Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

12.11.17

बस्तर पर जर्मनी में मंथन : आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान के संवर्धन की जरूरत



जर्मनी के हेमबर्ग यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘द विसडम आफ दी आदिवासी’ विषयक संगोष्ठी में जहां दुनिया के अगल-अलग देशों में समाज की मुख्यधारा से बिलग हो कर रहे आदिवासियों की पारंपरिक ज्ञान, रीती रिवाज, जीवनशैली पर मंथन किया जा रहा था, वहां डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने बस्तर के आदिवासियों की आर्थिक सामाजिक स्थिति से लेकर उनके पारंपरिक औषधिय व वनस्पतियों से संबंधित ज्ञान की पुरजोर से दुनिया के सामने रखा. डॉ त्रिपाठी से संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर क्षेत्र की पहचान ही जल-जंगल-जमीन और इसके आदिकाल से संरक्षक आदिवासियों को लेकर है. बस्तर के जंगली क्षेत्र में गांडा, मारिया, मुरिया, गोंड, भतरा, हलबा, परजा, दोरला, बाइसन हार्न मारिया जनजातियां निवास करती है. मानव उत्पत्ति विज्ञान के अनुसार बाइसन हार्न मारिया मानव उत्पत्ति काल की सर्वाधिक पुरानी जनजाति है.

RTI: Govt couldn’t frame National Litigation Policy in 07 years

The RTI information provided by the Department of Legal Affairs to activist Dr Nutan Thakur reveals that the Central Government has not been able to frame a National Litigation Policy despite work going on for the last 07 years.

press club of india election 2017 : मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए भड़ास वाले यशवंत ने भरा पर्चा

इसी नवंबर महीने की पच्चीस तारीख को होने वाले प्रेस क्लब आफ इंडिया के सालाना चुनाव की गहमागहमी तेज हो गई है.  भड़ास फॉर मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने शनिवार को अपना नामांकन दाखिल किया. यशवंत मैनेजिंग कमेटी के सदस्य पद हेतु चुनाव लड़ेंगे. दैनिक जागरण, अमर उजाला और आई-नेक्स्ट जैसे अखबारों में सब एडिटर से लेकर चीफ रिपोर्टर और संपादक पद पर आसीन रह चुके यशवंत फिलहाल कई न्यूज चैनलों और अखबारों के सलाहकार के रूप में भी कार्यरत हैं. साथ ही साथ वह दशक भर से भड़ास फार मीडिया के जरिए मीडिया इंडस्ट्री की अच्छी-बुरी हलचलों को जनता के सामने लाने का काम कर रहे हैं.


हिमाचल प्रदेश में बीजेपी के गुंडों ने इस पत्रकार को बुरी तरह पीटा


मजीठिया वेज बोर्ड मांगने पर अखबार मालिक ने रिपोर्टर को आफिस में घुसने से रोका



आरटीआई : सुषमा ट्विटर हैंडल आधिकारिक, विदेश मंत्रालय में 02 अन्य

विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर को आरटीआई  में दी गयी सूचना के अनुसार मंत्रालय अपनी मंत्री सुषमा स्वराज के ट्विटर हैंडल को आधिकारिक रूप से स्वीकार करता है. नूतन को दी गयी जानकारी में अपर सचिव (लोक राजनय) कपिल शर्मा ने बताया कि मंत्रालय के दो आधिकारिक ट्विटर हैंडल हैं- @MEAIndia  तथा  @indiandiplomacy.

उन्होंने बताया कि ये ट्विटर हैंडल मंत्रालय द्वारा अपने कार्यों तथा गतिविधियों को बेहतर तरीके से करने के लिए विदेश प्रचार तथा लोक राजनय (एक्सपीडी) प्रभाग द्वारा बनाए गए थे. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि  मंत्रालय द्वारा इन ट्विटर हैंडल को कोई आधिकारिक मान्यता नहीं दी गयी है क्योंकि ये सम्बंधित अफसरों द्वारा अपने सरकारी काम में सूचना के प्रसारण तथा सोशल मीडिया पर लोगों के साथ संपर्क में आने के लिए तैयार किये गए थे. उन्होंने बताया कि सुश्री स्वराज का आधिकारिक ट्विटर हैंडल @SushmaSwaraj है.

जिसे जब मौका मिलता है, लूट लेता है




राहुल के कारण झुकी मोदी सरकार

-फ़िरदौस ख़ान
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के गुजरात दौरे से केंद्र की भाजपा सरकार में हड़कंप मचा हुआ है. जीएसटी में बदलाव इसकी ताज़ा मिसाल है. पिछले दिनों राहुल गांधी ने गुजरात में जीएसटी के मौजूदा स्वरूप में बदलाव करने का वादा किया था. उन्होंने कहा था कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए जीएसटी में बड़े बदलाव किए जाएंगे. उन्होंने कहा था कि सत्ता में आने पर हम ऐसा जीएसटी लेकर आएंगे, जिससे आपको फ़ायदा होगा. आप के मुताबिक़ हम काम करेंगे. हम आपकी बात को सुनेंगे.

