29.3.13
महान हैं आसाराम जैसे संत..!
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28.3.13
“राज” नीति- जम्मू कश्मीर से तमिलनाडु तक
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27.3.13
होली मुबारक हो -
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Dr Dwijendra vallabh sharma
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किराए के समर्थकों से चाटुकारिता का तड़का..!
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जिन्दगी एक सजा हो गई हो जैसे-ब्रज की दुनिया
जिन्दगी एक सजा हो गई हो जैसे,
जिन्दगी बेमजा हो गई हो जैसे।
यूँ तो जीते रहे हम जिंदादिल की तरह,
पर कहीं कोई कमी-सी रह गई हो जैसे।
कतरा-कतरा करके बालू की तरह,
मुट्ठी से जिंदगी रिस गई हो जैसे।
जाड़े की धूप की तरह खुशियाँ,
चढ़ते-चढ़ते ढल गई हों जैसे।
किसी को फर्क नहीं मेरे होने या न होने से,
स्टेशन पर खड़े-खड़े ट्रेन छूट गई हो जैसे।
अब बेरंग है हर होली और बेनूर दिवाली,
मेरी तरह इनमें भी तासिर नहीं हो जैसे।
जिन्दगी एक सजा हो गई हो जैसे,
जिन्दगी बेमजा हो गई हो जैसे।
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ब्रजकिशोर सिंह
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लक्ष्य को स्पष्ट बनायें
लक्ष्य को स्पष्ट बनायें
आज आप कहाँ पर खड़े हैं इस बात का ज्यादा महत्व नहीं है ,महत्व है तो इस बात
का है कि आपको जाना कहाँ है ?
आप आज क्या हैं इस बात का कोई मुल्य नहीं है ,मुल्य है तो इस बात कि आप क्या
बनना चाहते हैं ?
इस बात का बहुत फर्क नहीं पड़ता कि आप अब तक कितनी बार गिरे,पर फर्क इस
बात से पड़ता है कि आप वापिस कितनी बार उठ खड़े हुये
यह बात कोई मायने नहीं रखती कि आप कितनी ऊँचाई से गिरे ,मगर इस बात का
फर्क पड़ता है कि आप वापस कितने ऊपर उछले
रफ्तार तेज हो या धीमे मगर आपको गन्तव्य स्थान मालुम होना चाहिए
जिन्दगी में चलते तो अरबों प्राणी है मगर कुछ भाग्यशाली ही अपने साथ राडार रखते
हैं और सही दिशा में चलते हैं
पूरी चिड़ियाँ को देखने वाला लक्ष्यवेध नहीं कर पाता,सही निशाने के लिए नजर सिर्फ
आँख पर ही होनी चाहिये
जो पगडण्डी बनाता है वही तो सबसे पहले मंजिल पर पहुँचता है
घाणी का बैल दिन भर चलता है मगर शाम ढलने तक भी कहीं भी नहीं पहुँचता है
अपने हाथ में विकल्प रखने वाला प्राय: लक्ष्य से भटक जाया करता है
लक्ष्य को पाने के लिए दोड़ने को किसने कहा,सिर्फ निरन्तरता ही काफी है
लक्ष्य खुली आँखों से देखा गया सपना ही तो है और सपना देखो तो फिर एकदम छोटा
क्यों देखते हो ?
लक्ष्य के करीबी मोड़ पर पहुचते ही मुसाफिर निराश हो जाता है और चलना छोड़ देता है
उठो,जागो और चल पड़ो क्योंकि विजय श्री आपका इन्तजार कर रही है
बार-बार लक्ष्य बदलने वाला कड़ी मेहनत के बाद भी असफल हो जाता है
आत्म अनुशासन नहीं होने के कारण ही मनुष्य परिस्थियों का दास बन जाता है और
परिस्थियाँ उसे नियंत्रित करके लक्ष्य विहीन कर देती है
अपना लक्ष्य खुद तय करो लोगों को तय मत करने दो,अनुभवी लोगों से सिर्फ इतना
ही जानो कि मार्ग ठीक और सुगम कौनसा है
लक्ष्य यदि बड़ा है तो मार्ग भी पथरीला होगा और ठोकरे भी मिलेगी यदि उठने का
साहस रखते हो तो निश्चित रूप से फूलों से आपका स्वागत होगा
अन्धे भी मार्ग पार कर लेते हैं फिर क्यों घबराते हो ,ईश्वर ने आपको दौ आँखें जो दी है
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26.3.13
और कैंसर हार गया .......
