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13.4.11

आईये जाने लोकपाल के बारे में!








जन लोकपाल विधेयक भारत में प्रस्तावित भ्रष्टाचारनिरोधी विधेयक का मसौदा है। यदि इस तरह का विधेयक पारित हो जाता है तो भारत में जन लोकपाल चुनने का रास्ता साफ हो जायेगा जो चुनाव आयुक्त की तरह स्वतंत्र संस्था होगी। जन लोकपाल के पास भ्रष्ट राजनेताओं एवं नौकरशाहों पर बिना सरकार से अनुमति लिये ही अभियोग चलाने की शक्ति होगी। जस्टिस संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने यह बिल जनता के साथ विचार विमर्श के बाद तैयार किया है।



जन लोकपाल विधेयक के मुख्य बिन्दु





  • इस कानून के तहत केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा।


  • यह संस्था चुनाव आयोग और उच्चतम न्यायालय की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी।


  • किसी भी मुकदमे की जांच एक साल के भीतर पूरी होगी। ट्रायल अगले एक साल में पूरा होगा।


  • भ्रष्ट नेता, अधिकारी या जज को 2 साल के भीतर जेल भेजा जाएगा।


  • भ्रष्टाचार की वजह से सरकार को जो नुकसान हुआ है अपराध साबित होने पर उसे दोषी से वसूला जाएगा।

  • अगर किसी नागरिक का काम तय समय में नहीं होता तो लोकपाल दोषी अफसर पर जुर्माना लगाएगा जो शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर मिलेगा।

  • लोकपाल के सदस्यों का चयन जज, नागरिक और संवैधानिक संस्थाएं मिलकर करेंगी। नेताओं का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।

  • लोकपाल/ लोक आयुक्तों का काम पूरी तरह पारदर्शी होगा। लोकपाल के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच 2 महीने में पूरी कर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा।

  • सीवीसी, विजिलेंस विभाग और सीबीआई के ऐंटि-करप्शन विभाग का लोकपाल में विलय हो जाएगा।

  • लोकपाल को किसी भी भ्रष्ट जज, नेता या अफसर के खिलाफ जांच करने और मुकदमा चलाने के लिए पूरी शक्ति और व्यवस्था होगी.....

  • अधिक जानकारी के लिये क्लिक करें

23.5.08

जुर्म

आज पं० जी की रचना पढी जुर्म को लेकर, उसमें उन्होने जुर्म और क्रूरता के बारे में

एक कविता के माध्यम से अपने विचार रखे हैं, जी में आया कि टिप्पणी कर दूं एक कविता

ही लिख कर। लेकिन फ़िर सोचा यार पहले कभी तुमने हिन्दी में कविता नही लिखी तो

क्यों ना एक नयी पोस्ट ही छाप दी जाये। पता नही क्या बला बत्तल जोड़ दिया है, लेकिन

ये भी आज समाज में घट रही नयी नयी घटनाओं को परिलक्षित करती है। पढें और बतायें

कि मेरी पहली हिन्दी तुकबन्दी, या कविता कैसी रही।

पं०सुरेश नीरव जी, रियाज़ भाई, रुपेश जी, यशवंत भाई, रजनीश, रक्षंदा जी, कमला जी, अबरार भाई आदि सभी आदरणीय सदस्यों से अनुरोध है कि, और अच्छा लिखने के लिए अपने सुझाव मुझे अवश्य बतायें।

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जुर्म!!


जुर्म तो अब बन चुका है फ़ितरत ही इंसान की।

रिश्ते नाते, बाप मां, बेटा ना बेटी आपकी॥

मां को काटें मिल के बेटे बोले मुक्ति देगी मां।

मां भी क्यों कर चुप रहे, उसने भी काटा बाप को॥

बेटी ने सबको दे के ज़हरीला नशा कटवा दिया॥

बोली आशिक के सफ़र में हमसफ़र बन जाउंगी।

आशिक भी क्यो ना हमसफ़र हो, इस गली गुलज़ार में॥

उसने भी कर दी कलम गर्दन महबूबा के यार की।

कब तलक सहते रहोगे इस तपिश को आज तुम।

वक्त रहते बोल दे, अब ना सहा जाये ये सब।

बोल दे अब बोल दे तू आज हल्ला बोल दे॥

8.2.08

भडासी गुरु यशवंत के फ़ंडे।


कभी कभी ब्लागस्पाट अपने आप में एक चूतियापा लगता है। साली तीन बार टिप्पणी टाईप कर के पोस्ट कर चुका हूं लेकिन टिप्पणी भी लगता है अपने गुरु की तरह है, अड गई तो बस अड गई,
मैने भी सोचा कि टिप्पणी क्यों एक पोस्ट ही जड़े देता हूं। बहराल अपने भडासी गुरु यशवंत भाई की दारु बाज़ी के कुछ फ़ंडे मै भी जानता हूं पढि़ये->
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१.) बिना नानवेज दारू नही।

२.) दारू के लिये कोई भी बहाना बढिया है, वो चाहे गम हो खुशी हो, गुस्सा, भडास, प्यार या कुछ भी नही।
३.) अकेले दारू पीने से बचते है, कम से कम एक साथी तो हो।

४.) दारू के लिये कभी आपसे पैसे निकालने को नही कहेंगे। अपने पैसे से दारू ले कर आते हैं। आप चाहे तो चिकन-मटन ला सकते हैं ।

५.) दारू पीकर रास्ते भूल जाते हैं। (याद है मुझे दफ़्तर छोड कर आप घंटो ग्रेटर नोएडा हाईवे पर भटके थे)

६.) दारू पीकर किसी भोजपुरी गीतकार का भूत सर चढ कर नाचने लगता है, खूब भोजपुरी गीत गाते हैं ४ पेग के बाद।

७.) दारू पीकर धंधे की बात नही।

८.) दारू पीने के लिये साथी ढूंढने के लिये दूरियों के कोई मायने नही। कहीं भी चले जायेंगे।

९.) दारू पीकर एकदम मस्तान हो जाते हैं। नं वन कामेडियन (याद है कुत्तों को कैसे भूंक कर भगाया था। से० १८ में)

अभी के लिये इतना ही बाकी फ़िर कभी...
जय भडास
अंकित माथुर...