कोलकाता मेट्रो में 7 वर्षों में कोई दुर्घटना नहीं

मेट्रो रेलवे, कोलकाता द्वारा लखनऊ स्थित एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर को आरटीआई  में दी गयी सूचना के अनुसार कोलकाता मेट्रो में पिछले 07 वर्षों में कोई दुर्घटना नहीं हुई है. नूतन ने रेलवे मंत्रालय से 01 जनवरी  2010 से अब तक हुई ट्रेन दुर्घटनाओं के सम्बन्ध में बनायी गयी जाँच समिति की सूची तथा इन जाँच आख्या एवं इनके आधार पर की गयी कार्यवाही की प्रति मांगी थी. मंत्रालय से इसे सभी रेलवे जोन को अग्रसारित कर दिया था. जहाँ अन्य सभी रेलवे जोन द्वारा अलग-अलग संख्या में दुर्घटना होने की बात बताई गयी, वहीँ कोलकाता मेट्रो अकेला ऐसा रेलवे जोन है जिसके द्वारा इस सम्बन्ध में शून्य सूचना दी गयी. इस अवधि में सर्वाधिक 83 ट्रेन दुर्घटनाएं उत्तर पश्चिम रेलवे जोन, जयपुर में हुईं जबकि पूर्वात्तर रेलवे जोन गोरखपुर में 62 दुर्घटनाएं हुईं. भारत में वर्तमान में 17 रेलवे जोन हैं.

DEMONETIZATION : Measuring its impact on real estate sector

Demonetization completes one year. On 8th November 2016, Prime Minister Narendra Modi had announced the closure of 500 and 1000 notes. Modi’s decision to take action on black money has ushered a new era for the real estate industry in India. The rolling out of major policy reforms such as the Real Estate Regulation and Development Act (RERA) and the Goods and Services Tax (GST) compounded the aftermath effects of Demonetization.

यूपी में कुपोषण एक महामारी, लेकिन सियासी मुद्दा नहीं

अजय कुमार, लखनऊ
दुनिया 21वीं सदी में पहुंच गई है। विज्ञान नित्य नये चमत्कार कर रहा है। चांद पर घर बसाने की बात हो रही है तो अन्य ग्रहों का भी पता चला है,जहां जीवन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। यह सब बाते और दावे काफी उत्साहित करने वाले लगते ही नहीं होते भी हैं। विज्ञान थ्योरी पर चलता है और इसके दावे प्रमाणित होते हैं, परंतु कुछ दावे ऐसे भी होते हैं जिनका कोई ओर-छोर नहीं होता है। ऐसे दावे तमाम मौकों पर हमारे नेतागण करते मिल जाते हैं। धरती पर स्वर्ग उतार लाने की बात होती हैं। वर्षों बरस तक ‘गरीबी हटाओं, देश बचाओं का’ का नारा देकर नेतागण सत्ता पर काबिज रहते हैं। पूरी दुनिया में एक मात्र अपना ही मुल्क होगा, जहां दरिद्र को नारायण की उपमा दी जाती होगी। फिर भी देश की बड़ी आबादी को भूखे पेट सोना पड़े, उसे न शुद्ध जल मिले न पौष्टिक खाना, छत और स्वास्थ सेवाओं की बात तो दूर की कौड़ी हो तो उस देश में कुपोषण जनित बीमारियों पर चर्चा करना बेईमानी लगता है। वहां  संयुक्त राष्ट्र हमें आइना दिखाते हुए कहता हो कि भारत में हर साल कुपोषण के कारण मरने वाले पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या दस लाख से भी ज्यादा है। दक्षिण एशिया में भारत कुपोषण के मामले में सबसे बुरी हालत में है। तो हमारा सिर शर्म से झुक जाना चाहिए लेकिन अफसोस ऐसा होता नहीं है।

जौहर करने वाली रानी पद्मावती का इतिहास

पद्मावती को इतिहास में पद्मिनी नाम से भी संबोधित किया गया है .12वी और 13वी सदी में दिल्ली के सिंहासन पर दिल्ली सल्तनत का राज था | सुल्तान ने अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए कई बार मेवाड़ पर आक्रमण किया | इन आक्रमणों में से एक आक्रमण अलाउदीन खिलजी ने सुंदर रानी पद्मावती को पाने के लिए किया था वरिष्ठ पत्रकार अनूप नारायण सिंह आप को बता रहे है पूरा इतिहास......

