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11.8.11

देखो अन्ना इस बिल से भ्रष्टाचार बदनाम तो न होगा

साहब आज की बैठक नुक्कड़ में न थी शहर से दूर एक ढाबे में भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी ने दावत रखी थी। दावत इस कर के थी कि अपने राम लेखक थे,  और कोई भी समझदार कांग्रेसी आड़े वक्त मे लेखक और पत्रकार इन दो प्राणियो को अवश्य खिलाता पिलाता है।  आजकल भाजपायी भी इसी रास्ते में हैं,  पर ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हे इस मामले आरक्षण की आवश्यकता है। खैर हुआ कुछ ऐसा कि माहौल बनने के बाद बात भ्रष्टाचार पर न मुड़ जाये इसलिये शर्मा जी ने शेरो शायरी की इच्छा जाहिर की। अपने राम शुरू हो गये

कांग्रेसियों की कांग्रेसियत से।
 

भ्रष्टाचार बदनाम तो न होगा

लोकपाल लाओ पर इतना बतला दो।

 कहीं हमें आराम तो नही होगा॥


भ्रष्टाचार का नाम सुनते ही शर्मा जी ने मुंह बनाया,  कहने लगे-  एलिया साहब से चुरा कर मरोड़ कर सुना रहे हो।  हमने कही भाई आम खाओ, पेड़ क्यों गिनते हो,  हमने सुनाई अभी हमारी हुई। अब आप जो बियर पी रहे हो,  पूछा है किसने बनाई,  कैसे अनाज को सड़ा कर उसमे कीड़े लगाकर खमीर उठाया जाता है। बदबूदार माहौल मे दुर्गंध के बीच उसे कैसे पैक किया जाता है।  शर्मा जी पीते पीते ठसक गये,  आगे न पी गयी, अपने मियां पीना जारी था।  उन्होने आरोप लगाया,  जब इतनी गंदी चीज है तो तो आप कैसे पी रहे हो।  हम मुस्कुराये,  कहा- शर्माजी आप आम जनता की तरह अनजान हो।  आपको पता ही नही की आप पी क्या रहे हो।  हम सरकार की तरह कैलकुलेटेड रिस्क ले रहे हैं।  हमे पता है,  इसमे गंदगी है,  गरीब का पसीना, आह, पीड़ा मिली हुयी है। पर हमने हिसाब लगाया नशा ज्यादा मजा देता है और गंदगी है ही नही कह कर साफ़ नकारी जा सकती है

पूरा पढ़ने के लिये  ---  अष्टावक्र

2.8.11

सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी का स्लट वाक

भाई सोहन शर्मा नुक्कड़ पर ठहाके लगा रहे थे कारण पूछने पर बोले -  " देखो तो दीपक भाजपाई के संघेरे भाईयों को स्लट वाक याने बेशर्मी मोर्चा का विरोध कर रहे हैं । अरे भाई कोई कैसे भी कपड़े पहने इनको क्या आपत्ति है ।  कम कपड़े पहनने का यह मतलब थोड़े ही है कि लड़की आप को बुला रही है , कि आओ बलात्कार करो । हमने सर हिलाया - बड़े उच्च विचार हैं आपके , वैसे शर्मा जी सोना चांदी पैसा कहां रखते हो शर्मा जी बोले - लाकर मे या  अलमारी के सेफ़ में और आदमी कहां रखेगा ? । हमने कहा घर के बाहर शोकेस बनवा दो आते जाते लोग आपकी संपत्ती की गहनो की तारीफ़ करेंगे मुहल्ले मे आपकी इज्जत बढ़ेगी मान बढ़ेगा


शर्मा जी बोले - दिमाग खराब हो गया है क्या , जिस चोर की निगाह पड़ी वही लूट लेगा , कौन शोकेस की चौकीदारी करता फ़िरेगा दिन भर । हमने कहा यही बात महिलाओं पर लागू नही होती क्या ? जिन कपड़ो से बलात्कारियों की नजर मे चढ़ो , उसको पहने का फ़ायदा क्या , खास कर उन लड़कियों को जो परिवार से दूर रहती हों या असुरक्षित जगहो पर जाती हों । चोर और बलात्कारी तो आसान और बढ़िया शिकार खोजते हैं , क्या वे स्ल्ट वाक को देख अपनी हरकते बंद कर देंगे  । सुंदर लड़कियो को कम कपड़ो मे देख आप जैसा अच्छा इंसान तो मन मसोस कर रह जाता है कि लड़की के घर वाले पीटेंगे पुलिस वाले पीटेंगे और सबसी बड़ी बात बीबी पीटेगी ।

