अहिंसक जनक्रांति के मार्फत अन्ना की जीत के बाद संभवतया देश दुनिया को समझ में आया होगा कि महात्मा गांधी व उनकी विचारधारा के मायने क्या थे, और आज भी क्या हैं। उन्हें भी जो अब तक गांधी की विरासत संभालने का श्रेय लेते रहे हैं। उन्हें भी जो अब तक गांधी को गाली देते आये हैं। इस देश में सत्ता के जुल्मों के विरूद्ध जब-जब बंदूकें उठी तो शासकों ने बंदूकों के बल पर ही उन्हें ठिकाने लगाने की भी कई कोशिशें की। यहां तक कि उन्हें आतंक का पर्याय घोषित कर हमेशा मुख्यधारा से भी दूर किया जाता रहा है। लेकिन आजादी के बाद के इतिहास की यह अकेली क्रांति है जिसके खिलाफ शासकों को ऐसा कोई हथियार नहीं मिला जिससे वे अन्ना व उनकी टीम को सबक सिखा सकते। सो गांधी के वंशजों व गैर वंशजों तंत्र को तंत्र की भाषा से नहीं बल्कि गांधी की ही भाषा में, रास्ते से धोबी पछाड़ दी जा सकती है। आईऐ आगे बढ़ें गांधी के साथ.......।
28.8.11
अहिंसक गांधी
अहिंसक जनक्रांति के मार्फत अन्ना की जीत के बाद संभवतया देश दुनिया को समझ में आया होगा कि महात्मा गांधी व उनकी विचारधारा के मायने क्या थे, और आज भी क्या हैं। उन्हें भी जो अब तक गांधी की विरासत संभालने का श्रेय लेते रहे हैं। उन्हें भी जो अब तक गांधी को गाली देते आये हैं। इस देश में सत्ता के जुल्मों के विरूद्ध जब-जब बंदूकें उठी तो शासकों ने बंदूकों के बल पर ही उन्हें ठिकाने लगाने की भी कई कोशिशें की। यहां तक कि उन्हें आतंक का पर्याय घोषित कर हमेशा मुख्यधारा से भी दूर किया जाता रहा है। लेकिन आजादी के बाद के इतिहास की यह अकेली क्रांति है जिसके खिलाफ शासकों को ऐसा कोई हथियार नहीं मिला जिससे वे अन्ना व उनकी टीम को सबक सिखा सकते। सो गांधी के वंशजों व गैर वंशजों तंत्र को तंत्र की भाषा से नहीं बल्कि गांधी की ही भाषा में, रास्ते से धोबी पछाड़ दी जा सकती है। आईऐ आगे बढ़ें गांधी के साथ.......।
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Dhanesh Kothari
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28.7.11
बाबा रामदेव और अन्ना हजारे अलग-अलग क्यों?
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Anonymous
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26.7.11
जिन्हे नाज था हिंद पर वो कहां है
ये दुश्मनी हम नही भूलेंगे ।
भूळेंगे सब मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे ॥
तेरी जीत मेरी हार ।
मेरी जीत तेरी हार ॥
साथ मिलकर खायेंगे ।
हिंदू मुस्लिम चिल्लायेंगे ॥
सामने हो तकरार ।
बना रहे अपना प्यार ................
गाड़ी आकर रुकी दोनो को आसिफ़ भाई का दुख बताया गया । सुनते ही दोनो छिटक कर दूर हो गये पर दावा एक सा किया हमे नाज है हिंद पर। हमने कहा भाई तुम लोग तो खा रहे हो मौज उड़ा रहे हो तुमको तो इस हिंद पर नाज होगा ही वो हिंद कहां है जिस पर आम आदमी नाज कर सके । इस पर दीपक भाजपाई को गुजरात एमपी याद आया वहीं शर्मा कांग्रेसी को हरियाणा आंध्रा । हमने पूछा दोनो का हिंद कहां है। दीपक भाजपाई बोले भाई ये सुनो कि कहां नही है यूपी मे नही है शर्मा जी ने भी हामी भरी । हमने कहा जहा हिंद है वही तुम दोनो को हिंद नजर नही आ रहा है । दोनो के दोनो पिल पड़े आपको यूपी मे हिंद नजर आ रहा है आंख के अंधे नाम नयनसुख ।
पूरा प्ढ़ने के लिये अष्टावक्र
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Arunesh c dave
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23.7.11
डंडे की तमन्ना है कि अन्ना मुझे मिल जाये
शर्मा जी ठठा कर हसें कहने लगे दवे जी क्यों मनगढ़ंत आरोप लगाते हो है कोई सबूत और होगा भी तो पहले वो जेलर ही अंदर जायेगा झूठ कहता है देख लेंगे निपटा देंगे उसको । हमने कही चलो भाई जेलर कि न मानो पर अन्ना की तो सुनोगे ताल ठोक कर कह रहे हैं कि देश भ्रष्टाचार के कारण रसातल मे जा रहा है । लोकपाल बिल लाये बिना मामला ठीक होगा नही और सरकार जो है जोकपाल बिल लाना चाहती है । इतना सुनते ही शर्मा जी के दिल से लय फ़ूट पड़ी " डंडे की तमन्ना है कि अन्ना मुझे मिल जाये " शर्मा जी मुस्कुराते हुये कहने लगे आ तो जाये ये अन्ना जंत्र मंतर सारा नेतागिरी भुला दिया जायेगा फ़िर बोले तुम्हारा ये अन्ना सुप्रीमकोर्ट क्यों गया है इसको डंडे से डर क्यों लगता है भाई गांधी जी तो कभी नही डरे असली गांधीवादी होता तो कभी न डरता ।