पांच दिन की अवैध हिरासत उत्पीड़न के बाद पुलिस ने इशराक को आज़मगढ़ कोर्ट में पेश किया

आजमगढ़/लखनऊ : कल 2 बजे के करीब इशराक को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया. इस दरम्यान रिहाई मंच के राजीव यादव से इशराक से बात हुई. इशराक ने बताया कि 7 तारीख को 7 बजे के करीब पुलिस ने उसे उसके घर (ग्राम कुजियारी) से उठाकर फरिहा रेलवे पुलिस चौकी ले गई जहां तीन घंटे रखने के बाद रात दो बजे बरदह थाने ले गई.  जहाँ एसओजी ने उससे अबू जैद के बारे में पूछताछ की. उससे बार-बार जैद के बारे में और उससे लिंक के बारे में पूछा गया. 2 दिन बरदह थाने और 2 दिन गंभीरपुर थाने में उसे रखा गया.

10.11.17

मैं भी तो हूं

9.11.17

भड़ास के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइव करें, नीचे की तस्वीर पर क्लिक करें

 भड़ास के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइव करें

प्रेस काउंसिल की तर्ज पर बने जर्नलिस्ट काउंसिल

इलाहाबाद। श्रृंग्वेरपुरधाम में हुए पत्रकार सम्मेलन में पत्रकारों का दर्द छलका। कहा गया कि हर महीने लाख-हजारों रूपए पगार उठाने, एयरकंडीशन दफ्तर और कंफर्टेबल चेयर पर बैठकर काम करने वाले पत्रकारों को श्रमजीवी पत्रकारों की श्रेणी में रखा गया है, पर देहात-कस्बों में बिना किसी पगार व सुविधा के कई साल से काम कर रहे पत्रकारों को श्रमजीवी पत्रकार का दर्जा नहीं दिया जाता। जबकि देश के अस्सी फीसदी हिस्से में ऐसे ही पत्रकार काम कर रहे हैं। ऐसे पत्रकारों के साथ भेदभाव कब तक किया जाएगा? पत्रकारों ने आवाज उठाई कि मौजूदा हालात के मद्देनजर प्रेस काउंसिल की तरह जर्नलिस्ट काउंसिल बनाया जाना चाहिए, जो केवल पत्रकारों के लिए कार्य करे।

8.11.17

टैक्स हैवन नहीं बल्कि इमानदार मुल्क कहो उन्हें

पनामा पेपर्स, पैराडाइज पेपर्स जैसे कुछ कागजातों में अनेक मुल्क के लोगो के नाम आये है जिनके बारे में अखाबारानाविसो का एक आई सी आई जी यानी international consortium of investigating journalist नामक एक समूह न इन कागजातों के आधार पर उन देशो में जहां टैक्स प्रणाली बहुत ही यथोचित और अनुकरणीय है, उन मुल्को में विभिन्न देशो के व्यापारी, नेता, कलाकारों द्वारा जमा की गई रकम को कालाधन मानते हुए एक अपनी रैंकिंग सूचि भी बना ली है . भारत का नाम उस रैंकिंग सूचि में 19 वें स्थान पर है .उक्त कंसोर्टियम का एक सदस्य भारतीय अखबार जनसता भी है अभीतक मैंने जो अध्ययन किया जनसता में छपे समाचारों का उससे पहली बात जो मैंने समझा कि पुरे दुनिया के अखबार आजतक अपनी पुरानी आदत “सनसनी फैलाने वाली खबरों “ से उपर नहीं उठ पायें है. नाम पता लगाना कोई बड़ा इन्वेस्टिगेशन नहीं है , सामान्य व्यक्ति भी वह पता कर ले सकता है .

क्या टीवी चैनल पर Debate Show में पतलून उतारेंगे?

क्या टीवी चैनल पर Debate Show में पतलून उतारेंगे? ये सवाल जैसे ही TV Debate कार्यक्रम में शिरकत करने वाले बुद्धिजीवी वर्ग से पूछा, भड़क गए. गुस्से से तमतमा गए. चेहरा लाल हो गया. बोले मर्यादा में रहो. हमारी भी मर्यादा है. किसी के कहने पर हम अपनी पतलून उतार कर किस बात का प्रमाण देंगे. हम पत्रकार हैं. TV पर लाखों करोड़ों जनता हमें देखती है सुनती है. हमारा मान सम्मान है. ऐसे ही पतलून उतार देंगे? हमारी मर्यादा है, हमारी शान है,, इनकी शान है, इनकी मर्यादा है, हमारा राष्ट्रगान तो हमारी जान है, हमारी धड़कन है, हम पतलून तो उतार देंगे लेकिन अपने राष्ट्रगान को अपमानित नही होने देंगे...