शर्मा जी ने सर हिलाया पीट तो बीबीयां वैसे भी लेती हैं भाई पर छोड़ के चले जायेगी उसका क्या । शर्माईन को भले मुझमें लाख बुराईयां और अपने मे लाख अच्छाईयां नजर आये , शादी के इतने सालों बाद मन भी नही लगता उनके बिना । हमने शर्मा जी को टोका - ओ भाई होश में आओ , कहां श्रीमती के प्यार में खो गये अभी घर पहुंचते ही भाभी चार काम बतायेंगी तो तुम्हारा प्यार का नशा हिरण हो जायेगा । अभी बात बेशर्मी मोर्चा की करना है , क्या विचार बनाया आपने । शर्मा जी ने स्टैंड बदला - मैं सहमत हूं कि बेशर्मी मोर्चा का विरोध होना चाहिये ।

अब शर्मा जी से हमने कहा तुरंत दिल्ली जाओ , अपनी सोणी मम्मी राउल बाबा और उनके चालीस चोरों का जो रोजाना स्लट वाक हो रहा है उसे बंद कराओ

पूरा पढ़ने के लिये अष्टावक्र

29.7.11

राहुल बाबा की शादी ------ हिना रब्बानी खार

नुक्कड़ पर भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी, लकदक करते नये कुर्ते में नजर आये इत्र पाउडर लगा चमचमा रहे थे । हमने पूछा - शर्मा जी आज तो कहर ढा रहे हो कहां की तैयारी है । शर्मा जी - बोले, लड़की देखने जाना है भाई । तभी आसिफ़ भाई ने टांग अड़ाई बोले मियां एक शादी में तो सुबह शाम पिटते हो फ़िर भी मन नही भर रहा । शर्मा जी भड़क गये - बोले, आप को हर बात में मजाक सूझता है । यहां हम देश हित में लड़की देखने जा रहे हैं । प्यारी मम्मी का आदेश आया है इस बुरे समय को दूर करने नयी महारानी चाहिये बाबा के लिये सभी लोग अच्छी सी सुशील लड़की देखें । हमने पूछा - भाई, तो कैसी लड़की खोजने जा रहे हो जवाब मिला यही तो मशविरा करने आप लोगों के पास आया हूं कि लड़की कैसी होनी चाहिये ।


हमने कही भाई कैटरीना कैफ़ सही रहेंगी, शर्मा जी सोच मे पड़ गये कहने लगे है तो बड़ी सुंदर पर वो तो फ़िल्मी कलाकार है । हमने कहा भाई वो एक दम सूट करेगी आपका बाबा आधा भारतीय वो आधी भारतीय दोनो मिलकर पूरे भारतीय बन जायेंगे । शर्मा जी फ़िर भड़क गये कहने लगे यार दवे जी मजा लेना है तो मै चला वरना बात गंभीर चिंतन की है गंभीरता से लो । हमने सर खुजाया भाई हिंदू या मुस्लिम लड़की कैंसल शर्मा जी अचकचाये फ़िर तो नब्बे फ़ीसदी लड़कियां कम हो जायेंगी । हमने कहा भाई बाबा हिंदू लड़की से शादी तो मुस्लिम साथ छोड़ देंगे मुस्लिम से करेगा तो हिंदू वोट बैंक खसक जायेगा । शर्मा जी ने सर हिलाया बोले सिख लड़की कैसी रहेगी हमने मेनका गांधी जिंदाबाद का नारा लगा दिया शर्मा जी ने तड़ से विषय बदल लिया । बोले गुरू मैने ट्रंप कार्ड खोज लिया है दलित लड़की से करवा देता हूं । हमने कहां मियां दलित घरों मे सोने की नौटंकी अलग बात है  शादी कर पायेगा तुम्हारा बाबा अनपढ़ गरीब लड़की से । शर्मा जी भड़क गये बोले क्या बेकार की बात है दलितो मे पढ़े लिखे लोग नही है क्या कई दलित उंचे पदो पर बैठे है उनमे से किसी की सुंदर सी लड़की से करवा देंगे ।