पूरा पढ़ने के लिये - अष्टावक्र
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Arunesh c dave
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15.6.11
बाबा रामदेव और अन्ना के अनशन
पिछले कुछ महिनों में भारत में पहली बार जनता भ्रष्टाचार के विरुद्ध आक्रोशित दिखी है| पहले जनता को अन्ना हजारे में अपना हितैषी नजर आया और जनता उनके साथ रोड पर उतर आयी, उसके कुछ समय बाद ही बाबा रामदेव ने भी अन्ना से भी बड़ा जनान्दोलन खड़ा करने के इरादे से देशभर में घूम-घूम कर आम जनता को अपने साथ आने के लिये आमन्त्रित किया| जिसके परिणामस्वरूप बाबा रामदेव के साथ भीड़ तो एकजुट हुई, लेकिन आम जनता नहीं आयी|
अन्ना अनशन के बाद देश की आम जनता अपने आपको ठगा हुआ और आहत अनुभव कर रही थी, ऐसे समय में बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार एवं कालेधन को लेकर देश की राजधानी स्थित रामलीला मैदान में अनशन शुरू किया तो केन्द्र सरकार के मन्त्रियों ने उनकी अगवानी की और मन्त्रियों के समूह से चर्चा करके आमराय पर पहुँचकर समझौता कर लेने के बाद भी बाबा ने अपना अनशन नहीं तोड़ा| इसके विपरीत बाबा के मंच पर साम्प्रदायिक ताकतों और देश के अमन चैन को बार-बार नुकसान पहुँचाने वाले लोग लगातार दिखने लगे, जिससे जनता को इस बात में कोई भ्रम नहीं रहा कि बाबा का अनशन भ्रष्टाचार या कालेधन के खिलाफ नहीं, बल्कि एक विचारधारा और दल विशेष द्वारा प्रायोजित था, जिसकी अनशन खतम होते-होते प्रमाणिक रूप से पुष्टि भी हो गयी|
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14.4.11
अन्ना जी मतदाता को गाली मत दो! आप एक निश्कलंक व्यक्ति तक नहीं ढूँढ सके!!
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Labels: अन्ना हजारे, निर्विवाद, निश्कलंक, बाबा रामदेव, मीडिया, लोकपाल
13.4.11
आईये जाने लोकपाल के बारे में!
जन लोकपाल विधेयक भारत में प्रस्तावित भ्रष्टाचारनिरोधी विधेयक का मसौदा है। यदि इस तरह का विधेयक पारित हो जाता है तो भारत में जन लोकपाल चुनने का रास्ता साफ हो जायेगा जो चुनाव आयुक्त की तरह स्वतंत्र संस्था होगी। जन लोकपाल के पास भ्रष्ट राजनेताओं एवं नौकरशाहों पर बिना सरकार से अनुमति लिये ही अभियोग चलाने की शक्ति होगी। जस्टिस संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने यह बिल जनता के साथ विचार विमर्श के बाद तैयार किया है।
जन लोकपाल विधेयक के मुख्य बिन्दु
- इस कानून के तहत केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा।
- यह संस्था चुनाव आयोग और उच्चतम न्यायालय की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी।
- किसी भी मुकदमे की जांच एक साल के भीतर पूरी होगी। ट्रायल अगले एक साल में पूरा होगा।
- भ्रष्ट नेता, अधिकारी या जज को 2 साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।
- भ्रष्टाचार की वजह से सरकार को जो नुकसान हुआ है अपराध साबित होने पर उसे दोषी से वसूला जाएगा।
- अगर किसी नागरिक का काम तय समय में नहीं होता तो लोकपाल दोषी अफसर पर जुर्माना लगाएगा जो शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर मिलेगा।
- लोकपाल के सदस्यों का चयन जज, नागरिक और संवैधानिक संस्थाएं मिलकर करेंगी। नेताओं का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
- लोकपाल/ लोक आयुक्तों का काम पूरी तरह पारदर्शी होगा। लोकपाल के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच 2 महीने में पूरी कर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा।
- सीवीसी, विजिलेंस विभाग और सीबीआई के ऐंटि-करप्शन विभाग का लोकपाल में विलय हो जाएगा।
- लोकपाल को किसी भी भ्रष्ट जज, नेता या अफसर के खिलाफ जांच करने और मुकदमा चलाने के लिए पूरी शक्ति और व्यवस्था होगी.....
