20.7.17
silence of National media on Gange rape and murder in Shimla
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यशवंत सिंह yashwant singh
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19.7.17
17.7.17
एनकाउंटर की जांच करने पहुंचे पत्रकार के पीछे पड़ी पुलिस
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यशवंत सिंह yashwant singh
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पहाड़ के लिए अभिशाप है 'पलायन'
ओम प्रकाश उनियाल
'पलायन' शब्द पहाड़ के लिए अभिशाप है। राज्य बनने के बाद निरंतर बढ़ते पलायन को थामने में किसी भी सरकार को कामयाबी नहीं मिली। पहाड़ के लोगों को दिवास्वप्न दिखाकर यहां के राजनीतिज्ञ अपना उल्लू सीधा करते रहे हैं। केवल विकास की गिनती कागजों पर ही करते रहे। पहाड़ों में कृषि, बागवानी को बढ़ावा देने, लघु एवं मध्यम उद्योग लगाने, उच्च व तकनीकी रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों को लेकर पहाड़ के भोले-भाले लोगों के हाथों में झुनझुना थमाते रहे उसका परिणाम सबके सामने है। गांव खाली होते जा रहे हैं। घर उजाड़, खेत बंजर हो चुके हैं। कुछ गांवों में तो उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके बुजुर्ग ही देखने को मिलेंगे।जो अपने पैतृक निवास नहीं छोड़ना चाहते।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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सावन की फुहार में ‘कजरी‘ का महत्व
सावन चल है जो इस भीषण तपिश से राहत ही नहीं प्रदान करेगा बल्कि अपनी मखमली हरियाली से मन मयूर को नाचने के लिए विवश कर देगा और फिर सावन नाम आते ही ‘कजरी‘ गीतों का उनसे जुड़ जाना स्वाभाविक ही है। गाँवों में जब युवतियाँ सावन में पेड़ों पर झूला झूलते समय समवेत स्वर में कजरी गाती है तो ऐसा लगता है कि सारी धरती गा रही हैं, आकाश गा रहा है, प्रकृति गा रही है। न केवल मानव प्रभावित है बल्कि समस्त जीव-जन्तु भी सावन की हरियाली व घुमड़-घुमड़ कर घेर रहे बादलों की उमंग से मदमस्त हो जाते हैं।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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बेरोजगार पत्रकारों के साथ खिलवाड़ करते मीडिया हाउस
मीडिया हाउस नौकरी के लिए विज्ञापन तो इस तरह से देते हैं, जैसे उनको तुरंत बहुत सारे मीडिया कर्मियों की जरूरत है।लेकिन रेज्यूमे भेजने के बाद फोन का इंतजार करते रहो। फोन कहां आता है। फोन तो जुगाड़ वालों के पास जाता है। भड़ास 4 मीडिया पर आप को मीडिया हाउसों के नौकरी वाले विज्ञापन मिल जाएगें । लेकिन रेज्युमे भेजने के लिये जो ई मेल आईडी दी गई होती है, जरूरी नहीं कि वह सही हो।
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यशवंत सिंह yashwant singh
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जिस पत्रकार के लिए मीडियाकर्मी सड़क पर लड़ रहे थे, वह पुरस्कार पाने में व्यस्त था
जिस पत्रकार की पिटाई के लिए मीडियाकर्मी मार्च निकाल रहे थे, वह सम्मान पाने में व्यस्त था!
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यशवंत सिंह yashwant singh
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16.7.17
भास्कर को सबक सिखाने वाली महिला आईएएस आफिसर का ट्रांसफर
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12.7.17
'के न्यूज' प्रबंधन का कुटिल फार्मूला
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किसानों के गुस्से के कारण?
कृष्ण चन्द्र दहिया
गुजरात के पटेल , मराठे व जाट किसान आरक्षण मांग रहे हैं जबकि इन्होंने 1980 तक कभी भी ऐसी कोई मांग नहीं की थी। इसका कारण ये था कि उस दौर तक विकास का पैमाना रु नही था और समाज का भाईचारा अहम बात थी। भले ही सरकारी पंचायत थी लेकिन हरियाणें में उनकी कीमत ही नहीं थी और लोग स्थानीय भाईचारा पंचायतों से अपने मामले निपटवाते थे। उससे मामले स्थाई रुप से निपटते थे और कोई पैसा नही लगता था। उस दौर में खाप पंचायत दहेज खत्म करने के आन्दोलन चलाती थी। आज सरकारी पंचायत का प्रधान बनने के लिये लोग 10 लाख तक खर्च करते हैं। जाहिर है भला , ईमानदार , मीठा बोलने वाला , निष्पक्ष आदमी तो ऐसे उटपटांग मामले में पडेगा नही? दूसरे अर्थों में गांव में पैसे वाले विकास के नारे लगा कर समाज पर कब्जा करने की कोशिश में हैं।
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प्रिन्ट मीडिया की जान खतरे में, हजारों अखबार होंगे बंद, केवल बचेंगे बड़े हाथी!