पूरा पढ़ने के लिये  अष्टावक्र

27.7.11

मन्नू ------- राजा बोला अब तेरा क्या होगा

सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी ने नुक्कड़ मे घोषणा की खामखा तुम तोग स्विस बैंक का नाम भजते रहते थे  वहां तो सिर्फ़ ग्यारह हजार करोड़ का कालाधन जमा है । हमने तुरंत शर्मा जी को प्रणाम कर कहा मान गये आपको स्विस सरकार से भी अपने प्रवक्ता टाईप बयान दिलवा दिया । खैर उन की भी मजबूरी है भारत का बॊस लाख करोड़ से ज्यादा का काला धन वहां से निकल गया तो बेचारे भिखारी नही हो जायेंगे । शर्मा जी भड़क गये बोले क्यों जनता को भड़काते हो दवे जी मनगढ़ंत आकड़ो से क्या सबूत है तुम्हारे पास । हमने कहा भाई राजा खुद ही सामने है आप ही की सरकार ने एक लाख अस्सी हजार करोड़ के घोटाले मे बंद किया है उसको । फ़िर भारत तो ऐसे राजाओं का देश ही रहा है ये तो सिर्फ़ राजा है यहां तुम्हारी मम्मी से लेकर चिद्दीबम तक अनेको महाराजा भी हैं । और मन्नू तो है ही राजा ने खुला बोला है अदालत मे कि मन्नू को भी मालूम था वह भी शामिल था ।


शर्मा जी ने तुरंत श्रद्धा से सिर नवाते हुये कहा आदरणीय मन्नू जी पर लांछन लगाना सूरज पर थूकने के समान है । हमने कहा "भाईयों कल से रेनकोट पहन कर आना" आसिफ़ भाई ने हैरानी से पूछा क्यों भाई! तो हमने कहा पूरा देश इनके सूरज उर्फ़ मन्नू पर थूक रहा है सूरज तक तो पहुंचेगा नही हमारे उपर ही न गिर जाये । पूरा नुक्कड़ ठहाके लगाने लगा तो गुस्साये शर्मा जी बोले आप लोग एक अपराधी की बातो पर मन्नू पर आरोप लगा रहे हो । हमने कहा यह जो आपको आज अपराधी लग रहा है कल तक आप ही को ईमानदार नजर आ रहा था । जैसे कपिल बाबू पहले छाती ठोक एक रूपये का भी घोटाला नही हुआ कह रहे थे आज आप मन्नू को वैसे ही निर्दोष बता रहे हो । कल इसका मामला भी सामने आयेगा तो कहोगे हमारी प्यारी मम्मी पर जो आरोप मन्नू लगा रहा है वह गलत है


पूरा पढ़ने के लिये अष्टावक्र

26.7.11

जिन्हे नाज था हिंद पर वो कहां है

आसिफ़ भाई नुक्कड़ के एक कोने मे गुमसुम उदास से बैठे थे सामने से एक के बाद एक सुंदरियां गुजरती जा रही थी पर नजरें जमीन की जमीन पर ।  कारण पूछा तो डबडबाई आंखो से देख पूछने लगे जिन्हे नाज है हिंद पर वो कहां है..... भाई किसकी नजर लग गयी हमारे मुल्क को । हमने सिर खुजाया फ़िर पूछा मियां नाज है वो लोग कहां है या नाज करने लायक हिंद कहां है । सवाल तो एक ही है और जवाब बेहद पेचीदा मिया तुम भी खामखां शोकसभा लेकर बैठ गये भाई । यहां खाओ खुजाओ बत्ती बुझाओ का देश है । मन खराब हो तो नेता है हीं गाली देने को  प्रसन्न हो तो अधिकारी  है ही  पैसा पहुंचाओ काम करवाओ । लेकिन आसिफ़ भाई पर हमारी दिलबहलाउ बातों का असर न पड़ा रहे उदास के उदास तभी शर्मा कांग्रेसी और दीपक भाजपायी एक ही गाड़ी मे शोले के जय वीरू टाईप गाना गाते आ रहे थे ।

ये दुश्मनी हम नही भूलेंगे ।
भूळेंगे सब मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे ॥

तेरी जीत मेरी हार ।
मेरी जीत तेरी हार  ॥

साथ मिलकर खायेंगे ।
हिंदू मुस्लिम चिल्लायेंगे  ॥

सामने हो तकरार ।
बना रहे अपना प्यार ................