- अधिक जानकारी के लिये क्लिक करें
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Ankit Mathur
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Labels: अंकित माथुर, अन्ना हजारे, अरविंद, जंतर-मंतर, लोकपाल विधेयक
9.4.11
भ्रस्टाचार के विरोध में एकजुट हुए पत्रकार
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हरीश सिंह
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Labels: अन्ना हजारे, पूर्वांचल प्रेस क्लब, मशाल जुलूस, लोकपाल विधेयक, हरीश सिंह
7.4.11
अन्ना के लिए भी समय निकालो प्लीज़
हिन्दूस्तान के १२१ करोड़ लोगों में से उन को छोड़ दो जिनको किसी बात की समझ नहीं है। इनमे बच्चे और वे इन्सान शामिल हैं जिन्हें अपने अलावा किसी से कोई मतलब नहीं। इसके बाद जो बचे उन्होंने क्रिकेट के लिए अपना बहुत समय दिया। भारत वर्ल्ड कप जीते , ये प्रार्थना की। जीतने के बाद खुशियाँ मनाई। पटाखे छोड़े। मिठाइयाँ बांटी। सड़कों पर डांस किया। देर रात तक ख़ुशी से किलकारियां मारते हुए हुए गलियों में घूमे। दूसरे दिन तक यही सब कुछ चलता रहा। चलना भी चाहिए था। सब के भाव थे। भारत की इज्जत का सवाल था। कप ना मिलता तो संसार में नाक कट जाती। पूरा देश एक हो गया। भारत अखंड नजर आने लगा। गली,सड़क, छोटे से कौने से भी यही आवाज सुने दी"विजयी भव "। ये कोई स्थाई नहीं। आज कप हमारे पास है। कल किसी और का होगा। कल,मतलब कुछ दिन पहले तक किसी अन्य का था। किन्तु हिन्दूस्तान था,है और रहेगा। कप उतना मान सम्मान हिन्दूस्तान दुनियां में नहीं दिला सकता जितनी ईमानदारी, सच्चाई,मजबूती दिला सकती है। यह सब पाने के लिए भी मैच हो रहा है। अफ़सोस कि इसमें किसी अन्य देश कि टीम नहीं। दोनों तरफ अपने ही हैं। एक तरफ हैं सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे और दूसरी ओर भ्रष्ट सिस्टम। उसके चलाने वाले नेता,अफसर। अन्ना हजारे के साथ देश के हर कौने से हर वर्ग जुड़ रहा है। लोग दिल्ली के जंतर मंतर पहुँच रहे हैं। जो नहीं जा पा रहे वे अपने स्तर अन्ना के साथ खड़े दिखते हैं। " हम अन्ना के साथ हैं। आप ! अगर आप भी साथ हैं तो ये सन्देश दूर तक भेजो। क्योंकि भारत को महान बनाना है। " ये एस एम एस बड़ी संख्या में भेजे जा रहे हैं आगे से आगे, बहुत दूर तक। ब्लॉग हो या फेसबुक। अन्ना के समर्थन में भरे पड़ें हैं। हर कोई अन्ना की ही बात कर रहा है। कोई उनसे मिला नहीं लेकिन उनके साथ हैं। किसी को कोई व्यक्तिगत फायदा होने वाला नहीं ,परन्तु अनेकानेक जागरूक जेब से पैसा खर्च कर अभियान के साथ जुड़े हुए हैं। इनको अन्ना हजारे या उनके किसी सहयोगी ने ऐसा करने को नहीं कहा। इन पर किसी का किसी किस्म के दवाब का भी सवाल नहीं है। फिर भी लागे हैं देश को करप्शन से मुक्त करवाने के अभियान में अन्ना हजारे के साथ। क्रिकेट की बात पुरानी हो गई। अब हर न्यूज़ चैनल पर अन्ना हजारे व उनका आन्दोलन है। महात्मा गाँधी के अनशन के बारे में केवल सुना था। सुना कि किस प्रकार गाँधी के अनशन से सरकार हिल जाती थी। जन जन गाँधी की भाषा बोलने लगता। आज इसको देख लिया। कोई फर्क नहीं। सब कुछ वैसा ही है बस पात्र बदल गए। तब देश को विदेशियों से आजाद करवाना था। आज उन अपनों से जो कण कण में करप्शन चाहते हैं। इस आजादी के बिना वो आजादी बेकार हो रही है,अधूरी है जिसके लिए गाँधी जी ने अनशन किया था। अगर तब गाँधी जी जरुरी थे तो आज अन्ना हजारे उनसे भी अधिक जरुरी हैं। क्योंकि जो पूरा नहीं वह किस काम का।
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गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर
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