कुछ नामचीन शायर तो ये कह उठे -----"अभी और बेज़ार होने दो इस कौम को ,ये खुद कहेंगे हुसैन हमारे हैं।"कुछ दिन पहले अहमद बुखारी कह उठे कि भारत इसलिये धर्मनिरपेक्ष है क्योंकि हम अल्पसंख्यक हैं जिस दिन मुसलमान हिंदुओं के बराबर हो गये उस दिन यहां इस्लामिक क्रांति होगी और इस दारूहरब को इस्लाम कंट्री बना लेंगे।ताजा बयान अकबरुद्दीन ओवेसी का है और ये वीडियो सोशल साइट्स पर उपलब्ध है जिसमें कहा गया है कि १५ मिनट को पुलिस हटा ली जाये तो २५ करोड मुसलमान १०० करोड हिंदुओं को काट डालेंगे।
मित्रों चिंतनीय बात ये नहीं कि ओवेसी ने क्या कहा?चिंतनीय ये भी नहीं कि अहमद बुखारी ने क्या कहा ? इस बात से भि चिंतित -परेशाचिंतनीय बात है आम न होने की ज़रूरत नहीं कि ये शायर चंद तालियों और पैसों के लिये हमारी बेज़ारी और हुसैन की--स्वीकार्यत की बात कर रहेर।पर मुसलमान की खामोशी।मुख्यधारा मीडिया
का दोगलापन जो इन बातों की चर्चा तक नहीं करता और राजनीतिक पार्टियों का तुष्टिकरण ।मुसलमानों को बहुत उत्साहित होने की ज़रूरत नहीं --गोधरा अगर गुजरात बनसकता है तो असुरक्षा बोध से ग्रस्त हिंदू ---भी कत्ले आम कर सकता है।वक्त रहते ऐसे बयानों को रोकने और ऐसे चिंतन को नष्ट करने की ज़रूरत है-इस सुचिंतित चुप्पी से सबका अहित है।
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Arvind pathik
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