गाड़ी आकर रुकी दोनो को  आसिफ़ भाई का दुख बताया गया । सुनते ही दोनो छिटक कर दूर  हो गये पर दावा एक सा किया हमे नाज है हिंद पर। हमने कहा भाई तुम लोग तो खा रहे हो मौज उड़ा रहे हो तुमको तो इस हिंद पर नाज होगा ही वो हिंद कहां है जिस पर आम आदमी नाज कर सके । इस पर  दीपक भाजपाई को गुजरात एमपी  याद आया वहीं शर्मा कांग्रेसी को हरियाणा आंध्रा । हमने पूछा दोनो का हिंद कहां है। दीपक भाजपाई  बोले भाई ये सुनो कि कहां नही है यूपी मे नही है शर्मा जी ने भी हामी भरी । हमने कहा  जहा हिंद है वही तुम दोनो को हिंद नजर नही आ रहा है । दोनो के दोनो पिल पड़े आपको यूपी मे हिंद नजर आ रहा है आंख के अंधे नाम नयनसुख ।

पूरा प्ढ़ने के लिये   अष्टावक्र

19.7.11

दिग्विजय सिंग जिंदाबाद

नुक्कड़ पर आज बड़ी भीड़ थी तमाम पढ़े लिखे लोग ही मौजूद थे चूंकि नुक्कड़  मे लाने के लिये गाड़ी और पैसे  की सुविधा नही थी अतः इस भीड़ मे कोई गरीब न था । नुक्कड़ मे उपस्थित लोग दिग्विजय सिंग को पिगविजय सिंग से लेकर पता नही क्या क्या कह रहे थे  । एक भाई का विचार अलग था उनका कहना था कि साहब विशेष किस्म का बवासीर है जो मुह मे हो गया है रिसर्च जारी है । एक सज्ज्न का कहना था कि भाई ये जो है मुस्लिम है या इसाई है कम से कम देशद्रोहियों का भाई है  तालियां चहुं ओर बज रही थी कि एक ने सवाल उठाया भाई यहां कोई कांग्रेसी तो है ही नही  किसी कांग्रेसी को बुलाओ वरना बहस किससे होगी । भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी को फ़ोन लगाया गया लेकिन पिटाई भय से शर्मा जी  नट गये । किसी ने सुझाव दिया भाई दवे जी को फ़ोन लगाओ लिखते हैं पढ़ता कोई नही कुलबुलाये से रहते हैं । उनको बुला लो पिट भी जायेंगे तो नाम तो उनका हो ही जायेगा बुरा नही मनायेंगे । निमंत्रण पाते ही अपने राम तड़ से पहुंच गये

 हमें बुला मंच मे पूछा दवे जी आपका इस विषय पर क्या कहना है ।  हमने छूटते ही कहा  दिग्विजय सिंग जिंदाबाद  पहले तो लोगो ने इसे खेल भावना से लिया पर दुबारा  नारा लगाते ही जनता मे रोष छा गया । एक ने गुस्से से कहा दवे जी बिना बात रखे ही पिटने का इरादा है क्या । हमने कहा भाई इस देश का एक ही नेता है जो मर्द है उसका नाम दिग्विजय सिंग है । जो सोचता है सामने बोलता है मन मे नही रखता और काम कांग्रेस का भी करता है और भाजपा का भी  है कोई और नेता जो पार्टी निरपेक्ष हो । एक ने पूछा  ये पार्टी निर्पेक्ष क्या बला है । हमने कहा भाई कांग्रेस मुसलमानो को अपने पीछे लामबंद करना चाहती है और भाजपा हिंदुओ को दिग्गी के बयानो से दोनो का हित होता है कि नही इधर हिंदू भड़कते हैं वहां मुसलमान सरकते हैं ।