जोधपुर। डीएवीपी की दमनकारी नई विज्ञापन नीति एवं मोदी सरकार द्वारा लागू किया गया जीएसटी प्रिन्ट मीडिया की जान लेना शुरू कर चुका है। इसे अघोषित इमरजेन्सी कह दिया जाये तो कोई अतिश्योक्ति न होगी। प्रिन्ट मीडिया के लिए राज्य एवं केन्द्र सरकार ने हमेशा सर्कूलेशन स्लेब के आधार पर विज्ञापन दरें तय करने का प्रावधान रखा। अखबारों की सीनियारटी पर कभी गौर नहीं किया। मजबूर होकर अखबार मालिक विज्ञापन दर हासिल करने के फेर मे कुछ सर्कूलेशन बढा कर रेट हासिल करते थे। यदि सीनियारटी के आधार पर रेट तय होता तो शायद ही कोई अखबार वाला इस फेर मे पड़ता।
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11.7.17
जी एमपी-सीजी के एसाइनमेंट हेड प्रदीप परिहार का इस्तीफा
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अमर उजाला से इस्तीफा देकर दैनिक भास्कर में स्पेशल करेस्पांडेंट बने अमित निरंजन
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डिफेक्टिव प्रोडक्ट भेजने वाली कंपनियों से सावधान रहें
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यशवंत सिंह yashwant singh
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10.7.17
इजराइल की ओर भारत के बढ़े हाथ दरअसल खुद को भी पहचानने की तरह है
भारत और इजराइल के रिश्ते : संस्कृति के दो पाट
-संजय द्विवेदी
इजराइल और भारत का मिलन दरअसल दो संस्कृतियों का मिलन है। वे संस्कृतियां जो पुरातन हैं, जड़ों से जुड़ी है और जिन्हें मिटाने के लिए सदियां भी कम पड़ गयी हैं। दरअसल यह दो विचारों का मिलन है, जिन्होंने इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए सपने देखे। वे विचार जिनसे दुनिया सुंदर बनती है और मानवता का विस्तार होता है। भारत की संस्कृति जहां समावेशी और सबको साथ लेकर चलने की पैरवी करती है, वहीं इजराइल ने एक अलग रास्ता पकड़ा, वह अपने विचारों को लेकर दृढ़ है और आत्ममुग्धता की हद तक स्वयं पर भरोसा करता है। उसके बाद आए विचार इस्लाम और ईसायत की आक्रामकता और विस्तारवादी नीतियों के बाद भी अगर भारत और इजराइल दोनों इस जमीन पर हैं, तो यह सपनों को जमीन पर उतर जाने जैसा ही है। ये दोनों देश बताते हैं कि लाख षडयंत्रों के बाद भी अगर विचार जिंदा है, संस्कृति जिंदा है तो देश फिर धड़कने लगते है। वे खड़े हो जाते हैं। दोनों देश दरअसल अपनी सांस्कृतिक परंपरा के आधार पर आज तक जीवित हैं और निरंतर उसका परिष्कार कर रहे हैं। तमाम टकराहटों, हमलों, विनाशकारी षडयंत्रों के बाद भी यहूदी और हिंदू संस्कृति एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक सत्य की तरह वैश्विक पटल पर आज भी कायम हैं।
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हिंदुस्तान हल्द्वानी के राजीव को प्रमोट कर नोएडा भेजा गया
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8.7.17
एक रुका हुआ फैसला : अनिवार्य विवाह पंजीकरण
अजय कुमार
आजादी के बाद से देश की आधी आबादी की दयनीय हालत को लेकर तमाम सरकारें समय-समय पर चिंता जताती रही हैं। इसको लेकर कुछ प्रयास भी हुए और कानून भी बने, लेकिन महिलाओं को आज तक समाज में दोयम दर्जे का ही समझा जाता है। कई बार तो ऐसा लगता है कि पुरूष प्रधान देश में महिलाओं की हैसियत उपभोग की वस्तु से अधिक नहीं है।उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों से लेकर पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक हक की लड़ाई तक में पुरूषों के सामने हाथ फैलाना पड़ता हैं। पुरूषो की प्रधानता के चलते महिलाएं कई तरह की उत्पीड़न का शिकार होती है।
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घूंघटवाली एंकर!
महिला एंकर ने घूंघट ओढ़े डिबेट शो की शुरुआत कर हरियाणा सरकार की तुच्छ मानसिकता को मारा तमाचा (देखें तस्वीरें और वीडियो)
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5.7.17
महुआ के मालिक पीके तिवारी गाजीपुर कोतवाली में बैठे दिखे
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