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Shri Sitaram Rasoi
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ASHUTOSH VERMA
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आईये,असफल बनें।
आईये,असफल बनें।
असफलता के कंटीले मार्ग से गुजर कर ही मुकाम पाया जाता है। जो व्यक्ति अपनी
जिन्दगी में असफल नहीं हुआ इसका मतलब यह भी है कि उसमे साहस और आत्म-
विश्वास की भारी कमी है और वह निश्चित घेरे में ही दौड़ रहा है।
असफलता यह सिखाती है कि काम बिगड़ता कैसे है और उसे सही ढंग से कैसे किया
जाना चाहिए
असफलता से व्यक्तित्व की चमक बढती है क्योंकि असफलता की रगड़ से ही सही
क्या होना चाहिए था कि पहचान होती है.
रात और दिन का होना तय है रात विश्राम देकर दिन भर मेहनत करने के योग्य बनाती
है अगर रात नहीं होती तो ....?
दुःख दुनियाँ वास्तव में क्या है,इसका ज्ञान देने के लिए ही आते हैं अगर दुःख नहीं होता
तो सुख मूल्यहीन हो जाता
विपत्तियाँ हमारे चरित्र को मापती है कि हम कितने धेर्यवान और उत्साही हैं
प्रतिकुल परिणाम हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि सफलता पाने का उचित
मार्ग क्या होना चाहिए
हम निर्धनता को पराजित करने के किस्से चाव से सुनते हैं मगर उस कारण पर गौर
नहीं करते जिससे निर्धनता पराजित होती है
हम जानते हैं कि बच्चा चलना सीखता है तब बहुत बार गिरता है परन्तु बड़े होकर भी
बच्चे के गिरने का मुल्य नहीं समझना चाहते
जीत का पदक दुनियाँ को यह कहता है कि बहुत बार हारने के बाद ही मुझे पाया जा
सकता है
जो हारने के लिए तैयार नहीं है उसे किसी ना किसी का गुलाम बनकर जिन्दगी गुजारनी
पड़ती है
तेरना सीखना है तो डूबने की जोखिम उठानी ही पड़ेगी
सोने का मुल्य उसकी कष्ट सहने की क्षमता के कारण ही है।
यदि परिस्थियाँ बुरी है तो उनका आलिंगन करना छोडो उनके प्रेम में मत पड़ो
सफलता सही स्ट्रोक खेलने से मिलती है और सही स्ट्रोक खेलने के लिए बहुत बार गलत
स्ट्रोक खेल कर क्लीन बोल्ड होना पड़ता है
जब धोनी का इतिहास लिखा जाएगा तब लोग उसे भारत का बेहतरीन कप्तान ही कहेंगे
क्योंकि वह हारना जानता है
अटल बिहारी जी के कुशल नेता और प्रधान मंत्री बनने के पीछे उनके नेतृत्व में उनकी
पार्टी की हार होना भी एक कारण था
नरेन्द्र मोदी को इसीलिए कुशल प्रशासक कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने समय में
बड़ी प्रशासनिक असफलता झेली थी
राजा बेटे के इर्दगिर्द बड़ा सुरक्षा घेरा है इसलिये वो प्रतिभा नहीं दिखा सके
सपने को साकार करने की तमन्ना है तो जल्दी-जल्दी नयी-नयी गलतियां करते जाईये
और गलतियां के दोहराव को रोकते जाईये
शिखरों को विजय करने वाले खाइयों में गिरने का साहस रखते हैं
यदि आपको अपनी असफलता का सही तथ्य मिल जाए तो ठहाका लगाईये क्योंकि
आपने अब सफलता का मन्त्र जान लिया है
मैं एक असफल व्यक्ति था पर अब नहीं हूँ
अगर आप सुरक्षित जीना पसंद करते है तो किताबों का रट्टा मारते रहिये क्योंकि आप
नौकरी पा सकते हैं अगर नौकरी देना चाहते हो तो पहले असफलता का स्वाद चखिए और
साहस कीजिये फिर देखिये दुनिया आपकी मुट्ठी में
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25.3.13
सिर्फ हक़ की बात
भारतीय प्रेस परिषद् के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति मारकंडे काटजू संजय
दत्त की सजा माफ़ करवाने की वकालत कर रहे हैं। मगर देश के जो संघर्षशील
पत्रकार दुर्गति भोग रहे हैं उनके कल्याण की बात जब भी आती है तो उनको पता
नहीं क्या हो जाता है। मजेदार बात तो ये की श्रम मंत्रालय क्या ये बात नहीं
जनता? जरूर जनता है मगर आखिर मीडिया से कौन पंगा ले? क्या पता कोई कदम
उठाने के पहले ही छीछालेदार शुरू हो जाये। और तो और सरकार तक जहां लाचार
नजर आ रही है ऐसे में श्रम विभाग भला किस खेत की मूली है? लाख टके का सवाल
तो ये है की आखिर कब तक दूसरों का सच उजागर करने वाले पत्रकार सत्ता और
पूंजीवादियों के इस अँधेरे को झेलने पर मजबूर रहेंगे? दूसरों का हक
दिलानेवालों का हक आखिर कबतक मारा जाएगा? इसपर श्रम विभाग को शर्म आनी
चाहिए।
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Kaput bhatkav
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तो 35 साल हो बालिग होने की उम्र..!