पूरा पढ़ने के लिये  अष्टावक्र

17.7.11

निकम्मा कामचोर अफ़जल गुरू हाय हाय

नुक्कड़ पर रोज की तरह दीपक भाजपाई और सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी एक दूसरे की टांग खीचने मे लगे थे । दीपक बाबू सिस्टम और नीति मे चूक और गलती बता रहे थे वहीं शर्मा जी का कहना था कि भाई इतने दिन धमाके न हुये इसकी खुशी मनाना छोड़ तुम लोग हम लोगो पर चिल्ला रहे हो । हमारा नाम तो गिनीज बुक मे आना चाहिये चुस्त दुरूस्त व्यवस्था के लिये । नुक्कड़ की असहाय आम जनता दुख और शोक मे डूबी हुई थी क्रोध भी था  कोई मोमबत्ती जला रहा रहा था कोई आस्तीने चढ़ा रहा था |


 इस माहौल मे हमारा जुलूस सामने से निकला नारे लग रहे थे निकम्मा कामचोर अफ़जल गुरू हाय हाय । इसे देख दीपक भाजपाई खुशी से उछल पड़े बोले दवे जी कसाब का नाम भी लेते तो मामला और जम जाता । हमने कहा भाई ये हमारा जुलूस है अलग एजेंडे का आपका इसमे रोल नही है । शर्मा कांग्रेसी ने मुंह बनाया क्यो बनते हो भाई मीडिया हो या भाजपा कुछ कहने को न हो तो कसाब और अफ़जल गुरू का नाम ले लेते हैं ।   हमने कही भाई तुम दोनो बात समझ ही नही रहे हो नारे पर ध्यान दो हम शिकायत कर रहें हैं अफ़जल गुरू से और उसे कोस रहे हैं उसकी नाकामी परऔर शर्मा कांग्रेसी  आपसे तो अब उम्मीद ही नही है । वो तो आदत पड़ गयी है तो आप  को कोस लेते हैं

पूरा पढ़ने के लिये   अष्टावक्र

11.7.11

SMS भाग भाग डी.के.बोस डी.के.बोस डी.के.बोस

नुक्कड़ से एक बच्चा उम्र  मुश्किल से दस साल होगी SMS बोस डी.के.  बोस डी.के. बोस डी.के. गाता हुआ चला जा रहा था ।  नुक्कड़ मे हंगामा मच गया लोग लोट पोट होने लगे भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी  अचकचा गये बोले हंस क्यो रहे हो भाई और ये SMS कौन है । कही जवाब न मिला उल्टे लोग उनको देख और हंसते थे एक ने तो कमेंटिया भी दिया ये पीएसपीओ के जैसे  SMS भी नही जानता इतना सुनते ही हंगामा और बढ़ गया । दुखी हो शर्मा जी हमारे पास आये  बोले दवे जी आपको हमारी प्यारी मम्मी की कसम है SMS का मतलब बताओ । अब साहब  कसम थी हमने बता दिया बात ऐसी है भाई मन्नू को नौजवानो की मोबाईल भाषा मे SMS कहा जाता है । बात समझते ही शर्मा जी आपे के बाहर हो गये बोले हमारे मन्नू का ये अपमान नही सहेगा हिंदुस्तान अभी पीटता हूं उस बच्चे को सारी अकल ठिकाने आ जायेगी ।


 बड़ी मुश्किल से शर्मा जी को रोका गया  फ़िर समझाया भाई पीटना है तो खुद को पीटो आज देश के बच्चे बच्चे के मुंह मे यह गाना समा रहा है। जिम्मेदार तुम लोग खुद हो सेंसर बोर्ड मे भी भ्रष्टाचारियो को बैठाया है पैसे खाकर अश्लील गाने हो या द्रुश्य आराम से पास हो जाते है । आज जब बच्चो द्वारा माता पिता मित्रो पड़ोसियो और गुरुओं के नाम के साथ यह गाना जोड़ गुनगुनाया जा रहा है तो मीडियानुसार भ्रष्टाचारी मन्नू के साथ क्यों नही जोड़ा जा सकता