भास्कर ने खंडन छापा और खेद भी जताया







अलविदा! रिलायंस इंडिया मोबाइल

भारत में मोबाइल क्रान्ति की शुरूआत करने वाली रिलायंस इंफोकोम (अब रिलांयस कम्यूनिकेशन, अनिल धीरूभाई अम्बानी ग्रुप) ने अपनी वॉयस सर्विस बंद करने की घोषणा कर दी है । 13 साल से भी ज्यादा समय तक इसका साथ रहा तो लगता है कि कुछ अपना सा छूट रहा है । आज ही सिम दूसरे नेटवर्क में पोर्ट करायी है लेकिन रिलायंस से कम्यूनिकेशन के बंद होने का अजीब सा दुख है । इस पुराने नेटवर्क से शायद लगाव ही था जो ‘जियो’ की इतनी सस्ती सर्विस आने के बाद भी इससे साथ नहीं छूटा था । सन् 2004 में मथुरा से प्रकाशित पत्रिका ‘प्रोपर्टी इनसाईट’ के साथ कैरीयर की शुरूआत थी । ‘लक्ष्मी प्रकाशन’ ग्रुप द्वारा इसका प्रकाशन किया जा रहा था । लिखना और विज्ञापन कलैक्शन यह दो काम जिम्मे थे । तब यह एलजी का यह रिलायंस सीडीएमए सैट ग्रुप के एम.डी. मुरारीलाल अग्रवाल जी ने दिया था, जो आज तक सहेज रखा है । तब से बहुत से मोबायल सेट बदले, रिलायंस का साथ आज तक चल रहा था ।

5.11.17

2.11.17

बिना आधार कार्ड बैंक एकाउंट नहीं खोल रहे आईसीआईसीआई वाले!


सुनें टेप...

डीएवीपी ने रिकवरी नोटिस जारी किया


निकाय चुनावः सबके अपने-अपने दांव और दावेदारी

अजय कुमार,लखनऊ
उत्तर प्रदेश फिर एक बार चुनाव के मुहामें पर खड़ा है। नगर निकाय और पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। बीजेपी सहित तमाम दल विजय डंका बजाने के लिये रणनीति बना रहे हैं, जिसको बढ़त मिलेगी,वह 2019 के लोकसभा चुनाव में पूरे मनोबल के साथ उतरेगा। अबकी से पहली बार बसपा हाथी चुनाव चिंह पर अपने प्रत्याशी उतारेगी तो अन्य तमाम छोटे दलों के अलावा आम आदमी पार्टी भी कई सीटों चुनाव लड़ने जा रही है। बसपा के लिये यह चुनाव सबसे अहम है। लोकसभा और विधान सभा में सब कुछ गंवा देेने के बाद 2019 से पहले अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिये मायावती के पास यह आखिरी मौका होगा। समाजवादी पार्टी के नये नेता बने अखिलेश यादव ने विधान सभा चुनाव कांग्रेस युवराज राहुल गांधी के साथ मिलकर ‘यूपी को यह साथ पंसद है।’ के नारे के साथ लड़ा था। मगर कोई कामयाबी हासिल नहीं हो पाई तो अब कांग्रेस और सपा अलग-अलग मैदान में जोर अजमाइश करते नजर आ रहे हैं। तमाम दलों द्वारा बात भले ही विकास की कि जा रही है,लेकिन सबका ध्यान वोटों के धु्रवीकरण की तरफ है। अयोध्या,ताजमहल, मदरसा जैसे उन सभी मुद्दों को हवा दी जा रही है जिससे वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है।

योगी की ‘डिजिटल यूपी’ मुहिम : सचिवालय में बदलाव,पूरा प्रदेश पकड़ेगा रफ्तार


 संजय सक्सेना,लखनऊ

उत्तर प्रदेश में भी डिजिटल क्रांति दिखने लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी कोई कोरकसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। योगी ने अपने छोटे से कार्यकाल में  डिजिटल यूपी बनाने के लिये जो कदम उठाये हैं, उसकी जितनी भी सराहना की जाये कम है। योगी के चलते कई विभागों का कामकाज ऑनलाइन हो चुका है। ई टेंडरिंग, शैक्षिक संस्थाओं, विकास प्राधिकरणों मदरसों आदि तमाम महकमें योगी की डिजिटल मुहिम से जुड़ चुके है। अब सरकार की नाक के नीचे यानी सचिवालय में भी यह मुहिम ई फाइलिंग के जरिये अमली जामा पहन रही है।

पत्रिका अखबार के संपादक गुलाब कोठारी ने लिखा जोरदार संपादकीय


प्रदीप सौरभ फिर पहुंचे नेशनल दुनिया अखबार, बने संपादक