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शादी से पहले सेक्स क्यों..?
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मांगी सूचना मौत मिली-ब्रज की दुनिया
मित्रों,सुशासन की सरकार बिहार के निवासियों को सूचना का अधिकार अद्वितीय
तरीके से प्रदान कर रही है। उनको सूचना मांगने का अनन्य अधिकार तो दे दिया
गया है लेकिन सूचना पाने का अधिकार नहीं दिया गया है अलबत्ता कोई सूचनार्थी
अगर सूचना मांगने की गुस्ताखी करने बावजूद जीवित या बिना जेल गए रह जाए तो
उसे जरूर सुशासन का शुक्रगुजार होना चाहिए। इस बार सूचना मांगने की सजा
पाई है एक अधिवक्ता रामकुमार ठाकुर ने। मुजफ्फरपुर जिले के मनियारी थाना के
पुरुषोत्तमपुर गांव में शनिवार 23 मार्च की शाम घात लगाए अपराधियों ने
जिले के रतनौली गांव निवासी सिविल कोर्ट के अधिवक्ता रामकुमार ठाकुर की
गोली मारकर हत्या कर दी। अधिवक्ता रामकुमार ठाकुर ने अपने ही ग्रामीण
रतनौली पंचायत के मुखिया राजकुमार सहनी से सरकारी योजनाओं की जानकारी
आरटीआई से मांगने का अक्षम्य अपराध किया था। उम्मीद के मुताबिक सूचना
उपलब्ध नहीं हुई थी। दैनिक जागरण,मुजफ्फरपुर के अनुसार अधिवक्ता बिहार
मनरेगा वाच संगठन से भी जुड़े थे। मुखिया व उनके समर्थकों द्वारा कई बार
उन्हें धमकी भी दी जा चुकी थी। जिसकी शिकायत थाने में भी की गई थी। लेकिन,
थाना स्तर से उनके आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिवक्ता ने अपनी
सुरक्षा को लेकर पुलिस के वरीय अधिकारियों व मुख्यमंत्री तक को आवेदन दिया।
कार्रवाई नहीं हुई और अंतत: वे अपराधियों के निशाने पर चढ़ गए। इतना ही
नहीं थानेदार ने ईलाज के लिए ग्रामीणों द्वारा ले जाए जा रहे घायल अधिवक्ता
को पुलिस जीप पर बिठा लिया और डेढ़ घंटा रास्ते में ही लगा दिया जिससे
अधिवक्ता की जान चली गई।
मित्रों,बिहार में
सुशासन किस तरह से काम कर रहा है मैं समझता हूँ कि यह उदाहरण देने के बाद
बताने की आवश्यकता ही नहीं रह गई है। मैंने खुद भी कई-कई बार सूचना मांग कर
देखा है मगर कभी मुझे सूचना प्राप्त नहीं हुई। मैं गारंटी के साथ नहीं कह
सकता कि मुझ पर भी कभी जानलेवा हमला नहीं होगा या फिर मुझे कभी झूठे मुकदमे
का सामना नहीं करना पड़ेगा। वास्तव में वर्तमान बिहार में लोकशाही का शासन
है ही नहीं बल्कि नौकरशाही का निरंकुश शासन है जिस पर नियंत्रण करना न तो
नीतीश कुमार उद्देश्य है और न तो अभीष्ट ही अर्थात् प्राथमिकता सूची में
कहीं है ही नहीं।
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ब्रजकिशोर सिंह
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24.3.13
राजनीति- चोर-चोर मौसेरे भाई..!
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