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अष्टावक्र

8.7.11

कुटिल सब्बल बाबू बिल नही है ये हमारा दिल है देखो देखो----- टूटे ना

नुक्कड़ पर आते ही भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी ने घोषणा कर दी मानसून सत्र मे बिल पेश हो  जायेगा । हमने कही भाई कांग्रेसी वो जमाना गया कि एक बहन को दिखा दूसरी से शादी कर देते थे आज कल लड़का लड़की एक दूसरे से मिलते जुलते है देखते समझते है तब शादी होती है । लड़की याने लोकपाल बिल दिखाओ फ़िर हम मानेंगे । शर्मा जी कुछ कहते की इससे पहले दीपक भाजपाई कूद पड़े कहने लगे हम भी तो यही कह रहे है ये दिखाते कहां है । हमने उनको फ़टकार लगाई हे देश की आखिरी उम्मीद पहले नारा लगाओ "सौगंध राम की खाते हैं बिल वही लायेंगे " और ये नारा लगाने से पहले सोच लेना फ़िर हम क्या खायेंगे नरेन्द्र मोदी जैसे जीवन कैसे बितायेंगे

इतने मे शर्मा जी ने घोषणा कर दी अन्ना का लोकपाल देश के लिये खतरा है । पूरा नुक्कड़ चौक गया किसी ने पूछा वो कैसे भाई क्या उसमे आतंकवादियो को छोड़ने का प्रावधान है या देश की सेना को भंग करने की बात है । शर्मा जी ने कहा भाई यही सब बताने आज मै कुटिल बाबू को साथ लाया हूं । तभी आसिफ़ भाई बोल उठे सही जा रहे हो शर्मा जी चोरो को अच्छा वकील करना ही चाहिये इनके जैसा ।

पूरा पढ़ने के लिये   http://aruneshdave.blogspot.com/2011/07/blog-post_06.html

5.7.11

ये तेरा बिल ये मेरा बिल ------- ये बिल बहुत हसीन है

नुक्कड़ मे आसिफ़ भाई गीत गुनगुना रहे थे  "  हमारी हसरतो का बिल ये बिल बहुत हसीन है " मैने टोका क्या आसिफ़ भाई क्या भाभी के लिये लिपस्टिक पाउडर खरीद लाये हो जो उसका बिल  आपको हसीन लग रहा है क्या बात है बुढ़ापे मे उलानबाटी खा रहे होआसिफ़ भाई भुनभुनाये कहने लगे बीबी से बचने के लिये आदमी नुक्कड़ आता है और आप हैं कि यहां भी याद दिला रहे हो उनकी । हमने गलती मानते हुये पूछा भाई फ़िर ये कौन सा बिल है गाने मे जरा हमे भी बताईये ।


आसिफ़ भाई फ़िर रूमानी अंदाज मे आ गये मिया हम लोकपाल बिल की बात कर रहे थे एक बार यह आ जाये फ़िर भारत मे हर ओर ईमानदारी होगी कही रिश्वत न ली जायेगी हमने बीच मे टोका आसिफ़ भाई हवा मे मत उड़ो सारी पार्टियो को उस बिल मे कमिया नजर आ रही है और आप को बिल हरा हरा क्यो नजर आ रहा है इतने मे दीपक भाजपाई कूद पड़े वाह दवे जी आप ने मेरे दिल की बात कह दी आसिफ़ भाई को हरा ही हरा नजर आता है हमने कहा हे स्वयंभू भगवा ठेकेदार  यहा बात सावन के अंधे वाले हरेपन की हो रही है और आ गये तुम अपना एजेंडा लेकर हां आसिफ़ भाई आप बताओ बिल का माजरा आसिफ़ भाई मुस्कुरा उठे गुनगुना उठे "किसी को देखना हो अगर तो मांग ले मेरी नजर तेरी नजर" ।

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अष्टावक्र


3.7.11

रामदेव बाबा को सत्ता सुंदरी का प्रेम पत्र

मेरे प्यारे चिरकुंवारे

जब से हमने सुना है आप को हमसे सियासी इश्क हो गया है हमारा दिल भी आप के लिये बेकरार है । जब आप करते हैं कपाल भांती कसम से हमे नीद नही आती । फ़िर सुना कि लखनउ मे आप को अर्धरात्री को अपनी  मेडिकल जांच करानी पड़ गयी तब से मन बड़ा बेचैन है । आप हमे पाने के लिये इतनी मेहनत कर रहें है और इधर हम हमारे मिलन के रास्ते मे आने वाली बाधाओ को लेकर बड़े चिंतित हैं । रूक्मणी की तरह आप हमे जब हरण करने  अपने हेलिकाप्टर रथ मे आयें इसके पहले आप को हमारे इतिहास और वर्तमान के बारे मे जान लेना चाहिये

हमारे महाराज लोकतंत्र ने राजनीति और नौकरी नाम की दो राजकुमारियो से शादी की थी । राजनीति से कांग्रेस बीजेपी और तीसरा मोर्चा नामक तीन पुत्र हुये और नौकरी से अफ़सर और बाबू नाम के दो पुत्र हुये । सब कुछ ठीक ही चल रहा था कि एक दिन आखेट मे महाराज से गलती से इमानदारी नामक गाय का वध कर दिया । श्रापित होकर महाराज का निधन हो गया और उनके साथ नौकरी भी सती हो गयी । राजनीति के बड़े पुत्र कांग्रेस ने स्वयंवर मे मुझे जीत लिया जीतकर जब वह मां के पास पहुंचा तो मां ने आदेश दिया कि पांचो भाई आपस मे बांट लो । तब से आज तक ये पांचो भाई मिल बाट कर मेरा सुख उठा रहे हैं । पर आप चिंतित न होना मुझे उर्वशी की तरह चिर यौवना होने का आशीर्वाद प्राप्त है ।

जब आप मेरा हरण करने आयेंगे तब ये पांचो भाई अपने ठेकेदार दलाल आदि महारथी मित्रो के साथ आपसे भीषण युद्ध करेंगे इस युद्ध मे कोई नियम न होंगे ।

पूरा पढ़ने के लिये    http://aruneshdave.blogspot.com/2011/05/blog-post_29.html

29.6.11

निरमा बाबा की चौथी आंख


                                                               

.  अष्टावक्र


एक दिन सुबह सुबह पत्नी ने मेरे हाथो से झाड़ू लेकर गर्मागरम चाय की प्याली रख दी । आसन्न खतरे को भांप कर मै सर्तक हो गया । श्रीमती ने कहा सुनो आज कल मेरा समय खराब चल रहा है क्यो न किसी अच्छे बाबा की शरण मे चलें | मै मन ही मन भुनभुनाया झाड़ू पोछा मै कर रहा हूं और समय इनका खराब चल रहा है । श्रीमती ने निरमा बाबा की जानकारी दी बड़े पहुंचे हुये बाबा हैं टीवी चैनलो मे छाये रहते हैं । मैने बहुत समझाया कि बाबा लोगो का चक्कर बेकार है भाई केवल टोपी देते हैं अरे उनमे ऐसी शक्तियां होती तो खुद का भला पहले करते काहे गरीबो से पैसे लेने की दरकार होती और ये टीवी वाले भी इनको नैतिकता से कोई लेना देना थोड़े है जिससे पैसा मिला उसको दिखा दिया । लेकिन समझाना व्यर्थ था पूरे तीन हजार रूपये बाबा के बैंक खाते मे जमा करके बाबा से उनके एक शिविर मे मिलने का नंबर लगा ।



पहुंचा तो देखा सैकड़ो की भीड़ थी संपर्क स्थल पर एक दादा टाईप के भक्त ने मनी रिसीट की जांच की और ससम्मान लाईन मे लगा दिया । नियत स्थान पर पहुचते ही मैने नजर घुमाई चारो ओर भक्ती का सागर हिलोरे मार रहा था वही कुछ मेरे टाईप के असंतुष्ट भी थे जो कि बलपूर्वक लाये गये थे । बाबा का कार्यक्रम शुरू हुआ सबसे पहले लाटरी लगी वाले अंदाज मे कुछ भक्तो ने बाबा का गुणगा्न शुरू किया किसी की लड़की की शादी बाबा के आशीर्वाद से हुई थी किसी का व्यापार रतन टाटा की तरह चमक गया था लाईने ऐसी बोल रहे थे कि मानो स्वयं कादर खान ने लिखी हो मैने मन ही मन अनुमान लगाया कम से कम 3000 प्रतिदिन लेते होंगे । उधर पत्नी ने विजयी निगाहो से मुझे देखा मानो मुझे उसका उपकार मानते हुये रात को आधा घंटा अतिरिक्त हाथ पैर दबाने का निर्देश दे रही हो ।

पूरा पढ़ने के लिये http://aruneshdave.blogspot.com/2011/03/blog-post_22.html

27.6.11

अखबार के मालिक और मेरी भिड़ंत

शाम के वक्त एक साहित्य प्रेमी अमीर मित्र का फ़ोन आया उनके फ़ार्म हाउस मे वाईन एंड डाईन का न्योता था । मुफ़्त मे पैग लगाने की खुशी मे मै दनदनाता पहुंच गया । वहां एक सज्जन और विराजमान थे मित्र ने मेरा उनसे परिचय करवाया वे मध्य भारत के सबसे बड़े अखबार के मालिक और संपादक थे । उन्होने ससम्मान मुझसे हाथ मिलाया बैठने के बाद मित्र ने मेरा परिचय दिया भाईसाहब बड़े अच्छे व्यंग्य कार हैं  । यह सुनते ही सज्जन के चेहरे पर तिरस्कार के भाव उभरे मन ही मन उन्होने अनुमान लगाया जरूर इस लेखक की चाल होगी पार्टी के बहाने अपने लेख पढ़वायेगा । पर टेबल पर रखी शीवाज रीगल की बोतल देख उनकी नाराजगी कुछ कम हो गयी मन मार कर बोले चलिये इसी बहाने आपसे मुलाकात हो गयी ।

मैने भी मन ही मन सोचा भाड़ मे जाये मुझे इससे क्या लेना देना अपन तो पैग लगाओ । यहां वहां की चर्चा होती रही और अखबार के  मालिक साहब इंतजार करते रहे कि कब मै अपनी रचना उन्हे दिखाउंगा । दो राऊंड होने के बाद भी जब लेख प्रकाशित करने की कोई चर्चा न हुई तो मालिक साहब का माथा ठनका पांच राउंड होने के बाद तो सब गहरे मित्र बन जाते हैं ऐसे मे बात टालते न बनेगी । मालिक साहब ने बात मेरे लेखन पर मोड़ी भाई साहब कोई रचना साथ लाये हैं क्या मैने पूछा किस लिये हकबकाये मालिक साहब ने कहा अखबार मे छापने के लिये और क्यों । मैने पूछा किस अखबार में वे बोले मै छापूंगा तो अपने अखबार मे ही ना लगता है आप मेरी बात कुछ समझे नही । मैने कहा आप तो कोई अखबार निकालते ही नहीं मालिक साहब ने असहाय भाव से मित्र की ओर देखा मानो कह रहें हो दो पैग मे लग गयी है

मालिक साहब ने याद दिलाया वे फ़लां अखबार के मालिक संपादक हैं । मैने पलट कर जवाब दिया वो अखबार नही सरकार का मुखपत्र है भाट और चारण जैसा अंतर यही है कि सरकार की छोटी मोटी गलतिया छाप दी जाती है । हां कभी कभी उसमे मंहगाई का जिक्र भी कर दिया जाता है । मालिक साहब बैकफ़ुट पर थे आप गलत समझ रहे हैं हमारा अखबार दूसरो से अलग है हम किसी के दबाव मे नही आते । मैने कहा आम जनता को टोपी पहनाईगा मुझे नही । सरकार के हर विभाग मे खुला कमीशन बट रहा है घपले हो रहे हैं और आपके पत्रकार भी भीख मांगते वहीं पाये जाते हैं कभी छापा आपने । क्या छापते हैं आप "अन्ना हजारे ने अपने भांजे को कांग्रेस मे भरती किया" "बाबा रामदेव खुद को राम कह रहे हैं" । शांती भूषण नजर आ रहा है आपको भ्रष्टाचार का प्रदूषण नही , सलवा जुड़ूम के नाम पर हो रहा अत्याचार तो खैर आपको मालूम ही न होगा नक्सलवाद की चक्की पर पिस रहे आदिवासियो के बारे में क्या किया आपने कुछ नही । छापते क्या हैं आप चमत्कारी अंगूठी फ़र्जी बाबाओ के विज्ञापन और तो और  वो लिंगवर्धक यंत्र कभी उपयोग किया है आपने क्या मालिक साहब जो दूसरो को बतलाते हो

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